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कोरोना: चीन ने दुनिया को चौंकाया, वुहान में एक दिन में 14 लाख 70 हज़ार से ज़्यादा टेस्ट

वुहान में कोविड-19 का पहला मामला पिछले साल सामने आया था, इसके बाद वुहान से यह महामारी दुनिया तक पहुंच गई है.

लाइव कवरेज

  1. चीन की 33 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने जा रहा है अमरीका

    अमरीका चीन की ऐसी 33 कंपनियों और संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करने जा रहा है जो कथित रूप से चीनी सेना के साथ जुड़ी हैं या जिनका मुस्लिम वीगर अल्पसंख्यकों के दमन से नाता है. कोरोना वायरस की महामारी के बाद दोनों देशों में तनाव और बढ़ गया है. अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि कोरोना वायरस चीन के लैब में पैदा किया गया है और उनके पास इसे लेकर सबूत भी हैं.

    अमरीकी वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, "सात कंपनियों और दो संस्थानों को लिस्ट में डाला गया क्योंकि वे वीगरों और अन्य लोगों के मानवाधिकारों के हनन के चीनी अभियान से जुड़ी थीं जिनके तहत बड़ी तादाद में लोगों को बेवजह हिरासत में लिया जाता है, उनसे बंधुआ मज़दूरी करवाई जाती है और हाई-टेक तकनीक के सहारे उन पर नज़र रखी जाती है."

    मंत्रालय ने एक अन्य बयान में कहा कि दो दर्जन अन्य कंपनियों, सरकारी संस्थाओं और व्यावसायिक संगठनों को भी चीनी सेना के लिए सामान की आपूर्ति करने के कारण लिस्ट में डाला गया है.

    ब्लैकलिस्ट होने वाली ये कंपनियाँ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) और फ़ेशियल रिकोग्निशन जैसी तकनीकों के क्षेत्र में काम करती हैं.

    अमरीका की कई बड़ी कंपनियों ने इन्हीं क्षेत्रों में भारी निवेश किया है जिनमें इंटेल कॉर्प और एनविडिया कॉर्प शामिल हैं.

    चीन की ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों में नेटपोसा का नाम शामिल है जो चीन की एक बड़ी एआई कंपनी जिसकी फ़ेशियल रिकोग्निशन पर काम करनेवाली सहयोगी कंपनी को मुसलमानों की निगरानी करने में लिप्त बताया जा रहा है.

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, सौ साल से भी ज़्यादा पुरानी कार रेंटल कंपनी हर्ट्ज़ दिवालिया

    दुनिया की जानी-मानी कार रेंटल कंपनी हर्ट्ज़ ने कोरोना संकट के दौरान कारोबार ठप होने के बाद अमरीका में दिवालिया होने के लिए अर्ज़ी दी है.

    हालाँकि हर्ट्ज़ ग्लोबल होल्डिंग्स इंक का ये आवेदन केवल उसके अमरीकी कारोबार के लिए है. यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में उसका अंतरराष्ट्रीय कारोबार दिवालिया की इस प्रक्रिया में शामिल नहीं है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ख़बर दी है कि कंपनी को यात्राओं पर सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियों से भारी घाटा हुआ है.

    हर्ट्ज़ का ज़्यादातर कारोबार एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों से होता है जो एयरपोर्ट आने के बाद गाड़ियाँ भाड़े पर लेते हैं. मगर विमान यात्राओं के रुकने से ये कमाई बंद हो गई है.

    कंपनी पर 19 अरब डॉलर का कर्ज़ है और इस वर्ष के आरंभ में दुनिया भर में इसके 39,000 कर्मचारी थे. कंपनी ने हाल ही में उत्तर अमरीका में अपने 10,000 कर्मचारियों की छँटनी की थी.

    हर्टज़ को दुनिया की उन बड़ी कंपनियों में गिना जा रहा है जिन पर कोरोना संकट की मार पड़ी है.

    अमरीकी एयरलाइंस उद्योग पर भी संकट है मगर सरकार की ओर से अरबों डॉलर की सहायता मिलने से उनकी मुश्किल थोड़ी कम हुई है.

    मगर हर्ट्ज़ को ऐसी कोई मदद नहीं मिल पाई.

  3. कोरोना वायरस: भारत से जिस दवाई के लिए परेशान थे ट्रंप उससे ज़्यादा मौतें- स्टडी

  4. कोरोना वायरस: क्या भारत के लिए इतना सख़्त लॉकडाउन ज़रूरी था?

  5. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना वायरस: ब्राज़ील दुनिया का दूसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश बना

    कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में अमरीका के बाद ब्राज़ील दुनिया का दूसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश बन गया है. ब्राज़ील में अभी तक कोरोना संक्रमण के 330,890 मामलों की पुष्टि हो चुकी है. इससे पहले रूस दूसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश था.

    वहां अब तक कोरोना संक्रमण के 326,448 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि शुक्रवार को वहां 1001 लोगों की मौत कोविड-19 की वजह से हुई है.

    देश में अब तक 21,048 लोग इस वायरस की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं. ब्राज़ील का साओ पाउलो शहर इस महामारी से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.

    साओ पाउलो से ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें फारमोसा क़ब्रिस्तान में खुदी हुई क़ब्रों की लंबी क़तारें देखी जा सकती हैं.

    धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो की सरकार ने जिस तरह से कोविड-19 की महामारी को हैंडल किया है, उसके लिए हर तरफ़ उनकी आलोचना हो रही है.

    बदले हालात में ब्राज़ील एक राजनीतिक संकट की तरफ़ बढ़ रहा है जिसके केंद्र में खुद राष्ट्रपति बोलसोनारो ही हैं.

    वे सोशल डिस्टेंसिंग के क़दमों का विरोध कर रहे हैं, क्लोक्विन जैसी दवा जो कोविड-19 का इलाज करने में सक्षम है भी या नहीं, ये साबित हुए बिना उसके इस्तेमाल की वकालत कर रहे हैं और इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के अनुभवी अधिकारियों से उनकी बन नहीं रही है.

    इन सब की वजह से कभी सेना के अफ़सर रहे बोलसोनारो की लोकप्रियता तेज़ी से गिरी है.

    लातिन अमरीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में कोरोना टेस्टिंग में तेज़ी लाने के बजाय सुस्ती देखी जा रही है. इस वजह से माना जा रहा है कि वहां संक्रमण और मरने वालों की संख्या के वास्तिवक आँकड़े सरकारी तस्वीर से कहीं ज़्यादा हो सकती है.

    ब्राज़ील में कोविड-19 की महामारी तेज़ी से विकराल रूप ले रही है. सोमवार को ही संक्रमण के मामलों में ब्राज़ील ब्रिटेन को पीछे छोड़कर तीसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश बना था. शुक्रवार को वो रूस से भी आगे निकल गया.

    हालांकि इस बात की संभावना कम है कि वो जल्द ही अमरीका को पीछे छोड़ दे. दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अमरीका में कोरोना संक्रमण के 16 लाख से भी ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है.

    जब से कोविड-19 की महामारी शुरू हुई है, राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो की सरकार के दो स्वास्थ्य मंत्री पद छोड़ चुके हैं.

    बताया जा रहा है कि इन स्वास्थ्य मंत्रियों पर क्लोरोक्विन और हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन जैसी मलेरिया रोधी दवा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए दबाव डाला जा रहा था.

    स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य बड़े अधिकारियों ने इस्तीफ़े दिए हैं. उनकी जगह पर सेना के अफसरों को नियुक्त किया जा रहा है.

    बुधवार को अंतरिम स्वास्थ्य मंत्री एडवार्डो पाज़ुएले, जो सेना के जनरल भी हैं, ने कोरोना संक्रमण के हल्के लक्षण वाले मामलों में क्लोरोक्वीन और हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन के व्यापक इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइंस भी जारी की है.

  6. कोरोना वायरस महामारी: देश-दुनिया में अब तक जो कुछ हुआ

    दुनिया भर में अब तक 336,404 लोगों की मौत

    • जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार दुनिया भर में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या कम से कम 51,80,982 हो गई है.
    • साथ ही कोविड-19 की महामारी के कारण अब तक 336,404 लोगो की जान भी जा चुकी है. ये आँकड़े सरकारी जानकारी और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं और माना जाता है कि इस महामारी से वास्तविक रूप से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या कहीं ज़्यादा भी हो सकती है.

    वैक्सीन से महरूम रह सकते हैं आठ करोड़ नवजात

    • विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोविड-19 की महामारी के कारण आठ करोड़ नवजात बच्चों को समय पर वैक्सीन मिलने में दिक्क़त हो सकती है.
    • डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़ महामारी के कारण दुनिया की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं जिस तरह से प्रभावित हुई हैं, उनसे बच्चों को डिफ्थेरिया, मीज़ल्स और पोलियो जैसी बीमारियों के टीकों की खुराक का रूटीन गड़बड़ा सकता है.
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन और सहयोगी संगठनों द्वारा जुटाए गए आँकड़ों के अनुसार एक साल से कम उम्र के बच्चों को नियमित रूप से दिए जाने वाले टीकों का काम कम से कम 68 देशों में प्रभावित हुआ है.
    • साल 1970 से ये टीकाकरण कार्यक्रम दुनिया भर में चलाए जा रहे हैं. कोरोना महामारी के कारण ऐसा पहली बार देखा गया है कि टीकाकरण का काम प्रभावित हुआ है.

    ब्रिटेन मे प्रधानमंत्री के सलाहकार से पूछताछ

    • ब्रिटेन में प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार डोमिनिक क्युमिंग्स विवादों में घिर गए हैं. लॉकडाउन के उल्लंघन को लेकर डोमिनिक क्युमिंग्स से पुलिस ने बातचीत की है.
    • कोरोना वायरस से संक्रमण के लक्षण होने के बावजूद डोमिनिक लंदन से 264 किलोमीटर दूर डरहम में देखे गए थे.ऐसी चर्चा है कि डोमिनिक क्युमिंग्स मार्च के आख़िर में प्रधानमंत्री से डॉउनिंग स्ट्रीट में मिले थे. उस समय बोरिस जॉनसन कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे.

    दक्षिण अमरीका महामारी का नया केंद्र

    • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि दक्षिण अमरीका कोरोना वायरस से फैली महामारी का नया केंद्र बन गया है. दक्षिण अमरीकी देश ब्राज़ील कोविड-19 की महामारी से सबसे ज़्यादा चपेट में है.
    • डब्ल्यूएचओ के मुताबिक़ अफ्रीका के उन देशों में भी संक्रमण के मामले अब तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जहां तुलनात्मक रूप से महामारी का असर कम था.
    • डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन विशेषज्ञ डॉक्टर माइक रेयान ने बताया, "एक तरह से दक्षिण अमरीका इस महामारी का नया केंद्र बन गया है और ब्राज़ील यक़ीनन वहां सबसे ज़्यादा प्रभावित है."

    पेरू में आपातकाल बढ़ा

    • पेरू में दो महीने से लागू लॉकडाउन के बावजूद कोरोना संक्रमण के मामले कम होते हुए नहीं दिख रहे हैं. हालांकि इस बीच वहां लॉकडाउन की शर्तों में कुछ ढील दी गई थी.
    • अब सरकार ने कहा है कि पेरू में आपातकाल के प्रावधान जून के आख़िर तक लागू रहेंगे.पेरू लातिन अमरीका में कोविड-19 की महामारी से दूसरा सबसे ज़्यादा प्रभावित देश है.
    • आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पेरू में 111,000 से ज़्यादा संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं और वहां 3148 लोगों की मौत हो चुकी है.

    आइसलैंड में आपातकाल में ढील

    • सोमवार से आइसलैंड में आपातकालीन प्रावधानों में कुछ ढील दिए जाने का फ़ैसला किया गया है. सरकार का कहना है कि आइसलैंड में अब केवल दो लोग आइसोलेशन में हैं.
    • आइसलैंड में कोरोना संक्रमण के 1803 मामलों की अभी तक पुष्टि हुई है और वहां 1791 लोग संक्रमण के बाद ठीक भी हो गए हैं. आइसलैंड में कोविड-19 की बीमारी के कारण दस लोगों की मौत भी हुई है.

    ब्रिटेन आने वाले लोगों के लिए क्वारंटीन का आदेश

    • ब्रिटेन आने वाले लोगों को अब दो हफ़्तों के लिए अनिवार्य रूप से क्वारंटीन में रहना होगा. नए आदेश के तहत आठ जून से जो लोग ब्रिटेन में आएंगे, उन पर ये नियम लागू होगा और इसका उल्लंघन करने की सूरत में एक हज़ार पाउंड का जुर्माना लगाया जाएगा.
    • ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने कहा है कि अनिवार्य क्वारंटीन का ये नियम आयरलैंड से आने वाले लोगों पर लागू नहीं होगा. साथ ही कोविड-19 की महामारी से जूझ रहे स्वास्थ्य कर्मियों और खेती-किसानी से जुड़े लोगों को भी छूट रहेगी.

    जंग के कारण 660,000 लोग हुए बेघर

    • संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कोविड-19 की महामारी के मद्देनज़र दुनिया भर में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में संघर्ष विराम की अपील की थी ताकि इस बीमारी पर ध्यान दिया जा सके.
    • एक ग़ैर सरकारी संगठन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव की इस अपील के बाद दुनिया भर में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों से 660,000 लोग अपना घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं.
    • संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो ग्वेटेरेस ने इस हफ़्ते एक बार फिर संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने की अपील की.
    • लेकिन नॉर्वे के शरणार्थी परिषद का कहा है कि सुरक्षा परिषद महामारी के दौरान संघर्ष विराम, शांति वार्ता और नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अगुवाई करने में नाकाम रहा है.
  7. कोरोना वायरस की त्रासदी अफ़ग़ानिस्तान के दोहरी त्रासदी क्यों है- देखिए रिपोर्ट

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, राष्ट्रपति ट्रंप जो दवाई ले रहे हैं उससे कोरोना के मरीज़ों में मौत का ख़तरा ज़्यादा

    अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वो कोविड 19 बीमारी से बचने के लिए मलेरिया की दवाई हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन ले रहे हैं. विज्ञान की शोध पत्रिका लैंसेट ने अपनी स्टडी में पाया है कि कोरोना वायरस से संक्रमितों के इलाज में जहां हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन दवाई दी जा रही है वहां मरने का ख़तरा ज़्यादा है.

    स्टडी में पाया गया है कि मलेरिया की इस दवाई से कोरोना संक्रमितों को कोई फ़ायदा नहीं हो रहा है. ट्रंप ने कहा था कि वो इस दवाई का सेवन कर रहे हैं जबकि स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेताया था कि इससे हार्ट की समस्या बढ़ सकती है. ट्रंप मेडिकल स्टडी की उपेक्षा करते हुए इस दवाई के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करते रहे हैं.

    हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन मलेरिया के रोगियों के लिए सुरक्षित है और लुपस या आर्थ्राइटिस के कुछ मामलों में भी ये लाभकारी है. लेकिन कोरोना संक्रमितों को लेकर कोई क्लिनिकल ट्रायल इस दवाई के इस्तेमाल की सिफ़ारिश नहीं की है. द लैंसेट की स्टडी में कोरोना वायरस से संक्रमित 96,000 मरीज़ों को शामिल किया गया.

    इनमें से 15,000 लोगों को हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन दी गई या इससे मिलती जुलती क्लोरोक्विन दी गई. ये या तो किसी एंटिबायोटिक के साथ दी गई या फिर केवल यही. इस स्टडी से पता चलता है कि दूसरे कोविड मरीज़ों की तुलना में क्लोरोक्विन खाने वाले ज़्यादा मरीज़ों की हॉस्पिटल में ज़्यादा मौत हुई और हार्ट की समस्या भी उत्पन्न हुई.

    जिन्हें हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन दी गई उनमें मृत्यु दर 18% रही, क्लोरोक्विन लेने वालों में मृत्यु दर 16.4% और जिन्हें ये दवाई नहीं दी गई उनमें मृत्यु दर नौ फ़ीसदी रही. जिनका इलाज हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन या क्लोरोक्विन एंटिबायोटिक के साथ दी गई उनमें मृत्यु दर और ज़्यादा थी.

    रिसर्चरों ने कहा है कि हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन क्लिनिकल ट्रायल से बाहर लेना ख़तरनाक है. ट्रंप ने कहा था कि कोविड टेस्ट में वो निगेटिव आए हैं क्योंकि वो हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन ले रहे हैं और इसका सकारात्मक फ़ायदा मिला है. इसे लेकर ट्रायल चल रहा है कि हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्विन कोविड 19 में प्रभावी है या नहीं.

  9. ‘यहां बेड नहीं हैं और लोग मर रहे हैं’

    ब्राज़ील दुनिया में ऐसा छठा देश है जहां पर कोविड-19 के कारण 20,000 से अधिक मौतें हुई हैं और वहां को लेकर ये चेतावनी भी जारी की गई है कि ये संकट अभी तक अपने उच्चतम स्तर तक नहीं पहुंचा है.

    इसके बावजूद राष्ट्रपति जेर बोलसोनारो ने स्थिति की गंभीरता को कम करने का प्रयास किया है. तो वहां पर फ़्रंटलाइन पर क्या स्थिति है?

    वर्ल्ड सर्विस पर बीबीसी ओएस रेडियो प्रोग्राम में देश के अलग हिस्सों में मौजूद दो डॉक्टरों से बात की गई.

    जोआओ आलो, परा प्रांत, अमेज़न वर्षावन में उत्तरी ब्राज़ील

    “अमेज़न प्रांत में मनौस सिर्फ़ ऐसी जगह है जहां पर आईसीयू है. और यहां पर सभी लोगों के लिए बेड नहीं हैं इसके कारण बहुत सारे लोग मर रहे हैं.”

    “मेरी आईसीयू यूनिट में हमारे चार डॉक्टर कोविड-19 पॉज़िटिव पाए गए हैं. हमारी एक नर्स आईसीयू में वेंटिलेटर पर हैं.”

    “महामारी में मेरे लिए सबसे बुरा लम्हा तब था जब मेरे एक सहकर्मी के पिता अस्पताल में भर्ती हुए थे. आख़िरी बार मैंने उन्हें अपनी ग्रैजुएशन पार्टी में देखा था. मैंने ही उन्हें सांस की नली लगाई और दूसरी रात मुझे पता चला कि वो नहीं रहे.”

    लेतिसिया कवानो-दोरादो, साओ पाउलो

    “बीते हफ़्ते मैंने ये नोट किया कि शहर में बने अस्थाई अस्पतालों में अधिक गंभीर मामले आ रहे हैं. स्पोर्ट्स स्टेडियम में हमने चार अस्पताल बनाए हैं.”

    “दुर्भाग्यवश, ब्राज़ील उन लोगों में बंट गया है जो संघीय सरकार पर भरोसा करते हैं और वो लोग जो विज्ञान का पालन करते हैं.”

    “हमारे राष्ट्रपति के नेतृत्व वाली सरकार ने साफ़ संदेश दिया है कि सोशल डिस्टेंसिंग ज़रूरी नहीं है यहां तक कि कोविड-19 वास्तव में मौजूद है.”

  10. ट्रंप के कह देने से खुल सकते हैं चर्च

    एंथनी ज़र्चर

    बीबीसी उत्तरी अमरीका संवाददाता

    अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि प्रांतों में चर्च खोल देने चाहिए क्योंकि अमरीका में प्रार्थनाओं की ज़रूरत है.

    मार्च में वापस लौटें तो पाएंगे कि ये प्रांतों में गवर्नर के आदेश थे कि कौन-सा व्यापारिक प्रतिष्ठान या जगह कैसे और कब तक बंद रहने हैं.

    अब गवर्नर ही हैं जो यह तय करेंगे कि कब और कैसे पाबंदियों में ढील देनी है. इसमें चर्च में लोगों के इकट्ठा होने की सीमा भी शामिल है.

    हालांकि, अमरीकी राष्ट्रपति के पास काफ़ी शक्तियां होती हैं पर वो कुछ नर्म तरीक़े की हैं.

    वो राज्यपालों को राज़ी कर सकते हैं लेकिन उन्हें आदेश नहीं दे सकते.

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगर लगता है कि चर्च धार्मिक सेवाओं को बहाल नहीं कर रहे हैं तो उनके पास कुछ ऐसे अधिकार हैं जिनसे वो अपनी बात मनवा सकते हैं, जैसे वो प्रांतों को मिलने वाली सहायता में कटौती कर सकते हैं. लेकिन अभी तक उनकी धमकियां अस्पष्ट हैं.

    अगर वो गवर्नरों पर इस तरह का हमला बोलते हैं तो इसका राजनीतिक नुक़सान होगा या यह लंबी क़ानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है.

  11. न्यूयॉर्क में 4,300 कोरोना मरीज़ों को भेजा गया था नर्सिंग होम

    एपी न्यूज़ की एक जांच के अनुसार, न्यूयॉर्क में कोविड-19 बीमारी से ठीक हो रहे तक़रीबन 4,300 मरीज़ों को पहले ही असुरक्षित नर्सिंग होम में भेजा गया.

    यह फ़ैसला नए संक्रमित मरीज़ों को बेड मिल सके इसके लिए लिया गया था.

    हाल में न्यूयॉर्क सरकार ऐसे कई फ़ैसलों के कारण निशाने पर है.

    वॉल स्ट्रीट जर्नल को पिछले सप्ताह डेमोक्रेटिक नेता रॉन किम ने कहा था, “राज्य हमारे समाज के सबसे कमज़ोर सदस्यों की ज़िंदगियां सुरक्षित रखने में नाकाम रहा है.”

    “तथ्य हमने बनाए रखे और कोविड-19 पॉज़िटिव मरीज़ों को ऐसी जगह भेज दिया जहां उनकी देखभाल के लिए बेहतर सुविधाएं नहीं थी, ये एक घातक चूक है.”

    शुक्रवार को न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रूयू क्यूमो न कहा था कि बीते 24 घंटों में 109 लोगों की मौत हुई है. वहीं, गुरुवार को 105 लोगों की मौत हुई थी.

  12. ट्रंप ने चर्चों को ‘तुरंत खोलने के लिए’ कहा

    व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उपासना की जगहें ‘तुरंत खोली जानी’ चाहिए और वो उन्हें ‘ज़रूरी’ मानते थे.

    उन्होंने कहा, “अमरीका में हमें बहुत प्रार्थनाओं की ज़रूरत है, कम नहीं.”

    अमरीकी राष्ट्रपति ने प्रांतों के गवर्नरों की निंदा में तर्क दिया कि शराब की दुकानें और गर्भपात क्लीनिक खुले हुए हैं.

    ट्रंप का बयान तब आया है जब सेंटर्स फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने चर्च कैसे दोबारा खोले जाने चाहिए इसको लेकर दिशानिर्देश जारी किए हैं.

    इसी महीने की शुरुआत में सीडीसी ने 60 पेजों का दिशानिर्देश जारी किया था जिसमें उपासना स्थलों का कोई ज़िक्र नहीं था.

  13. बीबीसी के लाइव अपडेट में आपका स्वागत है

    नमस्कार! बीबीसी हिंदी पर कोरोना को लेकर लाइव ख़बरों का सिलसिला जारी है. शनिवार को होने वाली तमाम हलचल और उनके मायने आप यहां जान सकते हैं. शुक्रवार को क्या-क्या हुआ यह जानने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.