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कोरोना वायरस: ट्रंप ने एक बार फिर दी चीन से सारे संबंध तोड़ने की धमकी
अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कोरोना महामारी को लेकर चीन की निंदा की है और उससे सारे संबंध तोड़ लेने की धमकी दी है.
लाइव कवरेज
8 करोड़ मज़दूरों को मुफ़्त राशन देगी सरकार
‘बिना राशन कार्ड के अगले दो महीनों तक प्रवासी मज़दूरों को मिलेगा मुफ़्त राशन’
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि अगले दो महीनों तक सभी प्रवासी मज़दूरों को मुफ़्त अनाज दिया जाएगा.
उन्होंने बताया कि इस योजना के दायरे में वो मज़दूर भी आएंगे जो खाद्य सुरक्षा क़ानून के दायरे में नहीं आते, इस योजना का फ़ायदा उन मज़दूरों को भी मिलेगा जिनके पास राशन कार्ड नहीं है.
उन्होंने कहा, “ऐसे आठ करोड़ प्रवासी मज़दूरों के लिए 3500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. अगले दो महीनों तक हर प्रवासी मज़दूर परिवार को पांच-पांच किलो गेहूं या चावल और एक किलो चना मिलेगा. इसे लागू कराने की ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों की है.”
“वन नेशन, वन राशन कार्ड' के ज़रिए मज़दूर चाहे देश के किसी भी कोने में हों, वहां राशन डिपो से अपने हिस्से का अनाज ले सकते हैं. इसका फ़ायदा उन सभी प्रवासी मज़दूरों को मिल पाएगा जो रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं.”
वित्त मंत्री ने कहा किप्रवासी मज़दूरों और शहरी ग़रीबों को कम कीमत पर किराए के मकान मिल सके इसके लिएप्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इसका इंतज़ाम किया जाएगा, राज्य सरकारें और उद्योगपति भी इसमें अपना योगदान करेंगे.
इसके अलावा वित्त मंत्री ने और भी बहुत सारी घोषणाएं कीं जो इस प्रकार हैं..
- नाबार्ड (नेशनल बैंक फ़ॉर एग्रीकल्चर एंड रुरल डेवलेपमेंट) ने ग्रामीण और सहकारी बैंकों को 29,500 करोड़ रुपये की मदद दी है.
- 25 लाख किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं. तीन करोड़ किसानों तक मदद पहुंचाई गई है. सरकार लॉकडाउन में भी लगातार काम कर रही है.
- केंद्र सरकार अपने ख़र्चे पर शहरों में रहने वाले बेघर लोगों को तीन वक़्त का खाना दे रही है.
- असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले सिर्फ़ 30 फ़ीसदी मज़दूर ही न्यूनतम वेतन का फ़ायदा उठा पाते हैं. पूरे देश में एक जैसा न्यूनतम वेतन लागू किया जाएगा ताकि क्षेत्रीय असमानता दूर हो. इसे क़ानूनी रूप दिया जाएगा.
- मज़दूरों को अपॉइंटमेंट लेटर (नियुक्ति पत्र) दिया जाएगा. साल में एक बार उनका हेल्थ चेकअप अनिवार्य होगा और ख़तरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले मज़दूरों का सामाजिक सुरक्षा स्कीमों के ज़रिए ध्यान दिया जाएगा.
- कोरोना संकट के दौरान 12 हज़ार स्वयंसेवी समूहों ने तीन करोड़ से ज़्यादा मास्क और 1.2 लाख लीटर सैनिटाइज़र बनाया. पिछले दो महीनों में शहरी ग़रीबों की मदद के लिए 7,200 नए स्वयंसेवी समूह बनाए गए.
- रेहड़ी-पटरी पर ठेला लगाने वालों के लिए पांच हज़ार करोड़ रुपये की सहयोग राशि का ऐलान किया जाता है. इससे हर व्यक्ति को 10 हज़ार रुपये तक की मदद मिलेगी. सरकार इसे एक महीने के भीतर लॉन्च कर देगी. लगभग 50 लाख लोगों को इसका फ़ायदा मिलेगा.
प्रवासी मज़दूरों के लिए 10 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च किए गए: निर्मला सीतारमण
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि वो नौ क़दमों का ऐलान करेंगी जिनमें तीन प्रवासी मज़दूरों, एक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और अपना रोज़गार करने वाले लोगों, दो छोटे किसानों और एक हाउसिंग के लिए है.
उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में कृषि क्षेत्र के लिए 86,000 करोड़ के बराबर राशि के 63 लाख लोन मंज़ूर किए गए. मार्च-अप्रैल का महीना खेती और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए सरकार ने ये फ़ैसला लिया.”
“इन दिनों प्रवासी मज़दूरों और शहरी ग़रीबों की बहुत चर्चा हुई है. मोदी सरकार ने शहरी ग़रीबों को 11 हज़ार करोड़ रुपये की मदद दी है. ये मदद एसडीआरएफ़ (स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ंड) के ज़रिए दी गई है.”
उन्होंने कहा,“जो प्रवासी मज़दूर अपने राज्यों में वापस गए हैं उनकी मदद करने के लिए 10 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च किए जा चुके हैं. वापस लौटे 40-50 फ़ीसदी मज़दूरों ने मनरेगा में काम करने के लिए नामांकन कराया है जो पिछले साल मई महीने के मुक़ाबले काफ़ी ज़्यादा है.मज़दूरी की दिहाड़ी 182 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 202 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है.”
हमें ग़रीब से ग़रीब आदमी की मदद करनी है: अनुराग ठाकुर, आर्थिक पैकेज पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री
आर्थिक पैकेज का ब्यौरा पेश करने के लिए की गई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने मीडियाकर्मियों का शुक्रिया अदा किया.
उन्होंने कहा, “नई सरकार देश के ग़रीबों को समर्पित है. हमें ग़रीब से ग़रीब आदमी की मदद करनी है. पिछले छह वर्षों में मोदी सरकार ने ग़रीबों और किसानों के लिए बहुत काम किया है.”
उन्होंने कहा किजनधन योजना के तहत ग़रीबों के खाते खुले, कल लघु और कुटीर उद्योगों के लिए ऐलान हुआ, आज प्रवासी मज़दूरों और ग़रीबों के लिए है.
आर्थिक पैकेज पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्रेस कॉन्फ़्रेंस शुरू
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि आज का ऐलान प्रमुख रूप से प्रवासी मज़दूरों, रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता, छोटे किसानों और ख़ुद का रोज़गार करने वालों के लिए है.
20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के ब्यौरे को पेश करने के अगले दिन वो यह प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर रही है.
उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि ग़रीबों के ख़ातों में जनधन अकाउंट के ज़रिए पैसे भेजे गए, ग़रीब की मदद कैसी की जाए इसके लिए हम आज आपके सामने आए हैं, कल एमएसएमई सेक्टर की मदद की गई जिससे ग़रीब को भी बल मिलेगा.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना था कि आर्थिक पैकेज श्रमिक, किसान के लिए है जो देशवासियों के लिए मेहनत करता है.
ब्रेकिंग न्यूज़, एयर इंडिया आज से शुरू कर रहा टिकटों की बुकिंग
भारत की सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया ने ट्वीट कर जानकारी दी है, “भारत से अमरीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, सिंगापुर और जर्मनी की फ़्लाइट्स की बुकिंग गुरुवार, 14 मई 2020 को शाम पाँच बजे से शुरू हो जाएगी.”
- एयर इंडिया के अनुसार टिकटों की बुकिंग कंपनी की वेबसाइट से हो सकेगी.
- इसके अलावा एयर इंडिया ने बताया है कि विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए दूसरे चरण में 16 मई से 32 देशों में फ़्लाइट्स भेजी जाएंगी.
कोरोना वायरस: दिल्ली में अब तक का सबसे बड़ा उछाल, संक्रमण के मामले 8400 के पार
दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि बीते-24 घंटे में 472 नए मामले सामने आये हैं. यह एक दिन में कोविड-19 के नए मामले सामने आने का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
- दिल्ली में अब संक्रमण के कुल मामले 8470 हो गए हैं. वहीं कोविड-19 से मरने वालों की संख्या बढ़कर 115 हो गई है. वहीं 3045 लोग इलाज के बाद पूरी तरह ठीक भी हो चुके हैं.
- गुरुवार को दिल्ली की एक जेल में भी कोविड-19 का पहला मामला सामने आया. अधिकारियों के अनुसार दिल्ली की रोहिणी जेल में एक 28 वर्षीय क़ैदी कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है.
अपनी दैनिक प्रेस वार्ता में गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “केंद्र सरकार लॉकडाउन में जो रियायतें देगी, दिल्ली में सोमवार से वही रियायतें लागू की जाएंगी. हम लोग दिल्ली की अर्थव्यवस्था को खोलने के तमाम प्रयास कर रहे हैं.”
केजरीवाल ने बताया कि ‘दिल्ली की अधिकांश मार्केट एसोसिएशन बाज़ारों को ऑड-ईवन के फ़ॉर्मूला के साथ खोलना चाहती हैं.’
केजरीवाल ने दो दिन पहले ही एक वॉट्सऐप नंबर जारी कर दिल्ली के लोगों से लॉकडाउन के संबंध में सुझाव मांगे थे. केजरीवाल के अनुसार उनकी सरकार को दिल्ली के पांच लाख लोगों ने अपने सुझाव भेजे हैं.
इन सुझावों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि ‘अधिकांश लोग चाहते हैं कि दिल्ली में सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन ना करने वालों और मास्क ना पहनने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही की जाये. साथ ही लोगों ने सुझाव दिया है कि स्कूल, कॉलेज, स्पा, स्वीमिंग पूल और मॉल कुछ और समय के लिए बंद रखे जायें.’
कोरोना वायरस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की 'चीन वाली थ्योरी' कितनी सही
कोरोना वायरस का जन्म किसी प्रयोगशाला में हुआ, ये बात कुछ राजनेता कहते रहे हैं जिनमें नया नाम जुड़ गया है भारत के केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का.
गडकरी ने समाचार चैनल एनडीटीवी को एक इंटरव्यू में कहा, ”ये कुदरती वायरस नहीं है, ये कृत्रिम वायरस है...ये वायरस एक लेबोरेट्री से आया है.“
उनकी इस टिप्पणी से पहले अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी कहा था कि ये वायरस चीन के वुहान शहर की एक लैब से आया.
मगर चीन ने उनके इस आरोप का ज़ोरदार खंडन किया.
अभी तक की वैज्ञानिक पड़ताल से यही संकेत मिलता है कि ये वायरस जानवरों से आया, और इसे इंसानों ने नहीं बनाया.
बीबीसी के विज्ञान संपादक पॉल रिनकन का कहना है कि अभी तक इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि सार्स-कोव-2 वायरस का स्रोत वुहान का कोई रिसर्च इंस्टीच्यूट है.
कोरोना वायरस के जीनोम के मार्च में प्रकाशित एक अमरीकी अध्ययन में भी ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि इस वायरस को तैयार किया गया है.
कोरोना वायरस: इस बार मई के महीने में भी गर्मी नहीं, क्या हैं कारण
भारत में मई का महीना अक्सर तेज़ चिलचिलाती हुई धूप का होता है जब पारा 40 के पार होता है. लेकिन इस साल ऐसा नहीं है.
साल 2019 मई में राजधानी दिल्ली में एक सप्ताह छोड़कर पूरे महीने पारा 40 के ऊपर रहा. लेकिन इस साल अब तक पारा 40 के नीचे रहा है और आने वाले कुछ दिनों तक भी ऐसा ही रहने कीउम्मीद की जा रही है.
इस साल मार्च और अप्रैल के बाद मई के महीने में भी तेज़ हवाएं चलीं और रुक-रुक कर बारिश होती रही. कई जगहों पर तो बिन मौसम अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुक़सान पहुंचाया.
भारतीय मौसम विभाग ने बुधवार 13, 14 और 15 मई को भी उत्तर भारत में कई इलाक़ों में बिजली कड़कने और बारिश होने की चेतावनी दी है.
इसकी वजह क्या कोरोना वायरस है. क्लिक कर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
ब्रेकिंग न्यूज़, रेलवे इस अंतराल के लिए ग्राहकों को लौटाएगा टिकटों के पैसे
भारतीय रेल मंत्रालय ने घोषणा की है कि 25 मार्च से पहले बुक किये गए, 30 जून तक की यात्रा के टिकटों को रद्द माना जाये और उन टिकटों के पूरे पैसे ग्राहकों को वापय किये जाएं.
रेलवे ने अपनी घोषणा में उन बुकिंग्स को भी शामिल किया है जो लॉकडाउन शुरू होने से पहले की गई थीं.
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि ‘विभिन्न राज्यों में फंसे मज़दूरों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से उनके घर पहुँचाने का कार्य फ़िलहाल जारी रहेगा.
साथ ही 12 मई से जिन 15 स्पेशल इंटरस्टेट ट्रेनों की शुरुआत की गई है, वो भी चलती रहेंगी. रेलवे की ताज़ा घोषणा का इन ट्रेनों से कोई वास्ता नहीं है.’
रेल मंत्रालय ने बताया है कि '13 मई के बाद से आईआरसीटीसी जो टिकटें बुक कर रहा है, उनके लिए सभी यात्रियों से उनके गंतव्य का पता भी माँगा जा रहा है ताकि कोविड-19 के मद्देनज़र स्वास्थ्य विभाग को कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करने में आसानी हो.'
मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लॉकडाउन की घोषणा करने के साथ ही सभी यात्री ट्रेनों को रोक दिया गया था. हालांकि मालवाहक रेलगाड़ियों को ज़रूरी सामान की आवाजाही के लिए चालू रखा गया था.
कोरोना वायरस: किस देश में फिर से खुल रहे हैं सैलून
मां बच्चे को जन्म दे रही थी, वॉर्ड में किलकारियां थीं और देखते ही देखते लाशें गिरने लगीं
कोरोना वायरस पर जाँच को लेकर भिड़े चीन और ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया का ये कहना कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति में चीन की भूमिका की जाँच होनी चाहिए, अब ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच व्यापारिक झगड़े की वजह बन गया है जिसका नुक़सान दोनों देशों को हो सकता है.
ऑस्ट्रेलिया के वाणिज्य मंत्री साइमन बर्मिंगम चीन के वाणिज्य मंत्री ज़ॉन्ग शेन से बातचीत का प्रयास कर रहे हैं जिन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया से बार्ली यानी जौ और बीफ़ के आयात पर रोक लगाने का आदेश दिया था.
बर्मिंगम ने 13 मई को कहा, “लाखों लोग इस महामारी से मर चुके हैं. लाखों लोगों की नौकरियाँ छिन गई हैं और करोड़ों लोगों की ज़िंदगी प्रभावित है. ऐसे में हम कम से कम एक निष्पक्ष जाँच की उम्मीद तो कर ही सकते हैं. और ऐसी माँग करने वाला ऑस्ट्रेलिया अकेला देश नहीं है.”
कितना हो सकता है चीन के ग़ुस्से का असर?
चीन ने अपने व्यापार नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए ऑस्ट्रेलिया से निर्यात हो रहे बीफ़ पर रोक लगा दी है.
चीन ऑस्ट्रेलिया की चार निर्यातक कंपनियों से बीफ़ लेने से इनकार कर चुका है जिनमें से एक कंपनी का मालिक चीन का व्यापारी है.
इससे पहले भी चीन ऑस्ट्रेलिया से आ रहे जौ के आयात पर भारी शुल्क लगाने की चेतावनी दे चुका है. अगर चीन ने इस चेतावनी पर अमल किया तो ऑस्ट्रेलिया के जौ के किसानों को 80 प्रतिशत तक मूल्य गिराना पड़ सकता है.
चीन क़रीब एक अरब अमरीकी डॉलर की क़ीमत का जौ हर साल ऑस्ट्रेलिया से आयात करता है जिसमें से अधिकांश जौ का प्रयोग बियर बनाने में होता है.
वहीं दूसरी ओर, चीन ऑस्ट्रेलिया के बीफ़ का एक तिहाई का ग्राहक है जिसकी सालाना क़ीमत 80 करोड़ अमरीकी डॉलर होती है. ऑस्ट्रेलिया की वाइन और डेयरी इंडस्ट्री को लग रहा है कि वो चीन का अगला निशाना बन सकते हैं.
इसके साथ ही पर्यटन और एजुकेशन सेक्टर भी निशाने पर आ सकता है. चीन ऑस्ट्रेलिया का टॉप कारोबारी साझेदार है. 2018 में चीन ने कुल 88 अरब डॉलर का आयात किया था.
चीन एक बार फिर से दुनिया को करने जा रहा हैरान, किसी को भरोसा नहीं
तस्वीरों में कोरोना वायरस महामारी
इनके जैसे ही हज़ारों लाखों कोरोना वॉरियर्स फ़्रंट पर रहकर इस महामारी का मुक़ाबला कर रहे हैं.
इनमें नर्सिंग स्टाफ़ से लेकर, वॉर्ड ब्वॉय, डॉक्टर से लेकर पैरामेडिक्स और असिस्टेंट से लेकर आईसीयू स्टाफ़ सभी शामिल हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अपने यहां लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील दी है लेकिन सार्वजनिक जगहों पर अब भी मास्क पहनकर रखना ज़रूरी है.
भारत में रेल सेवा को आंशिक तौर पर शुरू कर दिया गया है.
प्रवासी मज़दूरों के लिए श्रमिक ट्रेन चलायी गई हैं और इसके अलावा 15 स्पेशल ट्रेनें भी शुरू की गई हैं. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बाहर इंतज़ार करता एक परिवार.
पाकिस्तान में प्रतिबंधों में ढील के बाद लोग सड़कों पर लौट आए.
यह तस्वीर लाहौर की है, जहां प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद सड़क पर काफ़ी भीड़ नज़र आई.
यह न्यूयॉर्क में एक अस्थायी अस्पताल के बिस्तर की तस्वीर है.
दुनिया में कई जगहों पर अस्थायी अस्पताल तैयार किए गए है, ताकि लोगों को पूरा इलाज मिल सके.
यह तस्वीर बेल्जियम के एक जोड़े की है. कोरोना वायरस का सबसे अधिक ख़तरा बुज़ुर्गों को ही है.
पाकिस्तान: सिंध प्रांत में बंद कराये गए बाज़ार, 'सोशल डिस्टेन्सिंग को नहीं मान रहे थे लोग'
लॉकडाउन से कुछ दिन की रियायत के बाद, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में कुछ बाज़ारों को फिर से सील करना पड़ा है.
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि ‘बाज़ारों में पहुँच रहे लोग सोशल डिस्टेन्सिंग का ध्यान नहीं रख रहे थे.’
पाकिस्तान के ‘द डॉन’ अख़बार के मुताबिक़ बुधवार को 24-घंटे में कोविड-19 के 2,300 नए मामले सामने आए जिनके बाद पाकिस्तान में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 35,000 से अधिक हो गए हैं.
पाकिस्तान के डॉक्टर लगातार यह चिंता ज़ाहिर कर रहे हैं कि उनके यहाँ अगर मामले तेज़ी से बढ़े तो देश का मेडिकल सिस्टम उसे संभाल नहीं पाएगा.
इसी सोमवार को पाकिस्तान में बाज़ार खोले गए थे जिसके बाद बाज़ारों में भारी भीड़ और सड़कों पर जाम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर होने लगी थीं.
सोमवार को ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था कि ‘लॉकडाउन को अब कुछ चरणों में खोला जाएगा ताकि अर्थव्यवस्था को भी थोड़ी राहत मिले.’
कोरोना वायरस के अलावा जिनसे जूझ रहे हैं भारत के स्वास्थ्यकर्मी
- उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले में बीबीसी संवाददाता चिंकी सिन्हा और पीयूष नागपाल ने ऐसे कार्यकर्ताओं से बात की, जो कोरोना वायरस के दौर में लोगों की मदद कर रही हैं, लेकिन लोग ही उनके लिए परेशानी के सबब बन रहे हैं.
क्या कोरोना वायरस कभी नहीं जाएगा?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि संभव है कि कोरोना वायरस कभी ख़त्म ही ना हो. इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि इस महामारी से वैश्विक स्तर पर मानसिक सेहत का संकट पैदा होगा.
बुधवार को ग्लोबल हेल्थ बॉडी ने कहा कि इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि कोरोना वायरस कब ख़त्म होगा.
WHO के इमर्जेंसी चीफ़ माइकल रायन ने कहा, ''हमें इस चीज़ को लेकर स्पष्ट और तैयार रहने की ज़रूरत है. संभव है कि कोरोना हमारे बीच क्षेत्र विशेष का एक अन्य वायरस बन जाए और यह कभी नहीं जाए. मुझे लगता है कि इसे लेकर कोई वादा नहीं किया जा सकता कि यह कब ख़त्म होगा. इसकी कोई तारीख़ नहीं है. यह बीमारी हमलोग के लिए लंबी अवधि का संकट बन सकती है.''
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानसिक स्वास्थ्य विभाग की एक अन्य रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र को एक और ख़तरनाक संकट को लेकर आगाह किया गया है.
मानसिक स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टर डेवोरा केस्टल के मुताबिक़, “एकाकीपन, डर, अनिश्चितता, आर्थिक उथल-पुथल ये सभी मनोवैज्ञानिक परेशानी का कारण बन सकते हैं.” उनके मुताबिक़, हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले समय में हमें बच्चों में, युवाओं में और यहां तक की स्वास्थ्य कर्मियों में भी मानसिक कमज़ोरी देखने को मिल सकती है."
वो आगे कहती हैं, “पूरी दुनिया का मानसिक स्वास्थ्य और जीवन इस महामारी से प्रभावित हुआ है और इसे प्राथमिकता से देखे जाने की ज़रूरत है.”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस में संक्रमण के मामले बढ़कर 242,271 हो गए हैं. संक्रमण के लिहाज़ से रूस दुनिया का दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश बन गया है जबकि अमरीका इस महामारी से सबसे बुरी तरह प्रभावित देश है. अमरीका में संक्रमण के मामले 13 लाख 90 हज़ार से अधिक हो गए हैं. रूस में मरने वालों की संख्या 2,212 है.
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल में होने वाली मौतों में से 60 फ़ीसदी मौतों के कारण दूसरे थे. रूस में मॉस्को सबसे अधिक प्रभावित है, जहां मरने वालों की संख्या 1232 है. रूस की स्वास्थ्य मंत्री तात्याना गोलिकोवा ने आकड़ों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ से इनकार किया है.
बहरीन में 10 हज़ार बांग्लादेशी नागरिकों की नौकरी गई
बहरीन में श्रमिक मामलों पर नज़र रखने वाले प्राधिकरण (LMRA) ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से तक़रीबन 10 हज़ार बांग्लादेशी अपना काम-काज खो चुके हैं.
बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित बांग्लादेशी दूतावास के राजदूत डॉक्टर नज़रूल इस्लाम के साथ हुई एक ऑनलाइन बैठक में LMRA के चीफ़ ओसामा अब्दुल्ला अल-अबसी ने कहा कि ‘दोनों देशों के बीच अस्थायी श्रमिकों से संबंधित जो मौजूदा करार है, उसकी वजह से 15,000 बांग्लादेशियों को नए नौकरियाँ दी जाएंगी.’
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है. LMRA ने यह भी कहा है कि “चूंकि बहरीन में 80 प्रतिशत अस्थायी श्रमिक बांग्लादेश के हैं, इसलिए इस करार का सबसे अधिक फ़ायदा भी उन्हें ही मिलेगा.”
बांग्लादेश के क़रीब दो लाख लोग बहरीन में तरह-तरह के काम-काज से जुड़े हैं. तीन अप्रैल को LMRA ने अस्थायी श्रमिकों के लिए एक ‘एमनेस्टी स्कीम’ की घोषणा की थी जिसके अनुसार 31 दिसंबर तक श्रमिकों को अपनी रेजिडेंसी के लिए कोई जुर्माना या चालान नहीं भरना होगा और ना ही देश छोड़ने की ज़रूरत होगी.
बहरीन सरकार ने वर्क परमिट पर लगने वाली फ़ीस भी एक अप्रैल से तीन महीने के लिए माफ़ कर दी है. सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया है ताकि कोविड-19 की मार झेल रहे व्यापारियों और नियोक्ताओं को अस्थायी श्रमिकों को काम पर रखने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ ना झेलना पड़े.
बांग्लादेश के राजदूत के साथ हुई बैठक में LMRA ने यह भी भरोसा दिलाया कि ‘जब तक एमनेस्टी स्कीम लागू है, किसी भी अस्थायी श्रमिक को गिरफ़्तार नहीं किया जाएगा.’