रायपुर से बीबीसी
हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र
लिख कर कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानी सीएसआर के तहत प्रधानमंत्री केयर फंड
में जमा किये गये चंदे को राज्य सरकार को देने का अनुरोध किया है.
गौरतलब है कि देश भर
में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले लोगों की मूलभूत सुविधाओं
और विकास योजनाओं के लिये औद्योगिक कंपनियां, अपने तीन साल के औसत मुनाफे
का 2 फीसदी सीएसआर फंड में जमा कराती हैं.
यह रकम उसी ज़िले
में खर्च होती है, जहां संबंधित उद्योग या खनन
से लोग प्रभावित हुये हैं. पिछले चार सालों में देश भर में सीएसआर मद से 42 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक
की रक़म राज्यों में खर्च की गई है.
कोरोना वायरस के
मद्देनज़र केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री केयर फंड में तो औद्योगिक और खनन कंपनियों
को सीएसआर मद की रकम बतौर चंदा देने का प्रावधान रखा गया है लेकिन संबंधित राज्य
को इस मद से चंदा लेने की अनुमति नहीं है.
सीएसआर फंड से चंदा को लेकर राज्य और
केंद्र के बीच पिछले कई दिनों से तनातनी चल रही है.
अब इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री को
चिट्ठी लिख कर कहा है, "यदि इस राशि का व्यय कोविड-19 के संक्रमण को रोकने अथवा उससे निपटने
हेतु ही व्यय किया जाना है, तो राज्य शासन यह
सुनिश्चित करेगा कि सीएसआर मद की राशि उन्हीं जिलों में व्यय की जाएगी, जो खनन या औद्योगिक परियोजनाओं से
प्रभावित है तथा कोविड-19 के संक्रमण से प्रभावित है."
मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि "कोविड-19 वायरस के संक्रमण की स्थिति में केन्द्र
सरकार द्वारा सभी खनन परियोजनाओं और औद्योगिक इकाईयों को यह निर्देश दिए गए हैं कि
वे सीएसआर मद की राशि सीधे ‘प्रधानमंत्री केयर
फंड’ में जमा करें.
इकाईयों द्वारा उक्त निर्देशों का पालन भी आरंभ हो गया है."
"केन्द्र सरकार के इस
निर्णय से खनन परियोजनाओं और औद्योगिक इकाईयों की स्थापना से प्रभावित व्यक्तियों
में असंतोष व्याप्त है. केन्द्र सरकार के इस निर्णय से खनन इकाईयों के आसपास के
नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा."
भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री से शीघ्र ही सीएसआर की रकम राज्य को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया है.