जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख
महबूबा मुफ़्ती ने संभल मस्जिद मामला, अजमेर शरीफ़ दरगाह मामला और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर अपनी राय रखी है.
उन्होंने बांग्लादेश की तुलना भारत से की है, जिसके बाद बीजेपी नेता रवींद्र रैना ने उनके इस बयान को राष्ट्रद्रोह कहा है.
रविवार को दिए एक बयान में उन्होंने कहा कि "हमारे नेता गांधी जी से लेकर पंडित
नेहरू, मौलाना अबुल आजाद, सरदार पटेल और बाबा साहब आंबेडकर
ने इस मुल्क को हिंदू, मुस्लिम, सिख इसाई सब का घर बनाया है. ये साझा घर है. लेकिन आज हालात जो हो
रहे हैं उसमें आपस में लड़ाया जा रहा है."
केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए महबूबा मुफ़्ती ने कहा, "मुझे डर है कि 1947 में जो हालात हुए थे, कहीं न कहीं हमे उसी तरफ ले जाया जा रहा है. युवाओं को नौकरी नहीं है, अच्छे अस्पताल नहीं है, शिक्षा नहीं है."
उन्होंने कहा कि विकास के कामों की बजाय मस्जिद को
गिराकर मंदिर खोजा जा रहा है.
उन्होंने संभल मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहां जो हुआ वो बुरा हादसा है.
उन्होंने अजमेर शरीफ़ मामले पर कहा, "800 साल पुरानी अजमेर की दरगाह भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब की निशानी है. यहां हिंदु, मुस्लिम, सिख सब जाते हैं. उसके पीछे भी पड़ गए हैं कि उसे भी खोदो शायद
उसके नीचे भी मंदिर निकल आए. ऐसा कब तक चलेगा?"
महबूबा मुफ़्ती ने बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति पर भी बात की. उन्होंने कहा कि “वहां हमारे हिंदू भाइयों के साथ ज़्यादती हो रही है. अगर हम यहां अल्पसंख्यकों के साथ ज़्यादती करें तो फ़र्क़ क्या है? इतना बड़ा मुल्क हमारा, लेकिन हम में और बांग्लादेश में कोई फ़र्क़ ही नहीं रहेगा.”
महबूबा मुफ़्ती के बयान पर बीजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी नेता रवींद्र रैना ने कहा, “महबूबा मुफ़्ती का बांग्लादेश के साथ तुलना वाला बयान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है. सारी दुनिया देख रही है कि किस तरह वहां मानवाधिकारों का हनन हो रहा है. वहां अल्पसंख्यक समुदाय को चुन-चुन कर निशाना बनाया जा रहा है.”
रवींद्र रैना के मुताबिक़, "महबूबा मुफ़्ती ने जो किया है वह राष्ट्रद्रोह है. भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई सब सुरक्षित हैं."
उन्होंने कहा कि महबूबा मुफ़्ती के बयान को राष्ट्रद्रोह की नज़र से देखा जाना चाहिए और उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.