ट्रंप के घर के सुरक्षित दायरे में घुसने वाले शख़्स को गोली मारी, अब तक सामने आईं ये अहम बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घर के सुरक्षित दायरे में घुसने वाले शख़्स को सीक्रेट सर्विस ने गोली मार दी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई. यह घटना ट्रंप के फ़्लोरिडा स्थित घर मार-आ-लागो की है. हालांकि, उस समय ट्रंप वॉशिंगटन डीसी में थे.

सारांश

लाइव कवरेज

सुमंत सिंह, रौनक भैड़ा

  1. दिल्ली पुलिस ने 'आतंकी साज़िश' के आरोप में तमिलनाडु से आठ संदिग्धों को गिरफ़्तार किया

    दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल

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    इमेज कैप्शन, संदिग्धों को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है (सांकेतिक तस्वीर)

    दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 'आतंकी साज़िश' के आरोप में तमिलनाडु से आठ संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है.

    दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा को इसकी पुष्टि की है.

    दिल्ली पुलिस का दावा है कि जिन संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है उन्हें बांग्लादेश से हैंडल किया जा रहा था.

    पुलिस के मुताबिक़, गिरफ़्तार किए गए संदिग्धों में छह बांग्लादेशी नागरिक हैं.

    इन संदिग्धों को पूछताछ के लिए दिल्ली लाया जा रहा है.

  2. अमेरिकी राजदूत के 'मध्य-पूर्व पर इसराइल के क़ब्ज़े' वाले बयान पर अब पाकिस्तान ने भी दिया बयान

    इसहाक़ डार

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इसहाक़ डार (फ़ाइल फ़ोटो)

    पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की समेत 14 इस्लामी देशों और तीन संगठनों ने इसराइल में अमेरिका के राजदूत के मध्य-पूर्व से जुड़े बयान की कड़ी निंदा की है.

    अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि इसराइल को 'बाइबल के मुताबिक़ मध्य-पूर्व के बड़े हिस्सों पर क़ब्ज़ा करने का अधिकार है.'

    इन इस्लामी देशों और संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ऐसे भड़काऊ बयान स्पष्ट रूप से 'अस्वीकार्य' हैं और यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है.

    बयान में यह भी कहा गया कि ऐसे बयान क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर ख़तरा पैदा करते हैं.

    यह संयुक्त बयान पाकिस्तान, मिस्र, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इंडोनेशिया, तुर्की, सऊदी अरब, क़तर, कुवैत, ओमान, बहरीन, लेबनान, सीरिया और फ़लस्तीन के विदेश मंत्रियों और ऑर्गनाइजे़शन ऑफ़ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी), लीग ऑफ़ अरब स्टेट्स और गल्फ़ को-ऑपरेशन काउंसिल के सचिवालयों की ओर से जारी किया गया.

    इन देशों और संगठनों ने यह भी कहा कि अमेरिकी राजदूत का बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग़ज़ा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना के भी विपरीत है.

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी अपने एक्स अकाउंट पर इस बयान को साझा किया है.

    संबंधित कहानियां:

  3. बीएचयू कैंपस में स्टूडेंट पर गोली चलने की ख़बर, पुलिस ने क्या कहा?

    बीएचयू

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    इमेज कैप्शन, पुलिस का कहना है कि इस मामले में मुक़दमा दायर कर आगे की कार्रवाई की जाएगी (फ़ाइल फ़ोटो)

    बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में शनिवार रात स्टूडेंट्स के बीच हुए विवाद में गोलीबारी की रिपोर्ट सामने आई है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने इसकी जानकारी दी है.

    पीटीआई के मुताबिक़, मौक़े से गोली के चार ख़ाली कारतूस बरामद हुए हैं.

    पुलिस ने बताया कि रात में क़रीब 9.30 बजे एक फ़ोन कॉल के ज़रिए एक स्टूडेंट ने जानकारी दी कि उस पर गोली चली है. पुलिस की टीम ने मौक़े पर पहुंचकर जांच की.

    पुलिस का कहना है कि इस मामले में उचित धाराओं के तहत मुक़दमा दायर कर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

    गोली चलने की ख़बर सामने आने के बाद कैंपस में तनाव का माहौल रहा. कई स्टूडेंट्स ने इसको लेकर नारेबाज़ी भी की.

  4. ईरान में सड़कों पर उतरे स्टूडेंट्स, बड़े पैमाने पर हुए सरकार-विरोधी प्रदर्शन, सियावश मेहदी-अर्दलान और जारोस्लव लुकिव

    ईरान में प्रदर्शन
    इमेज कैप्शन, ये स्टूडेंट्स जनवरी में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों में मारे गए हज़ारों लोगों को श्रद्धांजलि दे रहे थे

    ईरान के कुछ विश्वविद्यालयों में स्टूडेंट्स ने सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किए हैं. पिछले महीने अधिकारियों की हिंसक कार्रवाई के बाद इतने बड़े पैमाने पर पहली बार प्रदर्शन हो रहे हैं.

    बीबीसी ने शनिवार को राजधानी तेहरान स्थित शरीफ़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी के परिसर में मार्च करते प्रदर्शनकारियों का वीडियो वेरिफ़ाई किया.

    बाद में इन प्रदर्शनकारियों और सरकार समर्थकों के बीच झड़पें होती हुई भी दिखीं.

    तेहरान के एक अन्य विश्वविद्यालय में धरना दिया गया. वहीं उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक रैली की ख़बर है. ये स्टूडेंट्स जनवरी में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों में मारे गए हज़ारों लोगों को श्रद्धांजलि दे रहे थे.

    अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह सीमित सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं.

    अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में बढ़ रहा है, जिसे ईरान हमेशा नकारता रहा है.

    इस बीच, मंगलवार को स्विट्ज़रलैंड में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों की मुलाक़ात हुई और उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के उद्देश्य से हो रही बातचीत में प्रगति हुई है.

  5. तालिबान सरकार का दावा- अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान के हमले में कई महिलाओं और बच्चों की मौत

    ज़बिहुल्लाह मुजाहिद

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    इमेज कैप्शन, अफ़ग़ान तालिबान ने पाकिस्तानी हमलों में दर्जनों नागरिकों के मारे जाने का दावा किया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तानी सेना पर अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

    तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों लोग मारे गए हैं और घायल हुए हैं.

    ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने एक बयान में कहा, "बीती रात पाकिस्तानी सेना ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हमारे निर्दोष नागरिकों पर बमबारी की, जिसकी वजह से महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों लोग मारे गए और घायल हुए."

    उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी जनरल अपने देश की सुरक्षा संबंधी कमज़ोरियों की भरपाई ऐसे अपराधों के ज़रिए कर रहे हैं."

  6. पाकिस्तान ने अफ़ग़ान सीमा क्षेत्र में 'सात आतंकवादी ठिकानों' पर हमले का किया दावा

    एयर स्ट्राइक

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में उसके देश में हुए आत्मघाती हमलों के जवाब में की गई है (सांकेतिक तस्वीर)

    पाकिस्तान ने कहा है कि उसने ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा क्षेत्र में 'सात आतंकवादी ठिकानों और शिविरों को निशाना बनाया' है.

    पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक़, ये हमले फ़ितना अल ख़्वारिज (एफ़एके) से जुड़े पाकिस्तानी तालिबान और उसके सहयोगी संगठनों और इस्लामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान प्रांत (आईएसकेपी) के 'आतंकवादी ठिकानों और शिविरों' पर हुए हैं.

    पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में उसके देश में हुए आत्मघाती हमलों के जवाब में की गई है.

    एक बयान में कहा गया, "पाकिस्तान के पास पुख़्ता सबूत हैं कि ये आतंकवादी हमले ख़्वारिज ने अपने अफ़ग़ानिस्तान स्थित लीडरशिप और हैंडलर्स के निर्देश पर किए. इन हमलों की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ानिस्तान स्थित पाकिस्तानी तालिबान, जो फ़ितना अल ख़्वारिज से जुड़े हैं, उनके सहयोगी संगठनों और इस्लामिक स्टेट ऑफ़ ख़ोरासान प्रांत ने भी ली है."

    पाकिस्तान ने कहा कि उसने कई बार अफ़ग़ान तालिबान सरकार से कोई ठोस क़दम उठाने की मांग की लेकिन इन समूहों के ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.

    इसके साथ ही पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार से मांग की कि वह अपने देश की ज़मीन का इस्तेमाल 'पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ख़्वारिज और अन्य आतंकवादियों' को करने से रोके.

  7. मध्य-पूर्व पर यहूदियों के क़ब्ज़े वाले बयान पर अमेरिकी राजदूत ने सफ़ाई में क्या कहा

    माइक हकाबी

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    इमेज कैप्शन, माइक हकाबी ने कहा कि जेनेटिक्स यानी आनुवंशिकी के ज़रिए यहूदी अपने वंशजों का पता लगा सकते हैं कि वे कहां-कहां रहते थे (फ़ाइल फ़ोटो)

    इसराइल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने इसराइल के 'मध्य-पूर्व पर क़ब्ज़े' से जुड़े अपने बयान पर अब सफ़ाई दी है.

    माइक हकाबी ने दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता और टिप्पणीकार टकर कार्लसन को एक इंटरव्यू में कहा था कि इसराइल को 'बाइबल के मुताबिक़ मध्य-पूर्व के बड़े हिस्सों पर क़ब्ज़ा करने का अधिकार है.'

    उनके इस बयान पर सऊदी अरब, क़तर, जॉर्डन और इस्लामी देशों के संगठन ऑर्गेनाइजे़शन ऑफ़ इस्लामिक को-ऑपरेशन समेत कई देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

    अब माइक हकाबी ने अपनी सफ़ाई में कहा है कि उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि टकर कार्लसन उनसे ऐसे लंबे सवाल पूछेंगे, जिनमें वह यह संकेत देते नज़र आ रहे थे कि 'आज के यहूदी वास्तव में बाइबल के यहूदियों जैसे नहीं हैं.'

    उन्होंने कहा, "अश्कनाज़ी यहूदियों के परिवार सदियों तक यूरोप में रहे. ये इसराइल की यहूदी आबादी का अल्पसंख्यक हिस्सा हैं, शायद केवल 35 से 40 प्रतिशत. इसराइल के भीतर सेफ़ारदी और मिज़राही यहूदियों की संख्या कहीं ज़्यादा है."

    माइक हकाबी ने कहा कि टकर एक ऐसी 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' को आगे बढ़ा रहे थे, जो इंटरनेट और सोशल मीडिया से आया है. हकाबी ने दावा किया कि उन्होंने इस थ्योरी के बारे में कभी नहीं सुना.

    उन्होंने कहा कि 'बहुत बुरे लोगों ने यहूदियों को अवैध ठहराने' और उनसे उनका इतिहास छीनने के लिए इस थ्योरी का इस्तेमाल हथियार की तरह किया.

    उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि टकर इस विषय पर इतने केंद्रित क्यों थे और मैं यह बिल्कुल नहीं कह रहा कि उन्हें इस 'कॉन्पिरेसी थ्योरी' की उत्पत्ति के बारे में जानकारी थी. मुझे नहीं पता कि उनके मन में क्या है या वह क्या सोच रहे थे."

    "लेकिन मैं इतना जानता हूं कि यह सोच यहूदियों को बदनाम करने के लिए है और यह पूरी तरह निराधार है."

    अमेरिकी राजदूत ने कहा कि इस 'कॉन्सपिरेसी थ्योरी' को सोशल मीडिया में उन इस्लामी अकाउंट्स के ज़रिए बढ़ावा दिया जाता है जो 'पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों से संचालित' होते हैं.

    माइक हकाबी ने यह भी कहा कि जेनेटिक्स यानी आनुवंशिकी के ज़रिए यहूदी अपने वंशजों का पता लगा सकते हैं कि वे कहां-कहां रहते थे.

    उन्होंने कहा, "आनुवंशिकी और लिखित साहित्य से हमें पता है कि आज के यहूदी अपने वंश को हज़ारों साल पीछे बाइबल के इसराइल और यहूदी समुदाय को खोज सकते हैं."

    "वे आपस में उतने ही जुड़े हुए हैं, जितना आनुवंशिकी हमें बताती है कि प्राचीन ख़ज़ार साम्राज्य आज के तुर्की में रहने वाले लोगों से जुड़ा है."

    अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अगर टकर कार्लसन इसराइल की उनकी अगली यात्रा में बेन-गुरियन हवाई अड्डे से आगे जाना चाहें, तो उन्हें उन स्थानों को दिखाने में खुशी होगी, जहां 'यहूदी यीशु मसीह के समय से और उससे भी पहले से रहते' आए हैं.

  8. नमस्कार!

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