विदेश मंत्री जयशंकर ने ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला से मुलाक़ात के बाद क्या कहा
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इमेज कैप्शन, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक होनी है
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्राज़ील
के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा से मुलाक़ात की है.
राष्ट्रपति लूला भारत दौरे पर हैं.
शनिवार को उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भी मुलाक़ात की है.
इस मुलाक़ात के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़
इनासियो लूला दा सिल्वा से मुलाक़ात करना सम्मान की बात है. हमारी रणनीतिक
साझेदारी को आगे बढ़ाने को लेकर उनके गर्मजोशी भरे विचारों और मार्गदर्शन की
सराहना करता हूं."
विदेश मंत्री ने ब्राज़ील के
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात को लेकर भी जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि दोनों देशों के
नेताओं के बीच शनिवार को बैठक होनी है. उन्होंने कहा कि यह बैठक दोनों देशों के
बीच संबंधों को नई गति देगी.
टैरिफ़ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद राहुल गांधी की ये टिप्पणी
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस ने ट्रेड डील को लेकर पीएम मोदी पर अमेरिका के सामने झुकने का आरोप लगाया है (फ़ाइल फ़ोटो)
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल
गांधी ने टैरिफ़ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी पर निशाना साधा है.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार
को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ को रद्द कर दिया.
इस फ़ैसले के बाद भारत में विपक्षी
दलों के नेता भारत-अमेरिका ट्रेड डील और भारत पर टैरिफ़ को लेकर केंद्र सरकार और
प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साध रहे हैं.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, "प्रधानमंत्री समझौता कर चुके हैं. उनका विश्वासघात अब उजागर हो चुका है."
उन्होंने कहा, "वह (पीएम) दोबारा बातचीत नहीं कर सकते. वह फिर से
सरेंडर कर देंगे."
कांग्रेस आरोप लगाती रही है कि पीएम
मोदी ने ट्रेड डील को लेकर अमेरिका के भारत के हितों का ख़्याल नहीं रखा.
टैरिफ़ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लेकर भारत में विपक्षी नेता क्या बोले
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले और भारत को लेकर ट्रंप के बयान के बाद विपक्षी दलों के नेता सरकार पर निशाना साध रहे हैं
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार
को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ के फ़ैसले को रद्द कर दिया. इसके बाद ट्रंप
ने कोर्ट के फ़ैसले और भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर बयान दिया.
ट्रंप ने कहा, "कुछ भी नहीं बदला
है. भारत टैरिफ़ का भुगतान करेगा. हम टैरिफ़ का भुगतान नहीं करेंगे.''
उनके इस बयान के बाद भारत में
विपक्षी दलों के नेता सरकार पर निशाना साध रहे हैं.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के समय को लेकर सवाल खड़ा किया.
उन्होंने कहा कि ट्रंप ने दो फ़रवरी
की रात (भारतीय समयानुसार) समझौते के अंतिम रूप की घोषणा की. अगर प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी 18 दिन और इंतज़ार कर लेते तो इस ट्रेड डील से बचा जा सकता था.
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सवाल किया कि भारत
ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करने की बजाय इतनी जल्दबाज़ी में
समझौता क्यों किया?
प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा,
"अदालत के हस्तक्षेप के बाद अब
व्यापार 10 फ़ीसदी टैरिफ़ से होगा, लेकिन
अमेरिका से भारत आने वाले आयात पर फिर भी ज़ीरो फ़ीसदी टैरिफ़ है."
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में ब्राज़ील
की तारीफ़ करते हुए कहा, "ब्राज़ील
ने सबसे अधिक टैरिफ़ झेलने वाले देशों में होने के बावजूद मज़बूती से रुख़ अपनाया.
उसने अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं किया."
ट्रंप ने कहा- ईरान में प्रदर्शन के दौरान 32 हज़ार लोग मारे गए
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इमेज कैप्शन, यह पहली बार है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान में प्रदर्शन के दौरान मरने वालों की संख्या को लेकर बयान दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने
शुक्रवार को कहा कि ईरान में जनवरी में हुए प्रदर्शनों में 32 हज़ार लोग मारे गए.
यह पहली बार है जब अमेरिकी
राष्ट्रपति ने ईरान में प्रदर्शन के दौरान मरने वालों की संख्या को लेकर बयान दिया
है.
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत
के दौरान एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, "उन्हें एक उचित समझौता करना चाहिए. ईरान के लोग अपने नेताओं से बहुत
अलग हैं और यह बेहद दुखद स्थिति है. वहां थोड़े ही समय में 32 हज़ार लोग मारे
गए."
उन्होंने कहा, "वे 837 लोगों को फांसी देने वाले थे. मैंने
उन्हें संदेश भेजा कि अगर आप एक भी व्यक्ति को फांसी देते हैं, तो आपको तुरंत निशाना बनाया जाएगा और उन्होंने
फांसी रोक दी."
अमेरिकी राष्ट्रपति से ईरान पर
संभावित हमले को लेकर भी पूछा गया. इस पर उन्होंने कहा कि वह ईरान पर सीमित सैन्य
हमले पर विचार कर रहे हैं.
बांग्लादेश का टी20 वर्ल्ड कप नहीं खेलने का फ़ैसला: सहायक कोच ने कहा- पूर्व खेल सलाहकार ने झूठ बोला
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इमेज कैप्शन, पूर्व खेल सलाहकार आसिफ़ नज़रुल ने कहा था कि वर्ल्ड कप न खेलने का फ़ैसला बोर्ड और खिलाड़ियों का है (फ़ाइल फ़ोटो)
बांग्लादेश क्रिकेट टीम के वरिष्ठ
सहायक कोच मोहम्मद सलाहुद्दीन ने बांग्लादेश के टी20 वर्ल्ड कप न खेलने के फ़ैसले
पर पूर्व खेल सलाहकार आसिफ़ नज़रुल की आलोचना की है.
बांग्लादेशी अख़बार 'द डेली स्टार' के मुताबिक़, नज़रुल
ने वर्ल्ड कप न खेलने का फ़ैसला बोर्ड और खिलाड़ियों का बताया था. इस पर मोहम्मद
सलाहुद्दीन ने कहा कि नज़रुल ने 'खुलेआम
झूठ बोला'.
दरअसल, नज़रुल ने पहले कहा था कि सरकार ने टीम को आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड
कप में न भेजने का फ़ैसला किया था, लेकिन
बाद में उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी बोर्ड और खिलाड़ियों पर डालते हुए अपना रुख़
बदल लिया.
बांग्लादेश क्रिकेट टीम के वरिष्ठ
सहायक कोच ने कहा, "वह ढाका यूनिवर्सिटी में शिक्षक हैं.
देश के सर्वोच्च शिक्षण संस्थान से जुड़े व्यक्ति का इस तरह झूठ बोलना हम स्वीकार
नहीं कर सकते. हम इसे कैसे मान लें? उन्होंने
पहले एक बात कही और बाद में यू-टर्न ले लिया."
सलाहुद्दीन ने वर्ल्ड कप से बाहर
होने के बाद खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति पर भी बात की. उन्होंने कहा कि कुछ
खिलाड़ी इतने टूट गए थे कि उन्हें दोबारा मैदान पर लाना मुश्किल हो गया था.
उन्होंने कहा, "जब कोई खिलाड़ी वर्ल्ड कप खेलने जाता है, तो वह अपना सपना, 27 साल का सपना लेकर आता है. आप एक पल में वह सपना तोड़ देते हैं. ठीक
है, अगर यह देश का फ़ैसला है और
राष्ट्रीय कारणों से लिया गया है, तो वे
देश के लिए कुर्बानी देंगे. लेकिन अगर नुक़सान की बात होगी, तो मैं केवल व्यक्तिगत नुक़सान की बात करूंगा."
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इमेज कैप्शन, सैफ़ हसन ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी (फ़ाइल फ़ोटो)
बांग्लादेश के उप-कप्तान की प्रतिक्रिया
इस बीच बांग्लादेश टी20 टीम के उप-कप्तान सैफ़ हसन ने भी टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने पर अफ़सोस जताया. उन्होंने कहा कि इसे पचा पाना आसान नहीं था.
सैफ़ ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक फ़ेसबुक अकाउंट पर लिखा, "वर्ल्ड कप नहीं खेल पाने के सदमे से उबरना आसान नहीं था क्योंकि यह मेरा पहला वर्ल्ड कप होता. यह लाइफ़ का सपना था, जिसके लिए बहुत मेहनत की और कुर्बानियां दीं."
ट्रंप ने कहा, वह ईरान पर सीमित सैन्य हमला करने पर कर रहे हैं विचार, बर्न्ड डीबुसमन जूनियर और कैशेला स्मिथ
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इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि अमेरिका के साथ समझौते का प्रस्ताव कुछ ही दिनों में तैयार हो जाएगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
ने कहा है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए उसके नेताओं पर
दबाव बनाने के उद्देश्य से सीमित सैन्य हमले पर विचार कर रहे हैं.
राष्ट्रपति ने यह टिप्पणी एक पत्रकार
के सवाल के जवाब में की. इससे कुछ घंटे पहले अधिकारियों ने हमले की संभावना का
संकेत दिया था.
गुरुवार को ट्रंप ने कहा था कि
दुनिया को "शायद अगले 10 दिनों में" पता चल जाएगा कि ईरान के साथ समझौता
होगा या अमेरिका सैन्य कार्रवाई करेगा. हाल के हफ्तों में अमेरिका ने इस क्षेत्र
में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है.
शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री
अब्बास अराक़ची ने कहा कि ईरान "संभावित समझौते के मसौदे" की तैयारी कर
रहा है और इसे आने वाले कुछ दिनों में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ को सौंपा
जाएगा.
अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों
को शक है कि ईरान परमाणु हथियार के विकास की दिशा में बढ़ रहा है. ईरान ने हमेशा
इस आरोप से इनकार किया है.
ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद दुनियाभर में नए टैरिफ़ लगाए, नैटली शरमेन, बिज़नेस रिपोर्टर
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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ उनके पास कई 'बेहतरीन विकल्प' हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने
सुप्रीम कोर्ट की ओर से पिछले साल लगाए गए टैरिफ़ रद्द होने के बाद नया 10 फ़ीसदी
ग्लोबल टैरिफ़ लागू कर दिया है.
ट्रंप ने अदालत के फ़ैसले को
"भयानक" बताया और उनकी व्यापार नीति को ख़ारिज करने वाले न्यायाधीशों को
"बेवकूफ़" कहा.
इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने
व्हाइट हाउस की ओर से पिछले साल घोषित किए गए ज़्यादातर ग्लोबल टैरिफ़ को अवैध
ठहराया. 6-3 के फ़ैसले में अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से आगे
बढ़कर फ़ैसला किया.
यह फ़ैसला उन कारोबारियों और अमेरिकी
राज्यों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है जिन्होंने इन टैरिफ़ को चुनौती दी थी.
इससे संभावित रूप से अरबों डॉलर के
टैरिफ़ रिफंड का रास्ता खुल गया है, साथ ही
वैश्विक व्यापार परिदृश्य में नई अनिश्चितता भी बढ़ गई है.
शुक्रवार को व्हाइट हाउस में बोलते
हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि रिफंड बिना क़ानूनी लड़ाई के नहीं मिलेंगे. उन्होंने
कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह मामला वर्षों तक अदालत में उलझा रह सकता है.
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