हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा- ग़ज़ा में सहायता केंद्रों पर खड़े 32 लोगों की इसराइली गोलीबारी में मौत

ग़ज़ा में खाने की तलाश में सहायता केंद्रों पर गए कम से कम 32 फ़लस्तीनियों की इसराइली गोलीबारी में मौत हो गई है. ग़ज़ा में हमास की ओर से संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है.

सारांश

लाइव कवरेज

प्रवीण और इफ़्तेख़ार अली

  1. सीरिया और इसराइल के बीच युद्ध विराम को लेकर अमेरिका ने यह कहा

    सीरिया

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    इमेज कैप्शन, सीरिया और इसराइल के बीच सुवैदा शहर के नज़दीक बीते कुछ दिनों से हिंसा चल रही है

    अमेरिका का कहना है कि इसराइल और सीरिया युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए हैं.

    तुर्की में अमेरिकी दूत ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी.

    बीते कई दिनों से सीरिया के दक्षिण में सुवैदा शहर के क़रीब दोनों के बीच भिड़ंत चल रही थी.

    रविवार से वहां हो रही हिंसा में 600 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

    इस हफ़्ते इसराइल ने दमिश्क में हवाई हमले किए थे. इसराइल ने सीरिया के दक्षिणी इलाके़ में सरकारी बलों पर हमला किया.

    इसराइल ने कहा था कि उसका उद्देश्य सीरियाई ड्रूज़ की रक्षा करना है.

    वहीं सीरियाई राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वह देश के दक्षिणी भाग में खानाबदोशों और ड्रूज़ लड़ाकों के बीच सांप्रदायिक झड़पों को रोकने के लिए एक नया बल तैनात करेगा.

  2. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर टैरिफ़ लगाने की चेतावनी दोहराई

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भी ब्रिक्स देशों को टैरिफ़ लगाने की चेतावनी दी थी

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की चेतावनी को दोहराया है.

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "जब मैंने ब्रिक्स के छह देशों के बारे में सुना तो मैंने उन्हें भारी नुक़सान पहुंचाया. अगर ये इस मामले में आगे बढ़ते हैं तो बहुत जल्दी ख़त्म हो जाएंगे."

    हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने ये बात कहते हुए किसी भी देश का नाम नहीं लिया. ट्रंप ने कहा, "हम किसी भी देश को हमारे साथ खेल खेलने की इजाज़त नहीं देंगे."

    ट्रंप और ब्रिक्स देशों के बीच विवाद इस महीने की शुरुआत में शुरू हुआ.

    इस महीने की शुरुआत में रियो डि जनेरियो में ब्रिक्स देशों के 17वें शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था.

    ब्रिक्स के रियो घोषणापत्र में 'वैश्विक शासन में सुधार करने' से लेकर 'अंतरराष्ट्रीय स्थिरता' पर बात की गई. इसके साथ ही इसमें एकतरफ़ा टैरिफ़ और नॉन-टैरिफ़ जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई.

    इस साल की शुरुआत में दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति का कार्यकाल संभालने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ़ वॉर की शुरुआत की.

    ब्रिक्स के रियो घोषणापत्र के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर पोस्ट किया कि 'जो भी देश ख़ुद को ब्रिक्स की अमेरिका विरोधी नीतियों के साथ जोड़ता है, उस पर अतिरिक्त 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया जाएगा. इस नीति में कोई छूट नहीं दी जाएगी. इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद.'

  3. कोल्डप्ले कॉन्सर्ट का वीडियो वायरल होने के बाद कंपनी ने सीईओ को छुट्टी पर भेजा

    कोल्डप्ले कॉन्सर्ट

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    इमेज कैप्शन, कोल्डप्ले कॉन्सर्ट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें एक कंपनी के सीईओ और चीफ़ पीपल ऑफ़िसर साथ नज़र आए थे

    अमेरिकी टेक कंपनी एस्ट्रोनॉमर ने कोल्डप्ले कॉन्सर्ट में अपने दो कर्मचारियों का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें छुट्टी पर भेज दिया है.

    वायरल वीडियो में कोल्डप्ले कॉन्सर्ट के दौरान दोनों कर्मचारी बड़ी स्क्रीन पर गले मिलते हुए दिखाई दिए थे. हालांकि जैसे ही वे स्क्रीन पर दिखाए दिए तो उन्होंने ख़ुद को छिपाने की कोशिश की थी.

    शुक्रवार देर रात कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुष्टि की कि उसके सीईओ एंडी बायरन को छुट्टी पर भेज दिया गया है.

    कोल्डप्ले के मुख्य गायक क्रिस मार्टिन ने बड़ी स्क्रीन पर इस जोड़ी को छिपते हुए देखने के बाद भीड़ से कहा, "या तो उनका अफे़यर चल रहा है, या फिर वे बहुत शर्मीले हैं."

    ये वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर काफ़ी वायरल हुआ और इसे लाखों लोगों ने देखा.

    इस वीडियो के वायरल होने के दो दिन बाद एस्ट्रोनॉमर ने मामले की जांच की घोषणा की थी. हालांकि पोस्ट में वायरल वीडियो का ज़िक्र नहीं किया गया था.

    कंपनी को-फाउंडर और चीफ़ प्रोडक्ट ऑफ़िसर पीट डेजॉय को अंतरिम सीईओ नियुक्त किया गया है.

  4. टीआरएफ़ को 'आतंकी संगठन' घोषित किए जाने के अमेरिका के फ़ैसले पर चीन बोला

    लिन जियान

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    इमेज कैप्शन, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने पहलगाम हमले की निंदा की है

    अमेरिका के 'द रेज़िस्टेंस फ़्रंट' (टीआरएफ़) को 'विदेशी आतंकवादी संगठन' घोषित करने पर चीन ने प्रतिक्रिया दी है.

    चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन सभी तरह के आतंकवाद का कड़ा विरोध करता है.

    उन्होंने कहा, "चीन सभी तरह के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है. चीन 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है."

    "चीन पड़ोसी देशों से आतंकवाद के ख़िलाफ़ सहयोग बढ़ाने की अपील करता है. चीन संयुक्त रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने का आह्वान भी करता है."

    22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए चरमपंथी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी.

    विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सात मई को एक प्रेस ब्रीफ़िंग के दौरान टीआरएफ़ को पहलगाम हमले का ज़िम्मेदार ठहराया था.

    वहीं अमेरिका के 'द रेज़िस्टेंस फ़्रंट' (टीआरएफ़) को 'विदेशी आतंकवादी संगठन' घोषित किए जाने के फ़ैसले का भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को स्वागत किया.

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  5. ट्रंप ने वॉल स्ट्रीट जर्नल समेत इन पर 10 अरब डॉलर का मुक़दमा दायर किया

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वॉल स्ट्रीट जर्नल के आर्टिकल की वजह से उनके सम्मान को नुक़सान पहुंचा है

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉल स्ट्रीट जर्नल, कंपनी के मालिक रूपर्ट मर्डोक और दो पत्रकारों ख़दीजा सफ़दर और जोसेफ़ पलाजोलो के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया है.

    ट्रंप ने इनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर कर 10 अरब डॉलर की मांग की है.

    ट्रंप ने आरोप लगाया है कि पत्रकार "एक फ़ैक्ट बनाकर पेश कर रहे हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 2003 में जेफ़री एपस्टीन के 50वें जन्मदिन के मौके़ पर एक पत्र लिखा और उस पर हस्ताक्षर किए." हालांकि ट्रंप ने ऐसी किसी भी बात का खंडन किया है.

    ट्रंप के वकील एलेजांद्रो ब्रिटो द्वारा दायर मुक़दमे में दावा किया गया है कि अख़बार को पता था कि आर्टिकल झूठा है और उन्होंने सच्चाई की परवाह किए बिना ट्रंप के प्रति दुर्भावना से प्रेरित होकर ये क़दम उठाया.

    मुक़दमे में दावा किया गया है कि ट्रंप के वकीलों ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को चेतावनी दी थी कि उसकी आगामी रिपोर्ट झूठी है और उसे पब्लिश नहीं करना चाहिए.

    मुक़दमे में कहा गया है कि आर्टिकल में सत्यता की कमी के बावजूद उसे लाखों लोगों तक पहुंचाया गया.

    मुक़दमे में ये भी कहा गया है कि इस आर्टिकल की पहुंच की वजह से राष्ट्रपति ट्रंप के सम्मान के अलावा वित्तीय नुक़सान भी बढ़ता रहेगा.

    मुक़दमे में इस मामले पर न्यायपीठ से सुनवाई का अनुरोध किया गया है.

    जेफ़री एपस्टीन अमेरिकी फाइनेंसर थे और उनकी कंपनी का नाम जे एपस्टीन एंड कॉरपोरेशन था. जेफ़री एपस्टीन पर यौन शोषण के आरोप थे. साल 2019 में जेफ़री एपस्टीन की जेल में मौत हो गई थी.

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