अगर अमेरिकी पैदल फ़ौज आई तो ईरान की ये है तैयारी, ग़ालिबाफ़ ने बताया

अमेरिका के ज़मीनी हमले की चर्चाओं के बीच ईरान के एक शीर्ष नेता ने कड़ी चेतावनी जारी की है.

सारांश

लाइव कवरेज

सुमंत सिंह और इफ़्तेख़ार अली

  1. ट्रंप के ईरान को 'पाषाण युग में पहुंचाने' की धमकी पर अमेरिकी सांसदों की कैसी प्रतिक्रिया

    यासमिन अंसारी और पीट हेगसेथ

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    इमेज कैप्शन, रिपब्लिकन नेताओं ने ट्रंप के भाषण की तारीफ़ की है, जबकि डेमोक्रेट्स ने कड़ी आलोचना की (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर 'बड़ा हमला' करेगा और उसे 'पाषाण युग' में पहुंचा देगा.

    इस धमकी पर अमेरिका के कुछ सांसदों ने ट्रंप की कड़ी आलोचना की, जबकि कुछ नेताओं ने इसका समर्थन किया.

    अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक्स पर लिखा, "वापस पाषाण युग में."

    वहीं, एरिज़ोना से डेमोक्रेट सांसद यासमिन अंसारी ने कहा, "वह 9 करोड़ की आबादी वाले देश की बात कर रहे हैं. यह घिनौना, भयावह और बुरा है."

    मैरीलैंड के सीनेटर क्रिस वैन होलेन ने भी भाषण की आलोचना की. इसके साथ ही उन्होंने ट्रंप को 'अमेरिका और दुनिया के लिए ख़तरा' बताया.

    डेमोक्रेट नेता वैन होलेन ने कहा, "ट्रंप ने हमेशा की तरह हमसे झूठ बोला. दो हफ़्ते पहले उन्होंने कहा था 'हम जीत गए.' अगर ऐसा है, तो हम अब भी वहां क्यों हैं? आगे क्या होगा? हम ट्रंप से सिर्फ़ अधिक झूठ की ही उम्मीद कर सकते हैं."

    उन्होंने कहा, "भ्रम में रहने वाला यह आदमी हमारे देश और दुनिया के लिए ख़तरा है."

    वहीं लुइज़ियाना से रिपब्लिकन सांसद स्टीव स्कैलीज़ ने भाषण की तारीफ की.

    स्कैलीज़ ने कहा, "आज रात राष्ट्रपति ट्रंप ने ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी के लिए देश के सामने बेहद ठोस तर्क रखा. ईरानी शासन का आतंक और अमेरिकियों की हत्या का लंबा इतिहास दिखाता है कि उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना क्यों ज़रूरी था."

  2. ईरान में और क्या हासिल करना है यह 'स्पष्ट नहीं': ऑस्ट्रेलियाई पीएम

    एंथनी अल्बनीज़

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    इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने नेशनल प्रेस क्लब में अपना संबोधन दिया

    ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा है कि उनका देश "ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने" के लक्ष्य का समर्थन करता है.

    हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब यह स्पष्ट नहीं है कि इस युद्ध में "आगे और क्या हासिल करना है या इसका अंतिम लक्ष्य क्या है".

    उनकी यह टिप्पणी नेशनल प्रेस क्लब में दिए गए संबोधन के दौरान आई, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के साथ ही हो रहा था.

    अल्बनीज़ से ख़ास तौर पर उस समयसीमा को लेकर भी सवाल किया गया, जो ट्रंप ने संघर्ष ख़त्म करने के लिए बताई है. इस पर उन्होंने कहा कि युद्ध की "शुरुआत से पहले ऑस्ट्रेलिया से कोई सलाह नहीं ली गई थी".

    उन्होंने कहा, "मैंने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि हम तनाव कम होते देखना चाहते हैं और यह भी चाहते हैं कि यह कैसे ख़त्म होगा, इस पर ज़्यादा स्पष्टता हो".

    अल्बनीज़ की यह टिप्पणी क़रीब 24 घंटे पहले दिए गए उनके एक छोटे संबोधन के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई लोगों को चेतावनी दी थी कि "आने वाले महीने आसान नहीं हो सकते".

    उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलिया इस युद्ध में सक्रिय भागीदार नहीं है. लेकिन इसके कारण सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को बढ़ती क़ीमतों का सामना करना पड़ रहा है".

  3. ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी लोगों के लिए लिखा पत्र, युद्धविराम का ज़िक्र नहीं

    मसूद पेज़ेश्कियान

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    इमेज कैप्शन, ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके देश ने 'कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया' (फ़ाइल फ़ोटो)

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने 'अमेरिकी लोगों' को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा है. इस पत्र को उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा किया.

    ईरानी राष्ट्रपति ने अपने पत्र में कहा कि ईरान ने "कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया". उन्होंने कहा कि उनका देश लंबे समय से "क़ब्ज़े और हमले" का सामना कर रहा है.

    यह पत्र उस दावे के कुछ घंटों बाद सामने आया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि "ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति" ने अमेरिका से युद्धविराम की मांग की है. हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किसकी बात कर रहे थे.

    सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका युद्धविराम पर तभी विचार करेगा "जब होर्मुज़ स्ट्रेल खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित होगा. तब तक हम ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे या जैसा कहा जाता है, उसे वापस पाषाण युग में भेज देंगे!!!"

    लेकिन पेज़ेश्कियान ने अपने पत्र में युद्धविराम का कोई ज़िक्र नहीं किया.

    उन्होंने लिखा कि ईरानी लोगों की अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है. अंत में उन्होंने कहा कि "टकराव और संवाद" के बीच लिया गया फ़ैसला आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को तय करेगा.

  4. ईरान युद्ध से जुड़े ट्रंप के भाषण पर अमेरिकी सांसदों की कैसी प्रतिक्रिया

    चक शूमर

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    इमेज कैप्शन, सीनेटर चक शूमर ने ट्रंप के भाषण की कड़ी आलोचना की है (फ़ाइल फ़ोटो)

    ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण पर अमेरिकी सांसदों ने भी प्रतिक्रिया दी है.

    सांसद चक शूमर, जो कि न्यूयॉर्क से डेमोक्रेट नेता हैं, उन्होंने भाषण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के ईरान से जुड़े फ़ैसले हमारे देश के इतिहास की सबसे बड़ी नीतिगत ग़लतियों में गिने जाएंगे."

    उनका कहना है कि ट्रंप "अपने उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताने में नाकामयाब रहे, वह सहयोगियों को दूर कर रहे हैं और अमेरिकी लोगों की रोज़मर्रा की समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं."

    वहीं रिपब्लिकन नेता और साउथ कैरोलीना से सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के भाषण पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. उन्होंने फॉक्स न्यूज़ से कहा कि ईरान के पास समझौता करने या और बमबारी का सामना करने का विकल्प है.

    ग्राहम ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसे लक्ष्यों की रूपरेखा दी है जो समय के साथ इस शासन के टिके रहने की क्षमता को ख़त्म कर देंगे."

    यह बयान ट्रंप की उस चेतावनी के संदर्भ में है जिसमें उन्होंने ईरान के इलेक्ट्रिक ग्रिड पर हमले की बात कही थी.

    उन्होंने कहा, "अगर आप यह समझौता नहीं करते हैं, तो हम उन सभी चीज़ों को नष्ट कर देंगे जिनकी आपको ज़रूरत होगी. यह इस अभियान का निर्णायक क्षण था."

  5. ईरानी दूतावास ने क्यों कहा, 'भारतीय सुरक्षित हाथों में हैं'

    अब्बास अराग़ची

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    इमेज कैप्शन, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज़ स्ट्रेट लगभग बंद है (फ़ाइल फ़ोटो)

    ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने बुधवार को कहा कि 'होर्मुज़ स्ट्रेट के भविष्य का फ़ैसला सिर्फ़ ईरान और ओमान तय करेंगे'.

    उनके इस बयान को दुनिया के विभिन्न देशों में स्थित ईरानी दूतावासों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर शेयर किया है.

    भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने भी इसे साझा किया है और अपने एक अन्य पोस्ट में कहा, "हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं है."

    होर्मुज़ को लेकर ईरान और अमेरिका आमने-सामने हैं. ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से इस रास्ते से भारत, पाकिस्तान और चीन जैसे कुछ चुनिंदा देशों के जहाज़ों को ही गुजरने की अनुमति दी है.

    इस संकरे समुद्री मार्ग के बंद होने से दुनियाभर में तेल की क़ीमतें बढ़ गई हैं. दुनियाभर का 20 फ़ीसदी ऊर्जा व्यापार इसी रास्ते से होता है.

  6. ट्रंप के संबोधन के बाद अमेरिकी शेयर बाज़ार के वायदा कारोबार में गिरावट

    अमेरिकी शेयर बाज़ार

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    इमेज कैप्शन, डाउ जोंस और एस एंड पी 500 फ़्यूचर्स क़रीब 0.7% नीचे हैं (सांकेतिक तस्वीर)

    ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन का बाज़ारों पर नकारात्मक असर हुआ है.

    एक ओर वैश्विक क्रूड की क़ीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाज़ार के वायदा कारोबार (फ़्यूचर्स) में गिरावट आई है.

    डाउ जोंस और एस एंड पी 500 फ़्यूचर्स क़रीब 0.7% नीचे हैं, जबकि नैस्डैक फ़्यूचर्स लगभग 1% गिरा है.

    शेयर बाज़ार में फ़्यूचर्स ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जो निवेशकों को भविष्य की किसी तारीख़ पर तय क़ीमत पर शेयर ख़रीदने या बेचने की अनुमति देते हैं.

    यह एक तरह का दांव होता है, जिसमें यह पता चलता है कि निवेशक बाज़ार की दिशा को किस ओर जाते हुए देखते हैं. ये भी माना जाता है कि फ्यूचर्स मार्केट शेयर बाज़ार की दिशा बताता है..

  7. डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन के फ़ौरन बाद तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी

    तेल भंडार

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप का संबोधन ख़त्म होने के बाद तेल की क़ीमतें बढ़ती जा रही हैं (सांकेतिक तस्वीर)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में संबोधन के बाद वैश्विक तेल क़ीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. उनका यह संबोधन ईरान में जारी युद्ध को लेकर था.

    बीबीसी संवाददाता पीटर हॉकिन्स के मुताबिक़, जब ट्रंप ने अपना संबोधन शुरू किया, उससे पहले बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की क़ीमत क़रीब 100 डॉलर प्रति बैरल पर थी. लेकिन भाषण के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव आया.

    लेकिन अब संबोधन ख़त्म होने के बाद क़ीमतें बढ़ती जा रही हैं और फ़िलहाल क़रीब 4% बढ़कर 105.38 डॉलर पर पहुंच गई है.

    ऐसा माना जा रहा था कि ट्रंप होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर कुछ एलान कर सकते हैं. लेकिन इससे जुड़ा कोई अपडेट नहीं आने पर तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है.

    होर्मुज़ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% ऊर्जा व्यापार इसी संकरे समुद्री रास्ते से होता है.

    28 फ़रवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से यह मार्ग लगभग बंद है, क्योंकि ईरान ने अमेरिकी और इसराइली हवाई हमलों के जवाब में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाज़ों पर हमला करने की धमकी दी है.

  8. इंडोनेशिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी

    तेरनाते

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    इमेज कैप्शन, भूकंप का केंद्र तेरनाते से लगभग 120 किलोमीटर दूर था

    इंडोनेशिया में गुरुवार सुबह 7.4 तीव्रता का एक तेज़ भूकंप आया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है.

    अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप की शुरुआती तीव्रता 7.8 दर्ज की गई थी. यह स्थानीय समय के मुताबिक़ सुबह 06:48 बजे मोलुक्का सागर में आया.

    भूकंप का केंद्र तेरनाते शहर से लगभग 120 किलोमीटर दूर था, जो एक छोटा लेकिन घनी आबादी वाला द्वीप है और जिसकी आबादी दो लाख से अधिक है.

    हवाई स्थित सुनामी वार्निंग सिस्टम ने कहा कि भूकंप के केंद्र से एक हज़ार किलोमीटर के दायरे में इंडोनेशिया, फ़िलीपींस और मलेशिया के तटीय इलाक़ों में लहरें उठने की संभावना है.

  9. राष्ट्रपति ट्रंप का 'ईरान पर एक महत्वपूर्ण अपडेट' को लेकर कुछ ही देर में संबोधन

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, ईरान ने ट्रंप के युद्धविराम की मांग वाली ख़बरों को "ग़लत और बेबुनियाद" बताया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ ही समय में "ईरान पर एक महत्वपूर्ण अपडेट" के साथ जनता को संबोधित करने वाले हैं.

    माना जा रहा है कि वह इस संबोधन में अमेरिकी सैन्य सफलताओं को दोहराएंगे और जनता को आश्वस्त करेंगे कि ईरान में चल रहा अभियान आने वाले हफ़्तों में कम या समाप्त हो जाएगा.

    इस संबोधन से पहले, बुधवार को ईरान युद्ध से जुड़े घटनाक्रम पर एक नज़र डालते हैं.

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि युद्ध के एक महीने बाद ईरान में 12,300 से ज़्यादा टारगेट्स पर हमला किया गया है. उसका कहना है कि इन हमलों में ईरानी जहाज़ों, सैन्य कमांड केंद्रों और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों को "नुक़सान पहुंचाया या नष्ट कर दिया" गया है.

    खाड़ी देशों पर ईरानी हमले जारी हैं. संयुक्त अरब अमीरात और क़तर ने मिसाइल और ड्रोन हमलों का जवाब दिया है, जबकि ब्रिटिश सैनिकों का कहना है कि उन्होंने जॉर्डन, बहरीन और साइप्रस सहित कई देशों के हवाई क्षेत्र में ईरान के 10 ड्रोन गिराए हैं.

    ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्धविराम की मांग वाली ख़बरें "ग़लत और बेबुनियाद" हैं. ट्रंप के भाषण से पहले, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिकियों के नाम एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने इस युद्ध को अपने देश पर "क़ब्ज़ा और हमला" बताया.

    साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोप और खाड़ी के अरब पड़ोसी देशों के आम लोगों के प्रति ईरान की कोई दुर्भावना नहीं है.

    यूरोप में ट्रंप की उन टिप्पणियों के बाद चिंता बढ़ रही है, जिनमें उन्होंने संकेत दिया था कि अगर सहयोगी देश अमेरिकी सेना के साथ शामिल होने के उनके अनुरोध को नहीं मानते हैं तो अमेरिका नेटो सैन्य गठबंधन से बाहर हो सकता है.

  10. नमस्कार!

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