राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के मुद्दे पर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी के बीच सोशल मीडिया एक्स पर बहस शुरू हो गई है.
प्रियांक खड़गे ने महेश जेठमलानी की एक पोस्ट के जवाब में लिखा, "यह देखकर अच्छा लगा कि आरएसएस पर हो रही बहस अब ‘क़ानूनी दिग्गजों’ का भी ध्यान खींच रही है. मैं क़ानून, संविधान, पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दों पर कभी भी और कहीं भी चर्चा, विचार-विमर्श और बहस करने के लिए तैयार हूँ."
उन्होंने लिखा, "सरनेम से भले ही दरवाज़े खुल जाएँ, लेकिन इससे हर तर्क को अपने-आप वज़न नहीं मिल जाता. निश्चित रूप से, पारदर्शिता की कमी का बचाव करते हुए संविधान का ज़िक्र करने से तर्क संवैधानिक नहीं हो जाता."
प्रियांक खड़गे ने लिखा, "मैं आपको एक बुनियादी फ़र्क याद दिलाना चाहता हूँ- आप सिलेक्टेड प्रतिनिधि हैं. मैं जनता का निर्वाचित प्रतिनिधि हूँ. एक बार नहीं. दो बार नहीं. बल्कि, तीन बार."
उन्होंने लिखा, "इसलिए, मुझे संवैधानिक नैतिकता पर उपदेश देने से पहले, कृपया असली सवाल का जवाब दें कि इतने बड़े पैमाने, प्रभाव और सार्वजनिक गतिविधियों वाले किसी संगठन को सामान्य क़ानूनी पारदर्शिता के दायरे से बाहर क्यों रहना चाहिए?"
इससे पहले महेश जेठमलानी ने एक पोस्ट में दावा किया कि प्रियांक खड़गे का आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखा गया पत्र संवैधानिक राजनीति से प्रेरित है.
उन्होंने एक लंबी पोस्ट में लिखा, "यह एक सोची-समझी राजनीतिक उकसावे की कार्रवाई है. इसमें क़ानून की समझ कम है, अंदाज़े ज़्यादा हैं, और यह साफ़ तौर पर वंशवादी राजनीति के अहंकार को दिखाता है."
"एक सदी से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने खुलेआम और जनता की आंखों के सामने देश की सेवा की है. चरित्र निर्माण, अनुशासन को बढ़ावा देना, सामाजिक एकता को मज़बूत करना और यह सब बिना किसी सरकारी मदद के किया है."
प्रियांक खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे हैं, जबकि महेश जेठमलानी जाने-माने वकील रहे राम जेठमलानी के बेटे हैं.
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल उठा रहे हैं. कर्नाटक सरकार ने आरएसएस की गतिविधियों को गुप्त बताते हुए कहा है कि इस संगठन को अपना रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए.
जबकि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को केरल के त्रिशूर में संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में कहा कि देश में कई ऐसी संस्थाएं हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है.