नेपाल में दूसरी बाढ़ की आशंका पर विशेषज्ञ ने क्या चेतावनी दी?, जैकब फ़िलिप्स, लाइव रिपोर्टर
नेपाल और तिब्बत में आई फ़्लैश फ़्लड के बाद अब नए ख़तरे की आशंका जताई जा रही है.
बाढ़ से मलबे ने नदियों का रास्ता रोक दिया है, जिससे ऊपरी इलाक़ों में नई झीलें बन गई हैं. ऐसे में इनके अचानक टूटने से दोबारा बाढ़ आने का ख़तरा बढ़ गया है.
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ़ रीडिंग में 'अर्ली वॉर्निंग एंड डिज़ास्टर' पर शोध करने वाले विशेषज्ञ जेफ़ दा कोस्टा ने बताया कि दूसरी बाढ़ का पहली बाढ़ जितना बड़ा होना ज़रूरी नहीं है, फिर भी वह गंभीर नुक़सान पहुंचा सकती है.
उन्होंने कहा, "अब यह देखना बहुत ज़रूरी है कि इलाक़े में बनी झीलों और नदियों के रास्ते में जमा मलबे में क्या बदलाव हो रहे हैं और वे कहां टूट सकते हैं."
विशेषज्ञ ने नेपाल और चीन के बीच निगरानी से जुड़ी सूचनाओं को साझा करने पर भी ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा कि ऊपरी इलाक़ों में होने वाली घटनाओं का असर सीमा पार रहने वाले लोगों पर बहुत तेज़ी से पड़ सकता है. ऐसे में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी तेज़ी से होना चाहिए, ताकि ज़मीन पर समय रहते ज़रूरी फ़ैसले लिए जा सकें.
दा कोस्टा ने इस आपदा के संदर्भ में जलवायु परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, पर्माफ़्रॉस्ट और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता में बदलाव हो रहा है.
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना गहन विश्लेषण के मौजूदा आपदा को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन का परिणाम नहीं माना जा सकता.