दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को हुए हादसे में मृतकों की संख्या सात हो गई है. वहीं, पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं.
दो मृतकों और एक घायल के परिजनों ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बात की है.
हादसे में जान गंवाने वाले 19 वर्षीय अक्षत सिंह यादव के रिश्तेदार धीरज ने बताया कि अक्षत बिल्डिंग की पहली मंजिल पर रहता था और दिल्ली यूनिवर्सिटी में सेकेंड ईयर का छात्र था.
धीरज ने बताया, "हादसे की खबर मिलने के बाद से अक्षत की मां सदमे में हैं और ज्यादातर समय चुप रहती हैं. परिवार अक्षत के शव को मध्य प्रदेश के कटनी ले जा रहा है, जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा."
धीरज ने कहा कि अगर अक्षत को जल्दी रेस्क्यू कर लिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी.
हादसे में मारे गए अर्पित जहाज के परिवार ने बताया कि उन्हें उसकी मौत की जानकारी दोस्तों के जरिए मिली.
अर्पित जहाज की चाची स्वाति ने बताया कि परिवार मध्य प्रदेश के देवास से करीब दोपहर 3 बजे फ्लाइट से दिल्ली के लिए रवाना हुआ था.
स्वाति ने कहा, "हादसे में अर्पित का चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था. शव की हालत ऐसी थी कि शुरुआत में उसकी पहचान नहीं हो पाई. बाद में परिवार ने उसके दाहिने हाथ पर बने तिल के जरिए पहचान की."
अर्पित के पिता भूपेंद्र जहाज ने बताया कि परिवार ने अर्पित की आंखें दान कर दी हैं. उन्होंने कहा, "अगर समय रहते रेस्क्यू हो जाता तो हमारा बच्चा आज हमारे बीच होता."
हादसे में घायल नीरज बावा के पिता दर्शन दास ने बताया कि उन्हें बेटे के साथ हुए हादसे की जानकारी रविवार दोपहर करीब 3 बजे टीवी न्यूज देखकर मिली.
दर्शन दास ने बताया कि उन्होंने राखी और कपड़ों के जरिए नीरज को पहचाना. उनकी बेटी ने भी टीवी पर उसे पहचान लिया.
दर्शन दास के मुताबिक़, घटना के तुरंत बाद नीरज ने अपने एक दोस्त को अपनी लोकेशन भेजी थी. इसके बाद उसने अपना फोन बाहर की तरफ फेंक दिया.
उन्होंने कहा, "मेरे पास उसका फोन है. इस पर स्क्रैच है. ये उसकी समझदारी थी कि जैसे ही हादसा हुआ, उसने तुरंत अपनी लोकेशन भेज दी, जिससे उसके दोस्त उस तक पहुंच पाए."
नीरज को अंदरूनी चोटें आई हैं और उसे इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया गया है. दर्शन दास ने बताया कि परिवार रात करीब 2 बजे अस्पताल पहुंचा था. घटना के अगले दिन दोपहर करीब साढ़े 3 बजे नीरज को एम्स में भर्ती कराया गया.