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सिंगापुर में नेपाल बाढ़ और एयर इंडिया को लेकर क्यों भारतीय बने नस्लभेद का निशाना
नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई भयंकर बाढ़ ने हज़ारों मील दूर सिंगापुर में काफ़ी गहरा असर किया है.
इस प्राकृतिक आपदा के बाद देश के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्री ने सख़्त लहजे में कहा है कि किसी भी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह को पनपने नहीं देना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि नेपाल में आई बाढ़ में 1,355 लोगं की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि हज़ारों लोग अब भी लापता है.
लापता लोगों में कई दूसरे देशों के नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें सिंगापुर भी शामिल है.
नेपाल-तिब्बत सीमा से शुरू हुई अचानक बाढ़ में सिंगापुर के तक़रीबन नौ लोग शामिल हैं. इनमें अधिकतर भारतीय मूल के सिंगापुर नागरिक हैं.
सिंगापुर के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्री को चेतावनी भारतीय मूल के नागरिकों और एक सिंगापुर एयरलाइंस की वजह से देनी पड़ी है.
क्या है पूरा मामला
नेपाल में सिंगापुर के नौ नागरिकों के लापता होने के बाद सोशल मीडिया पर नस्लवादी और विदेशियों को लेकर नफ़रती (ज़ेनोफ़ोबिक) पोस्ट सामने आई थीं.
इसके बाद देश के गृह मंत्री के. शनमुगम ने इसे 'शर्मनाक' बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से ऐसे कमेंट्स हटाने के लिए कहा था.
शनमुगम ने कहा, "मीडिया ने मुझे बताया कि उन्हें कई कमेंट्स हटाने पड़े क्योंकि वे बहुत बुरे थे. मुझे नहीं पता कि ये सभी कमेंट्स सिंगापुर के लोगों ने ही किए हैं या नहीं. लेकिन मैं यह ज़रूर कहूँगा कि ये कमेंट्स शर्मनाक, बुरे और बिल्कुल भी स्वीकार करने लायक नहीं हैं."
उन्होंने कहा, "मैंने पुलिस से इन कमेंट्स की जाँच करने को कहा है."
सिंगापुर स्थित न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म सीएनए ने बताया कि शनमुगम ने लापता सिंगापुर के नागरिकों के बारे में ऑनलाइन किए गए नस्लभेदी कमेंट के कई उदाहरण दिए.
उन्होंने बताया कि इन कमेंट में कहा गया था कि "नहीं, वे हमारे अपने नहीं हैं", "मुझे यहां सिर्फ़ भारतीय चेहरे दिख रहे हैं. छोड़ो. बचाव अभियान बंद करो" और "सभी एक जैसे दिखते हैं, एआई कैसे पहचान करेगा?"
हालांकि, शनमुगम ने ये भी कहा कि "सिंगापुर के लोग, चाहे वे किसी भी नस्ल के हों, उदार होते हैं. और यह ज़रूरी है कि हम कुछ लोगों को पूरे माहौल को ख़राब न करने दें."
एयर इंडिया के मामले पर भी नफ़रती कमेंट
भारतीयों को लेकर नफ़रती कमेंट सिर्फ़ नेपाल बाढ़ तक सीमित नहीं हैं बल्कि इसमें एयर इंडिया की भी एंट्री हुई है.
शनमुगम ने बताया कि इस खब़र से कि एयर इंडिया शेयरहोल्डर्स (जिनमें सिंगापुर एयरलाइंस भी शामिल है) से नई इक्विटी जुटाने की कोशिश कर रही है, इसके बाद ऑनलाइन "भारत-विरोधी और नस्लवादी बयानों" की एक नई लहर शुरू हुई.
उन्होंने बताया कि इस दौरान सोशल मीडिया पर "सांप, करी, पराठा और काला जादू" जैसी बातें कही जा रही हैं.
सीएनए के मुताबिक़, सोशल मीडिया पर टेमासेक के सीईओ और सीनियतर मैनेजमेंट पर भी जातीयता को लेकर टिप्पणियां की गईं. टेमासेक, सिंगापुर एयरलाइंस की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर है और दिलहान पिल्लै संद्रासेगारा टेमासेक के सीईओ हैं.
शनमुगम ने कहा, "ये कहा गया है कि सीईओ भारतीय मूल के हैं, इसलिए वो एयर इंडिया का पक्ष लेंगे. इन लोगों की नज़र में सीईओ का गुनाह बस यह है कि वो भारतीय मूल के हैं, जबकि वो भी हममें से किसी की तरह ही सिंगापुर के नागरिक हैं. यह बहुत बुरी और अपमानजनक बात है."
पिछले महीने समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि एयर इंडिया, रिकॉर्ड सालाना नुक़सान दर्ज करने के कुछ ही महीनों बाद, अपने मालिकों टाटा संस और एसआईए से 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त मदद मांग रही है.
एसआईए के एक प्रवक्ता ने पिछले हफ़्ते कहा था कि बोर्ड "एयर इंडिया से अतिरिक्त पूंजी की किसी भी मांग पर सावधानीपूर्वक विचार करेगा, जिसमें ग्रुप की पूंजी की अन्य ज़रूरतों और एयर इंडिया की बिज़नेस स्ट्रैटेजी को ध्यान में रखा जाएगा."
सिंगापुर के पीएम और पूर्व पीएम ने क्या कहा?
नस्लीय टिप्पणियों को लेकर सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग और पूर्व प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने भी बयान दिया है.
वर्तमान प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग ने रविवार को फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा कि "हम मज़बूती से बहस कर सकते हैं और हमें ऐसा करना भी चाहिए. लेकिन हमें कभी भी सही लगने वाले तर्कों का इस्तेमाल किसी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह या विदेशियों के प्रति नफ़रत फैलाने के बहाने के तौर पर नहीं करना चाहिए."
उन्होंने लिखा कि भले ही ऐसी सोच सिंगापुर की असलियत नहीं दिखाती, लेकिन इसे "ऑनलाइन होने वाली मामूली बातचीत" कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए.
वॉन्ग ने लिखा, "अगर ऐसे व्यवहार को रोका नहीं गया, तो यह आम बात बन सकती है, समुदायों के बीच अविश्वास बढ़ा सकती है और हमें एक-दूसरे से दूर कर सकती है."
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले पर अपने कैबिनेट सहयोगियों से चर्चा की थी और इसीलिए शनमुगम ने इस बारे में बात की थी.
उन्होंने कहा कि देश की पहचान "खुली हुई और सबको साथ लेकर चलने वाली" होनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "हमारा बैकग्राउंड चाहे जो भी हो, अगर हम अपने मूल्यों और जीवन-शैली को अपनाते हैं, तो हम इस देश का हिस्सा हैं."
"हमारी राष्ट्रीय प्रतिज्ञा का यही मतलब है, और मेरा मानना है कि ज़्यादातर सिंगापुरवासी इसी सोच से सहमत हैं."
वॉन्ग ने कहा कि सिंगापुर ने पहले भी ऐसे तनावों का सामना किया है. उन्होंने बताया कि कैसे कोविड-19 महामारी के दौरान विदेशियों के प्रति नफ़रत और नस्लीय भावनाएं भड़की थीं, और सिंगापुर-भारत कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट (सीईसीए) पर बहस के दौरान भी ऐसी बातें सामने आई थीं.
वहीं देश के पूर्व प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने भी फ़ेसबुक पर लिखा, "नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ ने कई परिवारों को ग़म में डुबो दिया है. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है और जो इस त्रासदी से प्रभावित हुए हैं, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं."
"ऐसे समय में, हमारा रवैया सहानुभूति और एकजुटता वाला होना चाहिए. इस त्रासदी के बाद हमारे भारतीय समुदाय के ख़िलाफ़ नस्लवादी टिप्पणियां और नफ़रत भरी बातें देखना बहुत परेशान करने वाला है."
पूर्व प्रधानमंत्री लूंग ने लिखा, "नस्लवादी पूर्वाग्रहों और नफ़रत को भड़काने की कोशिशें हमेशा होती रहेंगी. हम अलग-अलग नस्लों के बीच सहनशीलता और सम्मान के लिए कोशिश करते हैं, लेकिन इंसान नस्ल के प्रति पूरी तरह बेपरवाह नहीं हो सकते. सिंगापुर हमेशा इन गहरी और बांटने वाली भावनाओं के असर में आ सकता है."
"नस्ल और धर्म हमेशा हमारे समाज में मतभेद की वजह बन सकते हैं. इसलिए हमें अपने आपसी मेलजोल को मज़बूत करने और नस्लीय सद्भाव की रक्षा करने के लिए कड़ी मेहनत करते रहना होगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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