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लाइव, शुभेंदु सरकार ने ममता बनर्जी के कार्यकाल हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनाया आयोग

पश्चिम बंगाल सरकार ने ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है.

सारांश

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा, संदीप राय

  1. शुभेंदु सरकार ने ममता बनर्जी के कार्यकाल हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनाया आयोग, प्रभाकर मणि तिवारी, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए

    पश्चिम बंगाल सरकार ने ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है.

    इसकी अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज विश्वजीत बसु करेंगे.

    राज्य सचिवालय की ओर से बीती 10 जुलाई को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि आयोग साल 2011 से इस साल मई तक शिक्षा, खाद्य और आपूर्ति, राहत और आपदा प्रबंधन, नगर पालिका और पंचायत के अधिकार वाले क्षेत्र, आवास और मत्स्य पालन के कामकाज में 'भ्रष्टाचार के आरोपों' की जांच करेगा.

    गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि आयोग रिश्वखोरी, अंफान तूफ़ान के राहत में भ्रष्टाचार, 100 दिनों के रोजगार योजना में गड़बड़ियों, सत्ता के दुरुपयोग, मिड डे मील में गड़बड़ी और सरकारी नौकरियों में नियुक्तियों में भ्रष्टाचार समेत विभिन्न क्षेत्रों में लगने वालेतमाम आरोपों की जांच करेगा.

    इसके अलावा गैरक़ानूनी तरीक़े से की जाने वाली गिरफ़्तारियों, झूठे मामलों और अवैध निर्माण में सरकारी भूमिका की भी जांच की जाएगी.

    सहायक पुलिस महानिदेशक स्तर के आईपीएस अधिकारी के के जयरामन आयोग के सदस्य सचिव होंगे.

    उनके अलावा आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के एक-एक अधिकारी भी आयोग में शामिल रहेंगे.

    एक अधिकारी बताते हैं कि आयोग किसी मामले की जांच के दौरान किसी व्यक्ति को बयान के लिए बुला सकता है. वह पुलिस से एफ़आईआर की भी सिफ़ारिश कर सकता है.

    लेकिन भ्रष्टाचार के जिन मामलों की जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं, उनकी जांच आयोग नहीं कर सकेगा. आयोग समय-समय पर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा.

    विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ आगे बढ़ेगी. उन्होंने विधानसभा में भी यह बात दोहराई थी.

  2. दिन भरः सऊदी अरब समेत इन देशों से ट्रंप क्यों मांग रहे प्रोटेक्शन मनी?

  3. लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने मेस में मांसाहारी खाने पर लगाई रोक, प्रेरणा, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ

    उत्तर प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में से एक किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने अपने सभी हॉस्टलों के मेस में मांसाहारी खाना पकाने और परोसने पर रोक लगा दी है.

    विश्वविद्यालय का कहना है कि यह केवल एक मौखिक एडवाइज़री है. स्टूडेंट्स चाहें तो ऑनलाइन ऑर्डर कर अपने कमरों में नॉन वेज खा सकते हैं.

    केजीएमयू में कुल 18 हॉस्टल हैं, जिनमें क़रीब 2,500 स्टूडेंट्स रहते हैं.

    बीबीसी हिंदी से बातचीत में विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा, "हमारे यहां दो तरह के मेस चलते हैं. कुछ मेस स्टूडेंट्स सहकारी व्यवस्था (को-ऑपरेटिव) के तहत ख़ुद संचालित करते हैं, जबकि कुछ यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित हैं."

    "इसके अलावा डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन के स्टूडेंट्स के लिए सैटेलाइट फ्लैट जैसे हॉस्टल हैं, जहां उनके पास अपना किचन होता है, वहां ऐसी कोई रोक नहीं है.''

    उन्होंने कहा, "हमने यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित मेस को मौखिक रूप से सलाह दी है कि वहां नॉन वेज न बनाया जाए और उसकी जगह पनीर, चना जैसे विकल्प दिए जाएं. को-ऑपरेटिव मेस से भी ऐसा करने को कहा गया है, लेकिन कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है."

    "न तो हमने कैंपस में नॉन-वेज खाने पर रोक लगाई है और न ही सरकार या राजभवन ने ऐसा करने के लिए कहा है."

    राज्यपाल की टिप्पणी से जोड़ा जा रहा है फ़ैसला

    हालांकि यूनिवर्सिटी का यह फ़ैसला ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले आयोजित केजीएमयू के 22वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और विश्वविद्यालय की कुलपति आनंदीबेन पटेल ने छात्रावासों के मेस का ज़िक्र करते हुए नॉन वेज खाने पर टिप्पणी की थी.

    13 जुलाई को आयोजित समारोह में आनंदीबेन पटेल ने कहा था, "राजभवन की टीम ने विश्वविद्यालय के तीन मेस का निरीक्षण किया और पाया कि वहां नॉन वेज बनता है. एक जगह एक्सपायर्ड मसालों का भी प्रयोग किया जा रहा था."

    राज्यपाल ने अपने संबोधन में इसके आगे नॉन वेज पर किसी प्रतिबंध की बात नहीं कही. लेकिन अब चूंकि अगले ही दिन यूनिवर्सिटी ने नॉनवेज न बनाने को लेकर मेस में मौखिक एडवाइज़री जारी की है, तब दोनों घटनाओं को एक दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है.

    हालांकि विश्वविद्यालय का कहना है कि यह निर्णय सीधे तौर पर राजभवन के किसी आदेश के आधार पर नहीं लिया गया.

    डॉ. केके सिंह ने कहा, "15 जून को राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के दीक्षांत समारोह में भी राज्यपाल ने छात्रावासों में नॉन-वेज परोसे जाने पर नाराज़गी जताई थी. हमने उसी को ध्यान में रखते हुए यह एडवाइज़री जारी की है.''

    यह पहली बार नहीं है जब आनंदीबेन पटेल ने किसी यूनिवर्सिटी के छात्रावास में परोसे जाने वाले नॉन-वेज खाने पर सवाल उठाए हों.

    इससे पहले 15 जून को राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के तीसरे दीक्षांत समारोह में उन्होंने हॉस्टल में एक हफ़्ते में दो दिन नॉन-वेज खाना परोसे जाने की व्यवस्था पर भी टिप्पणी की थी.

  4. लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर भारत ने क्या कहा

    लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर अमेरिका में दायर आरोपपत्र को लेकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "अमेरिका की क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई के संबंध में हमने अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी घोषणा देखी है."

    "इसमें कई देशों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के ख़िलाफ़ आरोपपत्र और प्रवर्तन कार्रवाई की जानकारी दी गई है."

    उन्होंने कहा, "भारत लगातार यह कहता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध हथियारों की तस्करी और इससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क हमारे समाज के लिए गंभीर ख़तरा हैं."

    "आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के मामले में भारत और अमेरिका के बीच मज़बूत, प्रभावी और लगातार बढ़ता सहयोग है. भारत और अमेरिका की संबंधित एजेंसियां कई वर्षों से मिलकर काम कर रही हैं और यह सहयोग लगातार और मज़बूत हो रहा है."

    हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग को ज़िम्मेदार ठहराए जाने संबंधी बयान पर जायसवाल ने कहा, "हमने रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के डिप्टी कमिश्नर की टिप्पणियों पर ध्यान दिया है."

    "भारत आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के लिए अपने साझेदार देशों के साथ क़ानून प्रवर्तन और सुरक्षा सहयोग के ज़रिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है."

    पिछले दिनों अमेरिका ने भारत की जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के गैंग समेत तीन समूहों पर एक्शन लेते हुए 24 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है.

  5. कार्टून : डिप्लोमा इन चढ़ावा मैनेजमेंट

  6. तसलीमा नसरीन क़रीब दो दशक बाद लौटेंगी कोलकाता

    करीब दो दशक पहले अपने लेखों को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ने को मजबूर हुईं बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन अगले महीने शहर लौटेंगी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, यह वापसी राजनीतिक तौर पर भी अहम मानी जा रही है. पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार इसे धार्मिक कट्टरता के आगे लंबे समय तक हुए कथित झुकाव से बदलाव के संकेत के तौर पर पेश कर रही है.

    तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर बताया कि वह 1 अगस्त को कोलकाता में रवींद्र सदन में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होंगी. इस दौरान वह कविता पाठ भी करेंगी.

    धर्मनिरपेक्ष और कट्टरतावाद विरोधी संगठनों के एक समूह की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का महत्व साहित्य तक सीमित नहीं माना जा रहा है.

    1994 में कट्टरपंथियों की ओर से धमकी मिलने के बाद से वो बांग्लादेश से बाहर रह रही हैं.

  7. समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 10 लाख का जुर्माना, फिर किया कम

    विकलांग लोगों पर की गई असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना समेत पांच लोगों पर तल्ख़ टिप्पणी करते हुए ज़ुर्माना लगाया है.

    बार एंड बेंच के मुताबिक़, कोर्ट ने उन पर अदालती आदेशों का उल्लंघन करने के लिए पहले 10 लाख रुपये का ज़ुर्माना लगाया गया, जिसे बाद में कम करके तीन लाख रुपये कर दिया.

    सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर आपने आदेशों का पालन नहीं किया, तो यह राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी जाएगी."

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमारा मानना है कि समय रैना ने कोर्ट को गुमराह किया है और हमारे आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया है.”

    यह मामला क्योर एसएमए इंडिया फ़ाउंडेशन की एक याचिका से जुड़ा है.

    इसमें समय रैना पर स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) के महंगे इलाज को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी करने और इस बीमारी से प्रभावित एक व्यक्ति का मज़ाक उड़ाने का आरोप लगाया गया है.

    नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य कॉमेडियन को हर महीने कम से कम दो कार्यक्रम आयोजित कर विकलांग लोगों के इलाज के लिए बनाए गए कोष के लिए धन जुटाने का निर्देश दिया था.

    सुनवाई के दौरान सीनियर वकील अपराजिता सिंह ने कहा, "समय रैना शो तो कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्होंने एसएमए फ़ाउंडेशन या एसएमए से पीड़ित लोगों से संपर्क नहीं किया है.”

  8. भोजशाला परिसर मामला: एमपी हाई कोर्ट के फ़ैसले पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, नमाज़ पर क्या कहा?

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है.

    हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार ज़िले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर घोषित किया था.

    हाई कोर्ट ने वहां नमाज अदा करने पर रोक लगाई गई थी.

    सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के उस अंतरिम आदेश के अनुरोध को नहीं माना, जिसमें यथास्थिति बहाल करने की मांग की गई थी.

    याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि मुसलमानों को निर्धारित दिनों में हिंदू पूजा के साथ-साथ शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति मिले.

    क़ानूनी मामलों की ख़बरें देने वाली बेवसाइट लाइव लॉ के मुताबिक़, सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने टिप्पणी की, "हमें ऐसा कोई आदेश पारित नहीं करना चाहिए जिससे तनाव पैदा हो."

    हालांकि, पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह संबंधित स्थल से सटे एक अलग खुले स्थान को मुस्लिम पक्ष के लिए शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने के लिए जगह उपलब्ध कराए.

    अदालत ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था अस्थायी होगी.

  9. बर्मिंघम पहला वनडेः इंग्लैंड ने टॉस जीता, बल्लेबाज़ी का फ़ैसला

    भारत और इंग्लैंड के बीच पहला वनडे मैंच मंगलवार को एजबेस्टन, बर्मिंघम में हो रहा है.

    इस मैच में विराट कोहली और रोहित शर्मा भारतीय प्लेइंग इलेवन में शामिल हैं. टॉस जीतकर इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया है.

    तीन वनडे मैचों की सिरीज़ का दूसरा मैच 16 जुलाई को और तीसरा मैच 19 जुलाई को होना है.

    प्लेइंग इलेवन (इंग्लैंड)

    बेन डकेट, जैकब बेथेल, जो रूट, हैरी ब्रूक (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), सैम करन, विल जैक्स, जोफ़्रा आर्चर, लियाम डॉसन, जोश टॉंग, आदिल रशीद

    प्लेइंग इलेवन (भारत)

    रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, वॉशिंगटन सुंदर, केएल राहुल (विकेटकीपर), शिवम दुबे, अक्षर पटेल, गुरनूर बरार, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा

  10. असम सरकार ने बीते दो सालों में कितने लोगों को बांग्लादेश वापस भेजा, दिलीप कुमार शर्मा, गुवाहाटी से बीबीसी हिन्दी के लिए

    असम सरकार ने पिछले दो सालों में फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की ओर से विदेशी घोषित किए गए कुल 193 लोगों को बांग्लादेश 'पुशबैक' किया है. यह जानकारी सरकार ने असम विधानसभा के जारी बजट सत्र के दौरान सोमवार को सदन में दी.

    इन लोगों में 67 ऐसे ‘घोषित विदेशी’ भी शामिल हैं, जिन्हें पिछले साल फिर से लागू किए गए 1950 के 'प्रवासी निष्कासन कानून' के तहत देश की सीमा से बाहर भेजा गया है.

    जबकि राज्य सरकार ने पिछले दो सालों में अलग-अलग कैटगरी के तहत कुल 1,679 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा है.

    दरअसल, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ़) के विधायक बदरुद्दीन अजमल ने प्रश्नकाल के दौरान सवाल पूछा था कि पिछले दो सालों में कितने लोगों को बांग्लादेश 'पुशबैक' यानी वापस भेजा गया है?

    इस सवाल का जवाब देते हुए गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सदन को बताया, "1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 के बीच कुल 1,679 लोगों को बांग्लादेश भेजा गया है. इन लोगों का निष्कासन अलग-अलग कैटेगरी में किया गया है. इन 1679 लोगों में से 193 वे लोग हैं जिन्हें फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया है."

    भारत की ओर से अपनाए गए इस 'पुशबैक' तरीके का बांग्लादेश कड़ा विरोध जताता आ रहा है.

    असल में क़ानूनी तौर पर जिन लोगों को 'फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल' विदेशी घोषित करती है, वे गुवाहाटी हाई कोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं.

    जबकि देश से बाहर भेजने (डिपोर्टेशन) की औपचारिक प्रक्रिया में आपसी जांच-पड़ताल के बाद संबंधित व्यक्ति को दूसरे देश के अधिकारियों को सौंपना शामिल होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह व्यक्ति वास्तव में उसी देश का नागरिक है.

    लेकिन मई 2025 से असम सरकार ने घोषित 'विदेशी' लोगों को वापस भेजने या दूसरे देश से बातचीत किए बिना उन्हें जबरन अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार धकेलने का तरीका अपनाया है.

    इसके बाद बीते सितंबर में, सरकार ने 'इमिग्रेंट्स (एक्सपल्शन फ़्रॉम असम) एक्ट, 1950' (असम से प्रवासियों को निकालने का कानून) को फिर से लागू करने की घोषणा कर दी.

    इसके तहत अगर, फ़ॉरेनर्स ट्रिब्यूनल से कोई अवैध नागरिक घोषित होता तो ज़िला प्रशासन बिना किसी देर के उसे सीमा पार 'पुशबैक' करने का निर्देश दे सकता है.

    असम सरकार ने 'प्रवासी निष्कासन कानून' को फिर से लागू करने के बाद एक एसओपी (मानक प्रक्रिया) बनाई है. कई मौकों पर इसे लागू करके घोषित विदेशियों को 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का निर्देश दिया है, जिसके बाद अधिकारी उन्हें इंटरनेशनल बॉर्डर पार भेज देते हैं.

    सीएम सरमा ने कांग्रेस विधायक नूरुल इस्लाम के 'डी-वोटर्स' (संदिग्ध नागरिकता वाले वोटर) से जुड़े एक और सवाल के जवाब में कहा कि राज्य की वोटर लिस्ट में 91,385 डी-वोटर्स हैं.

  11. अभी तक बीबीसी संवाददाता रौनक भैड़ा आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता संदीप राय रात दस बजे तक आप तक ताज़ा ख़बरें पहुंचाएंगे.

    बीबीसी हिन्दी की कुछ अहम ख़बरों को आप उनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते हैं.

  12. अरविंद केजरीवाल 16 जुलाई को सोनम वांगचुक से मिलने जाएंगे

    आम आदमी पार्टी (आप) प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को अपनी पार्टी का समर्थन दिया.

    उन्होंने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की.

    अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि वह गुरुवार (16 जुलाई) को शाम 5 बजे जंतर-मंतर जाएंगे और सोनम वांगचुक को अपना समर्थन देंगे.

    अरविंद केजरीवाल ने कहा, "सोनम वांगचुक कुछ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनकी सेहत खराब हो रही है. वह देश के लिए बहुत क़ीमती हैं. मैं उनसे अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील करता हूं. संघर्ष के लिए और भी तरीके हैं."

    गौरतलब है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर चुके हैं.

  13. अखिलेश यादव ने 17 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक से की ये अपील

    उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से आमरण अनशन समाप्त करने की अपील की है.

    उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक का जीवन देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अनमोल है.

    अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर मंगलवार को एक पोस्ट में लिखा, "सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें. उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है, क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए."

    अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में केंद्र की बीजेपी सरकार पर भी तीखा हमला बोला.

    उन्होंने आरोप लगाया, "जिस सरकार को जगाने के लिए सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर बैठे हैं, वह सिद्धांतहीन, भ्रष्ट और असंवेदनशील है."

    उन्होंने कहा, "भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है. उनके लिए धन ही प्रधान है. वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं. उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है. जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता. सत्याग्रह का महत्व वो क्या जानें जो सत्ताग्रह के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं."

    गौरतलब है कि सोनम वांगचुक के अनशन का मंगलवार को 17वां दिन है. अखिलेश यादव से पहले टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा भी वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर चुकी हैं.

  14. उमर अब्दुल्लाह के बयान पर बीजेपी ने भेजा 100 करोड़ का क़ानूनी नोटिस, जहांगीर अली, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह के ख़िलाफ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 100 करोड़ रुपए के मानहानि मुकदमे की चेतावनी दी है.

    बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सत पॉल शर्मा ने अब्दुल्लाह को एक लीगल नोटिस भेजा है जिसमें उनसे वो आरोप वापस लेने को कहा गया है, जिसमें अब्दुल्लाह ने कहा था कि बीजेपी उनकी सरकार गिराने के लिए विधायकों को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है.

    दरअसल, सीएम अब्दुल्लाह ने 11 जुलाई को श्रीनगर में आयोजित एक रैली में दावा किया था कि बीजेपी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने जम्मू इलाके के कुछ विधायकों से संपर्क किया था.

    अब्दुल्लाह ने आरोप लगाया था कि विधायकों को बीजेपी में शामिल होने के लिए 20-30 करोड़ रुपये, मंत्री पद और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का ऑफ़र दिया गया था.

    इसके बाद जम्मू-कश्मीर बीजेपी की ओर से वकील परिमोक्ष सेठ ने अब्दुल्लाह को कानूनी नोटिस भेजा. तीन पेज के इस नोटिस में अब्दुल्लाह से सात दिनों के भीतर लिखित रूप से बयान वापस लेने और बिना शर्त माफ़ी मांगने को कहा गया है.

    नोटिस में कहा गया है कि ये आरोप पूरी तरह से झूठे, दुर्भावनापूर्ण और बिना किसी तथ्यात्मक आधार के हैं. इसमें कहा गया है कि इन आरोपों से पार्टी की प्रतिष्ठा, सम्मान और छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है.

    बीजेपी ने चेतावनी दी है कि अगर अब्दुल्लाह सात दिनों के भीतर बयान वापस नहीं लेते और माफ़ी नहीं मांगते हैं, तो पार्टी उनके ख़िलाफ़ सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई शुरू करेगी. इसमें 100 करोड़ रुपये के हर्जाने के लिए मानहानि का मुकदमा भी शामिल है.

    वहीं, उमर अब्दुल्लाह ने बीजेपी के कानूनी नोटिस को 'लव लेटर' बताया है. उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सम्मान की बात है और इससे पता चलता है कि बीजेपी उन्हें एक ऐसी राजनीतिक ताकत मानती है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

    अब्दुल्लाह ने बिना नाम लिए बीजेपी के एक नेता पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह पिछले कुछ समय से उनकी पार्टी के ख़िलाफ़ बेबुनियाद और छवि खराब करने वाले बयान दे रहे हैं.

    उन्होंने कहा कि अब तक उन्होंने राजनीतिक तरीके से जवाब दिया है, लेकिन अब वह भी संबंधित नेताओं को कानूनी नोटिस भेजना शुरू करेंगे.

  15. ईरानी हमले में भारतीय क्रू मेंबर की मौत, इंडियन एंबेसी ने क्या कहा

    संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो तेल टैंकरों पर मंगलवार को ईरान ने मिसाइल हमला किया, जिसमें एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई. इस हमले में छह भारतीयों समेत आठ अन्य लोग घायल हुए हैं.

    यूएई स्थित भारतीय दूतावास ने भी इस संबंध में बयान जारी करते हुए भारतीय क्रू मेंबर की मौत पर शोक व्यक्त किया.

    दूतावास ने लिखा, "दो जहाज़ों पर हुए हमलों में एक भारतीय नाविक की दुखद मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं. हम हालात पर लगातार नज़र रखे हुए हैं और घायलों और उनके परिवारों को हर संभव मदद देने के लिए स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं."

    यूएई के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़, उसके टैंकर मोंबासा और अल बहिया को ईरान की ओर से दागी गई दो क्रूज़ मिसाइलों ने निशाना बनाया. हमला होर्मुज़ स्ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में ओमान के समुद्री क्षेत्र में हुआ.

    मंत्रालय ने बताया कि मोंबासा टैंकर पर तैनात एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई. वहीं, आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं. घायलों में चार की हालत गंभीर बताई गई है.

    हमले के कारण दोनों टैंकरों को नुक़सान पहुंचा और उनमें आग लग गई. हालांकि, बाद में आग पर क़ाबू पा लिया गया.

    यूएई रक्षा मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का गंभीर उल्लंघन बताया.

    मंत्रालय ने कहा, "यूएई को अपने क्षेत्र, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार है. किसी भी संभावित ख़तरे का सामना करने के लिए देश पूरी तरह तैयार है."

    दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक बयान जारी कर हमले की ज़िम्मेदारी ली और कहा कि हमले का शिकार हुए जहाज़ नियमों का उल्लंघन कर रहे थे.

  16. भारतीय शेयर बाज़ारों में गिरावट, तेल क़ीमतों में बढ़त का असर

    भारतीय शेयर बाजार 14 जुलाई को गिरावट के साथ खुले. निफ्टी करीब 24,100 के नीचे, जबकि सेंसेक्स 77,200 पर कारोबार कर रहा है.

    बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक सेंसेक्स में साढ़े चार सौ से अधिक अंकों की गिरावट है, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 100 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ काम कर रहा है.

    बाज़ार में टीसीएस, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, भारती एयरटेल, टाटा स्टील और सनफार्मा जैसे शेयरों को छोड़ बाकी शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिखा.

    दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतें भी 2 फ़ीसदी चढ़कर 85 डॉलर के आसपास पहुंच गई हैं.

    गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने बीते दिन ही एलान किया था कि अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी कार्गो जहाज़ों से 20 फ़ीसदी शुल्क वसूलेगा.

  17. डोनाल्ड ट्रंप ने किन देशों का ज़िक्र करते हुए कहा- इन्हें हमारी ज़रूरत है, हमें इनकी नहीं

    अमेरिका के ताज़ा हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.

    इसका ज़िक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाउट हाउस में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका इन देशों को सुरक्षा मुहैया कराएगा लेकिन उसके बदले में उन्हें इसकी क़ीमत चुकानी होगी.

    उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि हमें भुगतान किया जाए, क्योंकि हम दुनिया के एक बेहद समृद्ध हिस्से की सुरक्षा कर रहे हैं. हम इस पर पैसा ख़र्च कर रहे हैं."

    ट्रंप ने कहा, "हम जिन देशों की सुरक्षा कर रहे हैं उनसे हमें पैसा मिलेगा. जैसे सऊदी अरब है, यूएई है, क़तर है, बहरीन है, कुवैत है और दूसरे देश भी हैं. हमें इन देशों की ज़रूरत नहीं है. उन्हें हमारी ज़रूरत है. हमारे पास वेनेज़ुएला को मिलाकर बहुत सारा तेल है."

    इसके इतर, डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी करेगा. साथ ही उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले सभी कार्गो जहाज़ों पर 20 फ़ीसदी शुल्क लगाने की घोषणा की है.

  18. सोनम वांगचुक का अनशन 17वें दिन भी जारी, अभिजीत दीपके ने उनकी हेल्थ को लेकर ये कहा

    पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की मांगों के समर्थन में 17 दिन से अनशन पर हैं.

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया है कि सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है.

    अभिजीत दीपके ने एक्स पर पोस्ट किया, "सोनम सर की भूख हड़ताल का 17वां दिन. उनकी मांसपेशियों का वज़न कम होना शुरू कर दिया है और वे बेहद दर्द में हैं."

    आगे लिखा, "बाकी सभी लोगों की तरह मैंने भी उनसे अपनी भूख हड़ताल ख़त्म करने की गुज़ारिश की. उन्होंने शांत भाव से जवाब दिया कि मुझसे भूख हड़ताल ख़त्म करने के लिए मत कहिए. सरकार से पूछिए कि वह बातचीत तक क्यों नहीं करना चाहती.”

    सोनम वांगचुक के समर्थन में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बयान जारी किया है.

    उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "सोनम सर, आपके अनशन ने न्याय की लड़ाई में देश के युवाओं को एकजुट कर दिया है. आपका लक्ष्य पूरा हो गया है."

    महुआ मोइत्रा ने लिखा, "सरकार को आपकी (सोनम वांगचुक) ज़िंदगी या करोड़ों युवाओं की ज़िंदगी की परवाह नहीं है. लेकिन आपकी ज़िंदगी हमारे लिए मायने रखती है. कृपया अनशन ख़त्म करें और लड़ाई जारी रखें."

    गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते कई दिनों से सीजेपी का धरना प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफ़ा दें.

  19. ट्रंप के 20 फ़ीसदी शुल्क वाले बयान पर ईरान ने कहा- बात तो सही कही, लेकिन...

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले कार्गो जहाज़ों पर 20 फीसदी शुल्क लगाने के बयान के बाद ईरान की प्रतिक्रिया सामने आई है.

    ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने ट्रंप के बयान पर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की बात सही है, लेकिन 20 फ़ीसदी शुल्क बहुत ज्यादा है. उन्होंने कहा कि ईरान उचित और संतुलित शुल्क वसूलेगा.

    अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अमेरिकी राष्ट्रपति बिल्कुल सही हैं. जो भी कार्गो शिप्स को होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित और आसान रास्ता देगा, उसे इस सेवा के लिए शुल्क मिलना चाहिए."

    उन्होंने आगे कहा, "ईरान हमेशा से इस स्ट्रेट का रक्षक रहा है और हमेशा रहेगा. 20 फ़ीसदी शुल्क ज्यादा है, हम उचित शुल्क लेंगे."

    दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ही कहा था कि अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी कार्गो जहाज़ों से 20 फ़ीसदी शुल्क वसूलेगा.

    ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर यह भी दावा किया कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी फिर से लागू करेगा.

  20. हूती विद्रोहियों का दावा- सऊदी अरब के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मिसाइल हमला किया

    यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सोमवार को सऊदी अरब के अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया है.

    हूती संगठन के मुताबिक़, इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया.

    हूती विद्रोहियों ने बताया कि यह कार्रवाई सऊदी अरब की ओर से सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, हूती विद्रोहियों के प्रवक्ता याह्या सारेया ने बयान जारी कर सभी एयरलाइंस को सऊदी हवाई क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि एयरलाइंस को इस चेतावनी को गंभीरता से लेना चाहिए.

    हूती प्रवक्ता ने कहा कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक यमन की राजधानी सना स्थित इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगी पाबंदियां खत्म नहीं हो जातीं.

    वहीं, सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकार के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे को निशाना बनाया, ताकि एक ईरानी विमान को वहां उतरने से रोका जा सके.