ट्रंप के जन्म के आधार पर नागरिकता वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, कितने लोग होंगे प्रभावित?
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने आज एक फै़सला सुनाया है, जिससे देशभर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों पर रोक लगाने की जजों की शक्ति सीमित हो जाएगी.
सारांश
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने आज एक फै़सला सुनाया है, जिससे देशभर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों पर रोक लगाने की जजों की शक्ति सीमित हो जाएगी
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "आरएसएस का नक़ाब फिर से उतर गया."
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने माना है कि हाल ही में अमेरिका और इसराइल की ओर से किए गए हमलों में देश की परमाणु ठिकानों को 'गंभीर और अत्यधिक' नुक़सान पहुंचा है
लाइव कवरेज
अश्वनी पासवान और इफ़्तेख़ार अली
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ट्रंप के जन्म के आधार पर नागरिकता वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, कितने लोग होंगे प्रभावित?
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इमेज कैप्शन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने आज एक फै़सला सुनाया है, जिससे देशभर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों पर रोक लगाने की जजों की शक्ति सीमित हो जाएगी.
यह मामला राष्ट्रपति ट्रंप के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें बिना दस्तावेज़ वाले आप्रवासियों के बच्चों के लिए जन्म के आधार पर नागरिकता के संवैधानिक अधिकार को ख़त्म करने को कहा गया था.
आज के फैसले के मुताबिक़, जन्म के आधार पर नागरिकता से संबंधित ट्रंप का आदेश आंशिक रूप से 30 दिनों में लागू हो जाएगा.
हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप का आदेश सभी के लिए जन्म के आधार पर नागरिकता ख़त्म करने का नहीं है, बल्कि यह सिर्फ़ उन बच्चों पर लागू होता है जो अमेरिका में बिना दस्तावेज़ वाले आप्रवासियों या अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के यहां पैदा हुए हैं.
प्यू रिसर्च के मुताबिक़, 2016 में अमेरिका में लगभग 2.5 लाख बच्चों का जन्म ऐसे माता-पिता से हुआ था जो बिना दस्तावेज़ वाले आप्रवासी थे. यह संख्या साल 2007 की तुलना में 36 फ़ीसदी कम थी.
प्यू रिसर्च ने पाया कि 2022 तक यह आंकड़ा बढ़कर 12 लाख हो गया.
माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टिट्यूट ने पाया, चूंकि वे बच्चे आगे चलकर खुद भी संतान पैदा कर सकते हैं, इसलिए जन्म के आधार पर नागरिकता को ख़त्म करने का असर यह हो सकता है कि साल 2050 तक अमेरिका में बिना दस्तावेज़ वाले आप्रवासियों की संख्या बढ़कर लगभग 47 लाख हो जाए.
एनबीसी के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा था कि उन्हें लगता है कि अनधिकृत आप्रवासियों के बच्चों को उनके माता-पिता के साथ निर्वासित किया जाना चाहिए, भले ही उनका जन्म अमेरिका में ही क्यों न हुआ हो.
ट्रंप ने पिछले दिसंबर में कहा था, "मैं परिवारों को तोड़ना नहीं चाहता. इसलिए परिवार को टूटने से बचाने का एकमात्र तरीक़ा यह है कि आप उन्हें एक साथ रखें और उन सभी को वापस भेज दें."
राष्ट्रपति ट्रंप के आदेशों पर जजों की शक्तियों को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फ़ैसला
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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप समय-समय पर अमेरिका आने वाले आप्रवासियों के लिए कड़े विचार ज़ाहिर करते रहे हैं
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने आज एक फै़सला सुनाया है, जिससे देशभर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेशों पर रोक लगाने की जजों की शक्ति सीमित हो जाएगी.
यह मामला राष्ट्रपति ट्रंप के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें बिना दस्तावेज़ वाले आप्रवासियों के बच्चों के लिए जन्म के आधार पर नागरिकता के संवैधानिक अधिकार को ख़त्म करने को कहा गया था.
आज के फैसले के मुताबिक़, जन्म के आधार पर नागरिकता से संबंधित ट्रंप का आदेश आंशिक रूप से 30 दिनों में लागू हो जाएगा.
अमेरिका में जन्म लेते ही बच्चों को वहां की नागरिकता मिल जाती है. हालांकि, राष्ट्रपति बनते ही ट्रंप ने इसे रोकने से जुड़े एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए थे.
कई अदालतों की ओर से ट्रंप के आदेश को निलंबित करने के बाद, उनके प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसमें तर्क दिया गया कि निचले जजों को राष्ट्रपति के कार्यों को रोकने का अधिकार नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट में अभी कंज़र्वेटिव बहुमत है और ट्रंप ने नौ में से तीन न्यायाधीशों की नियुक्ति की है.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा- 'आपातकाल में जिस धर्मनिरपेक्ष शब्द को जोड़ा गया उसे हटाया जाए'
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इमेज कैप्शन, शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि धर्मनिरपेक्ष हमारी संस्कृति का मूल नहीं है
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा है कि आपातकाल में जिस धर्मनिरपेक्ष शब्द को जोड़ा गया उसको हटाया जाए.
उनका ये बयान आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों पर दिए गए बयान के बाद आया है.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, "सर्वधर्म समभाव ये भारतीय संस्कृति का मूल है. धर्मनिरपेक्ष हमारी संस्कृति का मूल नहीं है."
उन्होंने कहा, "इसलिए इस पर ज़रूर विचार होना चाहिए कि आपातकाल में जिस धर्मनिरपेक्ष शब्द को जोड़ा गया उसको हटाया जाए."
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "अपने जैसा सबको मानो ये भारत का मूल विचार है, इसलिए समाजवाद की ज़रूरत नहीं है."
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश को इस (दोनों शब्दों) पर निश्चित तौर पर विचार करना चाहिए.
दिनभर- पूरा दिन, पूरी ख़बर मानसी दाश और संदीप राय से
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राहुल गांधी ने कहा- आरएसएस-बीजेपी को संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए
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इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने संविधान को लेकर बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा है
आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों पर दिए गए बयान को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "आरएसएस का नक़ाब फिर से उतर गया."
उन्होंने कहा, "संविधान इन्हें चुभता है क्योंकि वो समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है."
"आरएसएस-बीजेपी को संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए. ये बहुजनों और ग़रीबों से उनके अधिकार छीनकर उन्हें दोबारा ग़ुलाम बनाना चाहते हैं."
कांग्रेस सांसद ने कहा, "संविधान जैसा ताक़तवर हथियार उनसे छीनना इनका असली एजेंडा है."
उन्होंने कहा, "आरएसएस ये सपना देखना बंद करे. हम उन्हें कभी सफल नहीं होने देंगे. हर देशभक्त भारतीय आख़िरी दम तक संविधान की रक्षा करेगा."
दत्तात्रेय होसबालेने गुरुवार को कहा था कि ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया था.
उन्होंने कहा, "आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में दो शब्द जोड़े गए. ये दो शब्द 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' हैं. ये प्रस्तावना में पहले नहीं थे."
होसबाले ने कहा, "इन्हें प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए."
ईरान के विदेश मंत्री ने परमाणु ठिकानों को गंभीर नुक़सान होने की बात मानी
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इमेज कैप्शन, अब्बास अराग़ची ने माना है कि ईरान के परमाणु ठिकानों को इसराइली और अमेरिकी हमलों से नुक़सान पहुंचा है
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने माना है कि हाल ही में अमेरिका और इसराइल की ओर से किए गए हमलों में देश की परमाणु ठिकानों को 'गंभीर और अत्यधिक' नुक़सान पहुंचा है.
अब्बास अराग़ची ने एक सरकारी मीडिया से कहा कि ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन की ओर से क्षति का आकलन किया जा रहा है.
विदेश मंत्री के इस बयान से कुछ घंटे पहले ही ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने कहा था कि अमेरिका को उनके देश के परमाणु ठिकानों पर हमला करने से 'कुछ हासिल नहीं हुआ' है.
सर्वोच्च नेता ने कहा कि ट्रंप ने बमों के प्रभाव को 'बढ़ा-चढ़ाकर' बताया है. साथ ही उन्होंने अमेरिका और इसराइल पर जीत का भी दावा किया.
लेकिन अराग़ची की टिप्पणी एक अलग प्रभाव पैदा करती है.
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने की कोई योजना नहीं है.
जब इसराइल ने 13 जून को ईरान पर हमले शुरू किए तो ईरान ने छठे दौर की वार्ता रद्द कर दी थी.
बिहार में मतदाताओं की सूची से जुड़ी चुनाव आयोग की घोषणा के बाद तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल
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इमेज कैप्शन, तेजस्वी यादव ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर आरोप लगाया है कि वह चाहते हैं कि ग़रीबों का नाम वोटर लिस्ट से कट जाए
चुनाव आयोग की ओर से स्पेशल इंटेसिव रिविज़न ऑफ़ इलेक्टोरल रोल्स की घोषणा के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है.
उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग ने अचानक से विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की है, इसका ये मतलब है कि अभी जो फ़रवरी में वोटर लिस्ट जारी हुई थी, अब पूरे आठ करोड़ बिहारियों का वोटर लिस्ट साइड कर दिया गया है. अब नए सिरे से वोटर्स बनाए जाएंगे. "
चुनाव आयोग पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "चुनाव से ठीक दो महीने पहले आप ये काम क्यों कर रहे हैं. क्या ये संभव है कि आठ करोड़ लोगों का 25 दिन के अंदर आप वोटर्स लिस्ट बना लें."
तेजस्वी ने नीतीश कुमार का नाम लेते हुए दावा किया कि वह चाहते हैं कि ग़रीबों का नाम वोटर लिस्ट से कट जाए.
उन्होंने कहा, "इसमें साफ़ साजिश की बू आती है. और इस साजिश में नीतीश कुमार और पीएम मोदी जी का बड़ा योगदान है, क्योंकि ये लोग डरे हुए हैं."
दरअसल, चुनाव आयोग ने मंगलवार को बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू करने से जुड़ी घोषणा की थी.
आयोग के मुताबिक़ इस दौरान घर-घर जाकर जांच की जाएगी ताकि सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सके.
लेकिन विपक्षी पार्टी ये दावा कर रही है कि वह ऐसे दास्तावेज मांगेंगे जो ज़रूरी नहीं कि आपके पास मौजूद हो.
इसराइली हमलों में ईरान के एक और परमाणु वैज्ञानिक की मौत की पुष्टि
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ईरान की विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने इसराइली हमलों में एक और 'परमाणु वैज्ञानिक' की मौत के बारे में जानकारी दी है.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, विश्वविद्यालय के अनुसार ने बताया है कि सुलेमानी एक केमिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट और एक 'परमाणु वैज्ञानिक' थे, जो हाल के दिनों में इसराइली हमलों में मारे गए.
विश्वविद्यालय ने बताया कि इसराइली हमलों में उनकी मौत किस जगह हुई इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.
ईरान के अलग-अलग हिस्सों पर हमलों में इसराइल ने परमाणु और सैन्य ठिकानों के अलावा कई परमाणु वैज्ञानिकों और सैन्य कमांडरों को भी निशाना बनाया है.
इसराइल और ईरान के बीच 12 दिनों की जंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम की घोषणा के साथ ख़त्म हो गई.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से एस जयशंकर ने की बात, क्या बताया?
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इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (फ़ाइल फ़ोटो)
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से बात की है. उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दी.
हाल ही में ईरान और इसराइल के बीच 12 दिनों तक चला युद्ध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद समाप्त हुआ.
इस दौरान भारत सरकार ने ईरान में मौजूद कई भारतीय नागरिकों को वहां से निकाला.
एस जयशंकर ने एक्स पर लिखा, "आज (शुक्रवार) दोपहर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची से बात हुई."
उन्होंने लिखा, "मौजूदा जटिल हालात पर ईरान का नज़रिया और सोच साझा करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया. साथ ही, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में मदद करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया."
टेलर स्विफ्ट के कॉन्सर्ट पर हमले की साज़िश रचने का आरोप सीरियाई नागरिक पर लगा
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इमेज कैप्शन, सिंगर टेलर स्विफ्ट (फ़ाइल फ़ोटो)
एक युवा सीरियाई नागरिक पर जर्मन अधिकारियों ने विदेशी आतंकवादी संगठन का समर्थन करने का आरोप लगाया है. यह आरोप पिछले साल अगस्त में ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में टेलर स्विफ्ट के कॉन्सर्ट पर हमले की नाकाम साजिश से जुड़ा है.
मोहम्मद ए पर आरोप है कि वह जिहादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) की विचारधारा का समर्थन करता है और एक अन्य संदिग्ध की हमले की तैयारी में मदद कर रहा था.
मोहम्मद ए को किशोर बताया गया है और अभी भी उनकी गिरफ़्तारी नहीं हुई है.
पिछले साल विएना के अर्न्स्ट हैप्पल स्टेडियम में टेलर स्विफ्ट के तीनों हाउसफुल शो से ठीक पहले आयोजकों ने कॉन्सर्ट रद्द कर दिए थे, जिससे उनकी 'एरज़ टूर' के दौरान लाखों फैंस को भारी निराशा हुई थी.
अधिकारियों ने उस समय कई संदिग्धों को गिरफ़्तार किया था और कहा था कि वे आईएस और अल-क़ायदा से प्रेरित लगते हैं.
ट्रंप के ईरान पर हमले की तुलना हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले से करने का जापान में विरोध
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इमेज कैप्शन, जापान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिस पर परमाणु हमला हुआ है
ईरान पर हाल ही में किए गए हमलों की तुलना हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों से करने को लेकर जापान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है.
ट्रंप ने बुधवार को पत्रकारों से कहा था, "उस (ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी) हमले ने युद्ध ख़त्म कर दिया. मैं हिरोशिमा और नागासाकी का उदाहरण नहीं देना चाहता, लेकिन वह मूल रूप से एक जैसा था."
अगस्त 1945 में जब अमेरिका ने जापान के दो दक्षिणी शहरों पर परमाणु बम गिराए थे, तब लगभग एक लाख 40 हज़ार लोग मारे गए थे.
इस हमले के बाद बचे हुए लोग आज भी मनोवैज्ञानिक आघात और कैंसर के बढ़ते जोखिम के साथ जी रहे हैं.
नागासाकी के मेयर शिरो सुज़ुकी ने कहा, "अगर ट्रंप की टिप्पणी परमाणु बम गिराए जाने को उचित ठहराती है, तो यह हमारे लिए अत्यंत खेदजनक है."
परमाणु बम हमले में बचे लोगों ने गुरुवार को हिरोशिमा में विरोध प्रदर्शन किया और ट्रंप से अपना बयान वापस लेने की मांग की.
कर्नाटक: एक बाघिन और चार शावकों की मौत, जांच के लिए टीम गठित, इमरान क़ुरैशी, बीबीसी हिन्दी के लिए, बेंगलुरु से
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इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर
कर्नाटक के चामराजनगर ज़िले के माले महादेवेश्वर वन्यजीव अभयारण्य में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत से राज्य के वन विभाग के शीर्ष अधिकारी सकते में हैं.
बताया जा रहा है कि इनकी मौत किसी मरे हुए मवेशी का ज़हर मिला मांस खाने से हुई है. वन विभाग की गश्ती टीम को गुरुवार को नियमित जांच के दौरान ये मृत बाघ जंगल में मिले.
असामान्य परिस्थितियों में हुई इन मौतों को लेकर अधिकारियों और वन्यजीव कार्यकर्ताओं को शक है कि पहले बाघिन ने मवेशी को मारा होगा और बाद में किसी ने उसके शव में ज़हर मिला दिया होगा.
राज्य के वन मंत्री ईश्वर खंडरे ने इस मामले की जांच के लिए वरिष्ठ वन अधिकारियों और स्वतंत्र वन्यजीव विशेषज्ञ संजय गुबी की टीम गठित करने का आदेश दिया है.
मृत बाघों के मिलने के तुरंत बाद पशु चिकित्सकों ने उनका पोस्टमॉर्टम किया और खून, पेट व ऊतक (टिशू) के नमूने इकट्ठा किए, जिन्हें विषविज्ञान और डीएनए जांच के लिए भेजा गया है.
जहां ये बाघ मिले हैं, उस क्षेत्र के अधिकतर ग्रामीण अपने मवेशियों को चराने के लिए जंगल में छोड़ देते हैं. इस इलाके में बाघों और तेंदुओं द्वारा मवेशियों के मारे जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं.
वन्यजीव कार्यकर्ता जोसेफ हूवर ने बीबीसी हिंदी से कहा, "आशंका है कि अपने मवेशी के मारे जाने से नाराज़ किसी व्यक्ति ने उसके शव में ज़हर मिला दिया हो."
हूवर के मुताबिक, तमिलनाडु के किसान अक्सर अपने मवेशियों को पालने के लिए कर्नाटक के किसानों के पास छोड़ते हैं.
उन्होंने बताया, "समझौता यह होता है कि स्थानीय किसान गोबर इकट्ठा करके उसे कर्नाटक-केरल सीमा के पार, केरल के किसानों को बेचते हैं."
563 बाघों के साथ कर्नाटक, मध्य प्रदेश के बाद देश में बाघों की संख्या के लिहाज से दूसरे स्थान पर है.
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दत्तात्रेय होसबाले के संविधान पर दिए गए बयान पर बीजेपी सांसद ने कहा- सही बोला है
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इमेज कैप्शन, प्रवीण खंडेलवाल
आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों पर दिए गए बयान को लेकर बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने प्रतिक्रिया दी.
प्रवीण खंडेलवाल ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से कहा, "दत्तात्रेय होसबाले ने जो कहा है, वो बिल्कुल तर्कसम्मत है. जब संविधान निर्माताओं ने जो संविधान बनाया था, उसमें एक-एक शब्द का चयन भारत को स्वर्णिम राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से संविधान में रखा था."
उन्होंने कहा, "इसके बाद कुछ लोगों ने आपातकाल में अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए शब्दों के साथ छेड़छाड़ की. कुछ शब्द वो जोड़ दिए, जिनके कोई मायने नहीं है."
दत्तात्रेय होसबालेने गुरुवार को कहा था कि ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया था.
उन्होंने कहा, "आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में दो शब्द जोड़े गए. ये दो शब्द 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' हैं. ये प्रस्तावना में पहले नहीं थे."
होसबाले ने कहा, "इन्हें प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए."
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, "बाबा साहेब ने जो संविधान बनाया, उसकी प्रस्तावना में ये दो शब्द नहीं थे. आपातकाल के दौरान जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, संसद काम नहीं कर रही थी, न्यायपालिका पंगु हो गई थी, तब ये शब्द जोड़े गए."
राजनाथ सिंह के एससीओ समिट में दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करने को लेकर विदेश मंत्री ने क्या कहा?
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की मीटिंग के साझा बयान पर हस्ताक्षर करने से मना करने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी है.
एस जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा है कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का जब गठन हुआ तो इसका उद्देश्य आतंकवाद से लड़ना था. राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रियों की बैठक के लिए गए और स्टेटमेंट पर चर्चा हुई तो एक देश ने कहा कि वो इसमें इसका (आतंकवाद) उल्लेख नहीं चाहते.
उन्होंने बताया है कि राजनाथ सिंह का कहना था कि इस संगठन का मुख्य उद्देश्य ही आतंकवाद से लड़ना है और आतंकवाद का ज़िक्र नहीं है तो हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे.
मामले पर गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा था, "हमारी आतंकवाद को लेकर कुछ चिंताए थीं और हम चाहते थे कि वे उस दस्तावेज में जाएं. लेकिन एक देश को उस पर आपत्ति थी. जिसकी वजह से स्टेटमेंट फाइनल नहीं हुआ."
दत्तात्रेय होसबाले के संविधान पर दिए गए बयान पर एस जयशंकर ने कहा- मेरा कमेंट करना उचित नहीं
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आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों पर दिए गए बयान को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी है.
एस जयशंकर से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दत्तात्रेय होसबालेके बयान पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "मैं सरकार का मंत्री हूं तो ऐसे विषय पर मेरा कुछ कमेंट करना उचित नहीं है."
दत्तात्रेय होसबालेने गुरुवार को कहा था कि ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया था.
उन्होंने कहा, "आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में दो शब्द जोड़े गए. ये दो शब्द 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' हैं. ये प्रस्तावना में पहले नहीं थे."
होसबाले ने कहा, "इन्हें प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए."
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, "बाबा साहेब ने जो संविधान बनाया, उसकी प्रस्तावना में ये दो शब्द नहीं थे. आपातकाल के दौरान जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, संसद काम नहीं कर रही थी, न्यायपालिका पंगु हो गई थी, तब ये शब्द जोड़े गए."
संविधान पर आरएसएस सरकार्यवाह के बयान को लेकर कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, प्रमोद तिवारी
आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों पर दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है.
प्रमोद तिवारीने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से कहा, "दिल की बात जुबान पर आ गई. बीजेपी और आरएसएस का छुपा हुआ एजेंडा सामने आ गया."
दत्तात्रेय होसबालेने गुरुवार को कहा था कि ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया था.
उन्होंने कहा, "आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में दो शब्द जोड़े गए. ये दो शब्द 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' हैं. ये प्रस्तावना में पहले नहीं थे."
होसबाले ने कहा, "इन्हें प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए."
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, "बाबा साहेब ने जो संविधान बनाया, उसकी प्रस्तावना में ये दो शब्द नहीं थे. आपातकाल के दौरान जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, संसद काम नहीं कर रही थी, न्यायपालिका पंगु हो गई थी, तब ये शब्द जोड़े गए."
राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री से की मुलाक़ात, क्या चर्चा हुई?
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इमेज कैप्शन, राजनाथ सिंह के साथ चीन के रक्षा मंत्री
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन से क्विंगदाओ में मुलाक़ात की.
राजनाथ सिंह ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी. उन्होंने बताया कि चीन के रक्षा मंत्री से उनकी द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.
राजनाथ सिंह ने कहा है, "क़रीब छह साल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने पर मैंने खुशी जाहिर की."
उन्होंने कहा कि यह दोनों पक्षों (भारत और चीन) की जिम्मेदारी है कि इस सकारात्मक गति को बनाए रखें.
राजनाथ सिंह चीन के रक्षा मंत्री से ऐसे समय में मिले हैं जब उन्होंने चीन के क्विंगदाओ में हुई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की मीटिंग के साझा बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया.
इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया था, "हमारी आतंकवाद को लेकर कुछ चिंताए थीं और हम चाहते थे कि वे उस दस्तावेज में जाएं. लेकिन एक देश को उस पर आपत्ति थी. जिसकी वजह से स्टेटमेंट फाइनल नहीं हुआ."
संविधान पर आरएसएस सरकार्यवाह के बयान को लेकर कांग्रेस ने दी ये प्रतिक्रिया
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आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्दों पर दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है.
कांग्रेस ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी की सोच ही संविधान विरोधी है.
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, "ये बाबा साहेब के संविधान को ख़त्म करने की वो साजिश है, जो आरएसएस- बीजेपी हमेशा से रचती आई है."
कांग्रेस ने कहा, "लोकसभा चुनाव में तो बीजेपी के नेता खुलकर कह रहे थे कि हमें संविधान बदलने के लिए संसद में 400 से ज्यादा सीटें चाहिए. अब एक बार फिर वे अपनी साजिशों में लग गए हैं, लेकिन कांग्रेस किसी कीमत पर इनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी."
दत्तात्रेय होसबालेने गुरुवार को कहा था कि समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया था.
उन्होंने कहा, "आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में दो शब्द जोड़े गए. ये दो शब्द 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' हैं. ये प्रस्तावना में पहले नहीं थे."
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, "बाबा साहेब ने जो संविधान बनाया, उसकी प्रस्तावना में ये दो शब्द नहीं थे. आपातकाल के दौरान जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, संसद काम नहीं कर रही थी, न्यायपालिका पंगु हो गई थी, तब ये शब्द जोड़े गए."
होसबाले ने कहा, "इन्हें प्रस्तावना में रहना चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया जाना चाहिए."