कर्नाटक के बेंगलुरु से 80 किलोमीटर दूर मांड्या ज़िले के मड्डूर में रविवार शाम गणेश विसर्जन शोभायात्रा पर पथराव के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद वहां कर्फ़्यू लागू कर दिया गया है.
सोमवार सुबह पुलिस ने उन लोगों पर लाठीचार्ज किया जो भगवा झंडे लेकर मस्जिद के पास पथराव का विरोध कर रहे थे. रविवार हुए पथराव में कम से कम आठ लोग घायल हुए हैं.
रविवार शाम की हिंसा के कारण इलाक़े में काफ़ी तनाव की स्थिति बनी हुई है. इससे पहले भी सितंबर 2024 में मांड्या ज़िले के मड्डूर से 63 किलोमीटर दूर नागमंगला तालुक में भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में पत्रकारों को बताया कि रविवार रात की हिंसा में 21 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
उन्होंने कहा, "दोषी चाहे हिंदू हों या मुस्लिम, किसी को बख्शा नहीं जाएगा. राज्य के किसी और हिस्से में ऐसा कोई मामला नहीं हुआ है. अगर पुलिस की भी ग़लती साबित हुई तो हम उन्हें भी नहीं छोड़ेंगे."
कर्नाटक के डीजीपी एम.ए. सलीम ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "मैंने उन अधिकारियों को भी भेजा है जिन्होंने पहले मांड्या ज़िले में काम किया है, ताकि लोग हिंसा से दूर रहें और शांति स्थापित की जा सके."
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ (जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर हम से बात की है), जब रात क़रीब 8 बजे गणेश विसर्जन शोभायात्रा एक मस्जिद के पास से गुज़री तो आसपास की इमारतों से कुछ उपद्रवियों ने कथित तौर पर पथराव किया.
इसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हो गई. कुछ लोग पास की दूसरी मस्जिद के सामने भी विरोध करने लगे. पुलिस तुरंत मौके़ पर पहुंची और स्थिति नियंत्रित की.
वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों समुदायों के लोगों से बातचीत की और शांति बनाए रखने की अपील की है.
हालांकि सोमवार सुबह फिर बड़ी संख्या में लोग भगवा शॉल और झंडों के साथ मड्डूर में इकट्ठा हो गए. जिसको देखते हुए पुलिस बल भी बढ़ा दिया गया और वरिष्ठ अधिकारी भी वहां पहुंचे हैं.
गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा कि 'सब कुछ नियंत्रण में है.'
वहीं, विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि 'सरकार पत्थरबाज़ों को संरक्षण दे रही है और पुलिस हिंसा का विरोध करने वालों पर ही लाठीचार्ज कर रही है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को हिंदुओं से माफ़ी मांगनी चाहिए."