मध्य प्रदेश के खंडवा ज़िले में एक आदिवासी महिला के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया है. इस घटना के बाद महिला की मौत हो गई.
पुलिस का कहना है कि उन्होंने एफ़आईआर दर्ज कर दोनों अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया है. रविवार को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.
इस घटना पर कांग्रेस ने राज्य में क़ानून-व्यवस्था को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं.
वहीं, बीजेपी का कहना है कि राज्य सरकार हमेशा अपराधियों के ख़िलाफ़ सख़्ती से कार्रवाई करती है.
कांग्रेस ने मांग की है कि महिला के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 25 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए.
खंडवा के एएसपी राजेश रघुवंशी ने कहा, "24 मई शनिवार को खालवा पुलिस थाने पर मृतका के बेटे ने उनकी मां के साथ ग़लत काम किए जाने और उसके बाद मां की मौत हो जाने की जानकारी दी थी."
"इस सूचना पर थाना प्रभारी खालवा जगदीश सिंदिया और चौकी प्रभारी रोशनी सुशा परते पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे. घटनास्थल पर पीड़िता के बेटे समेत अन्य लोगों से पूछताछ की गई."
पुलिस ने बताया कि 23 मई शुक्रवार को गांव में एक शादी का कार्यक्रम था. इस कार्यक्रम के बाद महिला, गांव की ही एक दूसरी महिला को उनके घर छोड़ने गई थी. लेकिन वह रात में लौटकर नहीं आई.
पुलिस ने बताया, "शनिवार सुबह करीब 6 से 7 बजे के दौरान अभियुक्तों में से एक हरि कोरकू की मां ने महिला के घर संदेश भिजवाया कि उनकी मां उसके घर में ही पीछे की तरफ सोई हुई है. तब दोनों भाइयों ने जाकर देखा तो महिला खून से लथपथ पड़ी थी."
खंडवा के एएसपी राजेश रघुवंशी ने कहा, "महिला के बेटों का कहना था कि उनकी मां ने उन्हें बताया कि सुनील कोरकू और हरि कोरकू ने उनके साथ ज़बरदस्ती की है."
महिला के बेटों के बयान के आधार पर दोनों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू कर दी गई.
खंडवा के पुलिस अधीक्षक मनोज राय ने कहा, "इस मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हो गई है. महिला के प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर चोटों के निशान हैं."
'अस्पताल ले जाने के लिए नहीं मिली एम्बुलेंस'
महिला के एक रिश्तेदार ने आरोप लगाया है कि उन्हें महिला को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक नहीं मिली. इस कारण उन्हें महिला को ट्रैक्टर से ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया.
रिश्तेदारों का कहना है कि इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए खंडवा के जिला अस्पताल ले जाने के लिए भी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई. इसके बाद ट्रैक्टर चालक को चार हज़ार रुपये देकर शव ले जाया गया.
महिला के रिश्तेदार का आरोप है कि अगर समय से एम्बुलेंस और इलाज मिल गया होता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी.
इस आरोप पर खंडवा के कलेक्टर ऋषभ गुप्ता कहते हैं कि उन्हें अभी इसकी जानकारी नहीं है. वो इस बारे में पता करेंगे.
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता सीमा प्रकाश कहती हैं कि इस तरह की घटनाएं शर्मनाक हैं और एम्बुलेंस का नहीं मिलना सिस्टम की एक बड़ी विफलता को दिखाता है.
वो बताती हैं, "खालवा ब्लॉक में कोरकू आबादी दो लाख बारह हज़ार है. यह समुदाय अति पिछड़े आदिवासी कोरकू समूह में आता है."
राजनीतिक बयानबाज़ी भी जारी
यह मामला खंडवा ज़िले की हरसूद विधानसभा का है. यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है. यहां से विजय शाह विधायक हैं.
विजय शाह हाल ही में कर्नल सोफ़िया क़ुरैशी को लेकर की गई टिप्पणी और उसके बाद माफ़ी मांगने के चलते सुर्खियों में रहे हैं.
राज्य की विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था चरमराई हुई है.
मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने बताया कि कांग्रेस की तीन महिला सदस्यों का दल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा है.
उन्होंने कहा कि आदिवासी महिला के साथ जो हुआ, उसकी जितनी निंदा की जाए कम है.
उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और 25 लाख रुपये मुआवज़ा देने की मांग की है.
वहीं, मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता आशीष अग्रवाल ने कहा, "इस मामले में सभी आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. मध्य प्रदेश की सख़्त और संवेदनशील मोहन यादव सरकार ने ऐसे अपराधियों से निपटने में हमेशा सख़्ती दिखाई है."
"रही बात कांग्रेस के सवाल की, तो उसे देशभर में इंडिया गठबंधन और कांग्रेस शासित राज्यों में हो रहे जघन्य अपराधों को लेकर भी प्रतिनिधिमंडल बनाना चाहिए. कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में महिलाओं पर हुए अत्याचारों पर कांग्रेस तब क्यों कुछ नहीं कहती थी."