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इसराइल का दावा- हिज़बुल्लाह के आधे से अधिक कमांडर मारे गए

इसराइल के रक्षा मंत्री ने दावा किया है कि इसराइली सैन्य बलों ने हाल के महीनों में दक्षिणी लेबनान में सक्रिय हिज़बुल्लाह के आधे से अधिक कमांडरों को मार दिया है.

सारांश

  • कई देशों के बाद अब जर्मनी ने भी ग़ज़ा के लिए मदद जारी की, इसराइल के आरोप नकारे
  • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि अगले सप्ताह अमेरिकी हथियार यूक्रेन पहुंच जाएंगे
  • सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती के बाद पतंजलि आयुर्वेद ने आज फिर अख़बारों में छपवाए माफ़ीनामे
  • अमेरिका की सीनेट ने यूक्रेन, इसराइल और ताइवान को 95 अरब डॉलर (7915 अरब रुपये) की मदद वाले पैकेज को मंज़ूरी दे दी है
  • सैम पित्रोदा के इनहेरिटेंस टैक्स वाले बयान से कांग्रेस पार्टी ने किनारा किया, कहा- ये हमारे विचार नहीं
  • मुख्तार अंसारी की मौत के बाद आई विसरा रिपोर्ट पर उनके भाई और समाजवादी पार्टी नेता अफ़ज़ाल अंसारी ने सवाल उठाए हैं
  • पीएम मोदी को प्रियंका गांधी का जवाब, कहा- मंगलसूत्र का महत्व समझते तो ऐसी अनैतिक बातें ना करते

लाइव कवरेज

  1. ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के पाकिस्तान दौरे पर अमेरिका ने दी ये चेतावनी

    ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के पाकिस्तान दौरे के पर दोनों देशों के बीच हुए कारोबारी सौदों को लेकर अमेरिका ने प्रतिक्रिया दी है.

    अमेरिका ने पाकिस्तान को ईरान के साथ व्यापार सौदों के मद्देनज़र 'प्रतिबंधों के संभावित जोखिम' के बारे में चेतावनी दी और कहा है कि वह ईरान पर कार्रवाई जारी रखेगा.

    पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के सप्लायर्स पर प्रतिबंध लगाने पर ज़ोर देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के डिप्टी प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा, "हम बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियारों की खरीद से जुड़ी गतिविधियों को बाधित करना और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करना जारी रखेंगे, चाहे ये कहीं भी हो."

    "मुझे बस इतना कहना है कि हम ईरान के साथ व्यापारिक सौदों पर विचार करने वाले किसी भी देश को प्रतिबंधों के संभावित जोखिम के बारे में सतर्क रहने की सलाह देते हैं. लेकिन अंततः पाकिस्तान की सरकार अपनी विदेश नीति से जुड़ी बात रख सकती है."

    ईरान के राष्ट्रपति रईसी पाकिस्तान के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच आठ द्विपक्षीय सौदों पर सहमति बनी है.

    अमेरिकी प्रवक्ता ने इस संभावना की ओर भी इशारा किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ईरान की स्थिति के कारण प्रतिबंधों से ये संबंध खतरे में पड़ सकते हैं.

  2. विदेश मंत्री एस जयशंकर का दावा- मुंबई हमले के बाद यूपीए सरकार ने जवाब न देने का निर्णय किया

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साल 2008 में हुए मुंबई हमलों को लेकर तत्कालीन यूपीए सरकार को घेरा है.

    जयशंकर ने कहा कि 'यूपीए सरकार ने मुंबई आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई इस तर्क के आधार पर नहीं की क्योंकि पाकिस्तान पर हमला करना, कुछ न करने से ज़्यादा महंगा पड़ता.'

    विदेश मंत्री ने 'फॉरेन पॉलिसी द इंडिया वे: फ्रॉम डिफिडेंस टू कॉन्फ़िडेंस' विषय पर आयोजित एक चर्चा के दौरान ये बातें कही.

    इस दौरान उन्होंने यूपीए सरकार का ज़िक्र करते हुए कहा कि 'रक्षात्मक दौर में आतंकवाद स्वीकार कर लिया गया था.'

    जयशंकर ने कहा, "मुंबई (हमले) के बाद, पिछली यूपीए सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने लिखा कि 'हम बैठे, हमने बहस की. हमने सभी विकल्पों पर विचार किया. फिर हमने कुछ नहीं करने का फ़ैसला किया.' ये महसूस किया गया कि पाकिस्तान पर हमला करने की कीमत, उस पर हमला न करने से कहीं अधिक है."

    जयशंकर ने कहा कि 'अब फ़ैसला करने का अधिकार मैं आप पर छोड़ता हूं.'

    उन्होंने कहा कि भारत के सामने सीमाओं पर कुछ चुनौतियां हैं और उनसे बचाव का तरीका केवल सार्वजनिक तौर पर अपनी छवि बनाना नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे का निर्माण करना, सेना की मदद करना और एक ऐसा सिस्टम बनाना है जो सीमा पर ख़तरे की स्थिति में जवाब दे सके.

  3. ग़ज़ा के अस्पतालों में मिली सामूहिक क़ब्रों से यूएन के मानवाधिकार प्रमुख 'भयभीत'

    संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने कहा है कि वह इसराइली हमलों के बाद ग़ज़ा के नासेर और अल-शिफ़ा अस्पतालों में हुई तबाही और यहां सामूहिक क़ब्रें पाए जाने की ख़बरों से 'भयभीत' हैं.

    वोल्कर तुर्क ने इन मौतों की स्वतंत्र जाँच कराए जाने की मांग की है.

    फ़लस्तीनी अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने नासेर अस्पताल में मिली सामूहिक क़ब्रों से क़रीब 300 लोगों के शव बाहर निकाले हैं. हालांकि, ये स्पष्ट नहीं है कि इतने लोगों की मौत कब हुई या फिर इन्हें कब दफ़नाया गया.

    इसराइल की सेना ने कहा है कि ये दावा कि इन शवों को उन्होंने दफ़नाया है, पूरी तरह 'बेबुनियाद' हैं.

    लेकिन उसने ये ज़रूर कहा है कि फ़रवरी में ख़ान यूनिस शहर के अस्पताल में अपने दो सप्ताह के अभियान के दौरान, इसराइली सैनिकों ने फ़लस्तीनियों के दफ़नाए शवों की 'उन जगहों पर जाँच की', जहां बंधकों को रखने से जुड़े ख़ुफ़िया इनपुट मिले थे.

    अब रिहा हो चुके 10 बंधकों ने कहा कि उन्हें क़ैद के दौरान लंबे समय तक नासेर अस्पताल में रखा गया.

    नासेर अस्पताल में इसराइली कार्रवाई से पहले वहां के कर्मचारियों ने कहा था कि वे अस्पताल के परिसर में ही शव दफ़नाने को मजबूर थे क्योंकि बाहर जारी जंग की वजह से क़ब्रिस्तान तक पहुंचना मुमकिन नहीं था.

    नवंबर में अल-शिफ़ा अस्पताल पर हुई पहली इसराइली कार्रवाई से पहले वहां भी ऐसी ही ख़बरें आई थीं.

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