प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने मनोज परमार और दूसरे अभियुक्तों से संबंधित क़रीब 2 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त की है. ये वही मनोज परमार हैं, जिन्होंने ईडी की रेड के बाद पिछले साल 23 दिसंबर को अपनी पत्नी के साथ आत्महत्या कर ली थी.
शुक्रवार को ईडी के भोपाल ज़ोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के तहत मनोज परमार और दूसरे अभियुक्तों की करीब 2.08 करोड़ रुपये की 12 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त किया है. ये संपत्ति मध्य प्रदेश के आष्टा और सीहोर से ज़ब्त की गई हैं.
ईडी की जांच में पता चला कि मनोज परमार ने पंजाब नेशनल बैंक के उस समय के ब्रांच मैनेजर की मदद से दो सरकारी स्कीमों, प्रधानमंत्री एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत धोखाधड़ी से लोन लिए. साल 2016 में नकली एप्लीकेंट, जाली डॉक्यूमेंट और नकली कोटेशन का इस्तेमाल करके 6.20 करोड़ रुपये के कुल 18 लोन मंजूर किए गए. इनमें से 6.01 करोड़ रुपये असल में दिए गए.
साथ ही ईडी की जांच में पता चला है कि बैंक के लोन देने वाले नियमों को नज़रअंदाज़ किया गया.
साल 2023 में पहली बार मनोज परमार और उनका परिवार सुर्खियों में उस समय आया था जब उनके बच्चों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान उन्हें एक गुल्लक भेंट की थी.
सुसाइड के बाद मनोज परमार के घर एक पत्र बरामद हुआ था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि ईडी के अधिकारी उन पर बीजेपी में शामिल होने के लिए दबाव बना रहे थे.
मानसिक समस्याओं का इलाज दवा और थेरेपी से संभव है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए, आप इन हेल्पलाइन से भी संपर्क कर सकते हैं-
समाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन- 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)
इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यमून बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज-9868396824, 9868396841, 011-22574820
हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई- 022- 24131212
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस-080 - 26995000