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त्रिपुरा में भारी बारिश के बाद भूस्खलन, कम से कम सात लोगों की मौत

त्रिपुरा के राजस्व विभाग के सचिव बृजेश पांडे ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि दक्षिण त्रिपुरा जिले में पांच लोगों के मौत की ख़बर है. वहीं गोमती और खोवाई जिलों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है. इन जिलों में दो लोगों के लापता होने की भी ख़बर है.

सारांश

  • सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मामले की सुनवाई की, राज्य सरकार को लगाई फटकार
  • महाराष्ट्र के बदलापुर में नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, सीएम ने कहा-फास्ट ट्रैक अदालत में चलेगा मामला
  • लेटरल एंट्री पर विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री ने यूपीएससी से इसे रद्द करने का अनुरोध किया
  • बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने शेख़ हसीना के मामले में भारत पर लगाए नए आरोप
  • बीजेपी ने लुधियाना से हारे केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया

लाइव कवरेज

अश्वनी, शिल्पा और दीपक मंडल

  1. जेल में बंद इमरान ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का चांसलर बनने के लिए दिया आवेदन

    एक साल से भी ज़्यादा समय से जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का चांसलर बनने के लिए आवेदन दिया है.

    इमरान ख़ान के सलाहकार सैयद ज़ुल्फिकार बुखारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस बारे में जानकारी दी.

    उन्होंने बताया कि इमरान ख़ान के कहने पर "ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चांसलर इलेक्शन 2024" के लिए उनका आवेदन फॉर्म जमा कर दिया गया है.

    वहीं, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अभी तक इसे लेकर कुछ नहीं कहा.

    यूनिवर्सिटी की तरफ से उम्मीदवारों के नाम अक्टूबर में बताए जा सकते हैं. मतदान 28 अक्टूबर को ऑनलाइन होगा.

    इमरान ख़ान पर सरकारी उपहारों को निजी फ़ायदे के लिए ग़ैर क़ानूनी तरीके से बेचने सहित कई आरोप लगे हैं.

    अपने ऊपर लगे आरोपों को इमरान ख़ान राजनीतिक प्रतिशोध और षडयंत्र बता चुके हैं.

    संयुक्त राष्ट्र पैनल ने हाल ही में कहा था कि इमरान खान की हिरासत मनमाने ढंग से की गई थी.

  2. डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार अभियान को ईरान ने किया हैक, एफबीआई ने की पुष्टि

    अमेरिका के इंटेलिजेंस अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार अभियान को हैक करने के पीछे ईरान का हाथ था.

    अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी एफबीआई और अन्य जांच एजेंसियों ने बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है. बयान में कहा, ''ईरान ने अमेरिका के चुनाव में लोकतांत्रिक संस्थानों में कलह को बढ़ावा देने और विश्वास को कम करने के लिए हस्तक्षेप करने का फैसला किया था.''

    बयान में कहा गया है, ''ईरान ने सोशल इंजीनियरिंग और अन्य प्रयासों के माध्यम से दोनों राजनीतिक दलों के राष्ट्रपति अभियानों के साथ ऐसा करने का प्रसास किया है.''

    हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार अभियान की ओर से कहा गया था कि उसके आंतरिक संचार को हैक करने के पीछे ईरानी हैकर्स का हाथ है.

    हालांकि, ट्रंप के प्रचार अभियान के इस दावे को ईरान के अधिकारियों ने खारिज कर दिया था.

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