पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए को छोड़ने की घोषणा की है.
पारस ने कहा, "मैं घोषणा करता हूं कि आज तक हम एनडीए का हिस्सा थे, हम एनडीए के साथ थे. आज से अब हम एनडीए के सहयोगी नहीं हैं."
पशुपति कुमार पारस लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान के भाई हैं.
साल 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में समझौते के तहत एलजेपी के दूसरे गुट यानी चिराग पासवान की पार्टी एलजेपीआर को बिहार की छह सीटों पर चुनाव लड़ने का मौक़ा मिला था.
उस वक़्त पशुपति कुमार पारस से उनकी हाजीपुर सीट भी छीनकर उनके भतीजे और रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान को दे दी गई.
इसके ठीक एक दिन बाद पारस ने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और बीजेपी पर अन्याय करने का आरोप लगाया था.
साल 2019 के लोकसभा चुनावों में जीत के बाद पारस को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया था.
पशुपति पारस को भी फ़ूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री मिली थी, जो पहले रामविलास पासवान के पास भी रही थी.
साल 2020 में रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी पार्टी के दो गुटों के बीच खींचतान शुरू हो गई थी.
एक तरफ बॉम्बे की फ़िल्मी दुनिया से राजनीति में आए उनके बेटे चिराग पासवान थे और दूसरी तरफ पशुपति कुमार पारस.
इस संघर्ष में साल 2021 में रामविलास की लोक जनशक्ति पार्टी दो हिस्सों में टूट गई.