लखनऊ सुपर जायंट्स ने सनराइजर्स हैदराबाद को पांच विकेट से हराया

लखनऊ को जीत के लिए 20 ओवर में 191 रन का लक्ष्य मिला था. ऋषभ पंत की टीम ने इस लक्ष्य को 16.1 ओवर में ही हासिल कर लिया.

सारांश

लाइव कवरेज

हिमांशु दुबे और सुरभि गुप्ता

  1. टिकटॉक को बेचने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के सामने क्या प्रस्ताव रखा?

    शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप ने कहा है कि टिकटॉक के ग़ैर-चीनी ख़रीदार को ढूंढने के लिए वो समयसीमा बढ़ाने को तैयार हैं.

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक को बेचने के लिए चीन के सामने एक प्रस्ताव रखा है.

    उन्होंने कहा है कि इस शॉर्ट वीडियो ऐप को बेचने के लिए होने वाले सौदे को सुनिश्चित करने के लिए वो चीन पर लगाए गए टैरिफ़ में कटौती कर सकते हैं.

    इस शॉर्ट वीडियो ऐप की मालिक एक चीनी कंपनी बाइटडांस है.

    ट्रंप ने यह भी कहा है कि वो इस प्लेटफ़ॉर्म के किसी ग़ैर-चीनी ख़रीदार को ढूंढने के लिए 5 अप्रैल की समय सीमा को बढ़ाने के लिए तैयार हैं.

    इससे पहले, बाइडन प्रशासन के तहत टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक क़ानून पास हुआ था. मगर, जनवरी में ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद इस क़ानून को लागू करने में देरी की.

    यह क़ानून साल 2024 में बना था. इसे बेचने या इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया था.

    ट्रंप ने बुधवार को रिपोर्टर्स से कहा, “टिकटॉक को लेकर चीन को भूमिका निभानी होगी. मुझे लगता है कि वे ऐसा करेंगे.”

    “हो सकता है कि मैं इसके लिए टैरिफ़ में थोड़ी कटौती कर दूं या कुछ और, ताकि यह काम हो सके.”

    ट्रंप ने यह भी कहा है कि उनको उम्मीद है कि 5 अप्रैल तक की समयसीमा में इस मामले में होने वाले समझौते को लेकर एक रूपरेखा तैयार हो जाएगी.

    बीबीसी ने इस मामले में टिप्पणी के लिए टिकटॉक और वॉशिंगटन स्थित चीन के दूतावास से संपर्क किया है.

  2. यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने युद्ध विराम पर रूस की शर्तों को लेकर क्या कहा, जेरेमी बोवेन, पेरिस में अंतरराष्ट्रीय संपादक / इयान एकमैन, बीबीसी न्यूज़

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की

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    इमेज कैप्शन, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने अमेरिका से रूस की मांगों को लेकर बात की है.

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि उनको उम्मीद है कि अमेरिका अब रूस की मांगों के सामने मज़बूती से खड़ा रहेगा.

    दरअसल, रूस ने काला सागर में युद्ध विराम की शर्त के तौर पर खुद पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है.

    राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने बुधवार को पेरिस में हुए एक पैनल इंटरव्यू में यूरोपीय पत्रकारों से बातचीत की.

    इस दौरान, बीबीसी ने राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से सवाल किया था कि क्या अमेरिका रूस के दबाव का विरोध करेगा?

    इसके जवाब में उन्होंने कहा, “मुझे आशा है कि ऐसा होगा. ईश्वर करे, वे ऐसा करें. मगर, हम देखेंगे.”

    इससे पहले, अमेरिका ने मंगलवार को कहा था कि सऊदी अरब में अमेरिकी अधिकारियों के साथ रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल तीन दिनों तक अलग-अलग बातचीत करने के बाद काला सागर में युद्ध विराम को लेकर सहमत हो गए हैं.

    मगर, इसके कुछ घंटों बाद, रूस की ओर से एक बयान जारी किया गया था, जिसमें शर्तों की एक सूची शामिल थी.

    रूस ने कहा था कि काला सागर में कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए समुद्री संघर्ष विराम तभी शुरू होगा, जब रूस पर खाद्य और उर्वरकों के व्यापार पर पश्चिम की ओर से लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएंगे.

  3. अमेरिका: ट्रंप ने कारों पर लगाया 25 फ़ीसदी टैरिफ़, गहराया ट्रेड वॉर का ख़तरा, नतालिया शर्मन और माइकल रेस, बिज़नेस रिपोर्टर, बीबीसी न्यूज़

    कार प्रोडक्शन

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    इमेज कैप्शन, ट्रंप ने कहा है कि इस फ़ैसले से अमेरिका में रोज़गार और निवेश बढ़ेगा.

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ़ को लेकर नई घोषणा की है. इसके मुताबिक, अमेरिका आने वाली कारों और कारों के पार्ट्स पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया जाएगा.

    ट्रंप के इस कदम से ग्लोबल ट्रेड वॉर शुरू होने की आशंका बढ़ गई है.

    ट्रंप ने कहा है कि नए टैरिफ़ 2 अप्रैल से लागू हो जाएंगे. कारों के पार्ट्स पर यह टैरिफ़ मई या इसके बाद से शुरू होंगे.

    राष्ट्रपति ने यह दावा किया कि उनके इस कदम से कार इंडस्ट्री में ‘शानदार बढ़ोतरी’ देखने को मिलेगी. उन्होंने वादा किया कि इस कदम से अमेरिका में रोज़गार और निवेश भी बढ़ेगा.

    क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट

    मगर, विशेषज्ञों की राय इस मामले में कुछ अलग है.

    उनका मानना है कि ट्रंप के इस कदम से अमेरिका में महत्वपूर्ण कार प्रोडक्शन अस्थाई तौर पर बंद हो सकता है, कीमतें बढ़ सकती हैं और सहयोगी देशों के साथ संबंधों में तनाव आ सकता है.

    अमेरिका ने मोटे तौर पर पिछले साल 80 लाख कारें आयात की थीं, जो कि लगभग 240 बिलियन डॉलर का व्यापार था.

    अमेरिका को कार भेजने वालों में सबसे आगे मैक्सिको का नाम आता है. इसके बाद दक्षिण कोरिया, जापान, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं.

    ट्रंप के इस नए कदम से वैश्विक स्तर पर होने वाले कारों के व्यापार और इसकी सप्लाई चेन के प्रभावित होने का ख़तरा है.

  4. नमस्कार!

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