फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने संयुक्त राष्ट्र में कहा, हम फ़लस्तीन नहीं छोड़ेंगे

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र को संबोधित किया. अपने संबोधन की शुरुआत में महमूद अब्बास ने तीन बार घोषणा की “हम नहीं छोड़ेंगे.’’

सारांश

  • इसराइल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष: युद्ध विराम से इसराइल का इनकार, संघर्ष जारी
  • कनाडा में ट्रूडो सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव गिरा,लेकिन संकट बरकरार
  • शिव सेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत को मानहानि के मामले में 15 दिन की जेल की सज़ा
  • लेबनान पर जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है इसराइल
  • पाकिस्तान को आईएमएफ से सात अरब डॉलर का क़र्ज़ मंज़ूर

लाइव कवरेज

अदिति शर्मा

  1. मुंबई का भारी बारिश से बुरा हाल- कई इलाक़ों में भरे पानी, स्कूल-कॉलेज बंद

    मुंबई

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    भारी बारिश से मुंबई का बुरा हाल है. भारत की आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई और आसपास के इलाक़ों में बुधवार को भारी बारिश हुई है. इससे निचले इलाक़ों में पानी भर गया. कई उपनगरीय इलाक़े डूब गए हैं.

    लोकल ट्रेनें रुक गईं और मुंबई आने वाली कम से कम 14 फ्लाइट्स को डायवर्ट करना पड़ा है.

    भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मुंबई और उसके आस-पास के जिलों ठाणे, पालघर और रायगढ़ के लिए गुरुवार को सुबह साढ़े आठ बजे तक रेड अलर्ट जारी किया है.

    भारी बारिश के कारण बृहन्मुंबई नगर निगम ने गुरुवार को सभी स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी का एलान किया है.

    मुंबई

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    मुंबई पुलिस ने शहर और आस-पास के इलाक़ों के लोगों से कहा है कि वो जितना संभव हो घरों के अंदर रहें.

    लगातार हो रही बारिश के कारण 25 सितंबर को रात साढ़े नौ बजे बजे ठाणे में मुंब्रा के पास लैंडस्लाइड हुआ. इससे इलाक़े में तीन घंटे से ज़्यादा वक़्त तक ट्रैफिक जाम रहा.

    मुंबई

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    मौसम विभाग के मुताब़िक मुंबई और आसपास के इलाके में 27 सितंबर तक क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश जारी रहने के आसार हैं.

    पश्चिम मध्य और उससे सटे उत्तर पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तटों पर बना कम दबाव इलाके में पश्चिम-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ गया है.

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  2. कनाडा में जस्टिन ट्रूडो सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव गिरा

    जस्टिन ट्रूडो

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    इमेज कैप्शन, जस्टिन ट्रूडो (फ़ाइल फ़ोटो)

    कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार अपने ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव को हराने में कामयाब रही है.

    कनाडा की संसद में बहस के बाद लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 211 के मुकाबले 120 मतों से गिर गया.

    लेकिन आने वाले दिनोंं में ट्रूडो की मुश्किलें कम नहीं होने वाली है क्योंकि विपक्षी कंजर्वेटिव सांसदों ने मंगलवार को एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान किया है.

    कंजर्वेटिव सांसदों ने ट्रूडो की सरकार पर बढ़ती महंगाई, हाउसिंग संकट और बेकाबू अपराध को काबू करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया.

    ट्रूडो की लिबरल सरकार की पिछले नौ साल में लोकप्रियता कम हुई है.

    ओपिनियन पोल में टोरी नेता पियरे पोयलिवर में काफ़ी आगे दिख रहे हैं और चाहते हैं कि देश में तुरंत चुनाव हो. वामपंथी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस महीने की शुरुआत में लिबरल्स से अपना गठबंधन तोड़ दिया था. इससे ट्रूडो सरकार कमज़ोर हो गई है.

    पोयलिवर ने कहा कि ट्रूडो की सरकार हर मोर्चे पर नाकाम रही है. देश में महंगाई बढ़ रही है और हाउसिंग संकट गहराता जा रहा है जबकि देश का क़र्ज़ दोगुना हो चुका है.

    इस महीने की शुरुआत में कनाडा की लेफ्ट विंग न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी यानी एनडीपी ने ट्रूडो सरकार को दिया अपना समर्थन वापस ले लिया था.

    एनडीपी ने बीते ढाई साल से ट्रूडो सरकार को समर्थन दिया हुआ था. इस कारण ट्रूडो सत्ता में बने हुए थे.

    एनडीपी नेता जगमीत सिंह ने चार सितंबर को सोशल मीडिया पर साझा किए वीडियो में कहा था, ''हमने प्रधानमंत्री को अपने फ़ैसले के बारे में बता दिया है. लिबरल पार्टी के लोग इतने कमज़ोर और स्वार्थी हो गए थे कि वो कनाडा के लोगों के लिए लड़ नहीं सकते.''

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    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी को हुए ज़मीन आवंटन के मामले में हाई कोर्ट के फ़ैसले ने पार्टी नेताओं को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से भी ज़्यादा दुविधा में डाल दिया है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे सिद्धारमैया की बेदाग़ छवि को झटका लगा है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका से वापस लौट आए हैं. इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाक़ात की, क्वाड सम्मेलन में हिस्सा लिया, संयुक्त राष्ट्र में संबोधन किया, कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाक़ात की, लेकिन वो अमेरिका की घरेलू राजनीति से दूर ही रहे.

    तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित करते हुए कश्मीर का ज़िक्र नहीं किया.ऐसा सालों बाद हुआ है, जब अर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा नहीं उठाया.

    भारत के गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर सोमवार को बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी.बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा था, ''जब सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोग इस तरह की टिप्पणी करते हैं तो आपसी समझ और सम्मान पर सीधा असर पड़ता है.''

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