बलौदाबाज़ार फैक्टरी विस्फोट मामले में छत्तीसगढ़ सरकार की जांच में क्या पता चला, आलोक पुतुल, रायपुर से बीबीसी हिन्दी के लिए

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छत्तीसगढ़ सरकार ने गुरुवार को बलौदाबाज़ार-भाटापारा ज़िले के स्पंज आयरन प्लांट में हुए विस्फोट में 6 मजदूरों की मौत के लिए प्लांट प्रबंधन को ज़िम्मेदार ठहराया है.
प्रारंभिक जांच के बाद सरकार ने एक बयान में कहा है कि प्लांट प्रबंधन निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा था.
गुरुवार को बलौदाबाज़ार-भाटापारा ज़िले के ग्राम धौराभाठा में रियल इस्पात एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में स्पंज आयरन निर्माण के दौरान हुए विस्फोट में 6 मजदूर मारे गए थे. मारे जाने वाले सभी मजदूर बिहार के गया ज़िले के रहने वाले थे.
इस मामले में मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे.
प्रारंभिक जांच के बाद राज्य सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 22 जनवरी को प्लांट के भट्ठी क्रमांक एक के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल में कार्य के दौरान अचानक विस्फोट और गर्म राख की बौछार होने से 6 श्रमिकों की मौक़े पर ही मौत हो गई, जबकि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए.
घटना के समय डस्ट सेटलिंग चेंबर के भीतर लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म राख को पोकिंग के ज़रिए नीचे गिराया जा रहा था.
जारी बयान में कहा गया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए बलौदाबाज़ार में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के सहायक संचालक ने उप संचालकों और अधिकारियों की संयुक्त टीम के साथ कारखाने का निरीक्षण किया गया.

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प्लांट प्रबंधन की लापरवाही को लेकर कहा गया है कि भट्ठी को बंद किए बिना श्रमिकों से बहुत ही जोखिम भरे स्थिति में काम कराया गया. डस्ट सेटलिंग चेंबर के हाइड्रोलिक स्लाइड गेट को बंद नहीं किया गया, उचित वर्क परमिट जारी नहीं किया गया, नियमित रखरखाव का अभाव रहा और श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण और हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते, हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए.
इस घटना के बाद कारखाना अधिनियम के तहत भट्ठी क्रमांक एक के संचालन और मेंटेनेंस सहित सभी कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश जारी किया गया है.










