उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के न्यायपालिका पर दिए गए बयान पर कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी.
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 और 145 कई बार परिभाषित हो चुके हैं."
उन्होंने कहा कि इनमें किसी बदलाव की ज़रूरत नहीं है.
कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों को राज्यपाल द्वारा विचारार्थ रखने के बारे में समय सीमा तय कर दी थी.
उपराष्ट्रपति ने कहा, "संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है. जिन जजों ने राष्ट्रपति को आदेश दिया कि यही अब देश का क़ानून होगा, वे संविधान की ताक़त को भूल गए हैं."
"अगर अनुच्छेद 145(3) के तहत किसी चीज़ को संरक्षित किया गया है तो जब इससे कैसे निपट सकते हैं. हमें अब इसके लिए भी संशोधन करने की ज़रूरत है."
जगदीप धनखड़ ने कहा, "अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक शक्तियों के ख़िलाफ़ एक परमाणु मिसाइल बन गया है, जो न्यायपालिका को 24x7 उपलब्ध है."
संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को अपने समक्ष किसी भी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने हेतु आदेश जारी करने की शक्ति देता है.
धनखड़ ने कहा, “हाल ही में एक फ़ैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है. हम किस दिशा में जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमें बेहद संवेदनशील होना चाहिए. सवाल यह नहीं है कि कोई पुनर्विचार याचिका दायर करता है या नहीं. हमने इस दिन के लिए लोकतंत्र की कभी उम्मीद नहीं की थी. राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के लिए कहा जाता है और यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह क़ानून बन जाता है.”