राजनाथ सिंह ने महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी का ज़िक्र करते हुए कहा- 'हमारे आदर्श इस्लाम विरोधी नहीं थे'
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में शुक्रवार को एक कार्यक्रम में मुग़ल शासकों का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "औरंगज़ेब की शान में कुछ लोग क़सीदे पढ़ने का काम करते हैं. अगर पाकिस्तान में बाबर, तैमूर, औरंगजे़ब, गोरी और गज़नवी के क़सीदे पढ़ें जाएं तब यह बात समझ आती है, क्योंकि उनकी नीति और राजनीति दोनों ही भारत विरोधी हैं."
रक्षा मंत्री ने कहा, "पाकिस्तान का इंडिया स्टैंड हम समझ सकते हैं, लेकिन इन लोगों की क्या मजबूरी है, जो नहीं समझते हैं."
उन्होंने कहा, "क्या उन्हें लगता है कि बाबर, तैमूर, औरंगज़ेब, गोरी और गज़नवी के समर्थन करने से उन्हें मुस्लिम समाज का समर्थन मिल जाएगा?"
"वह ऐसा करके देश के मुस्लिम समाज का भी अपमान कर रहे हैं. हम मज़हब की राजनीति नहीं करते हैं, मेरे लिए सभी भारतीय समान हैं."
उन्होंने कहा कि हमारे आदर्श इस्लाम विरोधी बिल्कुल नहीं थे. हकीम ख़ान सूरी ने मुगलों के ख़िलाफ़ हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के साथ लड़ाई लड़ी थी. छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना में भी मुस्लिम समाज के लोग थे.
ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम पर दूसरे दौर की बातचीत से पहले कही ये बड़ी बात
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इमेज कैप्शन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच कई साल के बाद एक बार फिर से बातचीत शुरू हुई है, शनिवार को दोनों देश दूसरी बात बातचीत करने जा रहे हैं
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि उनका मानना है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ उनके देश के बीच समझौता होने की संभावना है.
अब्बास अरागची ने यह बात रूस में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोफ़ से मुलाक़ात के बाद कही है.
विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली दूसरे दौर की बातचीत का नतीजा अमेरिका पर निर्भर करेगा, जो शनिवार को इटली में होनी है.
उन्होंने कहा, "हालांकि हमें अमेरिकी पक्ष की नीयत और मंशा पर गंभीर शक है, फिर भी हम कल की बातचीत में ईरान की गंभीरता और पूरी दृढ़ता के साथ हिस्सा लेंगे."
"हम ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण हल के लिए पूरी तरह तैयार हैं."
अब्बास अरागची ने कहा, "अगर दूसरी तरफ़ (अमेरिका) भी इसी तरह की इच्छा हो और वे बेवजह और गैर-वास्तविक मांगें करने से बचें, तो मुझे लगता है कि समझौता होना मुमकिन है."
टैरिफ़ वॉर के बीच अमेरिका ने चीनी जहाज़ों को लेकर बनाई ये योजना
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अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ़ वॉर जारी है. इस बीच अमेरिका ने चीनी जहाज़ों पर पोर्ट फीस लगाने की योजना बनाई है.
अमेरिका ने ये योजना इसलिए बनाई है ताकि वो अपने देश में जहाज़ निर्माण को फिर से शुरू कर सके और इस क्षेत्र में चीन की बढ़त को चुनौती दी जा सके.
अक्तूबर महीने के मध्य से चीनी जहाज़ मालिकों और संचालकों से प्रति टन माल पर 50 डॉलर का शुल्क लिया जाएगा. साथ ही अगले तीन सालों तक यह शुल्क हर साल बढ़ता रहेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ़ नीतियों के बाद ऐसी चिंताएं थीं कि ये उपाय वैश्विक व्यापार को और बाधित करेंगे, लेकिन यह फीस मूल रूप से सुझाए गए फीस से कम गंभीर है.
अमेरिका की ओर से लगाए गए फीस पर चीन के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है.
विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि फीस से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए क़ीमत बढ़ेगी और "इससे अमेरिकी जहाज़ निर्माण उद्योग को कोई बढ़ावा नहीं मिलेगा."
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों के लिए कहा- जितना जल्दी हो, हथियार डाल दें
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इमेज कैप्शन, अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश से माओवाद, पूरी तरह से ख़त्म करने की समय सीमा तय की है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर ज़िले में '22 नक्सलियों' को गिरफ़्तार किया गया है और सुकमा में '33 नक्सलियों' ने आत्मसमर्पण किया है.
उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी है.
उन्होंने लिखा, "छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में विभिन्न ऑपरेशंस में कोबरा कमांडो और छत्तीसगढ़ पुलिस ने 22 कुख्यात नक्सलियों को आधुनिक हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों के साथ गिरफ्तार किया है."
केंद्रीय मंत्री ने कहा, "छिपे हुए नक्सलियों से मेरी अपील है कि मोदी सरकार की आत्मसमर्पण नीति को अपनाकर जितना जल्दी हो सके हथियार डालें और मुख्यधारा में शामिल हों."
"31 मार्च 2026 से पहले हम देश को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने के लिए संकल्पित हैं."
उन्होंने दूसरे पोस्ट में कहा, "सुकमा (छत्तीसगढ़) में अन्य 22 नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया, जिससे सरेंडर करने वालों की कुल संख्या बढ़कर 33 हो गई है."
शाह ने कहा, "नक्सलमुक्त भारत अभियान की दिशा में इस सफलता के लिए मैं सुरक्षा बल के जवानों और छत्तीसगढ़ पुलिस को बधाई देता हूं."
ग्रेनेड हमलों के अभियुक्त भारतीय शख़्स को अमेरिका में किया गया गिरफ़्तार, शेर्लिन मोलान, बीबीसी न्यूज़ मुंबई
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इमेज कैप्शन, हरप्रीत सिंह (बीच में)
पंजाब में चरमपंथी हमलों की साज़िश रचने के मामले में अभियुक्त एक भारतीय शख़्स को अमेरिका में गिरफ़्तार किया गया है.
शुक्रवार को फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इनवेस्टिगेशन (एफ़बीआई) ने कहा कि हरप्रीत सिंह को सैक्रामेंटो में एफ़बीआई के साथ एनफ़ोर्समेंट एंड रिमूवल ऑपरेशंस (ईआरओ) ने गिरफ़्तार किया है.
एफ़बीआई ने ये दावा किया है कि हरप्रीत सिंह का दो अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से नाता था और वो अमेरिका में ग़ैर-कानूनी तरीके़ से घुसे. एफ़बीआई ने ये भी कहा कि हरप्रीत सिंह गिरफ़्तारी से बचने के लिए बर्नर फ़ोन्स का इस्तेमाल कर रहे थे.
फ़िलहाल हरप्रीत सिंह हिरासत में हैं और उन्होंने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं दी है.
एक्स पर एक पोस्ट में एफ़बीआई ने सिंह को एक "कथित आतंकी बताया है जो भारत के पंजाब में आतंकी हमलों के ज़िम्मेदार हैं."
सिंह का एक नाम हैप्पी पासिया भी है. चंडीगढ़ के एक घर में साल 2024 में हुए ग्रेनेड अटैक से जुड़े केस में भारतीय जांच अधिकारी उनकी तलाश में है.
इसी साल जनवरी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने हरप्रीत सिंह की सूचना देने वाले को 5 लाख रुपये का इनाम दिए जाने की घोषणा की थी.
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पाकिस्तान में केएफ़सी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हिंसक हुआ, 170 से ज़्यादा गिरफ़्तार
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पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय फूड चेन केएफ़सी के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के मामले में 170 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, पाकिस्तान के बड़े शहरों जैसे कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में पुलिस ने कम से कम 11 घटनाओं की पुष्टि की है, जिनमें डंडों से लैस प्रदर्शनकारियों ने केएफसी की कई शाखाओं पर हमला किया और तोड़फोड़ की.
अधिकारियों के मुताबिक़, कम से कम 178 लोगों को इन हमलों में शामिल होने की वजह से गिरफ़्तार किया गया है.
बीबीसी उर्दू के अनुसार ये प्रदर्शन उस अंतरराष्ट्रीय अभियान से प्रेरित है, जो ग़ज़ा में युद्ध की वजह से इसराइल से जुड़े सभी सामानों और कंपनियों के बहिष्कार की बात करते हैं.
वहीं दूसरी ओर, केएफसी और उसकी अमेरिकी पैरंट कंपनी यम ब्रांड्स ने अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
इसराइली हमलों में ग़ज़ा में कम से कम 37 लोगों की मौत, चश्मदीदों ने क्या बताया?
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इमेज कैप्शन, इसराइली सेना की ओर से ग़ज़ा में सैन्य कार्रवाई जारी है.
ग़ज़ा पर हुए इसराइली हमलों में कम से कम 37 लोग मारे गए हैं. हमास की ओर से सिविल डिफ़ेंस एजेंसी ने इसकी जानकारी दी है.
एजेंसी के मुताबिक़, अधिकतर लोग उन क्षेत्रों में मारे गए हैं जहां विस्थापित हुए नागरिकों ने टेंट लगाए हुए हैं.
अल-मवासी में चश्मदीदों ने बीबीसी को बताया कि बुधवार की रात एक ज़ोरदार धमाके के बाद टेंट में आग लग गई, जिसके कारण दर्जनों फ़लस्तीनियों की मौत हुई, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं.
एक व्यक्ति ने कहा कि वह "चीख-पुकार" सुनकर उठा और उसने देखा कि "आग की लपटें एक टेंट से दूसरे टेंट में तेज़ी से फैल रही थीं."
इसराइल ने फ़लस्तीनियों से कहा है कि वे ग़ज़ा के दूसरे इलाक़ों से निकलकर अल-मवासी चले जाएं.
इसराइली सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने क्षेत्र में एक "हमास आतंकवादी" पर हमला किया है और घटना की समीक्षा की जा रही है.
वहीं, हमास ने इसराइल के नए युद्धविराम प्रस्ताव को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया है.
इसराइल के नए समझौते में 10 बंधकों की रिहाई के बदले 45 दिन के युद्धविराम की बात है.
हमास ने कहा कि वो ऐसे समझौते पर बातचीत करने के लिए तैयार है, जिसमें सभी बचे हुए बंधकों की रिहाई के बदले युद्ध ख़त्म किया जाए और फ़लस्तीनी कै़दियों को रिहा किया जाए.
दिल्ली के सीलमपुर में 17 साल के युवक की हत्या पर विरोध प्रदर्शन, सीएम रेखा गुप्ता ने क्या कहा?
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दिल्ली के सीलमपुर में 17 साल के युवक की हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन बढ़ने के बाद इस मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रतिक्रिया दी है.
रेखा गुप्ता ने कहा, "मेरी पुलिस कमिश्नर से बात हुई है. कुणाल जो कि 17 से 18 साल का था और उन पर चाकू से हमला किया गया. इसके बाद उन्हें उनका परिवार अस्पताल ले गया, लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया."
उन्होंने बताया कि मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई और परिवार के साथ पूरा न्याय होगा. पुलिस अपना काम कर रही है.
उत्तर पूर्वी ज़िले के एडिशनल डीसीपी संदीप लामा ने कहा, "छापेमारी हम कर रहे हैं."
उन्होंने बताया कि हमने अभियुक्त की पहचान कर ली है और जल्द ही इन्हें पकड़ लिया जाएगा. जांच जारी है.
रूस और यूक्रेन के बीच बार-बार विफल बातचीत पर अमेरिका ने दी ये चेतावनी
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इमेज कैप्शन, रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को ख़त्म करने के लिए अमेरिका मध्यस्थता का किरदार निभा रहा है
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस और यूक्रेन के बीच लगातार हो रही विफल बातचीत को लेकर चेतावनी दी है.
उन्होंने कहा कि अगर युद्धविराम समझौते को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखा तो अमेरिका कुछ ही दिनों में रूस-यूक्रेन शांति समझौते के लिए मध्यस्थता का प्रयास छोड़ देगा.
रुबियो ने कहा, "अमेरिका युद्ध ख़त्म करने में मदद करना चाहता है, लेकिन अगर बातचीत में जल्दी कोई सुधार नहीं दिखा, तो वह इससे आगे बढ़ने को तैयार है."
विदेश मंत्री ने कहा, "हम इस प्रयास को कई हफ़्तों और महीनों तक जारी नहीं रखेंगे, अमेरिका के पास ध्यान देने के लिए और भी ज़रूरी चीज़ें हैं.
रुबियो का यह बयान यूक्रेन के अमेरिका के साथ खनिज समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में पहला कदम उठाने के कुछ ही घंटों बाद आया है.
इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ 'रूसी नैरेटिव फैला' रहे हैं.
हाल ही में फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में विटकॉफ़ ने कहा था कि रूस और यूक्रेन की जंग उन पांच इलाक़ों पर निर्भर है, जिनके अधिकतर हिस्से पर रूस का क़ब्ज़ा है.
रामदेव ने फिर किया 'शरबत जिहाद' का ज़िक्र, रूह अफ़ज़ा के बारे में ये कहा
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इमेज कैप्शन, रामदेव ने अपने बयान में कहा था कि शरबत बेचने से जो पैसे मिलते हैं उससे मदरसे और मस्जिद बनवाई जाती है.
योग गुरु रामदेव ने अपने 'शरबत जिहाद' वाले विवादित बयान का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इसमें किसी का नाम नहीं लिया.
बीते हफ़्ते रामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. रामदेव वायरल वीडियो में कहते दिखे, "जैसे लव जिहाद, वोट जिहाद चल रहा है वैसे ही शरबत जिहाद भी चल रहा है."
अब उन्होंने अपने इस बयान पर सफ़ाई देते हुए कहा, "हमने किसी का नाम नहीं बोला, अब रूह अफ़ज़ा वालों ने शरबत जिहाद को अपने सिर ऊपर ले लिया. इसका मतलब है कि वह यह जिहाद कर रहे होंगे."
रामदेव ने कहा कि अगर हमदर्द और हिमालया की निष्ठा 100 फ़ीसदी इस्लाम में है और वह इसके लिए मदरसे और मस्जिद बनाते हैं तो उन्हें खुश होना चाहिए.
"लेकिन सनातनियों को समझना चाहिए कि किससे सनातन का गौरव बढ़ रहा है और किससे इस्लाम का गौरव बढ़ रहा है."
उन्होंने कहा, "अब इसे लेकर किसी के पेट में दर्द होता हो तो होने दो, जो शरबत जिहाद है वह है ही."
राहुल गांधी ने कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया से राज्य में रोहित वेमुला एक्ट लागू करने की मांग की
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इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने कर्नाटक में रोहित वेमुला एक्ट को लागू करने की मांग को लेकर सीएम सिद्धारमैया को पत्र लिखा है.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिख कर कर्नाटक में रोहित वेमुला एक्ट को लागू करने की मांग की है.
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी है.
उन्होंने लिखा, "हाल ही में संसद में मेरी मुलाक़ात दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदाय के छात्रों और शिक्षकों से हुई थी. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें किस तरह कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति के आधार पर भेदभाव झेलना पड़ता है."
रायबरेली से कांग्रेस सांसद ने कहा, "बाबासाहेब आंबेडकर ने दिखाया था कि शिक्षा ही वह साधन है जिससे वंचित भी सशक्त बन कर जातिभेद को तोड़ सकते हैं. लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि दशकों बाद भी लाखों छात्र हमारी शिक्षा व्यवस्था में जातिगत भेदभाव का सामना कर रहे हैं."
"इसी भेदभाव ने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे होनहार छात्रों की जान ली है."
उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि मैंने सिद्धारमैया जी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि कर्नाटक में रोहित वेमुला एक्ट लागू किया जाए.
"भारत के किसी भी बच्चे को वो जातिवाद नहीं झेलना चाहिए, जिसे बाबासाहेब अंबेडकर, रोहित वेमुला और करोड़ों लोगों ने सहा है."
इमेज कैप्शन, पीएम मोदी फरवरी में एलन मस्क से मुलाकात की थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक अरबपति और अमेरिकी प्रशासन में डीओजीई (डिपार्टमेंट गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी) का नेतृत्व संभाल रहे एलन मस्क से बात की.
पीएम मोदी ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया एक्स पर दी.
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मैंने एलन मस्क से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की. इनमें वो मुद्दे भी शामिल हैं, जिन पर हमने इस साल की शुरुआत में वॉशिंगटन डीसी में हुई बैठक में चर्चा की थी."
"हमने टेक्नॉलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं पर बात की. भारत, इन क्षेत्रों में अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है."
पीएम मोदी फरवरी में अमेरिका के दौरे पर गए थे. इस दौरान उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क से मुलाक़ात की थी.
नमस्कार!
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अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता इफ़्तेख़ार अली आप तक बड़ी ख़बरें पहुंचाएंगे.
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आगरा में दलित दूल्हे के साथ मारपीट का मामला, पीड़ित पक्ष ने क्या बताया?, नसीम अहमद, आगरा से बीबीसी हिंदी के लिए
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इमेज कैप्शन, लड़की की मां अनिता ने मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है
उत्तर प्रदेश के आगरा में दलित समुदाय के एक दूल्हे के साथ मारपीट का मामला सामने आया है.
पीड़ित पक्ष ने शिकायत में आरोप लगाया है, "उच्च जाति के कुछ लोगों ने दूल्हे और बारातियों के साथ मारपीट की."
आगरा के एत्मादपुर रामी गढ़ी में बुधवार की रात मथुरा से बारात आई थी.
लड़की की मां अनिता ने इस घटना को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने शिकायत में कहा, "दूल्हा घोड़ी पर बैठा था और डीजे पर गाना बज रहा था तभी गांव के उच्च जाति के करीब 15-20 लोग डंडे, तलवार और फरसा लेकर आए."
उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने दूल्हे को घोड़ी पर नहीं बैठने दिया और उसे घोड़ी से नीचे गिरा दिया.
लड़की की माँ का कहना है कि इस घटना में कई बारातियों को चोट लगी है. झगड़े के बाद दूल्हा पैदल ही मैरिज होम तक पहुंचा.
इसके बाद 112 पर सूचना देने पर पुलिस मौके पर आई.
एसीपी एत्मादपुर पीयूष कांत राय ने बताया कि प्रथम दृष्टया ये मामला डीजे की तेज आवाज को लेकर हुआ था.
उन्होंने बताया कि घायलों का इलाज चल रहा है और मामले की जांच शुरू कर दी है.
धनखड़ ने कौन से अनुच्छेद को बताया 'न्यायपालिका की परमाणु मिसाइल', कांग्रेस ने दिया क्या जवाब
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के न्यायपालिका पर दिए गए बयान पर कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रतिक्रिया दी.
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 और 145 कई बार परिभाषित हो चुके हैं."
उन्होंने कहा कि इनमें किसी बदलाव की ज़रूरत नहीं है.
कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों को राज्यपाल द्वारा विचारार्थ रखने के बारे में समय सीमा तय कर दी थी.
उपराष्ट्रपति ने कहा, "संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है. जिन जजों ने राष्ट्रपति को आदेश दिया कि यही अब देश का क़ानून होगा, वे संविधान की ताक़त को भूल गए हैं."
"अगर अनुच्छेद 145(3) के तहत किसी चीज़ को संरक्षित किया गया है तो जब इससे कैसे निपट सकते हैं. हमें अब इसके लिए भी संशोधन करने की ज़रूरत है."
जगदीप धनखड़ ने कहा, "अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक शक्तियों के ख़िलाफ़ एक परमाणु मिसाइल बन गया है, जो न्यायपालिका को 24x7 उपलब्ध है."
संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को अपने समक्ष किसी भी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने हेतु आदेश जारी करने की शक्ति देता है.
धनखड़ ने कहा, “हाल ही में एक फ़ैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है. हम किस दिशा में जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? हमें बेहद संवेदनशील होना चाहिए. सवाल यह नहीं है कि कोई पुनर्विचार याचिका दायर करता है या नहीं. हमने इस दिन के लिए लोकतंत्र की कभी उम्मीद नहीं की थी. राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के लिए कहा जाता है और यदि ऐसा नहीं होता है, तो यह क़ानून बन जाता है.”
बांग्लादेश ने दिया पश्चिम बंगाल में 'मुसलमानों की सुरक्षा' पर बयान,भारत ने दिया ये जवाब
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बांग्लादेश के पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा को लेकर बयान देने पर प्रतिक्रिया दी.
विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, "हम पश्चिम बंगाल की घटनाओं को लेकर बांग्लादेश की ओर से की गई टिप्पणियों को खारिज करते हैं. यह एक छिपा हुआ और भ्रामक प्रयास है."
"यह भारत की उस चिंता के साथ समानता स्थापित करने की कोशिश करता है, जो बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के निरंतर उत्पीड़न को लेकर है, जहां ऐसे अपराधों के दोषी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं. अनावश्यक टिप्पणियां करने और नैतिक उपदेश देने के बजाय, बांग्लादेश को अपने ही देश के अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर ध्यान देना चाहिए."
हाल ही में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक़्फ़ क़ानून के ख़िलाफ़ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी.इस हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई थी.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रेस सेक्रेटरी शफ़ीकुल आलम ने कहा था, "हम मुर्शिदाबाद में हुई सांप्रदायिक हिंसा के लिए बांग्लादेश को दोषी ठहराने के किसी भी प्रयास को कड़े शब्दों में खारिज करते हैं. हम मुसलमानों पर हुए हमलों की निंदा करते हैं, जिनमें जान-माल का नुकसान हुआ है."
"हम भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार से आग्रह करते हैं कि वे अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं."
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- सास भी दर्ज करा सकती है घरेलू हिंसा का मामला
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले में फ़ैसले सुनाया कि सास भी घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत केस दर्ज करा सकती है.
जस्टिस आलोक माथुर ने ट्रायल कोर्ट के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें बहू और उनके परिवार के सदस्यों को सास की दायर शिकायत पर समन जारी किया गया था.
समन के ख़िलाफ़ बहू ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
वहीं, बहू के वकील ने हाई कोर्ट में दलील दी कि उन्होंने (बहू) अपने ससुराल वालों के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा और दहेज का मामला दर्ज कराया था. इस कारण सास ने शिकायत दर्ज कराई है.
क़ानूनी मामलों की वेबसाइट बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने 'श्रीमती गरिमा और 5 अन्य बनाम यूपी राज्य’ नाम से दर्ज मामले में कहा, "सास को, बहू या परिवार के किसी दूसरे सदस्य द्वारा परेशान किया जाता है, शारीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है तो निश्चित रूप से वो पीड़ित व्यक्ति के दायरे में आएगी."
"ऐसे में उन्हें घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत शिकायत दर्ज कराने का अधिकार होगा."
सास ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि बहू अपने पति पर उसके मायके में जाकर रहने के लिए दबाव बना रही है.
उन्होंने अपनी शिकायत में इसके अलावा ये भी कहा कि बहू उनके और अन्य परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है और झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रही है.
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हमास ने इसराइल के नए युद्धविराम प्रस्ताव को किया अस्वीकार, बताया ये कारण
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इमेज कैप्शन, हमास ने आरोप लगाया कि इसराइल लगातार हवाई हमले कर रहा है (हवाई हमले के बाद की तस्वीर)
हमास ने इसराइल के नए युद्धविराम प्रस्ताव को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया है.
समूह ने कहा कि वो ऐसे समझौते पर बातचीत करने के लिए तैयार हैं, जिसमें सभी बचे हुए बंधकों की रिहाई के बदले युद्ध समाप्त किया जाए और फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाए.
हमास के मुख्य वार्ताकार खलील अल-हय्या ने अपना बयान वीडियो के जरिए जारी किया.
इसमें हय्या ने कहा कि हम ऐसे किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे, जिसमें कि इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का राजनीतिक एजेंडा पूरा होता हो.
इसराइल के नए समझौते में दस बंधकों की रिहाई के बदले 45 दिन के युद्धविराम की बात है.
हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कुछ घंटे पहले किए गए इसराइल के हवाई हमले हमले में 37 लोगों की मौत हो गई.
हालांकि, इसराइली सेना ने मामले पर अभी कुछ नहीं कहा है.