शुरू में ऐसे चार स्कूलों को बम की धमकी की जानकारी मिली थी लेकिन ताज़ा जानकारी के मुताबिक़ ऐसे स्कूलों की संख्या 6 हो गई है.
धमकी भरा ई-मेल मिलने और स्कूल बंद होने के बाद एक अभिभावक ने मीडिया से बात की है, जो स्कूल बंद होने के बाद वापस लौट रहे थे.
उनका कहना है, "हमें स्कूल से मैसेज मिला था लेकिन हमने काफ़ी देरी से इसे देखा. इसमें लिखा है कि 'असामान्य हालात' की वजह से आज स्कूल बंद रहेंगे. कुछ दिन पहले भी इसी तरह से स्कूल बंद किए गए थे. हालांकि हमें यह नहीं बताया गया है कि स्कूल क्यों बंद किया गया है. हमने मैसेज नहीं देखा इसलिए यहां आ गए."
वहीं दिल्ली के श्रीनिवासपुरी में मौजूद कैंब्रिज स्कूल की प्रिंसिपल माधवी गोस्वामी ने कहा है कि उन्होंने बम की धमकी भरे ई-मेल के बारे में सुबह क़रीब 6 बजे पुलिस को जानकारी दी थी.
इससे पहले 9 दिसंबर को भी दिल्ली के कुछ स्कूलों को बम की धमकी दी गई थी. दिल्ली पुलिस के साउथ वेस्ट डीसीपी सुरेंद्र चौधरी ने बताया था कि 40 से ज़्यादा स्कूलों को बम की धमकी दी गई थी.
तमिलनाडु में भारी बारिश की वजह से कई ज़िलों में स्कूल बंद रखने के आदेश
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इमेज कैप्शन, तमिलनाडु के कई इलाक़ों में भारी बारिश हुई है
तमिलनाडु में भारी बारिश की वजह से मदुरै और तिरूनेल्वेली समेत कई ज़िलों में शुक्रवार को स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है. पुदुचेरी में भी स्कूल बंद रहेंगे.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू के मुताबिक़ शुक्रवार को मदुरै और मयेलादुतुरेई के अलावा अन्य प्रभावित ज़िलों के कलेक्टर ने शुक्रवार को स्कूलों की छुट्टी की घोषणा की है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ तिरूनेल्वेली में भारी बारिश की वजह से कई जगहों पर पानी जमा हो गया है.
तमिलनाडु के कई इलाकों में बुधवार रात से तेज बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने पहले ही ऐसे कई इलाक़ों में 13 दिसंबर तक भारी बारिश की संभावना जताई थी.
वहीं समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया था कि गुरुवार को भारी बारिश की संभावना की वजह से चेन्नई, विल्लुपुरम, तंजावुर, मयिलादुथुराई, पुदुक्कोट्टई, कुड्डालोर, डिंडीगुल, रामनाथपुरम, तिरुवरुर, रानीपेट और तिरुवल्लूर में स्कूल बंद रहेंगे.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक़, "बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव की वजह से 13 दिसंबर तक तमिलनाडु में भारी बारिश होने की संभावना है."
"इस दौरान तमिलनाडु और पुदुचेरी के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है."
साथ ही मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में ना जाने की भी हिदायत दी है.
केजरीवाल के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे संदीप दीक्षित- जानिए क्या कहा
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इमेज कैप्शन, संदीप दीक्षित ने दावा किया है कि दिल्ली की अगली सरकार कांग्रेस के बिना नहीं बनेगी
दिल्ली के अगले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में संदीप दीक्षित का नाम भी शामिल है, जिन्हें नई दिल्ली विधानसभा सीट से टिकट दिया गया है.
टिकट मिलने के बाद संदीप दीक्षित ने कहा है, "क्योंकि मैं अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहा हूं, इसलिए मेरा उनसे सवाल करना और उनकी ज़िम्मेदारी तय करना स्वाभाविक है. अरविंद केजरीवाल में मेरे सवालों का सामना करने का साहस नहीं है."
संदीप दीक्षित ने दावा किया है कि दिल्ली की अगली सरकार कांग्रेस के बिना नहीं बनेगी.
नई दिल्ली सीट से दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मौजूदा विधायक हैं. केजरीवाल ने यह सीट शीला दीक्षित से छीन ली थी, जो मुख्यमंत्री रहते हुए केजरीवाल से चुनाव हार गई थीं.
संदीप दीक्षित लोकसभा सांसद भी रहे चुके हैं और शीला दीक्षित के बेटे हैं, वो आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के विरोधी भी रहे हैं.
एक देश एक चुनाव पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, अखिलेश यादव ने 'वन नेशन वन इलेक्शन' का विरोध किया है (फाइल फोटो)
गुरुवार को 'एक देश एक चुनाव' को कैबिनेट की मंज़ूरी मिलने के बाद विपक्षी दल लगातार इसपर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि ‘एक देश, एक चुनाव’ सही मायनों में एक ‘अव्यावहारिक’ ही नहीं ‘अलोकतांत्रिक’ व्यवस्था भी है.
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, "कभी सरकारें अपनी समयावधि के बीच में भी अस्थिर हो जाती हैं तो क्या वहाँ की जनता बिना लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के रहेगी. इसके लिए सांविधानिक रूप से चुनी गयी सरकारों को बीच में ही भंग करना होगा, जो जनमत का अपमान होगा." "दरअसल ‘एक देश, एक चुनाव’ लोकतंत्र के ख़िलाफ़, एकतंत्री सोच का बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जो चाहता है कि एक साथ ही पूरे देश पर क़ब्ज़ा कर लिया जाए."
देश में एक साथ चुनाव कराने पर विचार के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई थी, इस कमेटी ने वन नेशन वन इलेक्शन की सिफारिश की है.
केंद्र सरकार और उसके सयहोगी दलों की दलील रही है कि देश में एक साथ चुनाव कराने पर सरकारी ख़र्च में कमी आएगी और विकास के काम भी ज़्यादा रफ़्तार से चल सकेंगे.