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अमेरिका ने फ़लस्तीनी प्राधिकरण और फ़लस्तीन मुक्ति संगठन पर प्रतिबंध का किया एलान, इसराइल ने क्या कहा?

अमेरिका ने कहा है कि वह फ़लस्तीनी प्राधिकरण (पीए) और फ़लस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है.

सारांश

लाइव कवरेज

इफ़्तेख़ार अली और आनंद कुमार त्रिपाठी

  1. अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर राष्ट्रपति ट्रंप के एलान के बाद पाकिस्तान के पीएम ने कही ये बात

    अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शुक्रिया करते हुए इस पर प्रतिक्रिया दी है.

    पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "मैं राष्ट्रपति ट्रंप का दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने ऐतिहासिक अमेरिका-पाकिस्तान व्यापार समझौते के अंतिम रूप देने में नेतृत्व की भूमिका निभाई."

    शहबाज़ शरीफ़ के मुकाबिक़, दोनों देशों के बीच यह समझौता कल रात (बुधवार) वॉशिंगटन में हुआ.

    उन्होंने लिखा, "यह ऐतिहासिक समझौता हमारे बढ़ते सहयोग को और मज़बूती देगा, ताकि आने वाले दिनों में हमारी स्थायी साझेदारी के दायरे को और विस्तार दिया जा सके."

    इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ ट्रेड डील की जानकारी दी थी.

    उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "हमने पाकिस्तान के साथ एक नया समझौता किया है. इसके तहत अमेरिका और पाकिस्तान मिलकर वहां के विशाल तेल भंडार का विकास करेंगे."

    राष्ट्रपति ट्रंप ने लिखा, "हम उस तेल कंपनी को चुनने की प्रक्रिया में हैं जो इस पार्टनरशिप का नेतृत्व करेगी. कौन जानता है, शायद एक दिन पाकिस्तान भारत को तेल बेचे."

  2. भारत रूस के साथ क्या करता है मुझे परवाह नहीं: डोनाल्ड ट्रंप

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा है कि 'मुझे परवाह नहीं कि भारत रूस के साथ क्या करता है'.

    इससे पहले ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि एक अगस्त से भारत से अमेरिका आने वाले सभी सामानों पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगेगा.

    साथ ही उन्होंने रूस से हथियार और तेल ख़रीदने को लेकर भारत के ख़िलाफ़ अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की भी बात कही है.

    गुरुवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मुझे परवाह नहीं कि भारत रूस के साथ क्या करता है. अगर वे अपनी बर्बाद होती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ डुबोना चाहते हैं, तो करें मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता."

    उन्होंने कहा, "हमने भारत के साथ बहुत कम व्यापार किया है, क्योंकि उनके टैरिफ़ बहुत ज़्यादा हैं, दुनिया में सबसे ज़्यादा में से एक. इसी तरह, रूस और अमेरिका के बीच भी लगभग कोई व्यापार नहीं होता और यही ठीक है."

    ट्रंप ने आगे लिखा, "साथ ही, रूस के असफल पूर्व राष्ट्रपति मेदवेदेव, जो खुद को अब भी राष्ट्रपति समझते हैं, उन्हें कहिए कि अपने शब्दों पर ध्यान दें. वो बहुत ख़तरनाक ज़मीन पर क़दम रख रहे हैं!"

  3. भारत पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ को लेकर ट्रंप ने अब कही ये बात

    भारत पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ और अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने कहा, "हम अभी बातचीत कर रहे हैं, और यह मामला ब्रिक्स से भी जुड़ा है, जो मूल रूप से उन देशों का समूह है जो अमेरिका के विरोधी हैं, और भारत भी उस समूह का हिस्सा है. यह डॉलर पर हमला है, और हम किसी को भी डॉलर पर हमला करने नहीं देंगे."

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "तो यह हिस्सा कुछ ब्रिक्स और कुछ व्यापार को लेकर है. हमारा घाटा बहुत ज़्यादा था."

    उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी मेरे दोस्त हैं, लेकिन भारत हमारे साथ ज़्यादा व्यापार नहीं करता. वो हमें बहुत कुछ बेचते हैं, लेकिन हम उनसे कुछ नहीं खरीदते. आप जानते हैं क्यों? क्योंकि उनके टैरिफ़ बहुत ज़्यादा हैं, दुनिया में सबसे ज़्यादा में से एक."

    ट्रंप ने आगे कहा, "अब वो इन टैरिफ़ को काफी हद तक कम करने को तैयार हैं, लेकिन देखते हैं आगे क्या होता है."

    इससे पहले बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि एक अगस्त से भारत से अमेरिका आने वाले सभी सामानों पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगेगा.

    इसके अलावा, ट्रंप ने रूस से हथियार और तेल ख़रीदने को लेकर भारत के ख़िलाफ़ अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की भी बात कही है.

  4. भारत के साथ ट्रेड डील पर वार्ताओं से निराश हैं ट्रंप: व्हाइट हाउस के सलाहकार

    व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ चल रही ट्रेड डील की प्रगति से निराश हैं.

    उनका मानना है कि भारत पर लगाया गया 25 फ़ीसदी टैरिफ़ इस स्थिति को सुधारने और उसका समाधान निकालने में मदद करेगा.

    बुधवार को हैसेट ने कहा, "भारत का बाज़ार काफ़ी हद तक अमेरिकी उत्पादों के लिए बंद रहा है, जबकि अमेरिका का बाज़ार उनके लिए पूरी तरह खुला रहा है. मुझे लगता है कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ हुई प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि यह टैरिफ़ अमेरिकी जनता के लिए फायदेमंद होगा."

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि एक अगस्त से भारत से अमेरिका आने वाले सभी सामानों पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगेगा. इसके अलावा, ट्रंप ने रूस से हथियार और तेल ख़रीदने को लेकर भारत के ख़िलाफ़ अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की भी बात कही है.

    भारत पर लगाए गए टैरिफ़ को लेकर हैसेट ने कहा, "अब जो होगा वह यह है कि भारत अपने उत्पादों की क़ीमत अमेरिका में घटाएगा, ताकि वह अपनी बाज़ार हिस्सेदारी बनाए रख सके."

    उन्होंने यह भी कहा, "दूसरे देश भी ऐसा कर रहे हैं. इसके बाद भारत शायद उन नीतियों पर दोबारा विचार करेगा, जिनकी वजह से यह टैरिफ़ लगाना पड़ा."

  5. राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ़ के मुद्दे पर दक्षिण कोरिया को लेकर क्या एलान किया?

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका दक्षिण कोरिया से निर्यात होने वाले सामानों पर 15 फ़ीसदी का टैरिफ़ लगाएगा. हालांकि उनकी ओर से ये घोषणा दक्षिण कोरिया के साथ ट्रेड डील होने के बाद आई है.

    राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मुझे यह घोषणा करने में खुशी हो रही है कि अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ ट्रेड डील पर पूरी तरह से सहमत हो गया है."

    दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने कहा है कि इस समझौते से उनका देश बाक़ी देशों के मुक़ाबले समान या बेहतर स्थिति में रहेगा.

    यह घोषणा ठीक एक दिन पहले आई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से ट्रेड डील के लिए तय की गई 1 अगस्त की समयसीमा खत्म हो रही थी.

    इस समयसीमा तक देशों को अमेरिका के साथ समझौता करना है, वरना उन्हें ज़्यादा टैरिफ़ का सामना करना पड़ेगा.

    हालांकि अगर दक्षिण कोरिया ने अमेरिका से साथ यह समझौता नहीं किया होता, तो उस पर 25 फ़ीसदी लगाया जाता.

  6. फ़लस्तीन पर ब्रिटेन और फ़्रांस के बाद अब कनाडा भी एक बड़ा क़दम उठाने को तैयार

    फ़्रांस और ब्रिटेन के बाद अब कनाडा ने भी फ़लस्तीन को राष्ट्र का दर्जा देने की योजना बनाई है.

    प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि कनाडा सितंबर में फ़लस्तीन के राष्ट्र का दर्जा देने की योजना बना रहा है.

    कनाडा हाल के दिनों में ऐसी घोषणा करने वाला तीसरा जी7 देश बन गया है.

    कार्नी का कहना है कि ये क़दम लोकतांत्रिक सुधारों पर निर्भर करता है, जिसमें फ़लस्तीनी प्राधिकरण की ओर से अगले साल बिना हमास की भागीदारी के चुनाव कराना शामिल है.

    कनाडा के पीएम की ओर से ये टिप्पणी ब्रिटेन के सितंबर में फ़लस्तीन को राष्ट्र का दर्जा देने की घोषणा के एक दिन बाद आई है.

    ब्रिटेन की शर्त

    हालांकि ब्रिटेन ने शर्त रखी है कि अगर इसराइल युद्धविराम और अन्य शर्तों पर सहमत नहीं होता, तो वह सितंबर में फ़लस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देगा.

    इससे एक हफ्ते पहले फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था कि उनका देश फ़लस्तीन को इसी साल सितंबर में आधिकारिक तौर पर मान्यता देगा.

    इसराइली विदेश मंत्री ने कनाडा के इस घोषणा को 'हमास के लिए एक इनाम' बताते हुए ख़ारिज कर दिया.

    फ़लस्तीन को संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से 140 से ज़्यादा देशों की ओर से मान्यता प्राप्त है.

    कार्नी ने कहा है कि कनाडा आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा में फ़लस्तीन को को औपचारिक रूप से एक राष्ट्र का मान्यता देगा.

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