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अमेरिका समेत दुनिया के इन देशों में पेट्रोल की क़ीमत में भारी बढ़ोतरी

ब्रेंट क्रूड की एक बैरल की क़ीमत 73 डॉलर से बढ़कर 31 मार्च को क़रीब 117 डॉलर तक पहुंच गई है.

सारांश

लाइव कवरेज

अरशद मिसाल, रौनक भैड़ा

  1. क्या ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की जंग का ख़र्च उठाएंगे अरब देश, व्हाइट हाउस ने दिया ये जवाब

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अरब देशों से ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी जंग का ख़र्च उठाने को कह सकते हैं.

    व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इस ओर इशारा किया गया है.

    दरअसल, सोमवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ट्रंप की प्रवक्ता कैरोलाइन लेविट से पूछा गया कि क्या अरब देशों को युद्ध का ख़र्च उठाना चाहिए, जैसे 1990 के खाड़ी युद्ध में अमेरिकी सहयोगियों ने वॉशिंगटन की मदद की थी.

    इस सवाल पर लेविट ने कहा, "मुझे लगता है यह ऐसी बात है जिसमें राष्ट्रपति काफ़ी दिलचस्पी रखते हैं."

    उन्होंने आगे कहा, "मैं उनसे पहले कुछ नहीं कहूँगी, लेकिन इतना ज़रूर कह सकती हूँ कि यह उनके (डोनाल्ड ट्रंप) दिमाग़ में है और मुझे लगता है आप जल्द ही उनसे इस बारे में और सुनेंगे."

    कैरोलिन लेविट ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि अमेरिका अब तक ईरान में 11,000 से ज़्यादा सैन्य ठिकानों पर हमला कर चुका है.

    लेविट ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में सैनिक भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया है, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अब भी बातचीत है.

  2. एयरपोर्ट पर खड़े विमान पर अमेरिका का हमला, ईरान ने क्या कहा?

    ईरान के मशहद एयरपोर्ट पर अमेरिकी हवाई हमले में महान एयर (ईरान एयरलाइंस) का एक विमान क्षतिग्रस्त हुआ है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि यह विमान भारत जाने वाला था ताकि वहां से दवाइयां और मदद का सामान लाकर लोगों तक पहुंचाया जा सके.

    पीटीआई के मुताबिक़, अधिकारियों का कहना है कि यह विमान इसी हफ़्ते नई दिल्ली जाने वाला था. हालांकि, दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि नहीं की है.

    ईरान ने इस घटना को वॉर क्राइम और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का स्पष्ट उल्लंघन बताया है.

    भारत में स्थित ईरान के दूतावास ने एक्स पोस्ट में लिखा, "विमान में कई देशों से मंगवाई गई दवाएं और चिकित्सा उपकरण थे और वह एक मानवीय मिशन पर था. ऐसे नागरिक विमान को निशाना बनाना अंतर्राष्ट्रीय विमानन नियमों का उल्लंघन है और मानवीय क़ानून के सिद्धांतों के विपरीत है."

    ईरानी दूतावास ने कहा, "शिकागो कन्वेंशन (1944) और मॉन्ट्रियल कन्वेंशन (1971) के मुताबिक़, नागरिक विमानों की सुरक्षा के ख़िलाफ़ कोई भी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय अपराध मानी जाती है."

    दूतावास ने सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है. उन्होंने कहा, "इस हमले पर तुरंत कार्रवाई करें, ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दें और भविष्य में ऐसे ख़तरों को रोकें."

  3. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए ताज़ा हमले का वीडियो पोस्ट किया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें ईरान पर हुए ताज़ा हमलों को देखा जा सकता है.

    डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में केवल वीडियो साझा किया, इस पर उन्होंने कोई कैप्शन नहीं लिखा और ना ही यह बताया कि वीडियो ईरान में किस जगह का है.

    हालांकि, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि वीडियो ईरान के इस्फ़हान शहर पर हुए हमलों का है.

    इससे पहले सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सेना की तारीफ़ करते हुए लिखा था, "ईरान में बड़ा दिन. हमारी महान सेना ने कई लंबे समय से ढूँढे जा रहे ठिकानों को नष्ट कर दिया. हमारी सेना दुनिया में सबसे बेहतरीन और सबसे ताक़तवर है."

    इसी बीच अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप सैन्य अभियान ख़त्म करने को तैयार हो सकते हैं, भले ही होर्मुज़ स्ट्रेट काफ़ी हद तक बंद रहे.

  4. 'ट्रंप सैन्य अभियान ख़त्म करने को तैयार, भले ही होर्मुज़ स्ट्रेट...', रिपोर्ट में दावा

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान ख़त्म करने को तैयार हैं, भले ही होर्मुज़ स्ट्रेट काफ़ी हद तक बंद ही क्यों न रहे. यह दावा वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में किया गया है.

    अख़बार ने प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनके सहयोगियों ने आकलन किया है कि इस अहम समुद्री रास्ते को जबरन खोलने का मिशन लड़ाई को उनकी तय समयसीमा (चार से छह हफ़्ते) से आगे ले जाएगा.

    रिपोर्ट के मुताबिक़, ईरान की नौसेना और मिसाइल भंडार को गंभीर नुक़सान पहुंचाने के बाद, अब अमेरिका ईरान पर कूटनीतिक दबाव बनाए रखेगा ताकि व्यापार का प्रवाह फिर से शुरू हो सके.

    बीबीसी ने इस पर टिप्पणी के लिए व्हाइट हाउस से संपर्क किया है.

  5. रूस के बड़े तेल निर्यात ठिकानों पर हमला, बीबीसी वेरिफ़ाई ने पुष्टि की

    रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है. पिछले हफ़्ते यूक्रेन ने कई बार बाल्टिक सागर के पास रूस के बड़े तेल निर्यात ठिकानों पर हमला किया. इन हमलों के बाद कुछ जगहों पर कई दिनों तक आग जलती रही.

    बीबीसी वेरिफ़ाई ने पुष्टि की है कि 23 मार्च से अब तक रूस के लेनिनग्राद इलाक़े में, सेंट पीटर्सबर्ग शहर के पास (जो यूक्रेन की सीमा से लगभग 800 किलोमीटर दूर है) कम से कम तीन तेल ठिकानों पर हमला हुआ.

    बाल्टिक सागर के अहम बंदरगाह उस्त-लूगा और प्रिमोर्स्क पर अलग-अलग हमले हुए हैं. साथ ही पास में स्थित किरीशी तेल रिफ़ाइनरी पर भी हमला हुआ.

    फ़िनलैंड स्थित "सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर" के मुताबिक़, साल 2025 में रूस के कुल तेल निर्यात का 22% प्रिमोर्स्क से और 20% उस्त-लूगा से गया था.

    ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 26 और 27 मार्च को रूस के तीनों बाल्टिक बंदरगाहों से किसी भी जहाज़ में तेल नहीं भरा गया.

    सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा कि 24 मार्च को प्रिमोर्स्क में जलते तेल ठिकानों से भारी धुआँ उठ रहा था. 27 मार्च को उस्त-लूगा में आग और किरीशी रिफ़ाइनरी को बड़ा नुक़सान भी देखा गया.

  6. ईरानी हमले में दुबई बंदरगाह पर आग लगने से कुवैत का तेल टैंकर जला

    ईरानी हवाई हमले में दुबई बंदरगाह पर लगी आग में कुवैत का एक तेल टैंकर जल गया है. संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, समुद्री फ़ायरफ़ाइटिंग टीमें आग पर क़ाबू पाने की कोशिश कर रही हैं और जहाज़ पर मौजूद सभी 24 क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं.

    रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े मीडिया ने एक घंटे पहले ही कुवैती टैंकर को निशाना बनाए जाने की ख़बर दी थी और टैंकर से जुड़ी तस्वीरें भी जारी की थीं.

    इस टैंकर पर हमला उस समय हुआ है, जब कुछ ही घंटे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर तेहरान समझौते पर नहीं आता और होर्मुज़ स्ट्रेट बंद रहता है, तो ईरान की बिजली, तेल और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा.

    इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा था, "ईरान के हमले फ़ारस की खाड़ी के देशों पर नहीं, बल्कि 'दुश्मन हमलावरों' पर हैं, जो अरबों और ईरानियों का सम्मान नहीं करते."

    उन्होंने सोशल मीडिया पर संदेश देते हुए सऊदी अरब से अमेरिकी सेनाओं को अपने इलाक़े से बाहर निकालने की अपील भी की.