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ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने अपने एक लिखित संदेश में दावा किया है कि तुर्की और ओमान के कुछ इलाकों पर जो हमले हुए, वे ईरान की ओर से नहीं किए गए थे.
सुमंत सिंह, सुरभि गुप्ता
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ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा ख़ामेनेई ने अपने एक लिखित संदेश में दावा किया है कि तुर्की और ओमान के कुछ इलाकों पर जो हमले हुए, वे ईरान की ओर से नहीं किए गए थे.
मोजतबा ख़ामेनेई ने फ़ारसी नए साल नवरोज़ के मौक़े पर एक लिखित संदेश जारी किया है, जिसे सरकारी टीवी पर पढ़कर सुनाया गया है.
नौ पन्नों के संदेश में उन्होंने कहा कि ईरान अपने पूर्वी पड़ोसियों को बहुत करीबी मानता है. उन्होंने पाकिस्तान को अपने पिता अली ख़ामेनेई का "ख़ासतौर पर पसंदीदा देश" बताया.
उन्होंने पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच बेहतर संबंधों का आह्वान करते हुए कहा कि वह अपनी ओर से "ज़रूरी कदम उठाने" के लिए तैयार हैं.
इसराइल-अमेरिका के साथ युद्ध के दौरान पड़ोसी देशों पर हुए हमलों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "तुर्की और ओमान, जिनके साथ हमारे अच्छे संबंध हैं, उनके कुछ इलाक़ों पर जो हमले हुए, वे किसी भी तरह से इस्लामिक रिपब्लिक की सेना या रेजिस्टेंस फ़्रंट की फ़ोर्सेज़ ने नहीं किए थे."
उन्होंने इसराइल पर ईरान और उसके पड़ोसियों के बीच फ़ूट डालने के लिए "चाल" चलने का आरोप लगाया है.
ब्रिटिश विदेश मंत्रालय के अनुसार, ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने गुरुवार को एक फ़ोन कॉल पर ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची को ब्रिटिश ठिकानों पर हमला करने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी.
ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने ये जानकारी ईरानी विदेश मंत्रालय की ओर से इस कॉल का विवरण जारी किए जाने के बाद दी है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ इस बातचीत में अराग़ची ने कूपर से कहा था कि अमेरिका को ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने को "हमले में शामिल होना" माना जाएगा.
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस कॉल के दौरान कूपर ने "ईरान के हमलों" की निंदा की, जिसमें "अहम एनर्जी इन्फ़्रास्ट्रक्चर" पर किए गए हमले भी शामिल हैं.
उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट में "जहाजों की आवा-जाही को तुरंत बहाल करने" की भी मांग की और यह "स्पष्ट किया" कि ब्रिटेन के रक्षात्मक अभियान खाड़ी देशों के ख़िलाफ़ "ईरानी आक्रामकता की प्रतिक्रिया" में थे.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेटो के सहयोगी देशों को 'कायर' कहते हुए ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया है.
ट्रंप ने लिखा, "अमेरिका के बिना, नेटो एक कागज़ी शेर है! वे परमाणु शक्ति वाले ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे."
उन्होंने लिखा, "अब जब वह लड़ाई फ़ौजी तौर पर जीत ली गई है और उनके लिए ख़तरा भी बहुत कम है, तो उन्हें तेल की उन ऊंची कीमतों को लेकर शिकायत है, जो उन्हें चुकानी पड़ रही है. लेकिन वे 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' को खुलवाने में मदद नहीं करना चाहते, जो कि एक आसान-सी मिलिट्री कार्रवाई है."
ट्रंप ने इसे ही 'तेल की ऊँची कीमतों का एकमात्र कारण' बताया है.
ट्रंप ने आगे लिखा, "उनके लिए ऐसा करना कितना आसान है, और इसमें जोखिम भी कितना कम है. कायर. हम यह बात याद रखेंगे!"
बीते रविवार को ट्रंप ने यूरोपीय देशों को धमकी दी थी और कहा थी कि अगर वे होर्मुज़ स्ट्रेट खोलने में मदद नहीं करते हैं, तो यह नेटो के भविष्य के लिए 'बहुत बुरा' होगा.
लेकिन इसके बावजूद किसी भी यूरोपीय देश ने इसके लिए हामी नहीं भरी थी.
14 मार्च को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था, "उम्मीद है कि चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और दूसरे देश जहाज़ भेजेंगे ताकि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को ऐसे देश से ख़तरा न हो, जो पूरी तरह ख़त्म हो चुका है."
भारतीय ऑयल कंपनी इंडियन ऑयल ने कहा है कि वैश्विक कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि के बावजूद भारत में ऑटोमोटिव ईंधन की क़ीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है.
कच्चे तेल की क़ीमतों को लेकर एक सार्वजनिक सूचना में इंडियन ऑयल ने कहा है, "पिछले 20 दिनों में वैश्विक कच्चे तेल की क़ीमतें 71 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 156 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं."
"दुनिया भर में ईंधन की क़ीमतों में वृद्धि के बावजूद भारत में ऑटोमोटिव ईंधन की क़ीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है."
"इंडियन ऑयल ने केवल प्रीमियम पेट्रोल एक्सपी-95 (जो कुल पेट्रोल बिक्री का लगभग 5 प्रतिशत है) की क़ीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की सीमित वृद्धि की है."
प्रीमियम पेट्रोल एक हाई-ऑक्टेन ईंधन होता है, जो हाई-परफ़ॉर्मेंस या हाई-कम्प्रेशन वाले इंजनों के लिए होता है.
वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट किया, "कच्चे तेल की आपूर्ति में कोई रुकावट नहीं है. अतिरिक्त खेप पहले ही रास्ते में हैं, और आने वाले दिनों में ये भारत की आपूर्ति स्थिति को और मज़बूत करेंगी."
सऊदी अरब ने अब तक का सबसे सख़्त संकेत दिया है कि अगर ईरान उसके इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर हमले करना जारी रखता है, तो उसे जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
सऊदी अरब के विदेश मंत्री फ़ैसल बिन फ़रहान ने कहा, "हमारे सब्र की एक सीमा है."
उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके देश और उसके खाड़ी सहयोगियों के पास "काफ़ी क्षमताएं हैं, जिनका इस्तेमाल वे चाहें तो कर सकते हैं."
खाड़ी देशों के पास वाकई शक्तिशाली वायु सेनाएं हैं, जिन्हें उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन और फ़्रांस से बड़ी क़ीमत पर ख़रीदा है.
लेकिन ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इसराइल के इस संयुक्त युद्ध में शामिल होने में काफ़ी जोख़िम है.
ईरान के ख़िलाफ़ जंग से हो सकता है कि वह खाड़ी देशों पर अपनी बमबारी बढ़ा दे, और संभवतः सरकारी इमारतों जैसी जगहों को भी निशाना बनाना शुरू कर दे.
फिर घरेलू आबादी का पहलू भी है. हालांकि, सऊदी लोग बेहद देशभक्त होते हैं, लेकिन उनमें से कई लोग अपनी सरकार के इस कदम को अच्छी नज़र से नहीं देखेंगे कि वह किसी दूसरे मुस्लिम-बहुल देश के ख़िलाफ़ युद्ध में असल में इसराइल का साथ दे.
अमेरिका का कहना है कि वो ईरान के तेल को लेकर छूट देने की बात पर विचार कर रहा है, ताकि तेल की क़ीमतों पर काबू पाया जा सके. अगर ऐसा हुआ तो भारत को क्या फ़ायदा होगा? जानिए एक्सपर्ट से.
20 मार्च 2026 का न्यूज़ पॉडकास्ट दिनभर: पूरा दिन, पूरी ख़बर सुनिए मानसी दाश और सुमिरन प्रीत से.
अमेरिका को ब्रिटिश मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की मंज़ूरी पर ईरान की आपत्ति के बाद ब्रिटेन ने इस पर जवाब दिया है.
ब्रिटेन ने कहा है कि वह "व्यापक युद्ध में शामिल नहीं हो रहा".
ब्रिटेन की ओर से यह बात तब कही गई है, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर से कहा कि अमेरिका को ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने को "हमले में शामिल होना" माना जाएगा.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची की ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर से फ़ोन पर बात होने की जानकारी दी है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ इस बातचीत में अराग़ची ने कहा कि ब्रिटेन की ओर से अमेरिका को दी गई कोई भी मदद "हालात को और बिगाड़ देगी".
इसके बाद, अब ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा है, "हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है. हमने शुरुआती हमलों में हिस्सा नहीं लिया, और हम बड़े युद्ध में शामिल नहीं हो रहे हैं."
उन्होंने कहा, "हमने अमेरिका को ईरान के लगातार और घोर आक्रमण के जवाब में एक विशेष रक्षात्मक और सीमित उद्देश्य के लिए अपने बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है."
"हमने हमेशा कहा है कि यह ख़तरे को तुरंत ख़त्म करने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का सबसे अच्छा तरीका है."
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ हाइफ़ा में एक इसराइली तेल रिफ़ाइनरी के ऑपरेटर का कहना है कि गुरुवार को हुए ईरानी मिसाइल हमले में नुक़सान हुआ है.
हालांकि, ऑपरेटर ने कहा कि तेल रिफ़ाइनरी की ज़्यादातर उत्पादन सुविधाएं अभी भी चालू हैं.
हाइफ़ा के ऑयल रिफ़ाइनरीज़ लिमिटेड का कहना है कि गुरुवार के हमले में ज़रूरी इन्फ़्रास्ट्रक्चर को नुक़सान पहुंचा है, जिसमें किसी की मौत या किसी के घायल होने की ख़बर नहीं है.
ये भी बताया गया है कि जो उत्पादन सुविधाएं बंद हो गई थीं, उन्हें फिर से चालू किया जा रहा है.
उत्तरी इसराइल की हाइफ़ा खाड़ी में स्थित यह रिफ़ाइनरी, इसराइल की सबसे बड़ी तेल प्रोसेसिंग फ़ैसिलिटी है.
एसएंडपी ग्लोबल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसराइल की दो रिफ़ाइनरियों में से एक, हाइफ़ा एक बेहद अहम फ़ैसिलिटी है, क्योंकि इससे इसराइल को अपनी ज़रूरत का लगभग 60 प्रतिशत डीज़ल और 50 प्रतिशत गैसोलीन मिलता है.
वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत की रैंक पर आज का कार्टून.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मुखिया ममता बनर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी का घोषणापत्र जारी किया.
इस दौरान उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल की जनता ने हमें अपार आशीर्वाद, शुभकामनाएं, प्रार्थनाएं और समर्थन दिया है. हमने भी उनकी सेवा करने की पूरी कोशिश की है."
सीएम ममता ने बीजेपी पर साजिशें रचने का आरोप लगाते हुए कहा, "जब से बीजेपी सत्ता में आई है, तब से हर चुनाव में हमने कई तरह की साजिशें देखी हैं, लेकिन इस बार तो साजिश की सारी हदें पार कर दी गई हैं. ऐसा लगता है कि वे किसी भी तरह से बंगाल पर कब्ज़ा करना चाहते हैं और राज्य की सत्ता अपने हाथ में लेना चाहते हैं."
उन्होंने कहा, "बीजेपी सरकार एक गहरी साजिश रच रही है. देश को तबाही के कगार पर धकेल दिया गया है. कई राज्यों में कानून-व्यवस्था ठीक नहीं है और लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं."
सीएम ममता ने कहा, "बंगाल में एक 'अघोषित राष्ट्रपति शासन' थोप दिया गया है, क्योंकि बीजेपी जानती है कि होने वाले विधानसभा चुनावों में उसकी हार होगी. क्या पीएम मोदी बंगाल की जनता से इतने डरे हुए हैं?"
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे और 4 मई को मतगणना होगी.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक़ मध्य पूर्व में जारी जंग के चलते स्थिति अभी भी चिंताजनक है, हालांकि, किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के पास से किसी भी तरह की कमी की रिपोर्ट नहीं मिली है.
ये जानकारी मध्य पूर्व में हाल के घटनाक्रमों पर इंटर-मिनिस्ट्रियल ब्रीफ़िंग के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग एंड ऑयल रिफ़ाइनरी) सुजाता शर्मा ने दी है.
उन्होंने बताया, "लगभग साढ़े सात हज़ार कंज़्यूमर एलपीजी से पीएनजी पर शिफ़्ट हुए हैं...डिलीवरी ऑथेंटिकेशन बोर्ड की ओर से डिलीवरी की जा रही है. पैनिक बुकिंग में काफ़ी कमी है."
सुजाता शर्मा ने कहा, "एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी नॉर्मल है. पिछले एक हफ़्ते में लगभग 11300 टन कॉमर्शियल एलपीजी कंज़्यूमर्स को दी गई है. सभी राज्यों के पास सप्लाई उपलब्ध हैं."
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान ने ब्रिटेन से कहा है कि अमेरिका को उसके मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की इजाज़त देना "हमले में शामिल होना" माना जाएगा.
ईरान का कहना है कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर से फ़ोन पर बात की.
इस दौरान अराग़ची ने कहा कि ब्रिटेन की ओर से अमेरिका को दी गई कोई भी मदद "हालात को और बिगाड़ देगी".
अराग़ची ने मौजूदा हालात में ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देशों पर "पक्षपात वाला रवैया" अपनाने का आरोप लगाया.
ये भी रिपोर्ट है कि अराग़ची ने ब्रिटेन की इस बात के लिए भी आलोचना की कि उसने ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड्स पर इसराइल के हमलों की निंदा नहीं की.
इस बारे में अभी तक ब्रिटेन की सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है. बीबीसी ने ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय से इस पर टिप्पणी मांगी है.
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ ईरान पर अमेरिकी-इसराइली हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के प्रवक्ता और जनसंपर्क अधिकारी अली मोहम्मद नैनी की मौत हो गई है.
आईआरजीसी से जुड़ी 'फ़ार्स' न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अली मोहम्मद नैनी ने चार दशकों तक आईआरजीसी में सेवा दी और पिछले दो वर्षों से वह संगठन के प्रवक्ता के तौर पर काम कर रहे थे.
इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने भी अली मोहम्मद नैनी को ख़त्म करने की जानकारी देते हुए एक्स पर एक पोस्ट किया है.
इसराइली सेना ईरान की राजधानी तेहरान पर लगातार बमबारी कर रही है.
इसराइली सेना ने कहा कि वह ईरानी शासन के बुनियादी ढांचे को निशाना बना रही है, हालांकि उसने यह साफ़ नहीं किया कि उसका टारगेट क्या है.
लगातार बमबारी के बावजूद, ईरान का कहना है कि वह मिसाइलों का उत्पादन जारी रखे हुए है. उसका कहना है कि उसके मिसाइल भंडार में कोई ख़ास दिक्कत नहीं आई है.
वहीं अमेरिका और इसराइल का कहना है कि उनके हमलों ने ईरान की मिसाइल प्रोडक्शन क्षमता को कमज़ोर कर दिया है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने क्रिकेटर संजू सैमसन से जुड़ा एक क़िस्सा साझा किया है.
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि संजू सैमसन के लिए वह 'अंकल जैसे' रहे हैं.
शशि थरूर ने कहा, "मैंने संजू को बहुत प्रोत्साहित किया है. जब वह 14 साल का था, तब मैंने उससे कहा था कि वह अगला एमएस धोनी बनेगा."
उन्होंने कहा, "वह अपने खेल पर फ़ोकस्ड, शांत और संतुलित नज़र आता है. मैं उसे एक बार फिर वनडे टीम में वापस देखना चाहता हूं."
शशि थरूर ने हाल ही में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में भारत के आखिरी तीन मुक़ाबलों में संजू सैमसन की पारियों की तरीफ़ की.
संजू सैमसन केरल के तिरुवनंतपुरम के रहने वाले हैं.
नमस्कार!
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ईरान की राजधानी तेहरान पर इसराइल लगातार हवाई हमले कर रहा है. इस बीच ईरान के लोग नवरोज़ यानी फारसी नववर्ष मना रहे हैं.
19 मार्च की रात के दौरान ईरान ने भी यरूशलम पर कई मिसाइलें दागीं. रात भर आसमान में इंटरसेप्शन के तेज़ धमाके बार-बार सुनाई दिए.
इससे पहले इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने पत्रकारों से कहा कि ईरान अब "पूरी तरह कमज़ोर" हो चुका है और उसके पास न तो यूरेनियम संवर्धन करने की क्षमता है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की.
इस हफ़्ते, साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर इसराइल के हमले के जवाब में ईरान की कार्रवाई के बाद वैश्विक ऊर्जा क़ीमतों में तेज़ उछाल आया था.
अब इसराइल की ओर से ऐसे हमलों से परहेज करने के संकेत और अमेरिका की तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना के बाद क़ीमतें कुछ कम होने लगी हैं.
गुरुवार शाम एक संयुक्त बयान भी जारी हुआ, जिसमें ब्रिटेन, फ़्रांस, जापान और अन्य देशों ने होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए "उचित प्रयासों में योगदान देने की तैयारी" की बात कही.
इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्स ने कहा है कि सीरिया के अल-सुवेदा इलाक़े में द्रूज़ आबादी पर हुए हमलों के जवाब में उनसे सीरियाई सरकार से जुड़े ठिकानों पर हमले किए हैं.
आईडीएफ़ का कहना है कि ये हमले दक्षिणी सीरिया में किए गए.
इसराइली सेना ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया, "आईडीएफ़ ने गुरुवार रात दक्षिणी सीरिया में सरकार के सैन्य शिविरों में स्थित एक मुख्यालय और हथियारों के ठिकानों पर हमले किए. ये हमले गुरुवार की उन घटनाओं के जवाब में किए गए हैं, जिनमें अल-सुवेदा इलाक़े में द्रूज़ नागरिकों पर हमला किया गया था."
"इसराइली सेना सीरिया में द्रूज़ लोगों को किसी भी तरह का नुक़सान नहीं होने देगी और उनकी सुरक्षा के लिए लगातार कार्रवाई करती रहेगी. आईडीएफ़ दक्षिणी सीरिया में हो रही घटनाओं पर लगातार नज़र रखे हुए है और निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई करेगा."
ईरान के साथ युद्ध के बीच इसराइल लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ भी लगातार हमले कर रहा है और उसने अब सीरिया में भी हमले किए हैं.
इसराइल ने पिछले साल भी द्रूज़ समुदाय की सुरक्षा का हवाला देते हुए सीरिया में सैन्य हमले किए थे.
कौन हैं द्रूज़ समुदाय के लोग?
द्रूज़ समुदाय सीरिया, लेबनान, इसराइल और इसराइल के क़ब्ज़े वाले गोलान हाइट्स में रहने वाला धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है. ये अरबी भाषा बोलने वाले लोग हैं.
द्रूज़ धर्म शिया इस्लाम की एक शाखा है, जिसकी अपनी अलग पहचान और मान्यताएं हैं.
इसके क़रीब दस लाख अनुयायियों में से आधे सीरिया में रहते हैं, जहाँ वे कुल आबादी का लगभग तीन फ़ीसदी हैं.
इसराइल में द्रूज़ समुदाय के लोग सैन्य सेवा में अपनी भागीदारी के कारण राज्य के प्रति वफ़ादार माने जाते हैं.
इसराइल की केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, इसराइल और उसके क़ब्ज़े वाले गोलान हाइट्स में क़रीब एक लाख पचास हज़ार द्रूज़ रहते हैं.
ईरान से हमले रोकने की अपील के बावजूद, कुवैत की सरकारी तेल कंपनी कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कहा है कि उसकी तेल रिफ़ाइनरी पर कई ड्रोन हमले हुए हैं.
फ़िलहाल किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है.
सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक़, मीना अल-अहमदी रिफ़ाइनरी में आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए इमरजेंसी टीमों ने काफ़ी मेहनत की. रिफ़ाइनरी की कुछ यूनिटों को बंद भी करना पड़ा है.
खाड़ी देश ऊर्जा ठिकानों पर हमले से बचना चाहते थे. युद्ध के बीच उनके ऊर्जा ठिकाने बार-बार निशाने पर आ रहे हैं.
इसराइल की ओर से साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की है, जिसमें खाड़ी देश सीधे तौर पर इसकी चपेट में आ गए हैं.
रमज़ान के पवित्र महीने के अंत पर ईद उल-फितर मनाए जाने के बीच भी युद्ध थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं.
क़तर के रास लाफ़ान एलएनजी प्लांट पर ईरान के हमले के असर को पहले ही बड़ा माना जा रहा था. अब क़तर के ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि उनके देश को अरबों डॉलर का नुक़सान होगा.
क़तर स्थित रास लाफ़ान दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट है.
क़तर के ऊर्जा मंत्री साद बिन शेरिदा अल काबी का कहना है कि अगले पांच साल में क़तर की लिक्विफ़ाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) निर्यात क्षमता 17 फ़ीसदी तक घट जाएगी, जिससे देश को हर साल क़रीब 20 अरब डॉलर का नुक़सान होगा.
एलएनजी को बनाने के लिए नेचुरल गैस को बहुत कम तापमान पर ठंडा किया जाता है. इसके लिए बड़े औद्योगिक यूनिट का इस्तेमाल होता है, जिन्हें "ट्रेन" कहा जाता है. ऊर्जा मंत्री के मुताबिक़ ईरानी हमलों में प्लांट की 14 में से दो ट्रेन क्षतिग्रस्त हुई हैं.
ईरान ने रास लाफ़ान पर हमला इसराइली हमले के जवाब में किया. इसराइल की ओर से पर्शियन गल्फ़ में स्थित साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर हमला किया गया था.
सिंगापुर स्थित क्लीन फ्यूल्स मार्केट इंटेलिजेंस कंपनी हाईसाइट्स के चीफ़ कमर्शियल ऑफ़िसर सियारन रो ने बीबीसी से कहा, "पांच साल मरम्मत के लिए नहीं हैं, इनका पूरी तरह से फिर से निर्माण होगा."
एशियाई देश क़तर के एलएनजी पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं, ख़ासकर जापान, दक्षिण कोरिया, भारत और चीन.
यूरोप में इटली और बेल्जियम पहले ही बड़े ग्राहक हैं, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी गैस से दूरी बनाने की वजह से पूरा यूरोप मध्य-पूर्व की गैस पर तेज़ी से निर्भर हो रहा है.
विश्व स्तर पर देखें तो क़तर नेचुरल गैस बाज़ार में सबसे प्रमुख देश माना जाता है.
रो का कहना है, "बाज़ार में डर कई महीनों तक, यहां तक कि सालों तक बना रह सकता है. इससे सरकारों की एलएनजी आयात को लेकर सोच बदल सकती है."
एलएनजी एक अहम ऊर्जा स्रोत है, जिसका इस्तेमाल घरों को गर्म रखने, खाना पकाने, जहाजों और कारखानों को चलाने में होता है. खाद बनाने के लिए भी इसकी ज़रूरत होती है.