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यूक्रेन: खारकिएव की सुपर मार्केट पर रूस का हमला, दो लोगों की मौत

यूक्रेन के शहर खारकिएव की सुपर मार्केट पर रूस ने हमला किया है.

सारांश

  • गुजरात के राजकोट में टीआरपी मॉल में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई है.
  • शनिवार को राजस्थान के फलोदी में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.
  • भारतीय निर्वाचन आयोग के मुताबिक़ 507,297,288 करोड़ मतदाताओं ने पांचवें चरण तक अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.
  • आईपीएल के दूसरे क्वालिफ़ायर में राजस्थान रॉयल्स को हराकर फ़ाइनल में पहुंची सनराइज़र्स हैदराबाद की टीम, केकेआर से होगा मुक़ाबला.

लाइव कवरेज

  1. महबूबा मुफ़्ती वोटिंग के दौरान धरने पर बैठीं, पोलिंग एजेंटों को बेवजह हिरासत में लिए जाने का लगाया आरोप

    जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती लोकसभा चुनाव के छठे चरण की वोटिंग के दिन धरना प्रदर्शन पर बैठ गई हैं.

    महबूबा मुफ़्ती का आरोप है कि उनकी पार्टी के पोलिंग एजेंटों और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बेवजह हिरासत में ले लिया है.

    महबूबा मुफ़्ती अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं.

    महबूबा मुफ़्ती ने देर रात एक ट्वीट में लिखा, "हमारे कई पीडीपी पोलिंग एजेंटों और कार्यकर्ताओं को वोटिंग से एन पहले हिरासत में लिया जा रहा है. जब उनके परिवार वाले पुलिस थाने गए तो उन्हें बताया गया कि ये सब अनंतनाग के एसएसपी और साउथ कश्मीर के डीआईजी के निर्देशों पर हो रहा है. हमने चुनाव आयोग को इस बारे में लिखा है. उम्मीद है कि समय पर हस्तक्षेप किया जाएगा."

    समाचार एजेंसी एएनआई से महबूबा मुफ़्ती ने कहा, "पीडीपी कार्यकर्ताओं को बेवजह पुलिस थानों में बंद किया जा रहा है. डीजी, एलजी और ऊपर से लेकर नीचे तक सारे अधिकारी इसमें मिले हुए हैं. आपने कहा था कि निष्पक्ष चुनाव होंगे लेकिन आप ये सब कर रहे हैं. कई जगहों से शिकायतें आई हैं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की जा रही है."

  2. लोकसभा चुनाव के छठे चरण में राष्ट्रपति सहित इन बड़े चेहरों ने डाला वोट

    लोकसभा चुनाव के छठे चरण में छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 58 सीटों पर चुनाव हो रहा है.

    इस बीच कई बड़े नेता अपना मतदान कर चुके हैं. देखिए तस्वीरें:

  3. पश्चिम बंगाल: मतदान से पहले टीएमसी कार्यकर्ता की हत्या से तनाव, प्रभाकरमणि तिवारी, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

    पश्चिम बंगाल में पूर्व मेदिनीपुर ज़िले की तमलुक संसदीय सीट के तहत महिषादल में मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की हत्या से इलाके में भारी तनाव फैल गया है.

    उसी ज़िले के मोयना में हिंसा की अन्य घटना में एक टीएमसी कार्यकर्ता को सिर पर गंभीर चोटें आई हैं. तृणमूल ने इस हिंसा के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

    लेकिन बीजेपी ने इसे तृणमूल के दो गुटों की अंतर्कलह का नतीजा बताया है. पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया है और पूछताछ कर रही है.

    इससे दो दिन पहले तमलुक संसदीय क्षेत्र के ही नंदीग्राम इलाके में बीजेपी की एक महिला कार्यकर्ता की हत्या के बाद बड़े पैमाने पर आगजनी हुई थी. इसके अलावा कई अन्य इलाकों से भी छिटपुट हिंसा की खबरें मिल रही हैं.

    कुछ मतदान केंद्रों पर पोलिंग एजेंटों को नहीं पहुंचने के कारण मतदान देरी से शुरू हुआ. सीपीएम ने हल्दिया में अपने पोलिंग एजेंट के अपहरण का आरोप लगाया है.

    इसी तरह तमलुक में टीएमसी उम्मीदवार देवांशु भट्टाचार्य ने अपने दो पोलिंग एजेंटों के अपहरण का आरोप लगाया है.

    इस चरण में पांच ज़िलों की आठ सीटों के लिए मतदान हो रहा है. इनमें जंगलमहल इलाका भी शामिल है. पिछली बार इनमें से पांच सीटें बीजेपी ने जीती थी और तीन टीएमसी ने.

    जिस इलाके में हत्या और हिंसा हुई, उसे बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी और उनके परिवार का गढ़ माना जाता है. सुरक्षा के लिहाज से इस चरण में राज्य में सुरक्षा बलों की सबसे ज्यादा 919 कंपनियां तैनात की गई हैं.

    पुलिस ने बताया कि महिषादल में टीएमसी कार्यकर्ता शेख मईबुल (42) की शुक्रवार देर रात धारदार हथियार से गोद कर हत्या कर दी गई.

    वे ग्राम पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं. गंभीर रूप से घायल मईबुल ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है.

    महिषादल के टीएमसी विधायक तिलक कुमार चक्रवर्ती ने आरोप लगाया, "बीती रात चुनाव से संबंधित काम खत्म करने के बाद घर लौटते समय बीजेपी से जुड़े असामाजिक तत्वों ने मईबुल पर हमला कर दिया. इलाके की पंचायत पर बीजेपी का कब्ज़ा होने के बाद हिंसा बढ़ी है."

    लेकिन स्थानीय बीजेपी नेता प्रदीप बिजली का दावा है कि इसके पीछे तृणमूल के दो गुटों की आपसी रंजिश है. उनका सवाल था, "हम किसी की हत्या क्यों करेंगे?"

    पुलिस ने बताया है कि इस मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. फिलहाल इलाके में परिस्थिति नियंत्रण में है.

  4. दिल्ली में चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी और उपराज्यपाल आमने-सामने

    दिल्ली में वोटिंग से पहले शुक्रवार की रात उपराज्यपाल वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं के बीच जमकर ज़ुबानी जंग छिड़ी रही.

    दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर शनिवार को लोकसभा की सात सीटों के लिए होने जा रहे मतदान की तैयारियों को लेकर सवाल उठाए.

    रात 9 बजकर 47 मिनट पर आम आदमी पार्टी की सरकार में मंत्री आतिशी ने एक्स पर दावा किया, "ऐसी जानकारी मिली है कि आज दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिए हैं कि जहां इंडिया गठबंधन के वोटर भारी संख्या में हैं, वहां पर वोटिंग धीरे करवानी है ताकि लोगों को वोट डालने में दिक़्क़त हो."

    आतिशी ने कहा कि प्रशासन द्वारा भाजपा को जिताने का ऐसा कोई भी प्रयास ग़ैर-क़ानूनी, ग़ैर लोकतांत्रिक और ग़ैर-संवैधानिक है. उन्होंने उम्मीद जताई की चुनाव आयोग इस पर संज्ञान लेगा.

    आतिशी के इसी ट्वीट को कोट करते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, "ये चौंकाने वाला है. चुनाव आयोग को दिल्ली में बिना बाधा के मतदान सुनिश्चित करना चाहिए."

    एक्स पर ये बहस आधी रात तक चली और दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इस पर पलटवार किया.

    उन्होंने लिखा, "आदत ही बना ली है आप ने तो ऐ केजरीवाल साहब, जिस हाल में रहना, बस रोते हुए रहना!"

    उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इन दावों को अस्वीकार्य और बेतुका बताया. उन्होंने कहा कि ये मनगढ़ंत दावे मतदाताओं को गुमराह करके लोकतंत्र को नष्ट करने की एक जानबूझकर की गई योजना है. इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

  5. इसराइल ने रफ़ाह में सैन्य अभियान रोकने वाले अंतरराष्ट्रीय अदालत के आदेश पर क्या कहा?

    इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के कुछ सहयोगियों ने आईसीजे के फ़ैसले के बाद अदालत पर यहूदी विरोधी भावना और हमास का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए गुस्से में प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

    हालांकि, इस बात के कोई संकेत नहीं दिख रहे कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस यानी आईसीजे की ओर से रफ़ाह में सैन्य अभियान रोकने के आदेश के बाद भी इसराइल अपना रुख बदलेगा.

    अभी भी इसराइल के टैंक रफ़ाह के मध्य वाले इलाक़ों में पहुंच रहे हैं.

    इसराइली सरकार के पूर्व प्रवक्ता इलोन लेवी ने कहा कि फ़ैसला सुनाने वाले पीठासीन न्यायाधीश लेबनानी थे और अगर उन्होंने 'गलत तरीके' से आदेश दिया तो वह सुरक्षित ढंग से घर नहीं लौट सकते.

    आईसीजे ने इसराइल को ग़ज़ा के रफ़ाह में चलाए जा रहे सैन्य अभियान को रोकने का आदेश दिया था.

    आईसीजे ने दक्षिण अफ्रीका की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया.

    आईसीजे ने कहा कि इसराइल को रफ़ाह में चलाए जा रहे सैन्य अभियान को तुरंत रोक देना चाहिए, इससे फ़लस्तीनियों को ख़तरा है.

    टाइम्स ऑफ़ इसराइल की रिपोर्ट के अनुसार इस आदेश के बाद इसराइल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और विदेश मंत्रालय ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें कहा गया है कि इसराइल ने दक्षिणी ग़ज़ा के शहर में रहने वाले आम लोगों की जान जोख़िम में डालने वाला अभियान न तो चलाया है और न ही आगे करेगा.

  6. नमस्कार !

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