चैंपियंस ट्रॉफी के पहले मैच में न्यूज़ीलैंड ने पाकिस्तान को 60 रन से हराया

कराची के नेशनल स्टेडियम में खेले गए इस मैच मे टाॅस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूज़ीलैंड ने पाकिस्तान के सामने जीत के लिए 321 रनों का मजबूत लक्ष्य रखा था.

सारांश

लाइव कवरेज

अश्वनी पासवान, इफ़्तेख़ार अली

  1. पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हमलावरों ने बस से लोगों को उतारकर गोली मारी

    पाकिस्तानी सैनिक

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    इमेज कैप्शन, अज्ञात हमलावरों ने क्वेटा से लाहौर जा रही एक यात्री बस को निशाना बनाया था (फ़ाइल फ़ोटो)

    पाकिस्तान के बलूचिस्तान के बरख़ान ज़िले में एक यात्री बस पर अज्ञात हमलावरों ने गोलीबारी की है. इसके बाद हमलावरों ने लोगों को बस से उतारकर उनकी हत्या कर दी.

    ये हमला मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को हुआ है.

    बरख़ान के डिप्टी कमिश्नर वक़ार ख़ुर्शीद ने बीबीसी को बताया कि अज्ञात हमलावरों ने क्वेटा से लाहौर जा रही एक यात्री बस को निशाना बनाया था.

    उन्होंने कहा कि हमलावरों ने सात लोगों को बस से उतारकर उनकी हत्या कर दी.

    डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक पाकिस्तान के पंजाब के थे.

  2. भारत में मतदान को बढ़ावा देने वाली फ़ंडिंग रोकने पर ट्रंप बोले- उनके पास बहुत पैसा है

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा टैक्स लगाने वाले देशों में से एक है

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए दी जाने वाले आर्थिक मदद रोकने के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया दी है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "हम भारत को 21 मिलियन डॉलर क्यों दे रहे हैं. उनके पास बहुत पैसा है. भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा टैक्स लगाने वाले देशों में से एक है. हम मुश्किल से वहां पहुंच सकते हैं क्योंकि उनके टैरिफ़ बहुत ऊंचे हैं."

    ट्रंप ने कहा कि वो भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और वो दो दिन पहले ही यहां से गए हैं, लेकिन वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर क्यों देना?

    हाल ही में अमेरिका के नए सरकारी विभाग और अरबपति एलन मस्क के नेतृत्व वाले डिपार्टमेंट गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी यानी डीओजीई ने विभिन्न देशों को दी जाने वाले अमेरिकी मदद रोकने की घोषणा की थी.

    इस घोषणा में भारत में मतदान को बढ़ावा देने के लिए दिए जाने वाली फ़ंडिंग भी शामिल थी.

  3. यूक्रेन की जंग थमी तो शांति बनाए रखने के लिए जा सकती है ब्रिटेन की सेना

    ब्रिटिश सैनिक
    इमेज कैप्शन, ब्रिटिश सैनिक

    ब्रिटेन की सेना ने कहा कि वो सरकार के कहने पर यूक्रेन में तैनात होने के लिए तैयार हैं.

    इस हफ्ते रोमानिया में 2,500 ब्रिटिश सैनिक नॉर्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन यानी नेटो अभ्यास में भाग ले रहे हैं.

    ये यूक्रेन की सीमा से सिर्फ 25 किलोमीटर दूर है.

    नेटो अभ्यास में ब्रिटिश सेना ब्रिगेडियर एंडी वॉटसन की देख-रेख में हिस्सा ले रही है. उन्होंने कहा कि यूक्रेन में सैनिकों को तैनात करने का आदेश मिलता है तो उनकी ब्रिगेड 'बिल्कुल तैयार' है.

    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने भी हाल ही में कहा था कि युद्धविराम होता है तो वह यूक्रेन की सुरक्षा में मदद के लिए ब्रिटिश सेना भेजने के लिए तैयार हैं.

    यूक्रेन में जारी जंग को खत्म करने के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ के बीच मंगलवार को ही शांति वार्ता पर सऊदी अरब में चर्चा हुई.

    इस पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि उन्हें रूस-अमेरिकी वार्ता में आमंत्रित नहीं किया गया था.

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  4. यूक्रेन पर रूस-अमेरिका के बीच बातचीत कहां तक पहुँची, ट्रंप ने क्या कहा?

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग का अंत चाहते हैं

    यूक्रेन में जारी जंग को खत्म करने के लिए सऊदी अरब में अमेरिका और रूस के बीच हुई शांति वार्ता को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'बहुत अच्छा' बताया है.

    ट्रंप ने कहा कि मीटिंग के बाद से उन्हें शांति वार्ता पर पहले से 'ज्यादा आत्मविश्वास' है.

    उन्होंने कहा, "रूस कुछ करना चाहता है. वे बर्बरता को रोकना चाहते हैं. हर हफ्ते हज़ारों सैनिक मारे जा रहे हैं. ये मूर्खतापूर्ण है."

    "हम इसका अंत चाहते हैं और यह एक निरर्थक युद्ध है. अगर मैं राष्ट्रपति होता तो ऐसा (युद्ध) कभी नहीं होता."

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ के बीच यूक्रेन में जारी जंग को खत्म करने पर मंगलवार को सऊदी अरब में शांति वार्ता हुई थी.

    इस पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा, “हम सब पारदर्शिता चाहते हैं ताकि कोई पीठ पीछे कुछ न तय करे. हमें रूस-अमेरिकी वार्ता में आमंत्रित नहीं किया गया था. बाकी लोगों की तरह हमारे लिए भी यह हैरानी वाला था. हमें मीडिया से पता चला.”

  5. नमस्कार!

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