बेंगलुरु की अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में चल रहे विवाद पर बेंगलुरु ग्रामीण पुलिस ने दूसरी शिकायत दर्ज की है. यह शिकायत सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी है.
पोस्ट में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों द्वारा यूनिवर्सिटी में की गई तोड़फोड़ का ज़िक्र है.
दरअसल, मंगलवार देर शाम क़रीब 20-25 एबीवीपी सदस्य सरजापुर स्थित यूनिवर्सिटी कैंपस में घुस गए थे. उन्होंने यूनिवर्सिटी के मुख्य बोर्ड को काले रंग से पेंट कर दिया और कैंपस में तोड़फोड़ की.
एबीवीपी के सदस्य 'कुनान पोशपोरा' नाम से आयोजित एक चर्चा का विरोध जता रहे थे. यह चर्चा जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले के कुनान और पोशपोरा गांवों में 'सुरक्षा बलों द्वारा 35 महिलाओं के साथ कथित बलात्कार' के आरोपों से जुड़ी थी.
इस मामले में एबीवीपी ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र भी लिखा. इसमें उन्होंने कहा, "यह चर्चा देश-विरोधी विचारों को बढ़ावा दे रही है और सीमा पर तैनात सैनिकों को बलात्कारी दिखा रही है.”
एबीवीपी ने इस कार्यक्रम को आयोजित कराने वाले ग्रुप ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की.
यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि उसने इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी. यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया, “हमारे कैंपस में जबरन घुसने वाले लोग एक कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे. जबकि अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने ऐसा कोई कार्यक्रम मंज़ूर नहीं किया था. यह कार्यक्रम हुआ ही नहीं.”
यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को बताया, "जो लोग बाहर से आकर विरोध कर रहे थे, उन्हें इस कार्यक्रम के बारे में ग़लत जानकारी मिली थी. यह ग़लत जानकारी 'स्पार्क एपीयू' के सोशल मीडिया अकाउंट से गई थी."
प्रवक्ता ने कहा, "हमने पुलिस को बताया है कि यह सोशल मीडिया अकाउंट अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी का अधिकृत अकाउंट नहीं है और किसी भी तरह से यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व नहीं करता. हमने पुलिस से कहा है कि इस मामले की जांच करें और ज़रूरी कदम उठाएं."
बेंगलुरु ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत एमवी ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को बताया, “यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार से सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी दूसरी शिकायत मिली है. एक और छात्र संगठन ने यूनिवर्सिटी के नाम का ग़लत इस्तेमाल किया है. इसकी जांच की जा रही है.”
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दूसरी शिकायत आईटी एक्ट के तहत दर्ज हुई है.
गौरतलब है कि पुलिस ने मंगलवार शाम तोड़फोड़ के तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया था. कोर्ट के आदेश पर बुधवार को उन्हें रिहा कर दिया गया.