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यूएन में पीएम मोदी और स्नेहा दुबे पर क्या कह रहा है पाकिस्तान का मीडिया - उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण पर पाकिस्तान ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में भारतीय प्रधानमंत्री पर तीखी टिप्पणी की है.
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए मोदी ने शनिवार को पाकिस्तान का नाम लिए बग़ैर कहा था, "पीछे ले जाने वाली सोच के साथ जो देश आतंकवाद का इस्तेमाल राजनीतिक उपकरण के तौर पर कर रहे हैं, उन्हें ये समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा ख़तरा है. ये तय करना बहुत ज़रूरी है कि अफ़ग़ानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलो के लिए न हो."
मोदी का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों को मदद की ज़रूरत है और उनकी मदद करने में सब लोगों को अपना रोल अदा करना होगा.
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री शेख़ रशीद ने मोदी के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "नरेंद्र मोदी को अफ़ग़ानिस्तान में अल्पसंख्यकों का दर्द नज़र आता है, भारत में अल्पसंख्यकों पर हो रहे ज़ुल्म दिखाई नहीं देते."
शेख़ रशीद ने मोदी के भाषण को एक प्रधानमंत्री के बजाए एक काउंस्लर की स्पीच क़रार दिया.
शेख़ रशीद का कहना था, "मोदी की स्पीच दुनिया के बड़े फ़ोरम पर निम्नस्तरीय और छोटी थी. भारतीय प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान ऐसा लग रहा था कि काउंसिल का कोई लीडर संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है."
शेख़ रशीद ने कहा कि मोदी ने अपने भाषण के दौरान भारत के कोरोना वैक्सीन की मार्केटिंग की नाकाम कोशिश की.
भारत की स्नेहा दुबे का जवाब दिया पाकिस्तान की सायमा सलीम ने
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के भाषण का जवाब राइट टु रिप्लाई के तहत संयुक्त राष्ट्र में भारत की फ़र्स्ट सेक्रेटरी स्नेहा दुबे ने दिया था.
स्नेहा दुबे ने इमरान ख़ान का जवाब देते हुए कहा था, "पाकिस्तान, वो मुल्क है, जहाँ आतंकवादी स्वतंत्र रहते हैं. पाकिस्तान वो मुल्क है, जो अपने पड़ोसियों को परेशान करने के लिए पीछे से आतंकवाद प्रायोजित कर रहा है. पाकिस्तान वास्तव में आग लगाने वाला है लेकिन वो ख़ुद को अग्निशामक के रूप में देखता है."
स्नेहा दुबे ने अपने भाषण के अंत में इस बात को दोहराया था कि जम्मू- कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे.
स्नेहा दुबे के भाषण के बाद भारत की सोशल मीडिया में उनकी ख़ूब तारीफ़ हो रही है. वहीं, संयुक्ता राष्ट्र में स्नेहा दुबे का जवाब पाकिस्तान की अधिकारी सायमा सलीम ने दिया है.
सायमा सलीम ने कहा, "जम्मू-कश्मीर ना ही भारत का अभिन्न हिस्सा है और ना ही यह भारत का अंदुरूनी मामला है. हिमालय की गोद में बसा यह इलाक़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत विवादित क्षेत्र है. भारत इस इलाक़े पर क़ब्ज़ा किए हुआ है जिसका हल संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत-संग्रह के ज़रिए किए जाने की ज़रूरत है."
जिस तरह से स्नेहा दुबे भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में छाई हुई हैं उसी तरह सायमा सलीम पाकिस्तानी मीडिया में हर जगह छाई हुई हैं.
सायमा सलीम आंखों से देख नहीं सकती हैं, इसलिए उनके बारे में और ज़्यादा लोग बातें कर रहे हैं.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉक्टर आरिफ़ अल्वी ने कहा, "ना केवल मुझे बल्कि पूरे राष्ट्र को उन पर गर्व है. वो दृष्टि बाधित हैं फिर भी यूएन में शानदार भाषण दे रही हैं. हम ऐसा ही पाकिस्तान चाहते हैं, जहाँ लोग अपनी योग्यता के बल पर ऊपर उठें, एक ऐसी जगह जहां सबको बराबरी का अधिकार मिले."
राष्ट्रपति के अलावा कई मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने भी सायमा सलीम की तारीफ़ की है.
इमरान ख़ान ने अपने भाषण में रोनाल्ड रीगन को ग़लत कोट किया?
पाकिस्तान में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन को ग़लत कोट किया था.
इमरान ख़ान ने अपने भाषण में कहा था, "1983 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने अफ़ग़ान मुजाहिदीन को व्हाइट हाउस में बुलाया था और मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार रीगन ने उनकी तुलना अमेरिका के संस्थापकों से की थी."
इमरान के भाषण के बाद पाकिस्तान की एक पत्रकार गरीदाह फ़ारूक़ी ने ट्वीट किया, "अंतरराष्ट्रीय मंच पर कितनी बड़ी शर्मिंदगी और इस बार संयुक्त राष्ट्र महासभा में. अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने कभी भी अफ़ग़ान मुजाहिदीनों की तुलना अमेरिका के संस्थापकों से नहीं की थी. यह फ़ेक न्यूज़ है. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान इतने प्रतिष्ठित फ़ोरम पर पाकिस्तान का पक्ष मज़बूत करने के लिए फ़ेक न्यूज़ का सहारा ले रहे हैं. प्रधानमंत्री के लिए किसने यह स्पीच लिखी है उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाना चाहिए."
गरीदाह फ़ारूक़ी के ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) की उपाध्यक्ष मरियम नवाज़ ने ट्वीट किया, "स्पीच लिखने वाले को नहीं, इमरान ख़ान को निकाल देना चाहिए. यह ख़राब चयन था."
फिर क्या था कई सारे लोग इस पर प्रतिक्रिया देने लगे. इमरान ख़ान की पार्टी के लोग भी अपने नेता का बचाव करने उतर आए. किसी ने रीगन की वीडियो क्लिप लगाई तो किसी ने कहा कि क्लिप को एडिटेड क़रार दिया.
किसी ने कहा कि रीगन ने अफ़ग़ानिस्तान के मुजाहिदीनों के लिए नहीं बल्कि निकारागुआ के विद्रोहियों की तुलना अमेरिका के संस्थापकों से की थी.
किसी ने कहा कि रीगन ने तुलना की हो या नहीं, लेकिन रीगन अफ़ग़ानिस्तान में रूसी क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ लड़ रहे अफ़ग़ान मुजाहिदीनों को हमेशा से हीरो मानते थे.
भारत से संबंध: बाइडन ओबामा वाली ग़लती कर रहे हैं
अख़बार नवा-ए-वक़्त के संपादकीय पेज पर छपे एक लेख में कहा गया है कि भारत से संबंध के मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन वही ग़लती कर रहे हैं जो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा कर चुके हैं.
पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद अकरम चौधरी के इस लेख में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन भारत के मानवाधिकार उल्लंघनों को दरकिनार करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं.
लेख में कहा गया है कि मोदी के अमेरिका पहुँचने पर सिखों और मुसलमानों समेत कई लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. अमेरिका चीन का मुक़ाबला करने के लिए भारती की तरफ़ झुका हुआ है और यही वजह है कि वो भारत की तमाम मानव विरोधी हरकतों को भी नज़रअंदाज़ कर रहा है.
हाल ही में हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी के दिल्ली स्थित आवास पर हुए हमले का ज़िक्र करते हुए लेख में कहा गया है कि हिंदूवादी चरमपंथी संगठनों की इतनी जुर्रत हो गई है कि वो एक मुसलमान सांसद को भी बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हैं, इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कमज़ोर इंसान के साथ कैसा सुलूक किया जाता होगा.
लेख के अंत में कहा गया है कि दुनिया को अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास करना होगा. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने भी अगर आंखें बंद रखीं तो निश्चित तौर पर किसी बड़े नुक़सान की ज़िम्मेदारी उन पर होगी.
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