अज़रबैजान के ख़िलाफ़ जंग में अब तक आर्मीनिया के 700 से अधिक सैनिकों की मौत

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अज़रबैजान के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में आर्मीनिया की तरफ़ मरने वाले सैनिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
सोमवार को आर्मीनिया की सेना ने इस लिस्ट में 19 और सैनिकों का नाम जोड़ा. इसके साथ ही इस जंग में आर्मीनिया की तरफ़ से मरने वाले सैनिकों की संख्या बढ़कर 729 हो गई है.
आर्मीनिया के रक्षा मंत्रालय ने इससे पहले कहा था कि मुमकिन हो कि ये आंकड़ें अधूरे हों. लगातार जारी लड़ाई में मरने वाले लोगों के आंकड़ें देरी से प्राप्त हो सकते हैं.
हालांकि दूसरी तरफ़ अज़रबैजान अपनी तरफ़ से जानोमाल के किसी किस्म के नुक़सान का कोई ब्योरा नहीं दे रहा है.
राष्ट्रपति इलहाम एलियेव ने एक इंटरव्यू में हाल ही में कहा था कि जंग ख़त्म होने के बाद ये जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.
दूसरी तरफ़ अज़रबैजान के प्रॉसिक्यूटर जनरल के ऑफ़िस ने सोमवार को बताया कि अग़दाम इलाके में मोर्चे पर गोलीबारी के कारण चार लोग घायल हुए हैं.

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ईरान ने दी चेतावनी
ईरान ने कहा है कि अगर काराबाख़ की तरफ़ से ईरान की धरती पर मिसाइल या तोप के गोले आए तो वो इसका जवाब देगा. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद ख़तीबज़ादे ने कहा, "ईरान की धरती पर किसी भी तरह का हमला हुआ, चाहे वो अनजाने में ही किया गया क्यों ना हो, तो फिर ईरान उसका उययुक्त जवाब देगा."
समाचार एजेंसी तास ने ईरानी विदेश मंत्रालय की प्रेस सर्विस के हवाले से यह ख़बर दी है. पिछले हफ़्ते ऐसी ख़बरें आईं थीं कि मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम से कम से कम आठ मिसाइलें दाग़ी गईं थीं जो कि अराकेज़ नदी के ईरानी किनारे की तरफ़ खोड़ा अफ़ारीन इलाक़े में गिरी थीं. इसमें कोई हताहत नहीं हुआ था.
शनिवार को अज़ेरी सेना ने इसी नदी के दूसरे किनारे पर अपना झंडा गाड़ दिया था. काराबाख़ में सिर्फ़ तीन हफ़्तों की लड़ाई में कई दर्जन मिसाइल और गोले ईरान की सीमा में उड़कर चले गए हैं.
इन तीन हफ़्तों में ईरानी प्रेस और सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें देखी गई हैं जिनमें ईरान के सीमावर्ती इलाक़ों में रह रहे लोग पहाडियों पर से दूसरी तरफ़ हो रही जंग को देख रहे हैं. अज़रबैजान और आर्मीनिया से सेट ईरानी इलाक़ों में ज़्यादा तर अज़रबैजान मूल के लोग रहते हैं.

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अज़रबैजान के राष्ट्रपति का दावा
अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने दावा किया है कि उनकी सेना ने दक्षिणी जेबरैल ज़िले के 13 और गांवों पर दोबारा क़ब्ज़ा कर लिया है.
सोमवार को राष्ट्रपति इल्हाम अलीवेय ने ट्वीट किया, "जेबरैल ज़िले के सोलतानी, अमीरवर्ली, हसनाली, अलीकेशानली, क़ुमलक़, हासिली, गोयारसिनवेसल्ली, नियाज़कुल्लर, केसाल मम्मदली, साहवली, हासी इस्माइली और इसाक़ली गांव आज़ाद करा लिए गए हैं."
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ब्लॉगर हबीब मुन्तज़िर ने एक मैप पोस्ट किया है जिससे पता चलता है कि यह सारे गांव ईरान की सीमा के आस-पास हैं.
राष्ट्रपति ने 18 अक्टूबर को ट्वीट किया था कि अज़रबैजान की सेना ने अराकेज़ नदी पर बने ख़ुदाफ़ारिन पुल पर अपना झंडा फहरा दिया है जो कि 1990 के दशक से आर्मीनिया के क़ब्ज़े में था.
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कई लोगों ने टेलीग्राम पर वीडियो शेयर किए हैं जिनमें ख़ुदाफ़ारिन पुल के पास ईरान के दर्जनों अज़रबैजानी अज़ेरी सैनिकों का स्वागत करते हुए देखे जा सकते हैं.

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अज़रबैजान ने शवों को वापस करने की दोबारा पेशकश की
अज़रबैजान में युद्ध में बंदी बनाए गए या लापता हुए लोगों के आयोग ने एक बार फिर अपने प्रस्ताव को दोहराया है जिसमें उसने आर्मीनिया के सैनिकों के शवों को आर्मीनिया-अज़रबैजान सीमा के उत्तरी सेक्शन में बने एक ख़ास कॉरिडोर के रास्ते वापस करने की बात कही है.
अज़रताज़ एजेंसी के अनुसार इस आयोग के अधिकारियों ने रेड क्रॉस के अधिकारियों से मुलाक़ात की है और उनसे आधिकारिक तौर पर आर्मीनियो को इस प्रस्ताव की सूचना देने के लिए कहा है.
शनिवार रात और रविवार के बीच दोनों पक्षों ने युद्ध विराम की घोषणा की थी जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों ओर के युद्ध बंदियों और शवों की अदला-बदली करना था.
लेकिन दोनों पक्षों की तरफ़ से आ रही ख़बरों के आधार पर कहा जा सकता है कि युद्ध विराम वास्तव में शुरू नहीं हुआ है.

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अज़रबैजान के दो मानवरहित हवाई जहाज़ को मार गिराने का दावा
आर्मेनप्रेस न्यूज़ एजेंसी के अनुसार आर्मीनिया समर्थित नागोर्नो-काराबाख़ की वायु सेना ने अज़रबैजान के दो मानवरहित हवाई जहाज़ (UAVs) को मार गिराने का दावा किया है. एजेंसी ने काराबाख़ की सेना के हवाले से यह ख़बर दी है.
एजेंसी के अनुसार, "18 अक्तूबर को अज़रबैजान अपने मानवरहित हवाई जहाज़ के ज़रिए लगातार काराबाख़ की वायु सीमा का उल्लंघन कर रहा था जबकि 17 अक्तूबर के रात बारह बजे से मानवीय आधार पर युद्ध विराम लागू हो चुका था."
समाचार एजेंसी आर्मेनप्रेस ने काराबाख़ सेना के हवाले से लिखा है कि अज़रबैजान ने युद्धविराम के लागू होने के बाद भी उसका उल्लंघन जारी रखा और लड़ाई वाले उत्तरी इलाक़ों में रॉकेट से हमले किए जबकि दक्षिण इलाक़ों में मिसाइल से हमले किए और सुबह में दक्षिण में हमला किया.
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