प्रशांत भूषण को अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सज़ा सुनाएगा - आज की बड़ी ख़बरें

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प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार यानी 31 अगस्त को सज़ा पर फ़ैसला सुनाएगा.
इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने विवादित ट्वीट्स को लेकर अवमानना के दोषी ठहराए गए प्रशांत भूषण की सज़ा के बारे में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.
प्रशांत भूषण ने अपने दो ट्वीट्स में सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश पर टिप्पणी की थी जिसके लिए अदालत ने 14 अगस्त को उन्हें अवमानना का दोषी ठहराया था.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल से ये पूछा कि आपकी राय में क्या सज़ा होनी चाहिए.
सज़ा के बारे में पूछे जाने पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि प्रशांत भूषण को कड़ी चेतावनी दी जा सकती है और कहा जा सकता है कि भविष्य में वो ऐसी बातें न करें.
इस पर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अगर आप प्रशांत भूषण के बयान को देखें, तो कह सकते हैं कि इसमें एक सकारात्मक हिस्सा भी है और वो है उनका ये कहना कि उन्हें संस्था पर भरोसा है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा है कि वो माफ़ी नहीं मांगेंगे क्योंकि उन्होंने कोई ग़लती नहीं की है.
जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हर कोई ग़लती करता है, लेकिन उस व्यक्ति को ये समझना भी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को अपने बयानों पर फिर से विचार करने और बिना शर्त माफ़ी माँगने को कहा था, लेकिन प्रशांत भूषण ने इससे इनकार कर दिया था.
रिया चक्रवर्ती से CBI ने फिर की पूछताछ

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अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई ने शनिवार को भी अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती से पूछताछ की.
रिया अपने भाई शोविक चक्रवर्ती के साथ मुंबई स्थित डीआरडीओ गेस्ट हाउस से कई घंटों की पूछताछ के बाद शाम को निकलीं. डीआरडीओ गेस्ट हाउस में जांच एजेंसी सीबीआई की टीम ठहरी हुई है.
इससे पहले शुक्रवार को भी सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती से पूछताछ की थी. सीबीआई ने गुरुवार को भी शौविक चक्रवर्ती से कई घंटों तक पूछताछ की थी.
वहीं मुंबई पुलिस के अधिकारियों के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है कि रिया जब भी अपने घर से डीआरडीओ गेस्ट हाउस आएंगी, तो उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी. रिया को सुरक्षा देने की अपील सीबीआई ने की थी.
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वहीं सुशांत के दोस्त सिद्धार्थ पिठानी, अभिनेता के कुक रहे नीरज सिंह और सुशांत के स्टाफ़ के सदस्य रहे केशव बचनर भी शनिवार को डीआरडीओ गेस्ट हाउस पहुंचे थे, जहां सीबीआई ने उनसे पूछताछ की.
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अभिनेता सुशांत 14 जून को बांद्रा में अपने घर में मृत पाए गए थे. मुंबई पुलिस ने इसे आत्महत्या बताते हुए जांच शुरू की थी.
मगर सुशांत सिंह राजपूत के परिजनों ने इस मामले में रिया चक्रवर्ती पर सुशांत को परेशान करने, पैसा हड़पने और मौत में भूमिका होने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे.
रिया इन आरोपों को ग़लत बताती हैं. बाद में सुशांत सिंह राजपूत के परिजनों ने बिहार में एक एफ़आईआर दर्ज करवाई थी जिसमें रिया चक्रवर्ती, उनके भाई और माता-पिता समेत अन्य के ख़िलाफ़ शिकायत की गई थी.
इसके बाद पिछले हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. मामले की पड़ताल करने दिल्ली से मुंबई पहुंची सीबीआई की टीम अब तक कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है.
प्रवर्तन निदेशालय भी रिया चक्रवर्ती और उनके परिजनों पर कथित मनी लॉन्डरिंग और फ़र्ज़ीवाड़े के आरोपों की जांच कर रहा है.
ईडी ने रिया चक्रवर्ती के अलावा उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती से भी पूछताछ की है. उधर, कथित तौर पर रिया के फ़ोन पर मिले व्हाट्सऐप चैट के आधार पर नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने भी पड़ताल शुरू कर दी है कि इस मामले में कहीं ड्रग्स की भूमिका तो नहीं.

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बाजवा की संपत्ति से जुड़ी रिपोर्ट पर पाकिस्तान सरकार को शक
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने उस न्यूज़ रिपोर्ट पर संदेह ज़ाहिर किया है जिसमें चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर के चेयरमैन लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) असीम सलीम बाजवा की विदेशी संपत्तियों और व्यापार के बारे में दावा पेश किया गया था.
उन्होंने कहा है कि 'उस रिपोर्ट की सत्यता पर उन्हें संदेह है.'
इस न्यूज़ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना से रिटायर होने के बाद चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर (सीपीईसी) के चेयरमैन बनाये गए जनरल असीम सलीम बाजवा और उनके परिवार ने चार देशों में खरबों की संपत्ति बनाई है. कोई 99 कंपनियाँ और 133 रेस्त्रां उनके परिवार के सदस्यों के नाम हैं.
पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया ने क़ुरैशी के बयान को प्रकाशित किया है. उन्होंने कहा कि 'ये एक आम चलन हो गया है कि न्यूज़ रिपोर्टें बिना सत्यता की जाँच किये प्रकाशित कर दी जाती जबकि सत्यता की पुष्टि होने के बाद ही ऐसी रिपोर्टें सार्वजनिक की जानी चाहिए. इस मामले में सच्चाई जल्द सामने आएगी.'
मीडिया के प्रश्नों का जवाब देते हुए क़ुरैशी ने यह कहा कि इमरान ख़ान सरकार विपक्ष द्वारा बहुदलीय बैठक बुलाए जाने से बिल्कुल चिंतित नहीं है.
नवाज़ शरीफ़ के मामले पर बात करते हुए क़ुरैशी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को इमरान ख़ान से चर्चा के बाद ही इलाज के लिए विदेश भेजा गया था.
उन्होंने कहा, "जैसा कि शर्तों में तय हुआ था, नवाज़ शरीफ़ अपनी मेडिकल रिपोर्ट्स पाकिस्तान सरकार के साथ शेयर नहीं कर रहे. वे वहां बैठकर राजनीति कर रहे हैं. शहबाज़ शरीफ़ भी हलफ़नामे का उल्लंघन कर रहे हैं. नैतिक तौर पर, अगर नवाज़ शरीफ़ की सेहत ठीक है, तो उन्हें पाकिस्तान वापस लौट आना चाहिए और उन सभी मामलों का सामना करना चाहिए, जो उनके ख़िलाफ़ दर्ज हैं."

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सुधा भारद्वाज को बॉम्बे हाई कोर्ट का ज़मानत देने से इनकार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 'एल्गार परिषद - भीमा कोरेगाँव' मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता एवं वकील सुधा भारद्वाज की ज़मानत याचिका शुक्रवार को ख़ारिज कर दी.
उन्होंने अपनी बीमारियों का हवाला देते हुए और जेल में कोविड-19 के ख़तरे का ज़िक्र करते हुए कोर्ट से ज़मानत का अनुरोध किया था.
शुक्रवार को कोर्ट ने कहा कि 'राज्य सरकार जेल में ही उन्हें ज़रूरी मेडिकल सहायता उपलब्ध करायेगी.'
58 वर्षीय सुधा भारद्वाज फ़िलहाल मुंबई की भायखला महिला जेल में क़ैद हैं. उनके मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) कर रही है.
न्यायमूर्ति आर डी धानुका की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस साल जून में दायर सुधा भारद्वाज की अपील को ख़ारिज कर दिया जिसमें उन्होंने विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर उन्हें ज़मानत देने से इनकार किया गया था.

सुधा भारद्वाज ने ज़मानत का अनुरोध करते हुए हाई कोर्ट से कहा था कि उन्हें मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हैं. उनकी वकील रागिनी आहूजा ने कोर्ट में दलील दी कि सुधा की स्वास्थ्य समस्याएं जेल में रहते हुए उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का जोखिम बढ़ाती हैं, जहाँ एक कैदी को कुछ वक़्त पहले कोविड से संक्रमित पाया गया था.
हालांकि, अदालत ने एनआईए और महाराष्ट्र सरकार की दलीलों पर ग़ौर किया जिनमें कहा गया कि जेल के अधिकारी कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए सभी एहतियात बरत रहे हैं और वे भारद्वाज को उनकी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए ज़रूरी चिकित्सीय देखभाल उपलब्ध करा रहे हैं.
एनआईए के वकील, अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल अनिल सिंह ने भी अदालत को बताया कि अगर किसी भी वक्त भारद्वाज को और इलाज की ज़रूरत पड़ेगी या उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की ज़रूरत पड़ेगी, तो राज्य सरकार इसकी व्यवस्था करेगी.
उन्होंने कहा कि 'एल्गार परिषद - भीमा कोरेगाँव' मामले में सह-आरोपी, कवि-कार्यकर्ता वरवर राव को सरकारी जेजे अस्पताल में और बाद में कोविड-19 एवं अन्य बीमारियों के इलाज के लिए निजी नानावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
उच्च न्यायालय ने भारद्वाज की याचिका ख़ारिज करते हुए कहा, "हमारी नज़र में, ज़मानत का कोई आधार नहीं बनता है. इस आवेदन में विचार योग्य कोई गुण नहीं है."

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पाकिस्तान ने क्या डर से किया यह अचानक फ़ैसला?
पाकिस्तान की एक अदालत ने जमात-उद-दावा के तीन नेताओं को जेल भेजने का फ़ैसला सुनाया है. भारत और अमरीका ने जमात-उद-दावा पर 2008 में मुंबई में हुए धमाके में शामिल होने के आरोप लगाए थे.
पाकिस्तान के लिए सितंबर का महीना फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ओर से ब्लैकलिस्ट किए जाने से बचने का आख़िरी मौक़ा है. ठीक इसके पहले जमात-उद-दावा के तीन नेताओं को जेल भेजने के फ़ैसले को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है.
अगर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया जाता है तो वो ईरान और उत्तर कोरिया की श्रेणी में आ जाएगा. इसका मतलब ये होगा कि उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से अलग कर दिया जाएगा.
FATF आतंकवाद के वित्तपोषण पर नज़र रखता है और इसमें शामिल देशों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करता है. FATF का कहना था कि पाकिस्तान अगर ब्लैकलिस्ट होने से बचना चाहता है तो आतंकवाद के वित्तपोषण और क़ानून के तहत उसे रोकने के लिए ठोस कार्रवाई करे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ मलिक ज़ाफ़र इक़बाल और अब्दुल सलाम को 16-1/2 साल की जेल की सज़ा चार मामलों में मिली है जबकि तीसरे हाफ़िज़ अब्दुल रहमान मलिक को एक मामले में 1-1/2 साल की जेल मिली है. हाफ़िज़ सईद से जुड़े लोगों को फ़रवरी महीने में भी 11 साल की सज़ा मिली थी.
पाकिस्तानी अख़बार डॉन के अनुसार शु्क्रवार को एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने जमात-उद-दावा के तीनों नेताओं को आतंकवाद से जुड़े फंडिंग के नए मामले में सज़ा सुनाई है.
हाफ़िज़ सईद ने ही चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैयब को खड़ा किया था. इसी संगठन पर मुंबई धमाके के मास्टरमाइंड होने क आरोप है. भारत और अमरीका दोनों ने इस हमले के लिए लश्कर पर आरोप लगाए थे. 2008 के मुंबई धमाके में 160 लोगों की मौत हुई थी. मरने वालों में अमरीकी समेत कई विदेशी नागरिक भी थे.
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