कोरोना से ब्राज़ील में हज़ारों की मौत, राष्ट्रपति ने कहा, ‘तो क्या?’

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ब्राज़ील में हर दिन कोविड-19 से 400 से 500 लोगों की मौत हो रही है. लेकिन इस स्थिति का ब्राज़ील के राष्ट्रपति ज़ायर बोलसोनारो पर बहुत असर नहीं दिख रहा है.

इसकी झलक में हाल तब दिखी जब उन्होंने मौजूदा स्थिति पर उपेक्षापूर्ण ढंग से कहा, "तो क्या?"

बोलसोनारो लगातार कोरोना वायरस के ख़तरे को मानने से इनकार करते आए हैं और इसको लेकर उनकी काफ़ी आलोचना भी हो रही है. लेकिन उनके ताज़ा बयान से उनके समर्थकों में भी नाराज़गी देखने को मिल रही है.

इंपीरियल कॉलेज लंदन के अनुमान के मुताबिक़ कोविड-19 का संक्रमण इन दिनों दुनिया में सबसे तेज़ गति से ब्राज़ील में फैल रहा है.

बीते मंगलवार को जब देश में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या पांच हज़ार से ज्यादा होने के बाद एक पत्रकार ने देश में मरने वालों की संख्या के बारे राष्ट्रपति से सवाल किया तो उन्होंने कहा, "तो क्या? मैं समझ नहीं पाया, आप मुझसे क्या कहने को कह रहे हैं? मैं कोई चमत्कार नहीं कर सकता."

ब्राज़ील में अब तक कोरोना से एक लाख पंद्रह हज़ार से अधिक लोग संक्रमित हैं, वहीं इस वायरस के कारण अू तक 7,938 लोगों की मौत हुई है.

'मामूली बुख़ार है कोरोना'

पहले भी बोलसोनारो कोरोना संक्रमण को मामूली बुख़ार बता चुके हैं. उन्होंने ये भी दावा किया था कि मेरी तरह एथलीट रहे लोगों को वायरस की चपेट में आने पर भी कुछ नहीं होगा, अगर बहुत ख़राब स्थिति हुई तो मामूली बुख़ार महसूस होगा.

इतना ही नहीं ब्राज़ीली राष्ट्रपति लगातार सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधानों का भी उल्लंघन करते आए हैं. वो सार्वजनिक जगहों पर हाई प्रोफ़ाइल दौरे कर रहे हैं, समर्थकों से हाथ मिलाते हैं और समर्थकों के साथ सेल्फ़ी लेने के लिए उनके फ़ोन तक पकड़ लेते हैं.

19 अप्रैल को ब्राज़िलिया में सेना मुख्यालय के बाहर लॉकडाउन हटाने की मांग वाले प्रदर्शन में वे शामिल हुए. भाषण देते वक्त उन्हें खांसी भी हुई.

लापरवाह हैं राष्ट्रपति

36 साल के गुलिहेर्मे रोलिम एक डेंटिस्ट हैं. वे बताते हैं कि 2018 के चुनाव के दौरान उन्होंने बदलाव के लिए बोलसोनारो को वोट दिया था.

रोलिम ने बीबीसी ब्राज़ील से बताया कि उन्होंने बोलसोनारो का समर्थन एक 'आवश्यक बुराई के समर्थन' के तौर पर किया था. लेकिन अब उनके पिता की कोविड-19 से मौत हो चुकी है और उन्हें लग रहा है कि सरकार स्थिति को ठीक ढंग से नहीं संभाल रही है.

उन्होंने बताया, "बोलसोनारो एक लापरवाह शख्स हैं. उनका बयान ग़ैर-ज़िम्मेदारी वाला है और हानिकारक है. राष्ट्रपति गंभीर समस्या को हल्के में ले रहे हैं. कोरोना वायरस से मेरे पिता की मौत हुई है. राष्ट्रपति जो कह रहे हैं उससे मुझे डर लग रहा है. वो ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनके किसी अपने की मौत नहीं हुई है, वो इस दुख को समझ नहीं पा रहे हैं."

कोरोना वायरस का असर ब्राज़ील की राजनीति में भी दिख रहा है. साओ पाओलो और रियो डि जेनेरियो जैसे राज्यों के गवर्नर बोलसोनारो के आलोचक हैं. इन राज्यों में क्वारंटीन के प्रावधानों को आगे बढ़ाया गया है.

पिछले महीने कोरोना वायरस से निपटने के तौर तरीक़ों पर मतभेद के चलते उन्होंने देश के लोकप्रिय स्वास्थ्य मंत्री लुई हेनरिक मान्देत्ता को बर्खास्त कर दिया था.

मान्देत्ता की जगह उन्होंने नेल्सन टीच को स्वास्थ्य मंत्री बनाया है. कैंसर रोग विशेषज्ञ नेल्सन एक निजी क्लिनिक समूह के सीईओ हैं और मेडिकल सर्विस कंसल्टेंसी फ़र्म में पार्टनर भी.

हालांकि कोरोना वायरस को लेकर राष्ट्रपति के नज़रिए का कुछ लोग समर्थन भी कर रहे हैं. यह ख़ासकर कारोबारी लोग हैं जिन्हें लगता है कि लॉकडाउन से उनके कारोबार पर असर पड़ेगा.

ब्राजील रूकेगा नहीं

मार्च महीने में देश में रेस्त्रां चेन मैड्रो चलाने वाले करोड़पति कारोबारी जूनियर डोरस्की के एक बयान पर काफ़ी विवाद हुआ था. उन्होंने कहा था, "देश भर में कोरोना वायरस से पांच हज़ार लोग मरेंगे. हम इससे बच नहीं सकते हैं. लेकिन इसके लिए हम सब कुछ बंद नहीं कर सकते. हमें दुश्मन से छिपने के लिए काम बंद नहीं करना चाहिए."

हालांकि उन्होंने बाद में कहा कि उनके बयान को ग़लत तरीके से पेश किया गया.

हालांकि उनकी तरह कई और कारोबारी भी ऐसा ही नज़रिया रख रहे हैं. उनमें हैवन डिपार्टमेंट स्टोर के मालिक और ब्लूमबर्ग के मुताबिक़ मुक्त व्यापार के प्रचारक अरबपति लुसियानो हैंग भी शामिल हैं.

हैंग कोविड-19 को लेकर फैली चिंताओं की आलोचना कर चुके हैं, उनके मुताबिक़ वे अपने कारोबार के लिए नहीं बल्कि ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित है. उन्होंने कहा है कि व्यक्तिगत तौर पर वे अपने 22 हज़ार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल कर किसी समुद्रीतट पर चले जाने का रास्ता भी चुन सकते हैं.

ब्राज़ील के कुछ शहरों में, लॉकडाउन के प्रावधानों के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं, माना जा रहा है कि लॉकडाउन के प्रति आम लोगों के समर्थन में भी गिरावट है.

डेटाफोल्हा में प्रकाशित एक ओपिनियन पोल के मुताबिक़ 29 अप्रैल को 52 प्रतिशत ब्राज़ीली लोग घरों में रहने के पक्ष में हैं, जबकि अप्रैल की शुरुआत में यह संख्या 60 प्रतिशत थी. देश के सबसे अमीर लोगों में 39 प्रतिशत जनता क्वारंटीन के पक्ष में है.

दुनिया की तुलना में ब्राज़ील

दूसरी ओर दुनिया भर में कोरोना वायरस को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. ऐसे में बोलसोनारो अपने स्टैंड के चलते अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं.

रियो में मौजूद 'द गार्डियन' के संवाददाता टॉम फिलिप्स ने ट्वीट किया है, "कल्पना करने की कोशिश कीजिए (और उसमें नाकाम हो जाइए) कि किसी दूसरे वर्ल्ड लीडर से देश में हो रही हज़ारों मौत के बारे में पूछा जाए और उनका जवाब हो- 'तो क्या?'"

यहां तक कि डोनाल्ड ट्रंप ने भी आर्थिक असर के बावजूद सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधानों को लागू किया है. बोलसोनारो, ट्रंप से अपनी तुलना किए जाने पर काफ़ी ख़ुश होते हैं.

28 अप्रैल को व्हाइट हाउस के प्रेस कांफ्रेंस में डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राज़ील की स्थिति का हवाला भी दिया है, "मुझे कहने में अच्छा नहीं लग रहा है लेकिन ब्राज़ील में संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है. ग्राफ़ से तेज़ी दिख रही है. लगभग वर्टिकल जैसा ग्राफ़ है. ब्राज़ील के राष्ट्रपति मेरे अच्छे दोस्त हैं, शानदार आदमी हैं लेकिन वे लोग बेहद मुश्किल समय से गुज़र रहे हैं."

फ्लोरिडा के गर्वनर रोन डि सैंटिस ने भी कहा है कि वे ब्राज़ील की स्थिति को बेहद क़रीब से देख रहे हैं ताकि ब्राज़ीली लोगों पर अंकुश के लिए ख़ास प्रावधानों को अपनाया जा सके.

इंपीरियल कॉलेज लंदन के मुताबिक़ ब्राज़ील में कोरोना संक्रमण के फैलने की दर 2.8 है. यह तुलनात्मक अध्ययन में शामिल किए गए 48 देशों में सबसे अधिक है. जो देश लॉकडाउन को हटाने पर विचार कर रहे हैं वहां संक्रमण फैलने की दर एक से कम है, यानी कोरोना से संक्रमित एक मरीज़ औसतन एक से कम आदमी को संक्रमित कर रहा है.

बढ़ती राजनीतिक मुश्किलें

कोरोना वायरस की चुनौतियों ने ब्राज़ील राष्ट्रपति बोलसोनारो की दूसरी राजनीतिक मुश्किलों को भी बढ़ा दिया है.

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने बोलसोनारो के मित्र एलेक्जेंडर रामागेम की उस नियुक्ति पर रोक लगा दी जिसमें उन्हें फेडरल पुलिस का प्रमुख बनाया गया था. रामागेम इन दिनों बोलसोनारो के बेटे पर फ़ेक न्यूज़ फैलाने के मामले की जांच कर रहे थे.

इस पूरे विवाद के चलते बोलसोनारो के क़ानून मंत्री और सुपर मिनिस्टर माने जाने वाले सर्गियो मोरो को इस्तीफ़ा देना पड़ा है. उन्होंने राष्ट्रपति पर उनके कामकाज में दख़ल देने का आरोप लगाया है.

बोलसोनारो ने अपने आलोचकों को ख़ारिज करते हुए अपने दोस्त की नियुक्ति का बचाव अपने ख़ास अंदाज़ में किया है.

उन्होंने अपने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, "तो क्या हुआ? मैं अपने बेटों से मिलने से पहले रामागेम से मिला था. इस वजह से क्या उनकी नियुक्ति पर रोक लगनी चाहिए?

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