चीनी मर्द अब भी शादी के लिए 'ख़रीद' रहे हैं पाकिस्तानी लड़कियां: बीबीसी पड़ताल

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    • Author, सहर बलोच
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता
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चीन के मर्द अभी भी बिचौलियों के ज़रिए पाकिस्तानी परिवारों से संपर्क कर रहे हैं.

पिछले साल, जब ये ख़बर सामने आई थी कि चीन के पुरुष पाकिस्तान की ईसाई लड़कियों के साथ शादी कर रहे हैं, तो हड़कंप मच गया था.

पाकिस्तान के अधिकारी फ़ौरन हरकत में आ गए थे. उन्होंने इन गतिविधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए क़रीब 50 लोगों को गिरफ़्तार किया था. लेकिन पाकिस्तान की हुकूमत के कार्रवाई करने के एक साल बाद आज भी चीन के पुरुष, पाकिस्तान की ईसाई लड़कियों से ब्याह कर रहे हैं. हालांकि अब शादी का ये गोरखधंधा बड़ी ख़ामोशी से गुप-चुप चलाया जा रहा है.

अगर हम पीछे जाएं, तो हुआ ये था कि 2019 में एक तफ़्तीश से इस बात का पर्दाफ़ाश हुआ था कि चीन के बहुत से पुरुष, पाकिस्तान की ग़रीब ईसाई लड़कियों को चुन-चुन कर निशाना बना रहे हैं. उन्हें अमीर घरों में शादी का झांसा दिया जाता है. इस काम में बहुत से अनुवादक और पादरी, चीनी मर्दों की मदद कर रहे थे.

पता ये चला कि इनमें से ज़्यादा शादियां असल में एक फ़र्ज़ीवाड़ा थीं. जिसमें पाकिस्तान के पंजाब सूबे की रहने वाली ग़रीब ईसाई लड़कियों को शादी के बहाने चीन ले जाया जाता था. फिर उन्हें वेश्यावृत्ति के कारोबार में धकेल दिया जाता था.

पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी की तफ़्तीश में पता ये चला था कि कई मामलों में तो पाकिस्तान की इन ग़रीब ईसाई लड़कियों के अंग, ख़ास तौर से उनकी बच्चेदानी को निकाल कर अंगों के अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में बेच दिया गया था. एफ़आईए की जाँच में पता ये चला था कि जिन लड़कियों को वेश्यावृत्ति के 'लायक़' नहीं समझा जाता था, उनके अंग निकाल कर बेच दिए जाते थे.

हाल ही में बीबीसी उर्दू की एक पड़ताल में पता चला है कि पाकिस्तान के पंजाब और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वाह सूबे की ग़रीब ईसाई लड़कियों को अभी भी बिचौलियों के ज़रिए, चीनी मर्दों से शादी करने के प्रस्ताव दिए जा रहे हैं.

मानवों की तस्करी करने वालों का एक समूह अभी भी लोगों के संपर्क में है. ये शादियां, ज़्यादातर पाकिस्तान के सरहदी सूबे के मरदान, पेशावर और चारसद्दा शहरों में कराई जा रही हैं. और इनका इंतज़ाम बिचौलिए करते हैं.

चीनी मर्दों और पाकिस्तान की ईसाई लड़कियों की शादी के इस घोटाले में अक्सर पादरी, कोई रिश्तेदार या पारिवारिक दोस्त बिचौलिए की भूमिका निभाता है. फिर वो लड़की के परिवार वालों से बात करता है और शादी की तारीख़ तय करता है. फिर इन लड़कियों को गुप-चुप तरीक़े से इस्लामाबाद ले जाकर उनका ब्याह कर दिया जाता है.

ऐसी ही एक शादी का प्रस्ताव, पाकिस्तानी पंजाब के शेख़ूपुरा क़स्बे की गिरजा कॉलोनी में क़रीब-क़रीब तय हो गया था. लेकिन, ख़ुशक़िस्मती से लड़की के रिश्तेदारों के सही समय पर दख़ल देने की वजह से ये शादी रद्द कर दी गई.

2018 से अब तक हुई ऐसे कम-ओ-बेश सभी शादियों में एक बात बिल्कुल एक जैसी थी. और वो ये है कि जो लोग अपनी बेटियों का ब्याह चीन के मर्दों से करने के लिए राज़ी हुए, वो पाकिस्तान के सबसे ग़रीब और कमज़ोर तबक़े से ताल्लुक़ रखते हैं.

इन सभी परिवारों ने बेटियों को चीन में ब्याहने के पीछे एक ही प्रमुख वजह बताई. और वो ये थी कि इससे उनकी बेटियों को आर्थिक आज़ादी हासिल होगी. पाकिस्तान के आतंरिक विभाग के संघीय मंत्री, एजाज़ शाह के मुताबिक़, 'हो सकता है कि ऐसी शादियों में से कोई एक फ़ीसद ऐसी हों जो बिल्कुल वाजिब हों. लेकिन, ज़्यादातर मामलों में ये विशुद्ध शोषण का केस है.'

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ईंट-भट्टे के मज़दूर

मुझे बताया गया कि गिरजा कॉलोनी जाने का एक ही रास्ता है और वो है एक चौड़ी सी मुख्य सड़क. उस वक़्त बारिश हो रही थी और गिरजा कॉलोनी को जाने वाली पूरी गली कीचड़ की वजह से बंद थी. फिर भी, वहां के बाशिंदे या तो उस कीचड़ से बच कर या फिर उससे गुज़र कर आस-पास के कारख़ानों में जा रहे थे.

गिरजा कॉलोनी, मध्य पंजाब के शहर शेख़ूपुरा के बाहरी इलाक़े में उस सड़क के बीचो-बीच स्थित है, जो लाहौर की ओर जाती है. ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोग इस मुख्य गली के आर-पार आमने-सामने रहते हैं. गली में सब्ज़ियों और किराने के सामानों की कई दुकानें हैं.

इस कॉलोनी में पंजाब के अधिकतर ईंट-भट्ठा मज़दूर रहते हैं. मानव तस्करों के एक समूह ने इन मज़दूरों में से कई के परिवारों को ये कह कर फुसलाया था कि अगर वो चीन के मर्दों से अपनी बेटियों की शादी का प्रस्ताव मंज़ूर कर लेते हैं, तो एक दिन वो उसी ईंट भट्ठे के मालिक होंगे, जिसमें वो आज काम कर रहे हैं.

समीरन, इसी कॉलोनी में अपने परिवार के साथ रहती हैं. वो अपने शौहर के साथ पास की ही एक पानी की बोतल बनाने वाली फ़ैक्ट्री में काम करती हैं. उन्हें 35 हज़ार रुपए महीना तनख़्वाह मिलती है.

हाल ही में एक पादरी ने समीरन और उनके शौहर से संपर्क किया था. पादरी ने उन्हें बताया था कि उनके पास चीन में शादी करने का 'एक बहुत अच्छा ऑफ़र है.'

जब मैं इस परिवार के ठिकाने पर पहुंचती हूं, तो एक लड़का दरवाज़ा खोलता है. वो मुझसे कहता है कि उनके मां और पिता को आने में देर होगी. लेकिन, हमें उनके आने तक इंतज़ार करने को कहा जाता है.

जब तक बच्चों के मां-बाप नहीं आ जाते, तब तक वो शर्माते हुए हंसते रहते हैं और वो क़िस्सा बताते हैं कि उनकी सबसे बड़ी बहन से शादी करने कौन उनके घर आया था.

पादरी शामून बग़ल में बैठी अपनी बीवी की ओर से कहते हैं कि, 'मैं झूठ नहीं बोलूंगा. शुरुआत में हम दोनों ही बहुत उत्साहित थे.' समीरन के सात बच्चे हैं. पादरी उनमें से दो बड़ी बेटियों 21 बरस की उरफ़ा और 19 साल की सफ़ीरा के लिए रिश्ता लेकर आए थे.

समीरन बताती हैं कि, 'पादरी ने हमें उन मर्दों की तस्वीरें दिखाईं. वो यही कोई बीस-पच्चीस बरस के रहे होंगे. और उसने कहा कि उन लड़कों के पास मोटी सैलरी वाली नौकरी है. और वो हमारी बच्चियों का बहुत ख़याल रखेंगे.'

समीरन आगे कहती हैं कि, 'उस पादरी ने हमें बताया कि जब लोग ये देखेंगे कि उनकी बेटियां कितनी ख़ुश हैं, तो वो भी अपनी बेटियों को चीन में ब्याहना चाहेंगे.'

लेकिन, परिवार ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया.

आगे कुछ और बोलने से पहले समीरन और उनके पति ने एक-दूसरे की आंखों में झांका. और फिर समीरन ने कहा कि उन्होंने कराची में रहने वाले अपने परिवार के अन्य सदस्यों से बात की, ताकि, बेटियों के ब्याह के इस प्रस्ताव पर और सलाह मशविरा कर सकें.

समीरन बताती हैं, 'हमारे बुज़ुर्गों और भाई-बहनों ने हमें धमकी दी कि वो बेटियों को चीन में ब्याहने का ये प्रस्ताव मंज़ूर करेंगे, तो वो हमसे सारे रिश्ते तोड़ लेंगे. फिर हमें इनकार करना ही पड़ा.'

इस वक़्त समीरन के परिवार और पादरी के बीच बातचीत बंद है.

समीरन बताती हैं, 'उस पादरी ने हमसे मांग की है हम उसे हुए नुक़सान की भरपाई के तौर पर 15 लाख रुपए हर्जाना दें. उसने हमारी बेटियों का राष्ट्रीय पहचान पत्र बनाने के लिए पैसे दिए थे. उनके पासपोर्ट बनवाए थे. और उनके वीज़ा के लिए भी अर्ज़ी दे दी थी. लेकिन, हमारी बेटियों के काग़ज़ात अभी भी उसी के पास हैं. और वो कह रही है कि वो तब तक हमारी बच्चियों के काग़ज़ात नहीं वापस करेगी, जब तक हम उसे हर्जाने की रक़म नहीं दे देते.'

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'ख़ुद ईश्वर ने पादरी बनाया'

समीरन के घर से कुछ मुहल्ले छोड़ कर पादरी गोलनाज़ का घर है. मैं गोलनाज़ से मिलने जाने से पहले, उन्हें फ़ोन करती हूं. वो एक ही दस्तक में बड़ी तेज़ी से ऐसे दरवाज़ा खोलती हैं, जैसे वो मेरा ही इंतज़ार कर रही थीं.

वो मुझे एक छोटे से कमरे की ओर ले जाती हैं, जहां पर तीन लोग पहले से ही बैठे हुए थे. मुझे उन लोगों के ठीक सामने की ओर बैठने को कहा जाता है. मैं जैसे ही बैठती हूं, गोलनाज़ एक भी लफ़्ज बोले बग़ैर मेरी गोद में प्रमाणपत्रों के ढेर लगाने लगती हैं.

वो क़रीब 12 सर्टिफ़िकेट थे, जो गोलनाज़ ने मुझे सौंपे थे. और वो कम-ओ-बेश सारे के सारे लाहौर और शेख़ूपुरा के चर्चों की तरफ़ से जारी किए गए थे. इनमें से एक प्रमाणपत्र ऐसा था, जिसे उन्होंने अमरीका के टेक्सस राज्य के ऑस्टिन शहर के पादरी से हासिल किया था. जिसने एक मंत्रिस्तरीय फ़ेलोशिप का आयोजन किया था. कम से कम उस प्रमाणपत्र में तो ऐसा ही दावा किया गया था.

ये सुनिश्चित कर लेने के बाद कि मैंने सारे प्रमाणपत्र देख लिए हैं, उसके बाद ही गोलनाज़ से बोलना शुरू किया. उनकी उम्र तीस बरस के क़रीब होगी. गोलनाज़ कहती हैं, 'मैं यहां अपनी बिरादरी के लोगों के लिए काम करती हूं. और मुझे तो ख़ुद ईश्वर ने पादरी की दीक्षा दी, ताकि मैं इन लोगों की मदद कर सकूं.'

इसके बाद, गोलनाज़ मुझे अपनी बहन समीना की तस्वीरें दिखाती हैं, जो अब चीन के शांक्ची सूबे में रहती हैं. गोलनाज़ मुझे, समीना की छह महीने की बेटी की सालगिरह की तस्वीरें दिखाते हुए कहती हैं, ''देखो वो वहां कितनी ख़ुश दिख रही है.''

मुझे लगता है कि जब लोग ये देखेंगे कि वो चीन में कितनी ख़ुश हैं, तो वो भी चीन में ही शादी करना चाहेंगे. कम से कम मैं तो ऐसा ही सोचती हूं कि उन्हें यही करना चाहिए. लेकिन, उन्हें कोई ऐसा करने के लिए मजबूर तो नहीं कर रहा.'

लेकिन, जब गोलनाज़ से सराफ़ीन के परिवार के बारे में पूछा गया कि उन्होंने उनसे ये कहा था कि वो पंद्रह दिनों के भीतर शादी कर दें, तो गोलनाज़ ने उस परिवार के दावे को सिरे से ख़ारिज कर दिया.

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पाकिस्तान में निकाह की समस्या

पाकिस्तान के अधिकारी कई ऐसे मामलों की तफ़्तीश कर रहे हैं, जो संघीय जाँच एजेंसी और ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों के मुताबिक़ सीधे-सीधे सेक्स के लिए तस्करी का मामला है.

पिछले साल बीबीसी की एक पड़ताल से इस बात का पर्दाफ़ाश हुआ था कि शादी की आड़ में क़रीब 700 पाकिस्तानी लड़कियों को तस्करी कर के चीन ले जाया गया था.

उस वक़्त संघीय जाँच एजेंसी (FIA) के अधिकारी रहे जमील ख़ान मेयो ने बीबीसी को उस समय बताया था कि जिन लड़कियों को शादी के लायक़ नहीं समझा गया, उनके अंग को अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में बेच दिया गया था. जमील ख़ान ने हमें बताया था कि सबसे ज़्यादा मांग महिलाओं के गर्भाशय की थी.

उसके बाद से कई और ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे केस अधिकतर पंजाब के प्रमुख शहरों जैसे लाहौर, फ़ैसलाबाद, कसूर, शेख़ूपुरा और गुजरांवाला से जुड़े हुए हैं.

इनमें से अधिकतर मामले एक जैसे ही रहे हैं. किसी ग़रीब ईसाई परिवार से धनाढ्य दिखने वाला चीन का कोई परिवार संपर्क करता है. उनके साथ कोई पाकिस्तानी अनुवादक होता है. चीन का ये परिवार, ईसाई परिवार को या तो शादी की तैयारी के नाम पर, या फिर उस परिवार का क़र्ज़ उतारने के नाम पर 10 से 50 लाख तक की रक़म देने को तैयार होता है.

लगभग सभी मामलों में लड़कियों को इस्लामाबाद स्थित एक घर पर ले जाया जाता है. जहां पर उन्हें एक ओरिएंटेशन प्रोग्राम में हिस्सा लेना होता है. इसमें उन्हें चीनी भाषा जानने वाले अध्यापक, सुबह से शाम तक चीनी भाषा सिखाते हैं. लड़कियों की देख-भाल के लिए एक और आदमी भी नियुक्त किया जाता है. सोफ़िया नाम की एक लड़की के मुताबिक़, ये शख़्स उन्हें अनुशासन में रखने के लिए बेहद भद्दी ज़बान इस्तेमाल करता है और गालियां देता है.

जैसे ही ये मामले पाकिस्तान के टीवी चैनलों तक पहुंचने लगे, तब पाकिस्तान के अधिकारी हरकत में आए.

जमील ख़ान मेयो और पाकिस्तान की फ़ेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मई 2019 तक कई प्रेस कांफ्रेंस की थीं. ताकि इनके ज़रिए, वो लोगों को ऐसे अपराध के बारे में आगाह कर सकें.

लाहौर में हुई ऐसी ही एक प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों को बताया गया था कि चीन के पुरुषों का एक समूह, जिसके साथ एक महिला और एक पाकिस्तानी अनुवादक भी हैं, वो पंजाब में ऐसी शादियों का जुगाड़ कर रहा है. इसके तुरंत बाद पचास चीनी पुरुष और उनकी मदद कर रहे लोगों को पूरे पंजाब में छापेमारी के दौरान गिरफ़्तार किया था.

इनकी गिरफ़्त से नताशा मसीह, मेहद लियाक़त और मुक़द्दस को छुड़ा कर पाकिस्तान में उनके परिजनों को सौंपा गया था. ये लड़कियां, पंजाब के फ़ैसलाबाद और गुजरांवाला शहर से ताल्लुक़ रखती थीं.

लाहौर में चल रहे तीन मैरिज ब्यूरो-मुहम्मदी इस्लामिक सेंटर, पाक-चाइना मैरिज कंसलटेंसी और झोंगबा मैरिज ब्यूरो को भी बंद कर के उनके मालिकों को गिरफ़्तार कर लिया गया था. लाहौर के जौहर टाउन और डिवाइन गार्डेन इलाक़ों से भी 11 चीनी नागरिक और उनके दो पाकिस्तानी बिचौलियों को गिरफ़्तार किया गया था.

लेकिन, हाल ही में जब इस्लामाबाद में एफ़आईए से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि इस समय केवल एक चीनी नागरिक ही अधिकारियों के पास हिरासत में है. बाक़ी के गिरफ़्तार चीनी नागरिकों के ख़िलाफ़ कोई सबूत न होने पर न केवल उन्हें रिहा कर दिया गया था. बल्कि उन्हें देश छोड़ कर जाने भी दिया गया था.

जब एफ़आईए से ये सवाल किया गया कि क्या उनके नाम पाकिस्तान की एक्ज़िट कंट्रोल लिस्ट में हैं. तो एफ़आईए के अधिकारी ने इस सवाल का जवाब भी ना में ही दिया. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि, ''हम बस इतना ही कर सकते थे कि उन्हें गिरफ़्तार कर के उनके ख़िलाफ़ मामले अदालत में पेश करें. हम न्याय सुनिश्चित नहीं कर सकते. और इन लोगों को हमेशा के लिए तो जेल में क़ैद नहीं रख सकते.''

ऐसी शादियां अब भी हो रही हैं. हालांकि, अब ये काम गुप-चुप तरीक़े से हो रहा है. अब चीन के पुरुष तब तक किसी परिवार के पास नहीं जाते, जब तक बिचौलिए, किसी लड़की के साथ बात पक्की करके इसकी तस्दीक़ नहीं कर देते. इस वक़्त ऐसी शादियां कराने का तरीक़ा बिल्कुल अलग हो गया है.

हाल ही में ऐसी दो शादियों की ख़बरें पाकिस्तान के उत्तरी-पश्चिमी सूबे ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा के दो शहरों-पेशावर और मरदान से आई थीं.

पेशावर के रहने वाले पादरियों और लड़कियों के परिजनों से पूछताछ के बाद ये बात सामने आई है कि अब ऐसी शादियों का इंतज़ाम वो परिवार कर रहे हैं, जिनकी अपनी बेटियों की शादी पहले चीन में हो चुकी है.

पंजाब और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा के परिवारों के मुताबिक़, 2019 तक ऐसी शादियां कराने वाले गिरोह में एक महिला, चार मर्द और एक या दो अनुवाद करने वाले हुआ करते थे. हालांकि, साल के आख़िर के आते-आते चीनी लोगों के बजाए अब उनके साथ काम करने वाले बिचौलिये ही निकाह का प्रस्ताव लाने लगे थे.

अब ऐसे परिवारों को प्रस्ताव मंज़ूर होने पर पंजाब और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा से इस्लामाबाद लाया जाता है. और शादी का समारोह केवल कुछ क़रीबी रिश्तेदारों भर की मौजूदगी में होता है. लेकिन इन लोगों की मौजूदगी के बावजूद, परिवारों ने बताया कि जाँच एजेंसियों ने कभी भी ऐसे किसी समूह की मौजूदगी को स्वीकार नहीं किया है.

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दो लड़कियों की मौत

समिया डेविड और एबिगेल, दोनों की मौत एक महीने के भीतर हुई थी. समिया डेविड, पंजाब के गुजरांवाला की रहने वाली थीं. जबकि एबिगेल पेशावर की फादर्स क़ॉलोनी में रहा करती थीं.

इन दोनों लड़कियों के शादी करके पाकिस्तान छोड़ने और उसके बाद मौत होने का मामला भी एक जैसा है. एबिगेल के बीस बरस के भाई ताबिश के मुताबिक़, उनकी बहन की उम्र 18 साल थी. उन्हें कभी-कभी मिर्गी के दौरे पड़ा करते थे.

ताबिश के मुताबिक़, उनकी बड़ी बहन की शादी भी एक चीनी मर्द से ही हुई थी. और उसे ख़ुश देख कर ही परिवार ने एबिगेल की शादी भी एक चीनी नागरिक से करने का फ़ैसला किया था.

अपने परिवार के बारे में बात करते हुए ताबिश बताते हैं, ''मेरे पिता अक्सर बीमार रहते हैं. और हमारी मां एक घरेलू महिला हैं. हम सारे भाई-बहन एक-दूसरे का ख़याल रखते हुए बड़े हुए हैं. मैंने देखा था कि जब एबिगेल हमारे साथ रहती थी, तब उसे इतने दौरे नहीं पड़ते थे. लेकिन, चीन जाने के बाद उसे बहुत ज़्यादा दौरे पड़ने लगे थे.''

एबिगेल की शादी नवंबर 2018 में हुई थी. इसके कुछ दिनों बाद ही वो चीन रवाना हो गईं थीं.

चीन में क़रीब पाँच महीने रहने के बाद एबिगेल ने पाकिस्तान लौटने की ज़िद करनी शुरू कर दी. फिर उन्हें उनके शौहर के साथ पाकिस्तान वापस बुला लिया गया. वापस आकर एबिगेल, अपने पति के साथ इस्लामाबाद के E-11 सेक्टर में स्थित एक अपार्टमेंट में रहने लगीं.

लेकिन, जून 2019 में गोलरा शरीफ़ पुलिस थाने के एक जाँच अधिकारी को ख़बर मिली कि एक लड़की ने अपने घर में फांसी लगा कर जान दे दी है. इस जाँच अधिकारी के अनुसार, 'आरोप है कि 'उस लड़की ने अपने दुपट्टे की मदद से पंखे से लटक कर जान दे दी थी.'

इस जाँच अधिकारी ने बताया कि घटना के दो हफ़्ते बाद तक इस मामले की तफ़्तीश जारी रही थी. एबिगेल के माता-पिता इस बात पर अड़े थे कि उनकी बेटी के शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होगा. लेकिन, पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ख़ुद ही शव का पोस्टमॉर्टम कराया.

पुलिस के मुताबिक़ एबिगेल के गले और कलाई पर निशान पड़े थे.

एबिगेल के दोस्त और उसके एक अन्य चीनी दोस्त को भी आगे की पूछताछ के लिए थाने में ही रखा गया था. लेकिन, एक हफ़्ते बाद इस मामले का शोर थम गया.

पेशावर की सेंट जेम्स चर्च से ताल्लुक़ रखने वाले रेवरेंड एलेक्ज़ेंडर कहते हैं कि उन्हें अब तक जिन भी शादियों में जाने का मौक़ा मिला है, वो लोग प्रार्थना के लिए चर्च ज़रूर आते हैं. लेकिन चीन में होने वाली अधिकतर शादियों के मामले में इस रिवाज को नहीं पूरा किया जाता.

रेवरेंड एलेक्ज़ेंर को अक्सर कॉनफ़ेशन के लिए चर्च में बुलाया जाता है और शादियों से पहले की प्रार्थना सभाओं की अगुवाई के लिए भी उन्हें आमंत्रित किया जाता है.

रेवरेंड एलेक्ज़ेंडर बताते हैं कि, ''लेकिन, न तो मुझे एबिगेल की शादी में बुलाया गया, न ही मुझे प्रार्थना सभा में बुलाया गया. ये शादी बड़े गुपचुप तरीक़े से ऐसे की गई थी. इससे ऐसा लग रहा था, जैसे ये शादी ज़बरदस्ती कराई गई थी.''

लाहौर के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सलीम इक़बाल, ऐसी शादियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले पहले लोगों में से हैं. वो कहते हैं कि इस घटना की ख़बर मिलने के बाद, उन्हें ताबिश की छोटी बहन का एक संदेश मिला, जिसमें उन्होंने सलीम से अपनी बहन की मौत की अपने स्तर पर पड़ताल करने की गुज़ारिश की थी. लेकिन, सलीम बताते हैं कि, 'इसके कुछ ही दिनों बाद ताबिश ने मुझे फ़ोन कर के धमकाया और कहा कि मैं उनके निजी मामलों से दूर रहूं.'

इसके कुछ ही दिनों बाद एबिगेल के पिता ने एक लंबे ख़त में पुलिस को शुक्रिया अदा करते हुए लिखा कि उन्होंने बहुत सहयोग किया. एबिगेल के पिता ने इस ख़त में अपनी बेटी की मौत के लिए 'बुरी आत्माओं और काले जादू' को ज़िम्मेदार ठहराया था.

पंजाब के दूसरे छोर पर गुजरांवाला की रहने वाली समिया डेविड ने इस उम्मीद में ब्याह रचाया था कि उन्हें अच्छा घर मिलेगा. समिया की शादी 2018 के आख़िर में हुई थी. और मई 2019 में घर वापस आने के एक हफ़्ते के भीतर उनकी मौत हो गई थी. इसके बाद से ही समिया के परिवार और ख़ास तौर पर उनकी मां और भाई ने इस मामले को छुपाने के लिए हर वो जतन किया, जो वो कर सकते थे.

इस्लामिक और ईसाई रिवाज के मुताबिक़, किसी की मौत के बाद उसे दफ़नाने से पहले शव को नहलाते-धुलाते हैं. लेकिन, समिया की मां ने बेटी की मौत के बाद अपनी एक बेहद क़रीबी दोस्त को ही बेटी के शव को नहलाने के लिए बुलाया था. समिया की मां की दोस्त ने बाद में बताया कि उसके शव के निचले हिस्से और पेट के ऊपर चोट के निशान थे.

इसी दौरान, जब बीबीसी ने समिया के भाई साबिर मसीह से बात की, तो उसने कहा कि, 'लोग, समिया से बहुत जलते थे. ख़ास तौर से जिस तरह की ज़िंदगी वो जी रही थी. लेकिन, अब वो इस दुनिया से रुख़सत हो चुकी हैं. तो बेहतर होगा कि हम मुर्दा लोगों के बजाय उन लोगों को तवज्जो दें, जो अभी इस दुनिया में मौजूद हैं.'

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सरकारी स्तर पर चीन में हो रही शादियों के बारे में बात करने पर पाबंदी

इन शादियों की ख़बर मीडिया में आने के बाद, पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी (FIA) ने इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट जून 2019 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भेजी थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक़, 629 पाकिस्तानी लड़कियों को तस्करी कर के चीन ले जाया गया है.

सरकार के सूत्रों के मुताबिक़, इस मामले में पंजाब के अलग-अलग शहरों से क़रीब 50 चीनी नागरिकों और उनके साथ काम करने वाले बिचौलियों को गिरफ़्तार किया गया था.

लेकिन, जब हाल ही में हमने इस मामले में एफ़आईए के अधिकारियों से पूछा तो उन्होंने कहा कि उस वक़्त गिरफ़्तार लोगों में से केवल एक पर अभी मुक़दमा चल रहा है. बाक़ी सभी लोगों को अदालत ने बरी कर दिया है.

एफ़आईए से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि, ''हम अपनी तरफ़ से मामलों को कोर्ट में ही भेज सकते हैं. लेकिन, हम ये तो नहीं तय कर सकते कि अदालत किसे सज़ा देगी.''

एफ़आईए की फ़ैसलाबाद इकाई के उप निदेशक जमील ख़ान मेयो ने मई 2019 में बीबीसी को बताया था कि पाकिस्तान से जिन महिलाओं को तस्करी कर के चीन ले जाया गया था, उनमें से कई के अंग निकाल कर अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में बेच दिए गए थे. इनमें से ज़्यादातर महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिए गए थे.

एफ़आईए के अधिकारियों के मुताबिक़, तस्करी करके चीन ले जाई गई जो महिलाएं देह व्यापार के लायक़ नहीं लगतीं, उनके तमाम अंग निकाल कर बेच दिए जाते हैं.

लेकिन, फ़ैसलाबाद में इन सभी अभियानों की अगुवाई करने और इनकी जानकारी देने के फ़ौरन बाद जमील ख़ान मेयो का तबादला ख़ैबर पख़्तूनख़्वा कर दिया गया था. तब से जमील ख़ान इस मसले पर और कोई बात नहीं करना चाहते. और जब उनसे सवाल होता है, तो वो ऐसे मामलों पर बड़ी नफ़रत का इज़हार करते हैं.

लेकिन, अगस्त 2019 में संयुक्त राष्ट्र के एक सेमिनार में शिरकत करने वालों, जिनमें एफ़आईए के भी कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, के अनुसार 2018 के बाद से क़रीब 20 हज़ार पाकिस्तानी महिलाओं को तस्करी करके ले जाया गया था.

इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए एफ़आईए के अधिकारियों ने बताया कि दक्षिणी पंजाब और बलोचिस्तान के अलावा, कराची, लाहौर और फ़ैसलाबाद से भी महिलाओं की तस्करी करके ले जाया गया था. इसकी प्रमुख वजह या तो शादी थी या फिर आमदनी के बेहतर ज़रियों की तलाश थी.

लेकिन, ये आंकड़े देने के बाद एफ़आईए के अधिकारी इसके बारे में आगे और बात नहीं करना चाहते. इन मामलों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सलीम इक़बाल कहते हैं कि, 'सरकार के उच्च स्तर पर ही ऐसे मामलों को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं.'

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चीनी मर्दों और पाकिस्तानी महिलाओं की शादियां

अप्रैल 2019 में लाहौर की रहने वाली लगभग आठ लड़कियों ने शहर के अलग-अलग थानों में एफ़आईआर दर्ज कराई थी. इनमें नदाराबाद, बट चौक और डिवाइन रोड के पुलिस थाने शामिल थे. इन सभी एफ़आईआर की भाषा एक जैसी थी. और इनमें आरोपी बनाए गए लोग भी काफ़ी हद तक एक ही थे.

इन लड़कियों ने अपने अभिभावकों, रिश्तेदारों और धर्म गुरुओं पर केवल पैसे के लिए ज़बरदस्ती अपनी शादी कराने का आरोप लगाया था. लड़कियों का इल्ज़ाम था कि इसके लिए उन्होंने न तो तथ्यों की सही ढंग से पड़ताल की न ही उनकी किसी अन्य तरीक़े से तस्दीक़ की थी. जब चीनी पुरुषों की शादी की ख़बरें सामने आईं, तो ऐसी एफ़आईआर की संख्या बढ़ कर 13 हो गई. मगर, ये सभी शिकायतें पंजाब के केवल एक शहर से मिली थीं. इसके बाद एक के बाद एक पंजाब के कई और शहरों से लड़कियों ने ऐसी ही शिकायतें कीं. इनमें से तीन लड़कियों से बीबीसी ने बात की थी.

अंतरराष्ट्रीय संगठन ह्यमन राइट्स वॉच ने पिछले साल पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान में ठीक वैसी ही शादियां हो रही थीं, जैसी एशिया के पाँच अन्य देशों में. बीबीसी के साथ इंटरव्यू में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि इस मामले को सुलझाने में चीन, पाकिस्तान के साथ पूरा सहयोग कर रहा है.

क़ुरैशी ने कहा, 'हर समाज में हर तरह के लोग होते हैं. चीन ने वीज़ा पर भी कुछ वक़्त के लिए पाबंदी लगाई थी. और वो लोग अभी भी निगरानी के दायरे में हैं. चीन के साथ हमारे रिश्ते ऐसे हैं कि हम एक दूसरे को समझते हैं, आपस में बात करते हैं और एक-दूसरे से सहयोग भी करते हैं. आप देख सकते हैं कि ये उनकी मदद का ही नतीजा है कि ये मामला अब पीछे चला गया है.'

पाकिस्तान की हुकूमत चीन के अधिकारियों से बात कर रही है.

हाल ही में पाकिस्तान की सीनेट ने आंतरिक मंत्रालय के एक अधिकारी से चीनी नागरिकों के पाकिस्तानी लड़कियों से शादी के मुद्दे पर काफ़ी पूछताछ की थी.

आंतरिक मंत्रालय ने एफ़आईए की वही रिपोर्ट संसद को दे दी और कहा कि अब तक ये प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और क़रीब 50 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं. ये वही लोग थे, जिन्हें एफ़आईए के मुताबिक़, बाद में पाकिस्तान की अदालतों ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था.

जब हमने इस बारे में पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री एजाज़ शाह से पूछा तो उन्होंने बीबीसी को बताया कि चीन और पाकिस्तान की सरकारें इस मुद्दे पर बात कर रही हैं.

एजाज़ शाह ने कहा कि, ''हम ने इन मामलों की शिनाख़्त कर ली है और इनके बारे में चीन के अधिकारियों को भी बता दिया है.' एजाज़ शाह ने आगे कहा कि ये अवैध गतिविधियां न तो पाकिस्तान की हुकूमत के इशारे पर चल रही हैं और न ही चीन के अधिकारी ऐसी गतिविधियों का समर्थन करते हैं.''

साथ ही साथ उन्होंने बरी किए गए चीनी नागरिकों के बारे में कहा कि, ''अगर मैं आंतरिक मंत्री के तौर पर किसी को गिरफ़्तार करता हूं, तो मेरा काम पूरा हुआ. अब ये काम अदालतों का है कि वो उन्हें सज़ा दें या बरी करें. उन्हें रिहा कैसे किया जा सकता है, ये देखना तो हमारा काम है नहीं? ऐसा तो हो नहीं सकता कि जिन्हें कोर्ट ने बरी कर दिया हम उन्हें ईसीएल यानी एग्ज़िट कंट्रोल लिस्ट में डाल दें.''

जब पिछले साल चीन से बचा कर लाई गई नताशा मसीह से उनके साथ हुई घटना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब में पलट कर सवाल किया कि वो अब इस बारे में क्यों बात करें. लेकिन, फ़ोन काटने से पहले नताशा ने कहा कि, ''भरी अदालत में मेरी बेइज़्ज़ती की गई. मेरे ऊपर इल्ज़ाम लगाया गया कि मैंने देश का नाम बदनाम किया है. तो, अब इस बारे में बात करके मुझे क्या हासिल होगा?''

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