कोरोना वायरस: दक्षिण कोरिया में 'मौत के लिए ज़िम्मेदार' धार्मिक नेता के ख़िलाफ़ केस

इमेज स्रोत, AFP
कोरोना वायरस की वजह से हुई कुछ मौतों के लिए दक्षिण कोरिया के एक धार्मिक नेता के ख़िलाफ़ जाँच शुरू कर दी गई है.
राजधानी सोल के प्रशासन ने शिन्चेऑन्जी चर्च के संस्थापक ली-मन-ही और 11 अन्य के ख़िलाफ़ केस चलाने के लिए कहा है.
उन पर अधिकारियों से कोरोना पीड़ित कुछ लोगों के नाम छुपाने का आरोप है.
ये अधिकारी शहर में वायरस फैलने से पहले इससे प्रभावित को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे थे.
चीन के बाहर कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित देशों में दक्षिण कोरिया प्रमुख है.
देश में अब तक कोरोना वायरस के 3730 मामले सामने आ चुके हैं और 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.
इनमें से आधे पीड़ित एक ईसाई समूह की ओर से चलाए जा रहे चर्च के सदस्य हैं.

इमेज स्रोत, Getty Images
कोरोना वायरस फैलता गया...
प्रशासन का कहना है कि बीते महीने दक्षिणी शहर डाएगू में शिन्चेऑन्जी चर्च के सदस्यों में एक-दूसरे के जरिए कोरोना वायरस फैलता गया और फिर धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों में भी इसका असर होने लगा.
एक वरिष्ठ सदस्य किम शिन चांग ने बीबीसी संवाददाता लॉरा बिकर को बताया कि चर्च को 'इस मामले में बेहद दुख' है.
उन्होंने माना कि चर्च के सदस्य अपनी पहचान जाहिर करने से घबरा रहे थे.
लेकिन वो यह भी कहते हैं कि अब चर्च ने सभी पीड़ितों के बारे में जानकारी साझा कर दी है. इसमें सभी सदस्यों और जगहों की जानकारी भी है.
उन्होंने कहा, "हम अपने सदस्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस तरह की जानकारी देने से बच रहे थे. लेकिन फिलहाल में लगता है कि सरकार का पूरी तरह सहयोग करना ही सबसे ज़्यादा ज़रूरी है."
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त, 1
दक्षिण कोरिया में क्या हो रहा है?
रविवार को सोल प्रशासन ने एक समुदाय के 12 लोगों के ख़िलाफ़ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.
उन पर हत्या, नुकसान पहुंचाने और संक्रामक रोग और नियंत्रण अधिनियम का उल्लंघन करने के आरोप लगे हैं.
फिलहाल चर्च के सभी दो लाख 30 हज़ार सदस्यों के बयान लिए गए हैं. इनमें से करीब 9000 ने बताया कि उनमें कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे हैं.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त, 2
ख़ुद को मसीहा कहते हैं चर्च प्रमुख
चर्च की 61 वर्षीय एक महिला सदस्य कोरोना वायरस से पॉजिटिव पाए जाने वाले पहले लोगों में शामिल हैं.
उन्होंने शुरुआत में अस्पताल ले जाने, कोरोना वायरस का टेस्ट कराने से इनकार कर दिया था और चर्च के कई कार्यक्रमों में शामिल भी हुई थी. बाद में जब टेस्ट किया गया तो वो पॉजिटिव पाई गईं.
चर्च के प्रमुख ली मन ही ख़ुद को मसीहा कहते हैं. उनका भी कोरोना वायरस टेस्ट कराया गया है. अब तक उनकी रिपोर्ट नहीं आई.
फिलहाल सभी रोमन कैथोलिक चर्च बंद हैं, शहर में रविवार विरोध-प्रदर्शनों के लिए उतरने वाले समूहों ने ये योजना टाल दी और सभी बौद्ध कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए.
बीबीसी संवाददाता लॉरा बिकर की रिपोर्ट के मुताबिक, "दक्षिण कोरिया में फैले कोरोना वायरस के लिए विशेष धार्मिक संप्रदाय को जिम्मेदार मानते हुए लोगों का गुस्सा फूट रहा है. लोगों ने इस चर्च पर प्रतिबंध लगाने के लिए पिटिशन शुरू की है. इस पर अब तक करीब 12 लाख हस्ताक्षर कर चुके हैं."

इमेज स्रोत, Getty Images
चीन और जापान में भी अनुयायी
इस मामले में जांच शुरू होने के बाद शहर के मेयर मार्क वॉन सून ने मुख्य अभियोजक से संप्रदाय के नेता को हिरासत में लेने के लिए कहा है.
हालांकि आरोप लगने का मतलब यह नहीं है कि चर्च के पदाधिकारियों पर हत्या का मुकदमा तुरंत चलेगा. इस मामले में पहले जांच शुरू होगी और फिर जांच अधिकारी तय करेंगे कि किन आरोपों के तहत उन पर मुकदमा चलाया जाए.
चर्च के प्रमुख ली मन ही ख़ुद को 'जीसस का अवतार' बताते हैं. उन्होंने शिन्चेऑन्जी चर्च की स्थापना साल 1984 में की थी. कोरियाई भाषा में शिन्चेऑन्जी का मतलब 'नया स्वर्ग और धरती' है.
ली के अनुनायियों का मानना है कि वो अपने साथ करीब एक लाख 44 हज़ार लोगों को लेकर स्वर्ग जाएंगे.
चर्च का कहना है कि दक्षिण कोरिया से बाहर उसके करीब 20 हज़ार अनुयायी हैं. इन देशों में चीन, जापान और दक्षिण पूर्व एशिया के कुछ देश भी हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

























