जापान को उत्तर कोरिया की धमकी, बैलिस्टिक मिसाइल दिखाएं क्या?

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन

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उत्तर कोरिया ने जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे को "मूर्ख" और "राजनीतिक रूप से कच्चा" कहा है. उत्तर कोरिया का कहना है कि जापान के प्रधानमंत्री उत्तर कोरिया के ताज़ा मिसाइल परीक्षण के बारे में ग़लत जानकारी दे रहे हैं.

गुरुवार को शिंज़ों अबे ने कहा था कि उत्तर कोरिया का बार-बार बौलिस्टिक मिसाइल लांच करना दुनिया के लिए ख़तरा है.

लेकिन उत्तर कोरिया का कहना है कि वो "सुपर लार्ज मल्टिपल रॉकेट लांचर" का परीक्षण कर रहा था.

शनिवार को उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने कहा कि जापान "निकट भविष्य में जल्द असली बैलिस्टिक मिसाइल देख सकता है."

उत्तर कोरिया फिलहाल बैलिस्टिक मिसाइलों पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का सामना कर रहा है.

उसके परमाणु कार्यक्रम और मिसाइलों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. उत्तर कोरिया की कोशिश है कि वो जापान के मित्र देश अमरीका से बातचीत जारी रखे ताकि उस पर लगे प्रतिबंधों में उसे ढील मिले.

लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन आख़िरी बार इस साल फरवरी में मिले थे जिसके बाद से दोनों के बीच चल रही बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है.

उत्तर कोरिया का रॉकेट लांच

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क्या है ताज़ा विवाद?

दक्षिण कोरिया में मौजूद पर्यवेक्षकों के अनुसार उत्तर कोरिया ने गुरुवार को अपने दक्षिण में मौजूद हामग्योंग प्रांत से जापान सागर की तरफ दो अनजानी चीज़ें दाग़ी हैं.

इस लांच की आलोचना करते हुए जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ों अबे ने कहा था "उत्तर कोरिया बार-बार बैलिस्टिक मिसाइल लांच कर रहा है जो हमारे देश के साथ साथ पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ख़तरा है."

इसके बाद उत्तर कोरिया ने कई तस्वीरें जारी कीं और दावा किया कि किम जोंग-उन ने परीक्षण का निरीक्षण किया था.

उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया केसीएनए ने कहा, "अगर शिंज़ो अबे तस्वीरें देख कर भी एक मिसाइल और एक मल्टिपल लांच रॉकेट सिस्टम में फ़र्क नहीं कर सकते हैं तो कहा जा सकता है कि शिंजो अबे दुनिया के सबसे बेवकूफ और इतिहास के सबसे मूर्ख व्यक्ति हैं."

आगे सरकारी मीडिया में कहा गया, "शिंज़ो अबे अपने निकट भविष्य में, अपनी ही नाक के नीचे जल्द ही एक असली बैलिस्टिक मिसाइल देख सकते हैं."

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किसका दावा सही है?

मासेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफ़ेसर विपिन नारंग कहते हैं, "ज़रूरी नहीं कि दोनों में से एक भी सही कह रहा हो."

जानकार मानते हैं कि उत्तर कोरिया ने केएन-25 रॉकेट का लांच किया था जो अपने आकार के कारण बेलिस्टिक मिसाइल के समान दिखती है.

विपिन नारंग कहते हैं, "उत्तर कोरिया एक तरह का खेल खेल रहा है, और जापान भी वही कर रहा है."

वो कहते हैं, "जब जापान के प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, तो वो साफ़ तौर पर बताना चाह रहे थे कि ये संयुक्त राष्ट्र के लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन है."

"जबकि उत्तर कोरिया ने कहा है कि मल्टिपल रॉकेट लांचर हैं जो बैलिस्टिक मिसाइल नहीं है."

वो कहते हैं कि हो सकता है कि इसके पीछे एक बड़ी कहानी ये हो कि उत्तर कोरिया लंबी दूरी की बेलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण के बारे में तैयारी कर रहा है.

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विपिन नारंग कहते हैं, "उत्तर कोरिया ने कहा कि जापान बेलिस्टिक मिसाइल अपनी नाक के नीचे देखेगा. इसका मतलब यही कै कि वो इशारा कर रहे हैं कि वो लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण शुरु करेंगे."

अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत बंद होने के बाद इसी साल मई में जापान के प्रधानमंत्री ने कहा था कि वो बिना किसी शर्त के किम जोंग-उन के मिलाक़ात करने के लिए तैयार हैं. इसके बाद उम्मीद जगी थी कि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर लगी रोक पार चर्चा आगे बढ़ेगी.

लेकिन उसकी इस पेशकश का उत्तर कोरिया ने कोई जवाब नहीं दिया. इसी महीने उत्तर कोरिया ने कहा कि उत्तर कोरिया के परीक्षण की निंदा करने के बाद जापान के नेता कभी उत्तर कोरिया में कदम नहीं रखेंगे.

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