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ब्रितानी सांसदों ने 12 दिसंबर को चुनाव के प्रस्ताव को किया ख़ारिज
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने 12 दिसंबर को आम चुनाव कराने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन संसद ने उनके प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया.
इसके बावजूद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अपने प्रस्ताव पर अड़े हुए हैं और इसके लिए वो संसद में दूसरा विधेयक पेश करेंगे. उस विधेयक को पास कराने के लिए संसद के साधारण बहुमत की ज़रूरत होगी, न कि दो-तिहाई बहुमत की जैसा कि पिछले विधेयक में था.
हालांकि साधारण बहुमत के लिए भी उन्हें लिबरल डेमोक्रेट्स और एसएनपी के सांसदों के समर्थन की ज़रूरत होगी.
जॉनसन ने कहा कि संसद 'निष्क्रिय' हो गई है और 'सांसद इस देश को बंधक बनाकर' नहीं रख सकते. लेकिन विपक्षी लेबर पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं किया जा सकता है.
12 दिसंबर को चुनाव कराने संबंधी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो-तिहाई वोटों की ज़रूरत थी लेकिन सरकार केवल 299 सांसदों का समर्थन पा सकी.
कंज़रवेटिव पार्टी के सभी सांसदों ने सरकार के विधेयक के पक्ष में वोट दिया जबकि लेबर, एसएनपी और डीयूपी सांसदों ने मतदान नहीं किया. एक को छोड़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी सांसदों ने बिल के विरोध में मतदान किया.
इस बीच यूरोपीय यूनियन ने ब्रिटेन को ब्रेग्ज़िट के लिए 31 जनवरी, 2020 तक का समय दे दिया है. बोरिस जॉनसन पहले 31 अक्तूबर तक ब्रेग्ज़िट लागू करने के लिए अड़े हुए थे लेकिन ईयू के नए प्रस्ताव को उन्होंने भी स्वीकार कर लिया.
ईयू के अधिकारियों को पत्र लिखकर जॉनसन ने कहा कि और तीन महीने की समयसीमा की कोई ज़रूरत नहीं थी. इसका अर्थ ये हुआ कि 31 अक्तूबर को ब्रिटेन ईयू से अलग नहीं होगा.
बोरिस जॉनसन ने कहा कि वो जल्द चुनाव कराने के पक्ष में हैं और वो इसके लिए प्रयास करते रहेंगे. वो एक नया विधेयक लाने वाले हैं जिसमें केवल साधारण बहुमत की ज़रूरत होगी और लिबरल डेमोक्रेट्स और एसएनपी ने संकेत दिए हैं कि वो नए बिल का समर्थन कर सकते हैं. डीयूपी भी नए बिल का समर्थन कर सकती है.
लेकिन चुनाव की तारीख़ को लेकर असमंजस बरक़रार है.
लिबरल डेमोक्रेट्स और एसएनपी नौ दिसंबर को चुनाव कराना चाहते हैं. ब्रितानी क़ानून के मुताबिक़ चुनाव की तारीख़ से कम से कम 25 दिन पहले संसद को भंग करना पड़ता है.
सरकार ने कहा है कि चुनाव कराने के लिए संसद को भंग किए जाने से पहले वो प्रधानमंत्री के ब्रेग्ज़िट डील को क़ानून बनाने वाले विधेयक को दोबारा लाने की कोशिश नहीं करेगी.
सरकार ऐसा एसएनपी और लिबरल डेमोक्रेट्स का ख़याल रखते हुए कह रही है जो कि ब्रेग्ज़िट रोकने वाली पार्टी की छवि के साथ चुनाव में जाना चाहते हैं.
लेकिन सरकार अभी भी 12 दिसंबर को चुनाव कराने के लिए पूरी कोशिश कर रही है. सरकार का कहना है कि अब नौ दिसंबर को चुनाव कराना संभव नहीं है.
बोरिस जॉनसन ने कहा कि विपक्षी नेता जेरेमी कोर्बिन जिस तरह चुनाव का विरोध कर रहे हैं उससे मतदाता पूरी तरह हक्का-बक्का रह जाएंगे.
कोर्बिन ने कहा कि वो नए विधेयक का बारीकी से अध्ययन करेंगे लेकिन इस विधेयक का समर्थन तभी करेंगे जब इसमें से नो-डील ब्रेग्ज़िट की किसी भी संभावना को ख़त्म कर दिया जाए.
कई लेबर सांसद किसी भी हालत में आम चुनाव के लिए तैयार नहीं हैं क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता है कि ब्रेग्ज़िट को लेकर पार्टी के ढुल-मुल रवैये के कारण चुनाव में उनका प्रदर्शन ख़राब हो सकता है.