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तंज़ानिया में तेल टैंकर में विस्फ़ोट, 64 की मौत
पूर्वी अफ़्रीकी देश तंज़ानिया में शनिवार को एक तेल टैंकर में हुए विस्फोट की वजह से 64 लोगों की मौत हो गई.
इस विस्फोट से जुड़ी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही हैं, जिसमें आसमान में धुएं के काले बादल दिख रहे हैं साथ ही एक बड़े इलाके में आग की लपटें देखी जा सकती हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक तेल का एक टैंकर सड़क पर पलट गया था, जिस वजह से टैंकर में भरा तेल रिसने लगा.
आसपास मौजूद लोग उस टैंकर से तेल चुराने की कोशिश कर रहे थे तभी उस टैंकर में विस्फोट हो गया जिसमें कई लोग हताहत हो गए.
यह हादसा मोरोगोरो इलाके में हुआ, जो तंज़ानिया की आर्थिक राजधानी दार उस सलाम से 200 किलोमीटर दूर है.
तंज़ानिया के बंदरगाह से समुद्री माल और तेल ले जाने के लिए जिस मुख्य मार्ग का प्रयोग किया जाता है, उसी के बीच में मोरोगोरो शहर भी पड़ता है.
घायलों को किया गया एयरलिफ़्ट
इस हादसे में गंभीर रूप से घायल लगभग 70 लोगों को दार उस सलाम स्थित देश के सबसे बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इन लोगों को एयरलिफ़्ट कर अस्पताल में पहुंचाया गया.
वहीं अन्य घायलों को एंबुलेंस के ज़रिए नज़दीकी अस्पतालों में ले जाया गया. हादसे में जलकर मरने वाले अधिकतर लोगों की पहचान नहीं की जा सकी है.
हादसे के एक चश्मदीद डेनिएल गोगो ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, ''हालात बहुत ही खराब हैं. यहां तक कि वे लोग भी इस हादसे का शिकार हो गए जो तेल नहीं चुरा रहे थे. यह बहुत ही भीड़भाड़ वाला इलाका है.''
स्थानीय पुलिस प्रमुख विलबोर्ड ताफ़ुंगवा ने कहा है कि मरने वालों में अधिकतर मोटरबाइक और टैक्सी ड्राइवर हैं.
तेल चोरी नहीं करने की अपील
तंज़ानिया के राष्ट्रपति जॉन मगुफ़ूली ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है और लोगों से अपील की है कि वो पेट्रोल चोरी करने के लिए अपनी जान को जोखिम में ना डालें.
तंज़ानिया में मौजूद पत्रकारों का कहना है कि मोरोगोरो जैसे हादसे अफ़्रीकी देशों में अक्सर होते रहते हैं, क्योंकि यहां लोग टैंकर और पाइपलाइनों से तेल चोरी करने की कोशिश करते हैं और इस कोशिश में कई बार अपनी जान गंवा देते हैं.
पिछले महीने ही नाइजीरिया के उत्तरी राज्य बेन्यू में एक इसी तरह का हादसा हुआ था जिसमें एक तेल टैंकर में हुए विस्फोट की वजह से कम से कम 45 लोगों की मौत हो गई थी.
इसी तरह मई महीने में नीगर की राजधानी नियामे में स्थित एयरपोर्ट के पास हुए ऐसे ही हादसे में करीब 80 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी.
कई बार इस तरह के हादसों में मृतकों की संख्या बहुत ज़्यादा हो जाती है. साल 2010 में कांगों में एक हादसा हुआ था जिसमें 292 लोग मारे गए थे, उसके पांच साल बाद दक्षिणी सूडान में हुए हादसे में 203 लोग की जान गई थी.
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