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सीरिया: अमरीकी सैन्य गठबंधन के हमले में मारे गए थे 1600 आम लोग
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि साल 2017 में सीरिया के रक़्क़ा शहर में अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं के हमलों 1600 आम नागरिकों की मौत हुई थी.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार लड़ाकू विमानों और तोप से किए गए इन हमलों का लक्ष्य इस्लामिक स्टेट समूह था.
एमनेस्टी इंटरनेशनल और पर्यवेक्षक समूह एयरवॉर्स ने कहा है कि उन्होंने हमलों वाली 200 जगहों की जांच करके 1000 पीड़ितों की पहचान की है.
उन्होंने सैन्य गठबंधन से कहा है कि इन मौतों को लेकर 'दो साल से किया जा रहा खंडन' बंद किया जाए.
उधर अमरीकी गठबंधन का कहना है कि इस अभियान में 180 आम लोगों की ही मौत हुई थी.
सैन्य अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों को नुक़सान न हो, इसके लिए हर संभव सावधानी बरती गई थी और सैन्य संघर्षों पर लागू होने वाले क़ानूनों का पालन करते हुए हमले किए गए थे.
पांच महीनों में हुईं ये मौतें
अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस की गठबंधन सेनाओं ने सीरिया और पड़ोसी देश इराक़ में साल 2014 से अब तक 34,000 हज़ार हमले किए हैं.
ज़्यादातर हमले उस दौर में हुए जब आईएस लड़ाकों ने दोनों देशों के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया था और लगभग 80 लाख लोगों पर अपना क्रूर शासन लागू कर दिया था.
पिछले महीने इस सैन्य गठबंधन के समर्थन वाली सीरियन डेमोक्रैटिक फ़ोर्सेस ने इस समूह के आख़िरी गढ़ पर क़ब्ज़ा करके किसी समय रक़्क़ा को अपनी राजधानी बनाने वाली स्वघोषित 'ख़िलाफ़त' का अंत कर दिया था.
एमनेस्टी और एयरवॉर्स ने कहा है कि जांच के बाद वे अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस के हवाई और अमरीकी तोपों के हमलों में मारे गए लोगों का एक डेटाबेस बनाने में क़ामयाब हुए हैं. यह डेटाबेस जून से लेकर अक्तूबर 2017 तक हुए हमलों का है.
गठबंधन सेनाओं ने ये हमले ज़मीन पर सैन्य अभियान चला रही सीरियन डेमोक्रैटिक फ़ोर्सेस के समर्थन में किए थे.
'सच नहीं मिटा सकते'
एमनेस्टी की सीनियर क्राइसिस रेस्पॉन्स एडवाइज़र डोनाटेला रोवेरा ने कहा, "आईएस के स्नाइपर्स और बारूदी सुरंगों ने शहर को मौत के जाल में तब्दील कर दिया था मगर गठबंधन की ओर से की गई अधिकतर बमबारी निशाने पर नहीं थी. तोपों से भी हज़ारों गोले अंधाधुंध दाग़े गए. ऐसे में हैरानी की बात नहीं है कि इससे सैकड़ों लोग मरे और ज़ख़्मी हुए."
उन्होंने कहा, "गठबंधन सेनाओं ने रक़्क़ा को तबाह कर डाला मगर वे सच को नहीं मिटा सकते."
एमनेस्टी और एयरवॉर्स ने ओपन सोर्स इन्फ़ॉर्मेशन की जांच की जिसमें सोशल मीडिया पोस्ट को भी शामिल किया गया था. इससे 1600 से अधिक आम नागरिकों की मौत होने की जानकारी मिली.
शोधकर्ताओं ने रक़्क़ा शहर में जाकर दो महीने बिताए, हमलों वाली जगह की पड़ताल की और 400 से अधिक प्रत्यक्षदर्शियों और हमलों में ज़िंदा बचने वालों से बात की.
एमनेस्टी का कहना है कि वे मरने वालों में से 641 की पुष्टि सीधे कर सके और बाक़ियों की पुष्टि विभिन्न स्रोतों के माध्यम से की.
सैन्य गठबंधन का जवाब
इन दावों के संबंध में सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "आईएस को हराने के अभियान के दौरान ग़ैरइरादतन किसी की जान जाना दुखद है."
प्रवक्ता ने कहा, "गठबंधन आम नागरिकों को होने वाले नुक़सान को कम से कम करने की कोशिश करता है और हमेशा संतुलन देखता है कि स्ट्राइक करने और न करने से क्या परिणाम होंगे."
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