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कर्नाटक का 'सियासी नाटक' जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार पर सस्पेंस में कांग्रेस
- 13 मई, विधानसभा के चुनाव के नतीजे आए
- 135 सीटों के साथ कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला
- 224 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को 66 सीटें मिलीं
- 18 मई, शपथ ग्रहण की तारीख तय
- 17 मई की दोपहर तक मुख्यमंत्री पद के दो दावेदारों में से एक को चुनने काकांग्रेस का असमंजस बरक़रार
2018 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 80 और जनता दल सेकुलर को 37 सीटें मिलीं. दोनों पार्टियों ने गठबंधन में सरकार बनाई, लेकिन एक साल बाद हुए कई इस्तीफ़ों से सरकार गिर गई और राज्य में 'कमल' खिला.
इसी के साथ 104 सीटें लेकर भी सरकार न बना सकी बीजेपी ने आख़िर जुलाई 2019 में वहां एक बार फिर सरकार बना लिया.
उस वक्त देश के कई राज्यों में बीजेपी या उसके गठबंधन की सरकारें थीं और कांग्रेस एक के बाद एक चुनावों में मुश्किलों का सामना कर रही थी.
लेकिन 2023 में हुए चुनावों में यहां बाज़ी एकदम पलटी नज़र आई. कांग्रेस को एक बार फिर राज्य में सरकार बनाने का मौक़ा तो मिला ही, दक्षिण के एकमात्र राज्य में बनी बीजेपी सरकार को उसने सत्ता से हटा दिया.
चुनाव में कांग्रेस को कुल 135 सीटें मिलीं और बीजेपी को 66 सीटें हासिल हुईं. वहीं जेडीएस और अन्य को 23 सीटें मिलीं.
बड़ा सवाल- कौन बनेगा सीएम?
कांग्रेस को चुनाव में जीत तो मिली, लेकिन फिर एक और बड़ी चुनौती सामने आ गई. पूर्ण बहुमत हासिल करने वाली कांग्रेस, नतीजे आने के 72 घंटों बाद भी मुख्यमंत्री पद के लिए किसी एक के नाम पर मुहर नहीं लगा सकी.
मामला उलझा अनुभव और समर्थन, और नए चेहरे और मेहनत के बीच, यानी सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच.
जहां सिद्धारमैया पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अनुभवी नेता हैं, वहीं शिवकुमार का कहना है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की है, इसलिए उन्हें सीएम बनाया जाना चाहिए.
शिवकुमार का कहना है कि सिद्धारमैया पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसलिए इस बार ये ज़िम्मेदारी नए चेहरे को दी जानी चाहिए. वहीं सिद्धरमैया का कहना है कि अधिकतर विधायक उनके साथ हैं, इसलिए सीएम पद उन्हें दिया जाना चाहिए.
हालांकि ये पहली बार नहीं था जब कांग्रेस मुख्यमंत्री के नाम पर फंसी है. राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच का मतभेद भी खुल कर सामने आ गया था और वहां भी सरकार के ऊपर संकट के बादल मंडरा रहे थे.
वहीं मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की स्थिति बनी थी. बाद में मार्च 2020 में मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ दर्जनों विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया और वहां कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार गिर गई.
कर्नाटक के मामले में कांग्रेस चाहती है कि आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र वो दोनों नेताओं में से किसी को भी नाराज़ न करे. लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा क्योंकि दोनों ही नेता पीछे हटने को तैयार नहीं दिखते.
मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगाने के लिए कांग्रेस में बीते तीन दिनों से बैठकों का दौर जारी है और उम्मीद है कि बुधवार को इसका फ़ैसला सामने आ जाएगा.
लेकिन इससे पहले कांग्रेस में जो असमंजस की स्थिति है, उसे उसकी ताबड़तोड़ हो रही बैठकों और बयानों से समझा जा सकता है. एक नज़र इस बात पर कि अब तक क्या-क्या हुआ.
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अब तक क्या क्या हुआ?
13 मई 2023
- कांग्रेस की जीत का एलान हुआ और बीजेपी के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने हार की ज़िम्मेदारी स्वीकर करते हुए इस्तीफ़ा दे दिया.
- कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्नाटक में पार्टी के मुख्यालय में डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया से मुलाक़ात की. यहां उन्होंने 'बीजेपी मुक्त दक्षिण भारत' का एलान किया.
- सिद्धारमैया ने कहा कि 14 को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक होगी. उम्मीद यही थी कि बंगलुरू के शांग्री-ला होटल में होने वाली बैठक के बाद मुख्यमंत्री उम्मीदवार के नाम का एलान होगा, लेकिन इसके साथ बैठकों का जो दौर जारी हुआ वो बुधवार दोपहर तक तक ख़त्म नहीं हुआ.
- पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के घर के बाहर उनके समर्थक पोस्टर लगा कर मांग किया कि उन्हें सीएम बनाया जाए.
- वहीं सिद्धारमैया के समर्थकों ने उनके घर से बाहर इसी तरह के पोस्टर लगाए.
14 मई 2023
- चुनाव जीतने के एक दिन बाद शिवकुमार अपने आध्यात्मिक गुरु का आशीर्वाद लेने अपने परिवार के साथ तुमकुर में वीरशैव देशीकेंद्र के नोनाविनाकेरे कदासिद्धेश्वरा मठ पहुंचे, वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात करने सिद्धारमैया बंगलुरु में उनके घर पर पहुंचे.
- उनकी इस मुलाक़ात के बाद इस तरह के कयास लगाए गए कि पार्टी के दो आला नेताओं में सीएम पद को लेकर टकराव की स्थिति बन रही है. तुमकुर में एक प्रेस वार्ता कर शिवकुमार ने इस पर सफाई दी और कहा सिद्धारमैया और उनके बीच कोई मतभेद नहीं है.
- कांग्रेस विधायक प्रियंक खड़गे ने सफाई दी कि ये मुलाक़ात राजनीतिक नहीं थी और मुख्यमंत्री के नाम का फ़ैसला सीएलपी की बैठक में होगा.
- ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी ने सीएलपी बैठक के लिए सुशील कुमार शिंदे, दीपक बाबरिया और भंवर जीतेंन्द्र सिंह को पर्यवेक्षक बनाया. बैठक के बाद उन्हें पार्टी हाई कमान को रिपोर्ट सौंपनी थी.
- मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर ही पार्टी नए सीएम के नाम एलान करेगी.
- होटल के भीतर जब सीएलपी की बैठक चल रही थी, दोनों नेताओं के समर्थक बाहर नारेबाज़ी कर रहे थे. बैठक बेनतीजा रही और बैठक में शामिल नेताओं ने एकमत से फ़ैसला किया कि मुख्यमंत्री के नाम पर आख़िरी फ़ैसला एआईसीसी लेगी.
- कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पर्यवेक्षक सभी विधायकों की राय लेंगे और उसी आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे.
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15 मई 2023
- रणदीप सिंह सुरजेवाला और पर्यवेक्षकों ने सभी विधायकों से अलग-अलग मुलाक़ात की. कहा गया कि अब सीएम के नाम की घोषणा में ज़्यादा वक्त नहीं लगेगा.
- कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कहा, रिपोर्ट दिल्ली भेजी जाएगी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से बात करने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे इस पर फ़ैसला लेंगे.
- मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा को लेकर जारी कश्मकश के बीच सिद्धारमैया दिल्ली पहुंचे.
- शिवकुमार ने बंगलुरु में सुशील कुमार शिंदे और दूसरे नेताओं से मुलाक़ात की. शिवकुमार ने मीडिया से कहा "मैंने दिल्ली जाने को लेकर अब तक कोई फ़ैसला नहीं किया है और सीएम पद का फ़ैसला हाई कमान पर छोड़ दिया है. कुछ घंटों बाद उन्होंने कहा कि उन्हें पेट में इंफ़ेक्शन है और बाद में दिल्ली जाएंगे."
- दिल्ली में मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पहुंचे पर्यवेक्षकों ने उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंपी.
- सुबोध कांत सहाय सिद्धारमैया से होटल में मिलने पहुंचे.
- शिवकुमार के भाई डीके सुरेश मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात करने पहुंचे.
16 मई 2023
- दिल्ली पहुंचे शिवकुमार. उन्होंने पार्टी हाई कमान पर भरोसा जताया और कहा "हमने इस घर को बनाया है, हम इसका हिस्सा हैं, मां अपने बच्चे को सब कुछ देती है. कांग्रेस मेरी मां है."
- साथ ही उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य लोकसभा चुनाव में कर्नाटक में 20 सीटें हासिल करना है.
- चुनाव में जीते कांग्रेस के विधायक मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठक करने के लिए उनके घर पहुंचे. राहुल गांधी भी बैठक में शामिल होने पहुंचे.
- सिद्धारमैया और शिवकुमार के नाम को लेकर चल रही बहस के बीच तीसरे नाम की भी एंट्री हो गई. जी परमेश्वर के समर्थकों तुमाकुर में उनको सीएम बनाए जाने को लेकर प्रदर्शन किया. जी परमेश्वर ने कहा कि अगर उन्हें सीएम पद की ज़िम्मेदारी दी गई तो इसे पूरी श्रद्धा से निभाएंगे.
- शिवकुमार ने मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ दिल्ली में मुलाक़ात की.
- इसके कुछ देर बार सिद्धारमैया मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात करने पहुंचे. इसके बाद वो पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाक़ात करने पहुंचे.
- देर रात केसी वेणुगोपाल मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाक़ात करने पहुंचे. वहां से निकलते हुए उन्होंने मीडिया से कहा कि "इंतज़ार करें, नतीजा आएगा, जल्द आएगा और अच्छा आएगा."
17 मई 2023
- सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाक़ात करने के लिए केसी वेणुगोपाल 10 जनपथ में मौजूद उनके घर पहुंचे.
- इसके बाद सिद्धारमैया 10 जनपथ पहुंचे.
- उनके यहां से जाने के कुछ देर बार शिवकुमार भी वहां पहुंचे.
- पूरी उम्मीद है कि आज कांग्रेस में जारी इस सस्पेंस पर से पर्दा उठ जाएगा और जल्दी ही ये पता चल जाएगा कि कर्नाटक का अगला सीएम कौन होगा.
डी के शिवकुमार
- कांग्रेस पार्टी के पुराने नेता हैं. राज्य में वोक्कालिगा समुदाय के सबसे बड़े नेताओं में से एक माने जाते हैं.
- साल 2020 में उन्हें कांग्रेस ने कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष का जिम्मा सौंपा था. उस वक्त कांग्रेस राज्य में अपने बुरे दौर से गुजर रही थी, सिद्धारमैया समेत कैबिनेट में रहे कई मंत्री हार का सामना कर चुके थे.
- 1989 में विधानसभा चुनाव जीते, इसके बाद से कभी उन्होंने दूसरी पार्टी की तरफ नहीं देखा.
- आठवीं बार कनकपुरा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की है.
- 2019 में मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी के आरोप में क़रीब दो महीने दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी बिताने पड़े थे.
सिद्धारमैया
- 1983 में पहली बार भारतीय लोक दल पार्टी के टिकट से चुनकर कर्नाटक विधानसभा में आए. 1994 में जनता दल सरकार में रहते हुए कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री बने.
- 1999 से लेकर 2004 तक जनता दल के पार्टी अध्यक्ष रहे.
- एचडी देवगौड़ा के साथ विवाद होने के बाद जनता दल सेकुलर का साथ छोड़ा और 2008 में कांग्रेस का हाथ पकड़ा.
- 2013 से 2018 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं.
- उन्होंने अब तक 12 चुनाव लड़े हैं जिसमें से नौ में जीत दर्ज की है.
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