आईएसएचआर में लगी भारत माता और दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर हटाई गई- प्रेस रिव्यू

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भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) में पिछले छह महीने से हर दिन कर्मचारी एक जगह जमा होकर वंदे मातरम गाते थे, जो कुछ आपत्तियों के बाद शुक्रवार को बंद कर दिया गया.

सदस्य सचिव उमेश कदम के दफ़्तर और आईसीएचआर कॉन्फ्रेंस रूम में लगी भारत माता और जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर भी उतार ली गई है.

'इंडियन एक्सप्रेस' ने अपनी एक ख़बर में लिखा है संस्थान में हर दिन वंदे मातरम गाने और फिर भारत माता और दीनदयाल की तस्वीरों पर 'आपत्तियां' जताई गई थीं.

अख़बार ने इस बारे में आईसीएचआर के अध्यक्ष रघुवेंद्र तंवर और सदस्य सचिव उमेश कदम से जानकारी मांगी तो उन्होंने इस कदम की पुष्टि की. लेकिन इस बारे में विस्तार से बताने से उन्होंने इनकार कर दिया.

अख़बार के मुताबिक़ एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसे बताया, "वंदे मातरम गाने का मौखिक आदेश पिछले साल सितंबर में दिया था, आज ये बंद कर दिया गया. लेकिन ये भी मौखिक आदेश के बाद. भारत माता और दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर भी बग़ैर लिखित आदेश के हटाई गई हैं."

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि संस्थान की दीवारों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरों के साथ ये तस्वीरें लगी थीं.

कदम ने अख़बार को बताया, "इन तस्वीरों को लगाने के लिए कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया था. लोग आते हैं और हमें इस तरह की चीजें उपहार में देते हैं. हम इन्हें दीवार पर लगा देते हैं."

जब ये कहा गया कि संस्थान में लाइब्रेरी के सामने हर दिन कर्मचारी खड़े होकर वंदे मातरम गाते थे तो उन्होंने कहा कि ऐसा वो अपनी मर्जी से करते थे.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि पिछले साल 11 अगस्त को कदम के संस्थान की ज़िम्मेदारी संभालने के बाद हर दिन वंदे मातरम गाना शुरू हुआ था.

जब इस बार में चेयरमैन तंवर से पूछा गया तो उन्होंने बताया, "ये सच है कि वंदे मातरम गाने और तस्वीरें लगाने के लिए सही तरीके से अनुमति नहीं ली गई. न तो परिषद और न ही मुझसे अनुमति ली गई. मेरा इन तस्वीरों को हटाने या राष्ट्रगान रोकने में कोई रोल नहीं है. दस फरवरी के बाद मैं संस्थान नहीं गया."

तंवर ने कहा, "आईसीएचआर एक ग़ैर-सांप्रदायिक निकाय है. इसकी शुचिता को बरकरार रखा जाना चाहिए."

आईएसएचआर के सदस्य सचिव कदम हाल तक जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी पढ़ाते रहे हैं. (वह मध्यकालीन भारतीय इतिहास के चेयर थे). कदम यहां डीन भी रहे थे.

तंवर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एमिरेटस रहे हैं. उन्हें पिछले साल जनवरी में आईएसएचआर के अध्यक्ष के तौर पर मनोनीत किया गया था. उनका हाल का काम 'द स्टोरी ऑफ़ इंडियाज़ पार्टीशन' के नाम से 2021 में प्रकाशित हुआ था. भारत सरकार ने इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों में प्रकाशित किया है.

1972 में स्थापित आईएसएचआर के मिशन वाक्य के मुताबिक़ इसका काम "वस्तुनिष्ठ और वैज्ञानिक इतिहास लेखन को बढ़ावा देना है."

अपराधियों के चुनाव लड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने किसी निचली अदालत की ओर से जघन्य अपराधों में आरोप तय होने के बाद जन प्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है.

'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने सुप्रीम कोर्ट की ख़बर के मुताबिक़ इस मामले पर सुनवाई के दौरान जस्टिस के एम जोसफ़ और बी वी नागरत्ना की बेंच ने कहा, "अगर आपको एक राष्ट्र के तौर पर बरकरार रहना है तो हम सबको चरित्रवान होना होगा और कुछ जीवन मूल्य अपनाने होंगे. भ्रष्टाचार का हाल देखिए. पश्चिमी देशों में लोगों को ये समस्या नहीं झेलनी पड़ती. यहां तो भ्रष्टाचार सबसे निचले स्तर पर है. यही असली समस्या है."

जनहित याचिका दायर करने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि अगर कोर्ट जघन्य अपराध में किसी सरकारी कर्मचारी के ख़िलाफ़ आरोप तय करता है तो उसे या तो निलंबित कर दिया जाता या फिर बर्खास्त.

लेकिन एक जन प्रतिनिधि को जब तक किसी केस में दो साल या उससे अधिक की सजा नहीं सुना दी जाती तब तक वो मंत्री बना रहता है.

अख़बार के अनुसार उपाध्याय ने कोर्ट में कहा, "कोई साधारण व्यक्ति जिसके ख़िलाफ़ जघन्य आरोप तय हैं वो चपरासी भी नहीं बन सकता. लेकिन कोई जन प्रतिनिधि सांसद यहां तक कि क़ानून मंत्री भी बन सकता है."

इसके बाद जस्टिस जोसफ़ ने चुनाव आयोग के वकील अमित शर्मा से इस बारे में उनके विचार पूछे.

बेंच ने इस मामले पर तीन सप्ताह के अंदर केंद्र और चुनाव आयोग के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा. केस की अगली सुनवाई अप्रैल के पहले सप्ताह में होनी है.

शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, बिना वेतन काम करें पाकिस्तान के मंत्री

आर्थिक बेहाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अपने मंत्रियों और सलाहकारों से सैलरी, दूसरी सुविधाएं न लेने को कहा है. साथ ही उन्होंने नेताओं को लग्ज़री कार से यात्रा न करने को कहा है. सरकार का खर्च घटाने के मकसद से उन्होंने मंत्रियों से इकोनॉमी क्लास में हवाई यात्रा करने को कहा है.

'हिन्दुस्तान टाइम्स' ने पाकिस्तानी अख़बार डॉन की इस ख़बर का हवाला देते हुए लिखा है कि इससे पाकिस्तान सरकार को हर साल 200 अरब रुपये की बचत होगी.

पाकिस्तान सरकार फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद की रुकी हुई किस्त हासिल करने की कोशिश कर रही है.

आईएमएफ़ से बातचीत पूरी होने पर उसे एक अरब डॉलर का पैकेज मिल सकता है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पैकेज के लिए समझौता अंतिम चरण में है.

पाकिस्तान सरकार देश को आर्थिक बदहाली से बचाने की कोशिश में खर्च कम करने की कोशिश में लगी है.

दरअसल पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार काफी घट गया है और वहां अब सिर्फ तीन सप्ताह के आयात लायक डॉलर बच गया है. देश महंगाई 35 फीसदी से ऊपर पहुंच गई है.

एयर इंडिया इस साल करेगी 900 पायलटों की नियुक्ति

टाटा ग्रुप की एयरलाइंस एयर इंडिया इस साल 4,200 केबिन क्रू ट्रेनी और 900 पायलटों की भर्ती की योजना बना रही है.

बिजनेस अख़बार मिंट ने रॉयटर्स की ख़बरों का हवाला देते हुए कहा कि ये ऐलान टाटा ग्रुप के एयरबस एसई और बोइंग से 470 विमान खरीदने के करार के पंद्रह दिनों के भीतर हुआ है.

इससे पहले एयर इंडिया ने 1900 केबिन क्रू की भर्ती की थी. मई 2022 से फरवरी 2023 के बीच 1100 केबिन क्रू की भर्ती की गई. पिछले सात महीनों में उन्हें प्रशिक्षित किया गया है. इनमें से 500 केबिन क्रू को एयरलाइन की उड़ानों में तैनात किया गया है.

एयरलाइंस ने कहा है कि केबिन क्रू की भर्तियां पूरे देश से की जाएगी. उन्हें पंद्रह सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाएगी. इनमें सेफ्टी और सर्विस स्किल सिखाए जाएंगे. इसके बाद उन्हें उड़ानों में तैनात किया जाएगा.

प्रशिक्षुओं क्लास-रूम और विमान, दोनों जगह ट्रेनिंग दी जाएगी. उनहें मुंबई में एयरलाइंस के ट्रेनिंग केंद्र में ट्रेनिंग दी जाएगी. साथ ही उड़ानों के दौरान भी उन्हें प्रशिक्षण मिलेगा.

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