EPS: रिटायरमेंट के बाद ज़्यादा पेंशन पाने के लिए ये करना होगा

    • Author, वारिकुटी रामाकृष्णा
    • पदनाम, बीबीसी तेलुगू
  • प्रकाशित

अब लोगों के पास ये सुविधा है कि वो रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन की रकम ज़्यादा तय कर सकते हैं.

'कर्मचारी भविष्य निधि संगठन' (EPFO) ने सुप्रीम कोर्ट के फै़सले के मुताबिक 2022 के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं.

ज़्यादा पेंशन पाने का हक़दार कौन है? हमें ज़्यादा पेंशन पाने की सुविधा का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं? चलिए सरकार की नई स्कीम में ऐसे सवालों के जवाब ढूंढते हैं.

2022 में सुप्रीम कोर्ट ने जो फ़ैसला सुनाया था, उसके मुताबिक ऊंची सैलरी वाले लोग भी पेंशन फंड में ज़्यादा पैसे जमा करा सकते हैं. लेकिन इसके लिए शर्त ये है कि ऐसे लोग कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) के सदस्य एक सितंबर 2014 से पहले बने हो.

कोर्ट के इस फ़ैसले को इन दो स्थितियों से समझिए.

अगर मैं सितंबर 2014 से पहले रिटायर हो चुका हूं तो?

अगर आप सितंबर 2014 से पहले रिटायर हुए हों तो इस स्कीम का फ़ायदा आपको तभी मिलेगा, जब आपने ज़्यादा पेंशन के लिए आवेदन दिया हो और उसे ईपीएफओ ने मंजूर कर लिया हो.

अगर आपका आवेदन ईपीएफओ ने खारिज कर दिया हो तब आपको ज़्यादा पेंशन के लिए दोबारा आवेदन करना होगा.

अगर मैं सितंबर 2014 के बाद रिटायर हुआ हूं?

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में कहीं भी इस बात का साफ़ ज़िक्र नहीं है कि जो लोग एक सितंबर 2014 से चार नवंबर 2022 के बीच रिटायर हुए हैं, वो ज़्यादा पेंशन पाने के योग्य नहीं है. ये लोग इसके लिए आवेदन दे सकते हैं.

ऐसे लोगों का आवेदन अगर ईपीएफओ पहले खारिज कर चुका हो तो भी वो दोबारा आवेदन दे सकते हैं. इसके लिए अंतिम तारीख है तीन मार्च 2023.

वर्तमान में नौकरी कर रहे लोगों के लिए क्या?

जो लोग कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के सदस्य सितंबर 2014 से पहले बने हैं और अभी नौकरी कर रहे हैं, अगर इन्होंने ज़्यादा पेंशन स्कीम की सुविधा नहीं ली है तो ये लोग भी तीन मार्च 2023 तक आवेदन दे सकते हैं.

अगर ऐसे लोगों का आवेदन ईपीएफओ पहले खारिज कर चुका है तो भी ये नया आवेदन दे सकते हैं.

अगर सैलरी 15 हज़ार रुपये से कम है तो क्या करें?

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का कोई असर उन कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा, जिनकी तनख़्वाह महीने के 15 हज़ार से कम है.

लेकिन अब सवाल ये है कि अगर मेरी तनख़्वाह एक सितंबर 2014 से पहले 15 हज़ार से कम थी जो इसके बाद बढ़ गई तो क्या मैं ज़्यादा पेंशन वाली स्कीम का लाभ उठा सकता हूं?

तो इसका सीधा जवाब है नहीं. सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला उन्हीं कर्मचारियों पर लागू होता है, जिनकी तनख़्वाह एक सितंबर 2014 को 15 हज़ार से ज़्यादा थी.

अगर मैंने ईपीएफओ की सदस्यता एक सितंबर 2014 या उसके बाद ली तो?

जिन लोगों का ईपीएफ एकाउंट एक सितंबर 2014 या इसके बाद खुला, उस वक्त अगर उनकी तनख्वाह 15 हज़ार या इससे ज़्यादा थी तो वो ईपीएस का फ़ायदा उठा सकते हैं.

यानी ऐसे लोगों पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का कोई असर नहीं होगा.

पेंशन राशि की गणना कैसे होती है?

किसी भी कर्मचारी की पेंशन राशि उसकी मासिक तनख़्वाह के 'पेंशन वाले हिस्से' पर निर्भर करती है.

इसकी गणना के तहत 'पेंशन वाली सैलरी' में 'नौकरी के बरसों' को गुणा कर उसे 70 से विभाजित किया जाता है.

किसी भी संगठित क्षेत्र के संस्थान में नौकरी के कुल बरसों को 'पेंशनेबल सर्विस' कहा जाता है.

इसी तरह 'पेंशनेबल सैलरी' पिछले 60 महीनों में ली गई औसत तनख़्वाह को कहा जाता है.

अगर मैंने ज़्यादा पेंशन वाली स्कीम को चुना तो सैलरी ज़्यादा कटेगी?

पेंशन की राशि के अलावा सैलरी में कोई दूसरी कटौती नहीं होगी.

ये सुविधा क्या बाद में ख़त्म की जा सकती है?

एक बार आपने चुनाव कर लिया तो ये सुविधा फिर कैंसिल नहीं की जा सकती.

ये स्कीम कब से लागू होगी?

अगर आपने ज़्यादा पेंशन पाने का विकल्प चुना है तो ये उस तारीख़ से लागू होगी, जिस तारीख को आपने ईपीएफओ ज्वाइन किया है.

हमें ज़्यादा पेंशन वाली योजना चुननी चाहिए या नहीं?

अगर कोई ज़्यादा पेशन वाली स्कीम का चनाव करता है तो उसके पीएफ एकाउंट से कुछ रकम ईपीएस एकाउंट में ट्रांसफर होगी. इस तरह जब वो कर्मचारी रिटायर होगा तो उसकी पेंशन पहले के मुकाबले ज़्यादा होगी. लेकिन उसकी पीएफ में जमा रकम कम मिलेगी.

अगर आप ज़्यादा पेंशन वाली सुविधा नहीं लेते हैं तो आपके पीएफ एकाउंट में ज़्यादा रकम जमा होगी, ईपीएस खाते में कम. इस तरह जब ऐसा कर्मचारी रिटायर होगा तो उसे कम पेंशन मिलेगी, लेकिन पीएफ की राशि ज़्यादा होगी.

यहां ये जानना भी जरूरी है, कि पीएफ खातों में जमा कुल राशि पर ज़्यादा ब्याज़ मिलता है. लेकिन ईपीएस एकाउंट में जमा राशि पर कोई ब्याज़ नहीं मिलता. इसलिए किसी भी विकल्प का चुनाव करने से पहले कर्मयारियों को ये बात ध्यान रखनी चाहिए.

गौरतलब ये भी है कि पीएफ की राशि पर पांच साल बाद कोई टैक्स नहीं नहीं लगता. लेकिन मासिक पेंशन पर आपको टैक्स देना पड़ता है.

तो क्या मुझे आवेदन करना चाहिए?

कर्मचारी और उनके नियोक्ताओं को ईपीएस स्कीम के लिए तीन मार्च 2023 तक संयुक्त रूप से अप्लाई करना चाहिए. लेकिन इस प्रक्रिया बारे में पीएफ डिपार्टमेंट ने पूरा ब्योरा अभी तक नहीं दिया.

पेंशन की सुविधा लेना क्या जरूरी होता है?

नहीं, कोई भी कर्मचारी इसे चुनने या छोड़ देने के लिए स्वतंत्र होता है.

क्या प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट भी ईपीएस का विकल्प चुन सकते हैं?

जी हां, ये विकल्प प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट के लिए भी है.

पेंशन कब मिलती है?

पेंशन आपके नौकरी से रिटायर होने के बाद मिलती है. लेकिन इसके लिए कम से कम नौकरी के 10 साल का पूरा होना जरूरी है. पेशन की राशि तब मिलनी शुरू होती है, जब कर्मचारी की उम्र 58 साल से ज़्यादा हो जाती है.

अगर कोई कर्मचारी 50 से 57 साल के बीच नौकरी छोड़ देता है तो भी उसे पेंशन मिलेगी.

पेंशन कब तक मिलती है?

कर्मचारी को पेंशन उसके निधन के पहले तक मिलती है.

इसके बाद पेंशन की राशि उसकी पत्नी या बच्चों को मिलती है. लेकिन बच्चों की उम्र 25 साल से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए.

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