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दिल्ली एमसीडी चुनाव: बीजेपी-आम आदमी पार्टी के बीच तनातनी, कब-कब क्या-क्या हुआ
- दिसंबर 2022 को दिल्ली में एमसीडी चुनाव कराए गए. इसमें आम आदमी पार्टी को बहुमत मिला.
- बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच तीखी बहस के कारण मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव नहीं करवाए जा सके.
- तीन बार मेयर का चुनाव करवाने की कोशिश हुई लेकिन हंगामे के कारण सदन को स्थगित करना पड़ा.
- मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जल्द मेयर चुनाव करवाने का आदेश दिया, जिसके बाद 22 फरवरी को सदन की बैठक हुई.
- बैठक में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव हो गया लेकिन इसके बाद दोनों पार्टी के नेताओं के बीच झगड़ा हो गया और स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव नहीं कराया जा सका.
राजधानी दिल्ली में एमसीडी चुनावों (म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन दिल्ली) को लेकर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं में तीखी बहस जारी रहने के बाद, दिल्ली असेंबली सत्र को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.
बुधवार को आयोजित सत्र में एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों का चुनाव होना था लेकिन हंगामे और स्थगन के बीच रातभर सदन की कार्यवाही चलती रही.
इस दौरान कई बार ऐसा हुआ जब बीजेपी और आम आदमी के पार्षदों के उलझने की नौबत आ गई.
महिला पार्षदों के भी हाथापाई करने के वीडियो सामने आए हैं. ऐसे में सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी.
इससे पहले 06 जनवरी 2023, 24 जनवरी 2023 और फिर इसके बाद 06 फरवरी 2023 को मेयर चुनाव करवाने की कोशिश हुई लेकिन हंगामे के कारण सदन को स्थगित करना पड़ा और चुनाव नहीं कराए जा सके.
बाद में दिल्ली की नवनिर्वाचित मेयर शैली ओबेरॉय ने शुक्रवार सुबह 10 बजे तक एमसीडी सदन की कार्यवाही स्थगित करने का एलान कर दिया.
उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन कर बीजेपी के कई पार्षदों पर सदन में तोड़फोड़ करने और अव्यवस्था फैलाने के आरोप लगाए.
शैली ओबेरॉय ने अपने ट्विटर हैंडल से किए एक ट्वीट में बीजेपी पर गुंडागर्दी करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने लिखा, "सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, जब मैं स्थायी समिति का चुनाव करा रही थी, तभी बीजेपी के पार्षदों ने मुझ पर हमला करने की कोशिश की. बीजेपी की गुंडागर्दी की ये हद है कि ये एक महिला मेयर पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं."
लेकिन बीजेपी ने भी आम आदमी पार्टी पर पलटवार किया और अरविंद केजरीवाल पर सदन में गुंडागर्दी करवाने का आरोप लगाया.
दिल्ली बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सदन के भीतर जो कुछ हुआ वो सुनियोजित साजिश के तहत था.
उन्होंने कहा कि मेयर और डिप्टी मेयर के चुनावों तक सदन की कार्यवाही सामान्य तरीक़े से चल रही थी, लेकिन स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों के चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी की दूसरी योजना थी.
बीजेपी नेता वीरेंद्र सचदेवा ने भी आरोप लगाया, "शर्म कीजिए अरविंद केजरीवाल. हम शुरू से कह रहे थे कि आम आदमी पार्टी महापौर एवं उप महापौर चुनाव के बाद स्थायी समिति चुनाव नहीं होने देगी और आपने साबित कर दिया कि स्थायी समिति में हार के भय से आप चुनाव नहीं होने देंगे."
दिल्ली बीजेपी के उपाध्यक्ष राजीव बब्बर के अनुसार, "आम आदमी पार्टी के गुंडे पार्षदों ने भाजपा पार्षद प्रमोद गुप्ता और अरुण डेढ़ा पर किया हमला. अरविंद केजरीवाल के अर्बन नक्सल गुंडों ने पहले दिन से ही अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया."
दिल्ली एमसीडी चुनाव: कब-कब क्या-क्या हुआ?
23 फरवरी 2023: 22 तारीख को शुरू हुई सदन की कार्यवाही रातभर चली जिसके बाद 24 फरवरी 2023 को सुबह 10 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित किया गया. 23 फरवरी को सवेरे तक हंगामे के कारण सदन को क़रीब 13 बार स्थगित करना पड़ा.
22 फरवरी की आधी रात को आम आदमी पार्टी के नेताओं और शैली ओबेरॉय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और कहा कि स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव इसी सत्र में होगा. पार्टी का कहना था कि बीजेपी इसे टालने की कोशिश कर रही है लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे.
बीजेपी ने आरोप लगाया कि मामला तब बिगड़ा जब नई मेयर ने चुनाव के दौरान मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल को इजाज़त दी. बीजेपी ने इसका विरोध किया जिसे लेकर बहस हुई.
बीजेपी ने मांग की कि वोटिंग नए सिरे से कराई जाए.
22 फरवरी 2023: एमसीडी की स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों के चुनाव के दौरान बीजेपी और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच जमकर बहसबाज़ी हुई. मामला हाथापाई तक जा पहुंचा.
इसी दिन तनाव बढ़ने से पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी की पूर्व प्रोफ़ेसर और आम आदमी पार्टी की शैली ओबेरॉय को दिल्ली का मेयर चुना गया. उन्हें 150 वोट मिले जबकि बीजेपी की रेखा गुप्ता को 116 वोट मिले.
वहीं आम आदमी पार्टी के आले मोहम्मद इक़बाल को डिप्टी मेयर चुना गया. उन्हें 266 में से कुल 147 वोट मिले जबकि दो वोट को अमान्य करार दिया गया. वहीं उनके मुक़ाबले बीजेपी के कमल बागड़ी को 116 वोट मिले. 1977 के बाद इस पद पर रहने वाले वो पहले मुसलमान नेता हैं.
मेयर बनने के बाद शैली ओबेरॉय ने प्रिज़ाइडिंमग अफ़सर से लत्या शर्मा से सदन की कमान अपने हाथों में ली और स्टैंडिंग कमेटी की चुनाव करवाने की शुरुआत की.
18 फरवरी 2023: दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सिफारिश को मानते हुए 22 फरवरी को दिल्ली के एमसीडी के मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव करवाने की अनुमति दी.
उन्होंने अपने आदेश में लिखा, "दिल्ली के मुख्यमंत्री की सिफारिश के अनुसार फरवरी 22 को सुबह, 11 बजे चुनाव करवाए जाएंगे."
17 फरवरी 2023: सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में कहा कि राजधानी में मेयर का चुनाव न हो सके, तो ये अच्छा नहीं दिखता.
उन्होंने कहा कि जल्द चुनाव करवाने के लिए चौबीस घंटों के भीतर नोटिस जारी किया जाए और मेयर का चुनाव होने के बाद नए मेयर बाक़ी की प्रक्रिया पूरी करवाएं.
साथ ही उन्होंने कहा कि कोर्ट ने एलजी के मनोनीत 10 सदस्यों को वोटिंग का अधिकार देने से इनकार किया और कहा कि मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमिटी के चुनाव में इन सदस्यों को शामिल नहीं किया जाएगा.
13 फरवरी 2023: मेयर और दूसरी कमेटियों का चुनाव न हो पाने के बीच दिल्ली एमसीडी का बजट पेश किया गया. दो दशक में पहली बार केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए गए स्पेशल अफ़सर अश्विनी कुमार ने बजट पास किया.
एमसीडी के प्रवक्ता ने कहा कि एमसीडी हाउस में मेयर का चुनाव अब तक हो नहीं पाया है, जिस कारण इस साल स्पेशल बजट पास करेंगे. उन्होंने कहा दिल्ली एमसीडी का बजट हर साल फरवरी 15 तारीख को या फिर उससे पहले पेश किया जाता है.
06 फरवरी 2023: एमसीडी हाउस की आख़िरी मीटिंग हुई जिसमें प्रिज़ाइडिंग अफ़सर सत्या शर्मा ने तीन फ़ैसले सुनाए जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया.
उन्होंने कहा एलजी के मनोनीत 10 सदस्य वोट कर सकेंगे, मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव एक साथ करवाए जाएगा. उन्होंने आम आदमी पार्ट के दो पार्षदों के ख़िलाफ़ पिछले मामलों का हवाला देते हुए उन्हें सदन से बाहर जाने को कहा.
05 फरवरी 2023: दिल्ली के लेफ्टिनेंट जनरल ने मेयर चुनावों के लिए सत्या शर्मा को प्रिज़ाइडिंग अफ़सर मनोनीत किया.
04 दिसंबर 2022: दिल्ली में एमसीडी चुनाव कराए गए थे. इसका नतीजा 06 दिसंबर को आया था जिसमें आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी.
250 में से 134 वार्डों में जीत हासिल कर आप ने 15 सालों से बीजेपी के हाथों में रही एमसीडी को उसके हाथों से छीन लिया था, लेकिन उसके सामने चुनौती स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों के चुनाव की थी.
एमसीडी में मेयर नाममात्र का प्रमुख होता है, वो केवल बैठकें बुला सकता है और कोरम बनाने के लिए कह सकता है. जबकि यहां एक्ज़ीक्यूटिव पावर स्टैंडिंग कमेटी के पास होते हैं. लिहाज़ा दोनों पार्टियां इसमें बहुमत हासिल करने की कोशिश में हैं.
चुनाव जीतने के बाद आम आदमी पार्टी मेयर नहीं चुन सकी क्योंकि लेफ्टिनेंट जनरल वीके सक्सेना के मनोनीत सदस्यों की वोटिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया. आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि इन 10 मनोनीत सदस्यों को वोट करने दिया गया तो ये बीजेपी के पक्ष लेना होगा.
पार्टी ने एक साथ मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव करवाने की बात का भी विरोध किया.
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