BBC Hindi:बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

Supreme Court

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हेलो. उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन में आगे बढ़ रहे होंगे.

हम जानते हैं कि व्यस्तता के बीच आपके लिए सारी ख़बरों पर नज़र रखना मुश्किल रहता होगा.

ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.

ये पांच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हैं.

संविधान की प्रस्तावना के इन दो शब्दों को लेकर उठते सवाल और उनके जवाब

सोशलिस्ट और सेक्युलर ('समाजवादी और पंथ-निरपेक्ष')...भारतीय संविधान की प्रस्तावना में शामिल ये दो शब्द हमेशा बहस के केंद्र में रहते हैं. प्रस्तावना से इन दो शब्दों को हटाने से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई आगामी 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होनी है. ये सुनवाई मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की पीठ करेगी.

ये याचिका दो साल पहले दिसंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी.

इसके याचिकाकर्ता बीजेपी नेता डॉ सुब्रमण्यम स्वामी और सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्या सभरवाल हैं.

साल 2020 में ऐसी ही एक और जनहित याचिका दायर की गई थी. दोनों याचिका को जोड़ दिया गया है. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

हरि सिंह

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महाराजा हरि सिंह: अंतिम डोगरा राजा जिन्होंने दलितों के लिए मंदिर के द्वार खोले

जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने आख़िरकार महाराजा हरि सिंह की जयंती पर अवकाश घोषित करने की डोगरा संगठनों की लंबे समय से चली आ रही माँग मान ली.

मनोज सिन्हा ने उन्हें 'महान शिक्षाविद, प्रगतिशील विचारक, समाज सुधारक और आदर्शों से युक्त शीर्ष व्यक्तित्व' कहा है. हरि सिंह और डोगरा शासन को लेकर जम्मू और घाटी के लोगों की राय हमेशा अलग-अलग रही है. जहाँ जम्मू के लोगों के लिए डोगरा वंश के अंतिम शासक उनकी खोई हुई आन-बान और शान का प्रतीक हैं, वहीं घाटी के बहुत सारे लोग डोगरा शासकों को उत्पीड़न के प्रतीक के तौर पर देखते हैं.

1846 में सोबराँव के ब्रिटिश-सिख युद्ध में पंजाब की महारानी ने गुलाब सिंह को सेनापति नियुक्त किया था, लेकिन युद्ध से अलग रहकर उन्होंने अँग्रेज़ों की मदद की, इसके बाद 'अमृतसर संधि' में 75 लाख नानकशाही रुपए देकर उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर शासन करने का एकाधिकार हासिल किया था, इस समझौते को घाटी में अक्सर 'अमृतसर बैनामा' के नाम से जाना जाता है. उन्होंने अपने शासनकाल में कई बड़े बदलाव किए. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

शम्मी कपूर

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बॉलीवुड और कश्मीर का रिश्ता, डल झील में शम्मी कपूर की अस्थियाँ

कश्मीर की ख़ूबसूरत वादियों के बीचो-बीच गुलमर्ग में एक होटलनुमा कमरा है जिसे देखने के लिए लोग आज भी आते हैं. न सिर्फ़ देखने आते हैं बल्कि कई लोग तो ख़ास तौर पर यहाँ रहने आते हैं.

ये 'बॉबी हट' के नाम से मशहूर है और इसकी ख़ासियत ये है कि इसी कमरे में 1973 में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया की पहली फ़िल्म 'बॉबी' के कुछ हिस्से शूट हुए थे, ख़ास तौर पर वो गाना, 'हम तुम इक कमरे में बंद हों और चाबी खो जाए'.

शम्मी कपूर ने तो इतनी फ़िल्में कश्मीर में शूट की हैं कि उन्हें एक तरह से कश्मीर का ब्रैंड एम्बैसेडर माना जाता था और 60 के दशक में वो कश्मीर में बहुत मशहूर थे और उनकी फ़िल्में हाउसफुल हुआ करती थीं.

कश्मीर जाने पर आज भी आपको उनकी पीढ़ी के ऐसे लोग मिल जाएँगे जो बताते हैं कि शम्मी कपूर उनके शिकारे (हाउसबोट) पर रहते थे.

कश्मीर से उनके रिश्ते को इससे बेहतर और क्या ही बयां किया जा सकता है कि शम्मी कपूर की मौत के बाद उनका परिवार डल झील में प्रवाहित करने के लिए उनकी अस्थियां लेकर गया था. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

बाबर आज़म

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बाबर आज़म ने खेली ऐसी पारी कि सवाल उठाने वाले हुए 'बोल्ड'

पाकिस्तान के कप्तान बाबर आज़म पिछले कुछ मैचों और ख़ासकर एशिया कप में अपने बल्ले के ख़ामोश हो जाने से परेशान थे. वे आलोचनाओं का भी सामना कर रहे थे.

लेकिन टी-20 विश्व कप से पहले बाबर आज़म ने अपने आलोचकों का मुँह तो बंद कराया ही, इतनी बेहतरीन बल्लेबाज़ी की कि क्या क्रिकेट विशेषज्ञ, क्या क्रिकेट फ़ैन्स और क्या राजनेता- सभी क्लीन बोल्ड हुए पड़े हैं.

कराची में हुए इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टी-20 मैच में कप्तान बाबर आज़म ने इतनी बेहतरीन बल्लेबाज़ी की कि सुदूर अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में हिस्सा लेने गए प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने वहीं से उनकी प्रशंसा के पुल बांधे.

तो कहानी ये है कि पाकिस्तान पहला टी-20 मैच इंग्लैंड से हार गया था और दूसरे टी-20 मैच में भी इंग्लैंड ने जीत के लिए उसके सामने 200 रनों का बड़ा लक्ष्य रखा था. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

अल्ज़ाइमर

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वो बीमारी जिसमें व्यक्ति अपनी याददाश्त खोने लगता है

अल्ज़ाइमर एक ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति अपनी याददाश्त खोने लगता है.

डॉक्टर मानते हैं कि अल्ज़ाइमर का कोई इलाज नहीं है, लेकिन वे इससे बचाव के लिए लाइफ़स्टाइल में बदलाव लाने की सलाह ज़रूर देते हैं.

प्रिया की मां विजया अल्ज़ाइमर से पीड़ित हैं. शुरुआत में उनके लिए इस बीमारी को समझना मुश्किल था, लेकिन अब वो इस बीमारी के बारे में जानती हैं और उनका बच्चे की तरह ख़्याल रखती हैं. वीडियो यहां देखें...

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