उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में बम फेंकने के मामले में 35 स्कूली बच्चे पुलिस कस्टडी में

    • Author, अनंत झणाणें
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पिछले कई महीनों से सरेआम देसी बम मारने की घटनाएं हो रही थीं.

प्रयागराज पुलिस के मुताबिक़, शहर में अलग-अलग स्कूलों के बाहर पाँच बार बम मारने की घटना हुई. अब पुलिस का दावा है कि इन सबके पीछे स्कूली बच्चों के एक ग्रुप का हाथ है.

पुलिस के मुताबिक़, अधिकतर बच्चे दसवीं से बारहवीं कक्षा के छात्र हैं. इनमे से कुछ ने हाल ही में बारहवीं पास की है और सभी प्रयागराज के जाने माने स्कूलों में पढ़ते हैं.

प्रयागराज पुलिस के मुताबिक़ सबसे ताज़ा घटना शहर के बिशप जॉनसन स्कूल के बाहर हुई थी.

इससे पहले बॉयज़ हाई स्कूल, पतंजलि स्कूल और कई अन्य स्कूलों के बाहर बम चलाने की घटनाओं को अंजाम दिया गया था.

ओटीटी वेब सीरीज़ से प्रेरित ग्रुप्स के नाम और बमबाज़ी?

प्रयागराज एसएसपी शैलेश पांडे के मुताबिक़ जांच में पता चला है कि "इन छात्रों के द्वारा विभिन्न ग्रुप बनाए गये थे. जिनके नाम तांडव ग्रुप, जैगुआर ग्रुप, इम्मॉर्टल ग्रुप, माया ग्रुप जैसे कई अन्य ग्रुप हैं. जिसमें ये स्कूली छात्र शामिल हैं."

पुलिस के मुताबिक़ एक ग्रुप की दूसरे ग्रुप के प्रति दुश्मनी, विरोधी ग्रुप के छात्रों को दबाना, टशन-बाज़ी और अपना वर्चस्व क़ायम करने के मक़सद से बच्चों के यह ग्रुप बने और इन्होनें संगठित होकर बमबाज़ी की घटनाओं को अंजाम दिया.

एसएसपी शैलेश पांडेय कहते हैं, "इन उद्देश्यों को रखते हुए दहशत फैलाने के उद्देश्य से कई सारी घटनाएं की गईं. और सोशल मीडिया का ग़लत इस्तेमाल करके इन घटनाओं को ग्लैमराइज़ करने का काम किया जा रहा था."

एसएसपी शैलेश पांडेय ने बताया कि "इन छात्रों के ग्रुपों में मेंबरों की संख्या घटती बढ़ती रहती है. ग्रुप में ये संख्या सौ से ऊपर तक है. एक ग्रुप में ये संख्या तीन सौ तक की बताई जा रही है. ऐसा इन सब से पूछताछ में आया है. कुछ ग्रुप में पंद्रह, बीस, तीस. इस तरह से भी मेंबरशिप है इनके."

यूट्यूब पर सीख कर बनाए देसी बम

एसएसपी शैलेश पांडेय ने बताया कि ये स्कूली छात्र दहशत फैलाने के लिए देसी बम बनाते थे. वो कहते हैं, "उसके लिए जो मैटेरियल था, वह बड़ी आसानी से इनको मिल जाता है. और यह सोशल मीडिया, जैसे यूट्यूब इत्यादि प्लेटफ़ॉर्म पर उसके वीडियो देख करके यह बम बनाते हैं. और बनाने के बाद दहशत फैलाने के लिए फेंकते हैं."

मसलन जैसे "अगर किसी लड़के से दुश्मनी है तो वह जिस स्कूल में पढ़ता है वहां जाकर बमबाज़ी कर देना. किसी गैंग के बच्चे हैं वह किसी पर्टिकुलर जगह पर हैं तो वहां बमबाज़ी कर देना. इस तरह की घटनाएं इन छात्रों द्वारा की जा रही थी."

प्रयागराज एडिशनल एसपी अभिषेक भारती ने बीबीसी को बताया कि "ये जो छात्र घटना (बमबाज़ी) को लाइव सोशल मीडिया अकाउंट (फेसबुक इंस्टाग्राम) पर शेयर करते थे. और अगर लाइव नहीं करते थे तो घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग ज़रूर करते थे. ये लोग इंस्टाग्राम के ज़रिए ऑपरेट करते थे."

पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि ग्रुप के सदस्य यह बच्चे स्कूल से जुड़ी ज़रूरतों के लिए घरवालों से पैसे मांगते थे और उस पैसों से इन घटनाओं को अंजाम देते थे. साथ ही इन ग्रुप्स द्वारा इवेंट्स कर पैसे भी इकठ्ठा किए जाते थे जिसमें फ़ंड रेज़िंग की जाती थी. पुलिस ने बताया कि ग्रुप के कुछ मेंबर पबजी गेम की आईडी बना कर उसे दूसरे यूज़र्स को बेचते थे जिससे प्रत्येक आईडी पर इन्हें क़रीब आठ हज़ार रुपये मिलते थे.

छह एफ़आईआर और 35 गिरफ़्तारियां

एसएसपी शैलेश पांडे के मुताबिक़ "कुल 35 ऐसे लोगों को अरेस्ट करके उनके विरूद्ध क़ानूनी कार्रवाई की जा रही है. अभी और भी लोग हमारे स्कैनर में हैं. और हम लगातार इन घटनाओं पर फ़ोकस करते हुए ऐसे अपराधियों की लगातार कार्रवाई कर रहे हैं."

इस मामले की जांच से जुड़े एएसपी अभिषेक भारती कहते हैं कि गिरफ़्तार किए गए 35 छात्रों में से 28-29 छात्र नाबालिग़ हैं.

ताज़ा गिरफ़्तारी की जानकारी देते हुए एसएसपी शैलेश पांडेय कहते है, "जो दोषी थे उनकी गिरफ़्तारी की कार्रवाई एसपी सिटी और एसएसपी के नेतृत्व चल रही थी. उसी के तहत एक नए मामले में 11 लोगों को पकड़ा गया. जिसमें से एक बालिग़ है, और 10 बच्चे नाबालिग़ हैं. नाबालिग़ों को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बाल सुधार गृह भेजा जा रहा है. तथा जो बालिग़ हैं उनको कोर्ट से रिमांड लेकर जेल भेजा जा रहा है."

क्योंकि हमलों में बमों का इस्तेमाल किया गया है तो क्या अभियुक्तों के ख़िलाफ़ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जाएगी? मीडिया के इस सवाल के जवाब में एसएसपी शैलेश पांडेय ने कहा, "निश्चित तौर पर हम लोग इस ओर भी कार्रवाई कर रहे हैं. ऐसी घटनाएं जो दुस्साहसिक तरीके से, जहां पब्लिक ऑर्डर को बिगाड़ने का काम किया जा रहा है उसमें विधिसंगत तरीक़े से हम लोग एनएसए की कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे."

एडिशनल एसपी अभिषेक भारती कहते हैं कि "जो नाबालिग़ हैं उन पर गैंगस्टर या एनएसए नहीं लगाया जाएगा. लेकिन जो बालिग़ हैं, उन पर गैंगस्टर और एनएसए के तहत कार्रवाई की जाएगी."

इन बच्चों के बैकग्राउंड के बारे में एडिशनल एसपी अभिषेक भारती बताते हैं कि "जो छात्र हैं वह सभी अच्छे परिवारों से आते हैं और अच्छे कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाले हैं. इन छात्रों के परिवार वाले कोई वकील है, कोई व्यापारी है सभी अच्छे परिवारों से हैं. इन छात्रों के पास से 3 दोपहिया वाहन भी बरामद हुए हैं. अभी और भी लोगों की लिस्ट है, जिनके ख़िलाफ़ कार्रवाई चलेगी."

क्या है स्कूल प्रशासन का कहना?

बमबाज़ी की घटनाओं से परेशान स्कूली बच्चों की सुरक्षा से चिंतित स्कूल प्रशासनों ने पुलिस से मदद मांगी. बॉयज़ हाई स्कूल और कॉलेज के प्रिंसिपल डेविड लुक ने मीडिया को बताया कि,"दोपहर में 12 बजकर आठ मिनट के आस-पास दो पहिया वाहन पर सवार अज्ञात लोगों ने सड़क से दहशत फैलाने के लिए स्कूल के मेन गेट पर बम फेंके. उस समय स्कूल के छोटे बच्चों की छुट्टी का समय था. जिससे बच्चों और उनके अभिभावकों में दहशत फैल गई."

बमबाज़ी की इन घटनाओं के बाद पुलिस छात्रों के अभिभावकों और स्कूल प्रशासन से उनकी काउंसलिंग की अपील कर रही है. प्रयागराज एसएसपी शैलेश पांडे कहते हैं कि वो क़ानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ स्कूल प्रशासन और छात्रों के परिजनों से भी अपील करते हैं, कि वो अपने छात्रों और बच्चों की अच्छे से काउंसलिंग करें और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखें.

शैलेश पांडेय कहते हैं, "बच्चों को अपराध की दुनिया में क़दम रखने से रोकें. विशेष करके उनके मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल उनके सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नज़र रखें. जिससे की हम ऐसे छात्रों को जो देश का भविष्य हैं उनको अपराध के क्षेत्र में जाने से रोक सकें."

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