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उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण का मतदानः इन सीटों पर है रोमांचक मुक़ाबला
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण के मतदान के लिए आज सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली मंडलों की 55 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में से इन 55 में से 38 सीटें बीजेपी ने जीती थीं. हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में यहां की 11 में से सात लोकसभा सीटें विपक्ष ने जीत ली थीं.
सहारनपुर मंडल के दो ज़िलों मुज़फ़्फ़रनगर और शामली में पहले चरण के दौरान 10 फ़रवरी को मतदान हो चुका है. आज (14 फ़रवरी को) सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, अमोरोहा, संभल, रामपुर, बदायूं, बरेली और शाहजहांपुर ज़िलों में वोट डाले जा रहे हैं.
दूसरे चरण में कई सीटों पर रोमांचक मुक़ाबले हैं और कई सियासी धुरंधरों की साख़ दांव पर लगी हुई है. इस चरण में शामिल ज़िलों में मुसलमानों की अच्छी खासी आबादी है और कई सीटों से मुसलमान उम्मीदवार आसानी से जीतते रहे हैं.
यहां होंगे दिलचस्प मुक़ाबले
सहारनपुर में सबसे दिलचस्प मुक़ाबले में सहारनपुर देहात, नकुड़, गंगोह और रामपुर मनिहारान सीट हैं. राजनीतिक विश्लेषक लोकेश सहारनपुरी के मुताबिक़ सहारनपुर देहात सीट इसलिए दिलचस्प हो गई क्योंकि उस सीट पर भाजपा ने एक दलित उम्मीदवार को मैदान में उतारा है जबकि यह एक सामान्य सीट है.
लोकेश कहते हैं, "दलित भी वो जो मायावती का वेस्ट यूपी में सबसे क़रीबी ही नही बल्कि आंख, नाक, कान रहा है. ये हैं जगपाल सिंह जिन्होंने मायावती के लिए 2002 में अपनी सीट छोड़ी थी. जगपाल सिंह इस क्षेत्र में (पूर्व में ये हरौड़ा सीट थी, रिज़र्व थी ) लगभग हर कम्युनिटी में स्वीकार्य लीडर रहे हैं."
लोकेश कहते हैं, "जगपाल सिंह अत्यंत मिलनसार व्यक्ति हैं और इस बार वो भाजपा से मैदान में हैं. उनके मुक़ाबले में सपा से आशु मलिक हैं. ये वही आशु मलिक हैं जिनसे अखिलेश 2016 में अपने पारिवारिक झगड़ों के दौरान नाराज़ हुए थे. ये देखना दिलचस्प होगा कि एक सामान्य सीट पर एक पूर्व बसपाई और लोकप्रिय दलित नेता पर भाजपा का ये दांव लगाना उनकी नैया पार कराएगा या नहीं."
सहारनपुर की नकुड़ सीट पर भी मुक़ाबला काफ़ी रोमांचक है. लोकेश कहते हैं, "यहां मुक़ाबला काफ़ी दिलचस्प है. यहां से चार बार के विधायक और दो बार मंत्री रहे धर्म सिंह सैनी इस बार तीसरी पार्टी से मैदान में हैं. धर्म सिंह सैनी बसपा के कद्दावर लीडर थे. 2002 में बसपा के टिकट पर जीतकर पहली बार विधायक बने थे.
मायावती की वो सरकार जब मुलायम सिंह ने तोड़ी थी तब भी धर्म सिंह सैनी लालच में नहीं आए थे. इसका पुरस्कार मायावती ने उनको 2007 में कैबिनेट में लेकर दिया था. 2012 में भी वो बसपा के टिकट पर विधायक रहे, लेकिन 2017 में भाजपा में चले गए, विधायक बने और मंत्री रहे. इस बार सपा से मैदान में हैं."
लोकेश कहते हैं, "इस सीट पर धर्म सिंह सैनी के सामने इमरान मसूद के पुराने साथी रहे और गुज्जर सम्मेलन को लेकर चर्चित हुए मुकेश चौधरी (गुज्जर) हैं जो भाजपा के टिकट पर लड़ रहे हैं. इस सीट पर लगभग 55 हजार हिन्दू गुज्जर वोट हैं. इन हिन्दू गुज्जर मतदाताओं में पहली बार किसी गुज्जर को जिताने का जुनून दिखाई दे रहा है."
बिजनौर
बिजनौर की आठ विधानसभा सीटों में से सबसे रोचक मुक़ाबला बिजनौर सीट पर है. यहां से भाजपा ने मौजूदा विधायक सूची मौसम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है. वहीं समाजवाद पार्टी राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन ने डॉक्टर नीरज चौधरी को उम्मीदवार बनाया है.
इस सीट पर जाट और दलित वोटर निर्णायक भूमिका में रहते हैं. 1991 के राम मंदिर आंदोलन के बाद से ही बिजनौर सीट पर बीजेपी मज़बूत रही है. यहां 1991, 2002, 2012 और 2017 में बीजेपी जीत चुकी है जबकि 1996 और 2007 में बसपा और 2014 में यहां समाजवादी पार्टी जीती थी.
बहुजन समाज पार्टी से इस बार रुचि वीरा मैदान में हैं जो साल 2014 में यहां से समाजवादी पार्टी की विधायक रह चुकी हैं. इस सीट पर एक लाख के क़रीब मुसलमान मतदाता हैं और 50 हज़ार के क़रीब जाट मतदाता हैं जबकि इतने ही दलित वोटर हैं.
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अमरोहा
अमरोहा मुसलमान बहुल विधानसभा सीट है और यहां से समाजवादी पार्टी जीतती रही है. समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार महबूब अली यहां से पांच बार चुनाव जीत चुके हैं. यहां हुए पिछले दो चुनावों में महबूब अली ने ही जीत हासिल की है. दूसरे नंबर पर दोनों बार बसपा रही है. इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार सलीम ख़ान ने चुनाव से दो दिन पहले समाजवादी पार्टी उम्मीदवार को समर्थन दे दिया है. बहुजन समाज पार्टी से नवेद अयाज़ दावेदारी ठोक रहे हैं. युवा उम्मीदवार नवेद अयाज़ ने मुक़ाबले को रोचक कर दिया है. बीजेपी से राम सिंह सैनी ने भी पूरा ज़ोर लगाया है.
कुंदरकी
मुरादाबाद ज़िले में सबसे रोचक मुक़ाबला कुंदरकी सीट पर है जहां समाजवादी पार्टी से टिकट कटने के बाद मौजूदा विधायक हाजी रिज़वान बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. संभल से सांसद शफ़ीक़ुर्रहमान बर्क़ के पोते ज़ियाउर्रहमान यहां से समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं. दोनों ही उम्मीदवार तुर्क समुदाय से हैं. वहीं बीजेपी ने कमल प्रजापति को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर बीजेपी अभी तक सिर्फ़ एक बार 1993 में जीती थी.
रामपुर
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और प्रमुख मुसलमान चेहरा और रामपुर से सांसद आज़म ख़ान इस बार रामपुर विधानसभा सीट पर जेल से ही मैदान में हैं. 80 के दशक से रामपुर की ये सीट आज़म ख़ान और उनके परिवार के पास ही रही है.
आज़म ख़ान ख़ुद इस सीट से नौ बार चुनाव जीत चुके हैं. आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ कई मुक़दमे दर्ज करवाने वाले कार्यकर्ता आकाश सक्सेना को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने यहां नवाब ख़ानदान के काज़िम अली ख़ान को टिकट दिया है जबकि बसपा से सदाक़त हुसैन मैदान में हैं.
आज़म ख़ान अपने राजनीतिक वर्चस्व को बरक़रार रखने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. जेल में होने की वजह से उन्हें भावनात्मक समर्थन भी मिल रहा है.
स्वार
रामपुर की ही स्वार सीट भी इस बार चर्चा में हैं. यहां से आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला आज़म मैदान में हैं. आज़म कुछ दिन पहले ही जेल से रिहा हुए हैं. अब्दुल्ला आज़म ने 2017 का चुनाव भी जीता था, लेकिन अदालत ने उनके उम्र से जुड़े दस्तावेज़ों को फ़र्ज़ी पाया था और उनका चुनाव रद्द कर दिया था. इस सीट पर उनका मुक़ाबला बीजेपी-अपना दल (सोनेलाल) गठबंधन के उम्मीदवार हैदर अली से है. हैदर अली बीजेपी गठबंधन के एकमात्र मुसलमान उम्मीदवार हैं और उन्हें काफ़ी सुर्ख़ियां मिल रही हैं. इस सीट पर कांग्रेस ने रक्षपाल और बसपा ने शंकरपाल को टिकट दिया है.
शाहजहांपुर
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और बीजेपी के दिग्गज नेता सुरेश खन्ना शाहजहांपुर सीट से अपनी साख बचाने के लिए मैदान में हैं. सुरेश खन्ना अब तक इस सीट पर आठ बार विधायक चुने जा चुके हैं. इस बार उनका मुक़ाबला सपा गठबंधन के तनवीर ख़ान और बसपा के सर्वेश पांडे से है. कांग्रेस ने यहां पूनम पांडे को उम्मीदवार बनाया है.
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