बच्चे से ओरल सेक्स को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ‘कम गंभीर’ अपराध माना - प्रेस रिव्यू

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में कहा है कि नाबालिग के साथ ओरल सेक्स ज़्यादा संगीन यौन दुर्व्यवहार नहीं है और यह एक 'कम गंभीर' अपराध है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि यह फ़ैसला हाई कोर्ट की सिंगल जज की बेंच जस्टिस अनिल कुमार ओझा ने हाल ही में दिया है.

अख़बार के अनुसार फ़ैसले में लिखा है, "लिंग को मुंह में डालना बहुत गंभीर यौन अपराध या यौन अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. यह पेनिट्रेटिव (गहराई तक जाना) यौन अपराध की श्रेणी में आता है जो पोक्सो एक्ट के सेक्शन 4 के तहत दंडनीय है."

बेंच ने अपने आदेश में दोषी की सज़ा को घटा दिया है.

वीडियो कैप्शन, Cover Story: भारत में इंटरनेट पर कैसे बढ़ रहा बच्चों का यौन शोषण?

इस मामले में एक व्यक्ति ने एक 10 वर्षीय लड़के के साथ यौन दुर्व्यवहार किया था. लड़के के रिश्तेदारों को अपराध का तब पता चला जब उन्होंने लड़के के पास से 20 रुपये पाए. जब उन्होंने इसके बारे में पूछा तो बच्चे ने घटना की पूरी जानकारी दे दी.

सेशंस कोर्ट ने पहले उस व्यक्ति को पोक्सो एक्ट के सेक्शन-6 के 'गंभीर पेनिट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट' के तहत दोषी पाया था.

ट्रायल कोर्ट ने दोषी को 10 साल की जेल और 5,000 रुपये के जुर्माने की सज़ा सुनाई थी. सेक्शन-6 के तहत सबसे कम सज़ा 10 साल की है जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है.

हालांकि, हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच ने ट्रायल कोर्ट की जांच को ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि ओरल सेक्स 'गंभीर पेनिट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट' के तहत नहीं आता है यह एक्ट के सेक्शन-4 के तहत केवल 'पेनिट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट' में आता है.

हाई कोर्ट ने दोषी की सज़ा को 10 साल से कम करते हुए सात साल कर दी है लेकिन जुर्माने की रक़म बरक़रार रखी है.

मज़दूर

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भारत में कब तक आ रहा है स्वदेशी 6G?

संचार एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया है कि भारत स्वदेशी 6G तकनीक पर काम कर रहा है और इसे 2023 के अंत तक या 2024 की शुरुआत तक लॉन्च करने का लक्ष्य है.

वैष्णव ने अख़बार के एक वेबीनार कार्यक्रम में कहा कि तकनीक को लेकर जो अपेक्षित मांगें थीं उनकी अनुमति वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को दी जा चुकी है.

उन्होंने कहा, "6G पर काम शुरू हो चुका है. यह 2024 या 2023 के अंत तक सामने होगा. इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं. हम भारत में ही नेटवर्क तैयार कर रहे हैं जो टेलिकॉम सॉफ्टवेयर पर चलेगा जिसमें भारत में बने टेलीकॉम उपकरण होंगे और जो भारत के ही टेलीकॉम नेटवर्क को अपनी सेवाएं देगा और जो दुनिया के और भी देशों में जा सकता है."

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि 6G के अलावा स्वदेशी 5G की लॉन्चिंग की भी तैयारी है. अगले साल की तीसरी तिमाही तक इस तकनीक के लिए ज़रूरी एक प्रमुख सॉफ़्टवेयर को तैयार कर लिया जाएगा.

उन्होंने बताया कि 2022 की दूसरी तिमाही तक 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी हो सकती है.

मोहन भागवत

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RSS का मानना समान नागरिक संहिता पर पहले बने सहमति

संसद के शीतकालीन सत्र में तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के केंद्र के निर्णय के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेताओं को लगता है कि सरकार को जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे बिल लाने से पहले सर्वसम्मति बनाने और व्यापक विचार-विमर्श का रास्ता अपनाना चाहिए.

'अमर उजाला' अख़बार सूत्रों के आधार पर लिखता है कि संघ का मानना है कि ये दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, लेकिन इन्हें कानूनी जामा पहनाने से पहले व्यापक विमर्श ज़रूरी है, क्योंकि समाज के एक वर्ग में इन्हें लेकर शंका है.

संघ का कहना है कि आम धारणा है कि सर्वसम्मति बनने पर इन मुद्दों को लेकर समाज में बनने वाले किसी भी तरह के तनाव से निपटने में मदद मिलेगी.

हालांकि बीजेपी के अंदरखाने इन दोनों पर कानून बनाने की मांग उठ रही है. संघ के सूत्रों का यह भी कहना है कि संसद में तीन कृषि कानूनों को पेश करने से पहले पहले उसके साथ किसी तरह का विमर्श नहीं किया गया था. यहां तक कि इन्हें वापस लेने के निर्णय से पहले भी उसे कोई सूचना नहीं दी गई.

अखिलेश और जयंत की मुलाक़ात, गठबंधन की हो सकती है घोषणा

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समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख जयंत चौधरी के बीच मंगलवार को मुलाकात हुई. मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने ट्विटर पर तस्‍वीरें भी शेयर की हैं.

नवभारत टाइम्स अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि बुधवार को दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन का ऐलान हो सकता है.

चुनाव से पहले दोनों की मुलाकात काफी महत्‍वपूर्ण मानी जा रही है. इसकी चर्चा काफी पहले से थी कि इस महीने दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन का ऐलान हो सकता है, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत रुकी थी.

अमर उजाला अख़बार लिखता है कि दोनों दलों ने सीटों के बंटवारे पर पत्ते तो नहीं खोले हैं पर चर्चा यह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 36 सीटों पर गहरी बातचीत हुई है.

इनमें 30 आरएलडी के हिस्से में आ रही हैं जबकि छह सीटों पर आरएलडी और सपा के कार्यकर्ता सिंबल बदलकर चुनाव लड़ सकते हैं.

हालांकि कुछ सीटों पर अभी पेंच फंसने की बात भी कही जा रही है.

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